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13 नव॰ 2017

सत्य की खोज।satya ki khoj hindi kahaniya.

By: Successlocator On: नवंबर 13, 2017
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  • दस भिक्षु सत्य की खोज में एक बार निकले थे। उन्होने बहुत पर्वतों-पहाडों, आश्रमों की यात्रा की। लेकिन उन्हें कोई सत्य का अनुभव न हो सका। क्योंकि सारी यात्रा बाहर हो रही थी। किन्हीं पहाडों पर, किन्ही आश्रमों में, किन्हीं गुरुओं के पास खोज चल हरी थी। जब तक खोज किसी और की तरफ चलती है, तब तक उसे पाया भी कैसे जा सकता है, जो स्वयं में है।आखिर में थक गए और अपने गांव वापस लौटने लगे। वर्षा के दिन थे, नदी बहुत पूर पर थी। उन्होने नदी पार की। पार करने के बाद सोचा कि गिन लें, कोई खो तो नहीं गया। गिनती की, एