Exam लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
Exam लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

23 सित॰ 2016

कैसे डालें सुबह जल्दी उठने की आदत

By: Successlocator On: सितंबर 23, 2016
  • Share The Gag






  • कैसे डालें सुबह जल्दी उठने की आदत


     to bed and early to rise makes a man healthy wealthy and wise
     Hi friends,
    हममें से ज्यादातर लोगों ने कभी ना कभी ये कोशिश ज़रूर की होगी कि रोज़ सुबह जल्दी उठा जाये. हो सकता है कि आपमें से कुछ लोग कामयाब भी हुए हों, पर अगर majority की बात की जाये तो वो ऐसी आदत डालने में सफल नहीं हो पाते. लेकिन आज जो article  मैं आपसे share कर रहा हूँ इस पढने के बाद आपकी सफलता की  probability निश्चित रूप से बढ़ जाएगी. यह article इस विषय पर दुनिया में सबसे ज्यादा पढ़े गए लेखों में से एक का Hindi Translation है. इसे Mr. Steve Pavlina ने लिखा है . इसका  title है “How to become an early riser.“.
    तो आइये जानें कि हम कैसे डाल सकते हैं सुबह जल्दी उठने की आदत.

     कैसे डालें सुबह जल्दी उठने की आदत?

    It is well to be up before daybreak, for such habits contribute to health, wealth, and wisdom.
       -Aristotle
    सूर्योदय  होने  से  पहले  उठाना  अच्छा  होता  है , ऐसी  आदत  आपको  स्वस्थ , समृद्ध  और  बुद्धिमान  बनती  है .
     सुबह  उठने  वाले  लोग  पैदाईशी  ऐसे  होते  हैं  या   ऐसा  बना  जा  सकता  है ? मेरे  case में  तो  निश्चित  रूप  से  मैं  ऐसा  बना  हूँ . जब  मैं  बीस  एक  साल  का  था  तब  शायद  ही  कभी  midnight से  पहले  बिस्तर  पे  जाता  था . और  मैं  लगभग  हमेशा  ही  देर  से  सोता  था. और  अक्सर  मेरी  गतिविधियाँ  दोपहर  से  शुरू  होती  थीं .
    पर  कुछ  समय  बाद  मैं  सुबह  उठने  और  successful  होने  के  बीच  के  गहरे  सम्बन्ध  को  ignore नहीं  कर  पाया , अपनी  life में  भी . उन  गिने  – चुने  अवसरों  पर  जब  भी   मैं  जल्दी  उठा  हूँ  तो  मैंने  पाया  है  कि  मेरी  productivity लगभग  हमेशा  ही  ज्यादा  रही  है , सिर्फ  सुबह  के  वक़्त  ही  नहीं  बल्कि  पूरे  दिन . और  मुझे  खुद अच्छा  होने  का  एहसास  भी  हुआ  है . तो  एक  proactive goal-achiever होने  के  नाते  मैंने सुबह  उठने  की  आदत  डालने  का  फैसला  किया . मैंने  अपनी  alarm clock 5 am पर  सेट  कर  दी …
    — और  अगली  सुबह  मैं  दोपहर  से  just पहले  उठा .
    ह्म्म्म…………
    मैंने  फिर  कई  बार  कोशिश  की , पर  कुछ  फायदा  नहीं  हुआ .मुझे  लगा  कि  शायद  मैं  सुबह  उठने  वाली  gene के  बिना  ही  पैदा  हुआ  हूँ . जब  भी  मेरा  alarm बजता  तो  मेरे  मन  में  पहला  ख्याल  यह  आता  कि  मैं  उस  शोर  को  बंद  करूँ  और  सोने  चला  जून . कई  सालों  तक  मैं  ऐसा  ही  करता  रहा , पर  एक  दिन  मेरे  हाथ  एक  sleep research लगी  जिससे  मैंने  जाना  कि  मैं  इस  problem को  गलत  तरीके  से  solve कर  रहा  था . और  जब  मैंने  ये  ideas apply   कीं  तो  मैं  निरंतर  सुबह   उठने  में  कामयाब  होने  लगा .
    गलत  strategy के  साथ  सुबह  उठने  की  आदत  डालना  मुश्किल  है  पर  सही  strategy के  साथ  ऐसा  करना  अपेक्षाकृत  आसान  है .
    सबसे  common गलत  strategy है  कि  आप  यह  सोचते  हैं  कि  यदि  सुबह  जल्दी  उठाना  है  तो  बिस्तर  पर  जल्दी  जाना  सही  रहेगा . तो  आप  देखते  हैं  कि  आप  कितने  घंटे  की  नीद  लेते  हैं , और  फिर  सभी  चीजों  को  कुछ  गहनते  पहले  खिसका  देते  हैं . यदि  आप  अभी  midnight से  सुबह  8 बजे  तक  सोते  हैं  तो  अब  आप  decide करते  हैं  कि  10pm पर  सोने  जायेंगे  और  6am पर  उठेंगे .  सुनने  में  तर्कसंगत  लगता  है  पर  ज्यदातर  ये  तरीका  काम  नहीं  करता .
    ऐसा  लगता  है  कि  sleep patterns को  ले  के  दो  विचारधाराएं हैं . एक  है  कि  आप  हर  रोज़  एक  ही  वक़्त  पर  सोइए  और  उठिए . ये  ऐसा  है  जैसे  कि  दोनों  तरफ  alarm clock लगी  हो —आप  हर  रात  उतने  ही  घंटे  सोने  का  प्रयास  करते  हैं . आधुनिक  समाज  में  जीने  के  लिए  यह  व्यवहारिक  लगता  है . हमें  अपनी  योजना  का  सही  अनुमान  होना  चाहिए . और  हमें  पर्याप्त  आराम  भी  चाहिए .
    दूसरी  विचारधारा  कहती  है  कि  आप  अपने  शरीर  की  ज़रुरत  को  सुनिए  और  जब  आप  थक  जायें  तो  सोने  चले  जाइये  और  तब  उठिए  जब  naturally आपकी  नीद  टूटे . इस  approach की  जड़  biology में  है . हमारे  शरीर  को  पता  होना  चाहिए  कि  हमें  कितना  rest चाहिए , इसलिए  हमें  उसे  सुनना  चाहिए .
    Trial and error से  मुझे  पता  चला  कि  दोनों  ही  तरीके  पूरी  तरह  से  उचित  sleep patterns नहीं  देते . अगर  आप  productivity की  चिंता  करते  हैं  तो  दोनों  ही  तरीके  गलत  हैं . ये  हैं  उसके  कारण :
    यदि  आप  निश्चित  समय  पे  सोते  हैं  तो  कभी -कभी  आप  तब  सोने  चले  जायेंगे  जब  आपको  बहुत  नीद  ना  आ  रही  हो . यदि  आपको  सोने  में  5 मिनट  से  ज्यादा  लग रहे  हों  तो  इसका  मतलब  है  कि  आपको  अभी  ठीक  से  नीद  नहीं  आ  रही  है . आप  बिस्तर  पर  लेटे -लेटे अपना  समय  बर्वाद  कर  रहे  हैं ; सो  नहीं  रहे  हैं . एक  और  problem ये  है  कि  आप  सोचते  हैं  कि  आपको  हर  रोज़  उठने  ही  घंटे  की  नीद  चाहिए , जो  कि  गलत  है . आपको  हर  दिन  एक  बराबर  नीद  की  ज़रुरत  नहीं  होती .
    यदि  आप  उतना  सोते  हैं  जितना  की  आपकी  body आपसे  कहती  है  तो  शायद  आपको  जितना  सोना  चाहिए  उससे  ज्यादा  सोएंगे —कई  cases में  कहीं  ज्यादा , हर  हफ्ते  10-15 घंटे  ज्यदा ( एक  पूरे  waking-day के  बराबर ) ज्यादातर  लोग  जो  ऐसे  सोते  हैं  वो  हर  दिन  8+ hrs सोते  हैं , जो  आमतौर  पर  बहुत  ज्यादा  है . और  यदि  आप  रोज़  अलग -अलग  समय  पर  उठ  रहे  हैं  तो  आप  सुबह  की  planning सही  से  नहीं  कर  पाएंगे . और  चूँकि  कभी -कभार  हमारी  natural rhythm घडी से  मैच  नहीं  करती  तो  आप  पायंगे  कि  आपका  सोने  का  समय  आगे  बढ़ता  जा   रहा  है .
    मेरे  लिए  दोनों  approaches को  combine करना  कारगर  साबित  हुआ . ये  बहुत  आसान  है , और  बहुत  से  लोग  जो  सुबह  जल्दी  उठते  हैं , वो  बिना  जाने  ही  ऐसा  करते  हैं , पर  मेरे  लिए  तो  यह  एक  mental-breakthrough था . Solution ये  था  की  बिस्तर  पर  तब  जाओ  जब  नीद  आ  रही  हो  ( तभी  जब  नीद  आ  रही  हो ) और  एक  निश्चित  समय  पर  उठो ( हफ्ते  के  सातों  दिन ). इसलिए  मैं  हर  रोज़  एक  ही  समय  पर  उठता  हूँ ( in my case 5 am) पर  मैं  हर  रोज़  अलग -अलग  समय  पर  सोने  जाता  हूँ .
    मैं  बिस्तर  पर  तब  जाता  हूँ  जब  मुझे  बहुत  तेज  नीद  आ  रही  हो . मेरा  sleepiness test ये  है  कि  यदि  मैं  कोई  किताब  बिना  ऊँघे  एक -दो  पन्ने  नहीं  पढ़  पाता  हूँ  तो  इसका  मतलब  है  कि  मै  बिस्तर  पर  जाने  के  लिए  तैयार  हूँ .ज्यादातर  मैं  बिस्तर  पे  जाने  के  3 मिनट  के  अन्दर  सो  जाता  हूँ . मैं  आराम  से  लेटता  हूँ  और  मुझे  तुरंत  ही  नीद  आ  जाति  है .  कभी  कभार  मैं  9:30 पे  सोने  चला  जाता  हूँ  और  कई  बार  midnight   तक  जगा  रहता  हूँ . अधिकतर  मैं  10 – 11 pm के  बीच  सोने चला  जाता  हूँ .अगर  मुझे   नीद  नहीं   आ  रही  होती  तो  मैं  तब  तक  जगा  रहता  हूँ  जब  तक  मेरी  आँखें  बंद  ना  होने  लगे . इस  वक़्त  पढना  एक  बहुत  ही  अच्छी activity है , क्योंकि  यह  जानना  आसान  होता  है  कि  अभी  और  पढना  चाहिए  या  अब  सो  जाना  चाहिए .
    जब  हर  दिन  मेरा  alarm बजता  है  तो  पहले  मैं  उसे  बंद  करता  हूँ , कुछ  सेकंड्स  तक  stretch करता  हूँ , और  उठ  कर  बैठ  जाता  हूँ . मैं  इसके  बारे  में  सोचता  नहीं . मैंने  ये  सीखा  है  कि  मैं  उठने  में  जितनी  देर  लगाऊंगा ,उतना  अधिक  chance है  कि  मैं  फिर  से  सोने  की  कोशिश  करूँगा .इसलिए  एक  बार  alarm बंद  हो  जाने के  बाद  मैं  अपने  दिमाग  में  ये  वार्तालाप  नहीं  होने  देता  कि  और  देर  तक  सोने  के  क्या  फायदे  हैं . यदि  मैं  सोना  भी  चाहता  हूँ , तो  भी  मैं  तुरंत  उठ  जाता  हूँ .
    इस  approach को  कुछ  दिन  तक  use करने  के  बाद  मैंने  पाया  कि  मेरे  sleep patterns एक  natural rhythm में  सेट  हो  गए  हैं . अगर  किसी  रात  मुझे  बहुत  कम  नीद  मिलती  तो  अगली  रात  अपने  आप  ही  मुझे  जल्दी  नीद  आ  जाती  और  मैं  ज्यदा  सोता . और  जब  मुझमे  खूब  energy होती  और  मैं  थका  नहीं  होता  तो  कम  सोता . मेरी  बॉडी  ने  ये  समझ  लिया  कि  कब  मुझे  सोने  के  लिए  भेजना  है  क्योंकि  उसे  पता  है  कि  मैं  हमेशा  उसी  वक़्त  पे  उठूँगा  और  उसमे  कोई  समझौता नहीं  किया  जा  सकता .
    इसका  एक  असर ये हुआ कि  मैं  अब  हर  रात  लगभग  90 मिनट  कम  सोता  ,पर  मुझे  feel होता  कि  मैंने  पहले  से ज्यादा  रेस्ट  लिया  है . मैं  अब  जितनी  देर  तक  बिस्तर  पर  होता  करीब  उतने  देर  तक  सो  रहा  होता .
    मैंने  पढ़ा  है  कि  ज्यादातर  अनिद्रा  रोगी  वो  लोग  होते  हैं  जो  नीद  आने  से  पहले  ही  बिस्तर  पर  चले  जाते  हैं . यदि  आपको  नीद  ना  आ  रही  हो  और  ऐसा  लगता  हो  कि  आपको  जल्द ही  नीद  नहीं  आ  जाएगी  , तो  उठ  जाइये  और  कुछ  देर  तक  जगे  रहिये . नीद  को  तब  तक  रोकिये  जब  तक  आपकी  body ऐसे  hormones ना  छोड़ने  लगे  जिससे आपको नीद ना आ जाये.अगर  आप  तभी  bed पे  जाएँ  जब  आपको  नीद  आ  रही  हो  और  एक  निश्चित  समय  उठें  तो  आप  insomnia का  इलाज  कर  पाएंगे .पहली  रात  आप  देर  तक  जागेंगे  , पर  बिस्तर  पर  जाते  ही  आपको  नीद  आ  जाएगी . .पहले  दिन  आप  थके  हुए  हो  सकते  हैं  क्योंकि  आप  देर  से  सोये  और  बहुत  जल्दी  उठ  गए , पर  आप  पूरे  दिन  काम  करते  रहेंगे  और  दूसरी  रात  जल्दी  सोने  चले  जायेंगे .कुछ  दिनों  बाद  आप  एक  ऐसे  pattern में  settle हो  जायेंगे  जिसमे  आप  लगभग  एक  ही  समय  बिस्तर  पर  जायंगे  और  तुरंत  सो  जायंगे .
    इसलिए   यदि  आप  जल्दी  उठाना  चाहते  हों  तो  ( या  अपने  sleep pattern को  control करना  चाहते  हों ), तो  इस  try करिए :  सोने  तभी  जाइये  जब  आपको  सच -मुच  बहुत  नीद  आ रही  हो  और  हर  दिन  एक  निश्चित  समय  पर  उठिए .

    22 सित॰ 2016

    कैसे आईआईटी की प्रवेश परीक्षा में सफलता प्राप्त करें IIT exam secrets

    By: Successlocator On: सितंबर 22, 2016
  • Share The Gag
  • भारत में इंजीरिंग विषयों की शिक्षा प्राप्त करने के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) सर्वश्रेष्ठ संस्थान माने जाते हैं। इनमें प्रवेश पाना जितना ही सम्मानजनक है उतना ही चुनौतीपूर्ण भी है। आईआईटी की प्रवेश परीक्षा में सफल होने के लिए अच्छी गणितीय क्षमता, भौतिकी और रसायन के महत्वपूर्ण टॉपिक्स की पहचान और समझ, कठिन मेहनत, लगातार अभ्यास, तेज गति से प्रश्न हल करने और उत्तर देने का अभ्यास, अपने सहपाठियों एवं अध्यापकों से खुली चर्चा आदि बहुत उपयोगी हैं।


    • हर टॉपिक का विस्तारपूर्वक (डिटेल में) अध्ययन करें। । भौतिकी, रसायन और गणित के सभी टॉपिकों का अध्यन करना जरूरी है। कुछ चुन-चुनकर अध्ययन किए गये टॉपिकों से काम नहीं बनेगा।
    • याद रखिए कि JEE में 11वीं कक्षा से लगभग 45% और 12वीं कक्षा से लगभग 55% प्रश्न पूछे जाते हैं।
    • भौतिकी में इन टॉपिक्स को विस्तार से पढ़ें: तरल, तरंग एवं ध्वनि, विद्युतचुम्बकीय प्रेरण, संधारित्र एवं विद्युतस्थैतिकी, यांत्रिकी, प्रकाशिकी, तथा आधुनिक भौतिकी ।
    • रसायन विज्ञान में इन टॉपिक्स को अच्छी तरह तैयार करें : सह-संयोजकता, भौतिक रसायन में रासायनिक साम्य, विद्युत-रसायन, ऊष्मागतिकी, मत्रात्मक विश्लेषण (Quantitative Analysis), अकार्बनिक रसायन तथा कार्बनिक रसायन में रासायनिक आबन्धन ।
    • गणित में इन टॉपिक्स पर विशेष ध्यान दीजिए : समिश्र संख्याएँ, वृत्त, परवलय, अतिपरबलय, निर्देशांक ज्यामिति, प्रायिकता, सीमा, सदिश विश्लेषण, मैट्रिक्स, फलन, अवकलनीयता (differentiability), निश्चित समाकल, अवकलज के अनुप्रयोग आदि।
    • मन में सकारात्मक सोच के साथ तैयारी कीजिए। अपने आप को आईआईटी के योग्य मानकर चलिए।
    • समान दर से लगातार अध्ययन करिए और प्रश्न हल करते रहिए तथा अपनी परीक्षा स्वयं लेते रहिए। प्रत्येक विषय को समुचित समय दीजिए। एक विषय की तैयारी बहुत दिनों तक करने के बाद दूसरे विषय को तैयार करना ठीक तरीका नहीं है। एक विषय को अधिक से अधिक एक-दो दिन पढ़िए, फिर दूसरा विषय पढ़िए।
    • समुचित मार्गदर्शन भी लेते रहिए। तेज विद्यार्थियों तथा अपने अध्यापकगण से चर्चा करते रहिए। तेज गति से गणना करने की अपनी स्वयं की विधियाँ विकसित कीजिए। जेईई पूर्णतः कांसेप्ट पर आधारित हो गया है। इसलिए सभी महत्वपूर्ण टॉपिक्स के आपके कांसेप्ट पूरी तरह साफ होने चाहिए।



    सलाह


    • यदि आप किसी कोचिंग संस्थान से कोचिंग नहीं ले रहें हो तो भी कोचिंग संस्थान के छात्रों के सम्पर्क में अवश्य रहें और उनसे चर्चा करके अपनी कमियों की पूर्ति करें।
    • दो-तीन विद्यार्थियों का 'स्टडी-सर्कल' बनाएं जो आईआईटी प्रवेश-परीक्षा की तैयारी कर रहे हों। इनके साथ नियमित चर्चा करें। आपने जो टॉपिक तैयार किए हैं उन्हें समझाएँ तथा उन्होने जो तैयार किया है उसे उनसे सींखें।

    चेतावनी


    • प्रशन हल करते समय गति भी तेज बनाने की लगातार कोशिश करनी चाहिए। यह लम्बे और लगातार प्रयत्न से ही आती है। किन्तु गति बढाने के लिए शुद्धता (accuracy) से समझौता ना करें।
    • परीक्षा के ठीक पहले रात-दिन पढ़ने की गलती न करें। इसके बजाय सात-आठ घण्टे की अच्छी नींद लें और प्रसन्न बने रहें। इससे परीक्षा-हाल में आपकी मानसिक क्षमता और दक्षता अपने पूर्ण रूप में बनी रहेगी। परीक्षा केन्द्र पर पन्द्रह मिनट पहले पहुँचना भी हर दृष्टि से लाभकारी रहेगा।

    22 मार्च 2016

    जब पढने में मन न लगे तो क्या करे

    By: Successlocator On: मार्च 22, 2016
  • Share The Gag




  • दोस्तो ,
    अकसर प्रतियोगी परीक्षाओ की तैयारी करने वाले प्रतियोगियों के सामने यह समस्या आती है ,कि पढाई में मन नही लगता है । मगर पढना प्रतियोगी परीक्षा के लिए बहुत जरुरी है । तो मेरे अनुभव और विचार से तो सबसे पहले पढाई में मन न लगने के कारन का पता लगाना चाहिए कि आखिर पढाई में मन क्यों नही लग रहा है ?
    मेरे विचार से कुछ सामान्य कारण ये हो सकते है :-
    १- पढाई का उपयुक्त माहौल का न होना ।
    २- पढने का उचित समय का न होना ।
    ३- पढने के लिए उपयुक्त सामग्री का न होना ।
    ४- उचित मार्गदर्शन का न होना ।
    ५-अन्य कार्यो से व्यवधान ।
    ६- एकाग्रता की कमी होना ।
    ७- दृढ निश्चय का अभाव।
    मेरे ख्याल से उपरोक्त सामान्य कारणों से सामान्यतः प्रतियोगी पढ़ नही पाते है , इनके अलावा भी कुछ अन्य विशेष कारण हो सकते है , जो अलग अलग लोगो के लिए अलग हो सकते है । आज हम इन्ही सामान्य कारणों की चर्चा करते है । इन कारणों में सबसे महत्वपूर्ण कारण जो है , वो है उचित मार्गदर्शन का न होना । उचित मार्गदर्शन का प्रतियोगी परीक्षाओ में अति महत्वपूर्ण स्थान है । जैसे आपको अगर दिल्ली जाना है , और आपको सही रास्ता मालूम नही , अगर आपको सही मार्गदर्शक नही मिला तो हो सकता है , कि आप किसी तरह से दिल्ली पहुच भी जाये मगर इसमें आपका बहुत सारा समय और धन खर्च हो सकता है । मगर सही मार्गदर्शक मिलने पर आप समय के साथ धन भी बचा सकते है , और अपनी मंजिल पर सही वक़्त पर पहुच सकते है । अतः सही ढंग से तैयारी शुरू करने के लिए एक उपयुक्त मार्गदर्शक अतिआवश्यक है । कई बार हम मेहनत और प्रयास तो बहुत करते है मगर सफलता नही मिलती है , दूसरी तरफ कुछ लोग कम मेहनत और कुछ प्रयास में ही सफल हो जाते है । इसका कारण उनका सही दिशा में सार्थक प्रयास होता है । जैसे - अगर हम कील को उल्टा पकड़कर कितनी भी जोर से दीवार में ठोंके वह नही ठुक सकती है , वही उसे सीधा कर देने पर वह थोड़े प्रयास से ही आराम से ठुक जाएगी । इसी तरह प्रतियोगी परीक्षा में सही दिशा में सही प्रयास बहुत जरुरी है ।

    इसे भी पढ़ें:पढाई पर अपना ध्यान केंद्रित कैसे करे? PADAI ME DHYAN


    अब हम मूल मुद्दे पर आते है , कि कैसे हम पढाई में मन लगाये : -
    सबसे पहले तो पढने के लिए एक लक्ष्य या उद्देश्य होना जरुरी है , यह हमारे लिए प्रेरक का कार्य करता है । अगर लक्ष्य विहीन है ,तो हमारी सफलता शंकास्पद होगी । अतः एक लक्ष्य होना अति आवश्यक है । एक से अधिक लक्ष्य होने से मन अधिक भटकता है और पढाई में मन नही लगता है ।
    अब लक्ष्य निर्धारण के बाद समुचित तैयारी जरुरी है , अर्थात हमें अपने लक्ष्य के बारे में पूरी जानकारी जुटानी होगी , कि परीक्षा कैसे होगी ?
    सिलेबस क्या है ?
    पैटर्न किस तरह का है ?
    प्रश्न किस तरह के आते है ?
    पाठ्य सामग्री कहाँ से , कैसे मिलेगी ?
    तैयारी की रणनीति क्या होगी ?
    सफलता के लिए कितनी मेहनत जरुरी है ?
    सफल लोगो की क्या रणनीति रही थी ? इत्यादि
    अगर हम इन प्रश्नों के उत्तर प्राप्त कर लेते है तो , हमारी समास्या का आधा समाधान हो जायेगा । अब आधे समाधान के लिए हमें अपनी दिनचर्या को व्यवस्थित करना होगा । मतलब सेल्फ मेनेजमेंट
    यदि हम खुद को सही तरीके से प्रतियोगिता के हिसाब से नही ढाल पाते है, तो सफलता में संदिग्धता होगी । हमें अपनी पढाई का समय और घंटे अपनी क्षमता के अनुसार निर्धारित करने होंगे । और निर्धारित समय सरणी का द्रढ़ता के साथ पालन करना होगा । इसके लिए हम प्रेरक व्यक्तिवो , प्रेरक प्रसंगों, प्रेरक पुस्तकों आदि का सहर ले सकते है ।
    पढाई करते समय ध्यान देने योग्य बाते :-
    १ - पढाई हमेशा कुर्सी-टेबल पर बैठ कर ही करें , बिस्तर पर लेट कर बिलकुल भी न पढ़े । लेटकर पढने से पढ़ा हुआ दिमाग में बिलकुल नही जाता , बल्कि नींद आने लगती है ।
    २ - पढ़ते समय टेलीविजन न चलाये और रेडियो या गाने भी बंद रखे ।
    ३ - पढाई के समय मोबाइल स्विच ऑफ़ करदे या साईलेंट मोड में रखे ," मोबाइल पढाई का शत्रु है "

    ४ - पढ़े हुए पाठ्य को लिखते भी जाये इससे आपकी एकाग्रता भी बनी रहेगी और भविष्य के लिए नोट्स भी बन जायेंगे ।
    ५- कोई भी पाठ्य कम से तीन बार जरुर पढ़े ।
    ६ - रटने की प्रवृत्ति से बचे , जो भी पढ़े उस पर विचार मंथन जरुर करें ।
    ७ - शार्ट नोट्स जरुर बनाये ताकि वे परीक्षा के समय काम आये ।
    ८- पढ़े हुए पाठ्य पर विचार -विमर्श अपने मित्रो से जरुर करें , ग्रुप डिस्कशन पढाई में लाभदायक होता है।

    ९ - पुराने प्रश्न पत्रों के आधार पर महत्वपूर्ण टोपिक को छांट ले और उन्हें अच्छे से तैयार करें ।
    १० - संतुलित भोजन करें क्योंकि ज्यादा भोजन से नींद और आलस्य आता है , जबकि कब भोजन से पढने में मन नही लगता है ,और थकावट, सिरदर्द आदि समस्याएं होती है ।
    ११- चित्रों , मानचित्रो , ग्राफ , रेखाचित्रो आदि की मदद से पढ़े । ये अधिक समय तक याद रहते है ।
    १२- पढाई में कंप्यूटर या इन्टरनेट की मदद ले सकते है
    इसे भी पढ़ें:

    8 नव॰ 2015

    पढाई पर अपना ध्यान केंद्रित कैसे करे? PADAI ME DHYAN

    By: Successlocator On: नवंबर 08, 2015
  • Share The Gag
  • पढाई पर अपना ध्यान केंद्रित कैसे करे?

    concentrate-on-studies
    आज का  पोस्ट है How to concentrate on studies for long hours in Hindi, यह पोस्ट में केवल विध्यार्थी के लिए ले के आया हु। किसी उम्र के, किसी भी कक्षा के और किसी भी institute के।

    How to concentrate on studies for long hours in Hindi

    दिमाग एक बन्दर की तरह होता है, ये एक जगह रुक नहीं सकता उचलता कूदता रहता है। एक ही पल में ये दुनिया के किसी भी कोने में चला जाता है।
    किसी भी व्यक्ति के बारे में सोचना शुरू कर देता है। सपने और कल्पना में जा सकता है यानि सपनो की दुनिया में चला जाता है। ख़ास कर पढाई करने के समय। आपके हाथ में किताब तो है लेकिन बहार की दुनिया के विचार आपका ध्यान बन्ने नहीं देता है।
    किसी को GF, BF याद आ जाते है, किसी को नया मोबाइल लेने का ख्याल, कभी दोस्तों के साथ मज़ा करने की इच्छा, तो कभी लम्बे सफ़र जाने का विचार।
    आप अपने आप को झिंजोड़ते हो कोसिस करते हो पढाई में ध्यान लगाने की, ध्यान को केन्द्रित करने की।
    दिक्कत हैं ना?
    दूसरी दिक्कत है के आप में से ज्यादातर लोग मध्य वर्ग (Middleclass) से सम्बन्ध (Belong) रखते है। छोटा घर और वही पर आपकी दादी जी पूजा करती है, वही पर आपके पिता जी टेलीविज़न पर खबर देखते है, वही पर आपका भाई क्रिकेट मैच देखता है और वही पर आपकी भाभी आपके छोटे भतीजे के साथ खेलती है। और तो और आपके रसोई घर के कुकर के सीटीयो की आवाज, वो भी वही पर है।
    कैसे पढाई में ध्यान लगा पाओगे? एक बात तो में भूल ही गया पडोसी के घर में लगे कारपेंटर के ठक-थक की वो भी तो दिक्कत है। और गली में खेल रहे बच्चो की आवाज, बस और बस।
    और कुछ आपके दिमाग के songs भी तो है, आपके दिमाग में है की आप कुछ दिनों के लिए समुन्द्र के किनारे बैठ कर पढाई करे या किसी बहते हुए झरने की आवाज के सामने या पहाड़ की छोटी पर या फिर रात के अँधेरे में जब बहार गरज-बरस से बरसात होती हो।
    कईयों को कीड़े-मकोड़े की पक्षियों की आवाजो में पढना अच्छा लगता है और कईयों को टेलीविज़न से निकलती हुई Teeeeeeeeeee।।।। उस आवाज में।
    इन सब दिक्कतों का एक ही इलाज है की आपके कानो पर Headphone लग जाए और उस में से केवल वही आवाज आये जो आपको अच्छी लगती है। आपको एक शांत वातावरण का एहसास कराये।
    मैंने काफी कुछ अध्ययन (Study) के बाद कुछ ध्वनियों (Sounds) को रिकॉर्ड किया है, मैंने उनको आपके लिए अपने YouTube चैनल पर अपलोड भी किया है। जिनमे श्वेत रव, बरसात की आवाज, आग की आवाज, कीड़े मकोडो की आवाज, पक्षियों की आवाज इत्यादि।

    और बारी-बारी हर ध्वनि को सुनने का प्रयास कीजिये, जो भी ध्वनी जो भी आवाज आपको अच्छी लगे आपको लगे की आप उसमे मज़ा ले रहे है। आप उसमे पढाई कर सकते है। उसको अपने favourite में add कर दीजिये। और जब भी पढाई करे, जब भी अध्ययन करे उसी को सुनिए।
    आप चाहे तो एक से ज्यादा आवाजो को भी favourite में add कर सकते है और बदल-बदल के ध्वनि सुन सकते है।
    तो मेरे प्रिय विध्यार्थी मित्रो, मेरी इच्छा है की इस बार आप बहतर और बहुत अच्छे तरीके से परीक्षा दे।

    17 अक्टू॰ 2015

    परीक्षा में सफलता के मंत्र

    By: Successlocator On: अक्टूबर 17, 2015
  • Share The Gag
  • परीक्षा में सफलता के मंत्र


    पढ़ाई
    NDND
    परीक्षा की घड़ी ऐसा समय होती है, जब बच्चे, बड़े हर कोई घबरा जाता है। छोटे बच्चों के लिए परीक्षा किसी हौआ से कम नहीं होती है। एक ओर माता-पिता की उनसे अपेक्षाएँ और दूसरी ओर उनका चंचल मन दोनों उनके लिए दुविधा का कारण बन जाता है। 

    परीक्षा में जहाँ तनाव के कारण बच्चों का पढ़ाई में मन नहीं लगता है, वहीं दूसरी ओर बच्चों के लिए परीक्षा में अच्छे अंक लाना भी मजबूरी होती है। हम आपको बताते हैं कुछ ऐसी छोटी-छोटी बातें, जो परीक्षा में आपके बच्चे को सफल बनाने में सहायक हो सकती है। 

    परीक्षा में सफलता के मंत्र : 

    * सबसे पहले पढ़ाई करने के लिए एक टाइम टेबल बनाएँ और उसी के अनुसार अपनी पढ़ाई करें। 
    * पढ़ाई करते वक्त एकाग्रता होना बहुत जरूरी होती है। इसके लिए सुबह जल्दी उठकर ध्यान करें, जिससे आपकी एकाग्रता बनी रहे। 
    * हर रोज कोई टेस्ट पेपर बनाकर एक निर्धारित समय सीमा में उसको हल करने का प्रयास करें तथा उसके बाद अपनी उत्तरपुस्तिका को जाँचकर अपना मूल्यांकन स्वयं करें।
    * लगातार घंटों बैठकर पढ़ाई करने से बेहतर है कुछ समय एकाग्रचित्त होकर पढ़ाई की जाए। 
    * पढ़ाई के बीच-बीच में दो-तीन घंटे बाद एक ब्रेक अवश्य लें। 
    * देर रात तक पढ़ने की बजाय सुबह जल्दी उठकर पढ़ाई करें। 
    * आप चाहें तो अपने दोस्तों के साथ बैठकर पढ़ाई कर सकते हैं। 
    * पढ़ाई के दौरान और परीक्षा के लिए जाते समय कभी भी नकारात्मक विचार मन में न आने दे कि जो पेपर में आएगा वह हल कर पाऊँगा या नहीं। 
    * पूरे आत्मविश्वास के साथ पेपर देने जाएँ। पेपर हल करने में काफी मदद मिलेगी। 
    * परीक्षा के अंत तक ये ना सोचे कि मैं कुछ नहीं कर सकता हूँ। हमेशा यह सोचें कि मैं भी मेहनतकरके अव्वल आ सकता हूँ।
    * परीक्षा में सबसे पहले पूरा प्रश्नपत्र पढ़ें और उसके बाद ही उसे हल करें। हड़बड़ी में प्रश्नपत्र हल करने की भूल ना करें।
    * जिस प्रश्न को हल कर रहे हैं, उस पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित रखें। इस दौरान अन्य प्रश्नों के बारे में विचार न करें। हाँ, समय का जरूर ध्यान रखते रहें।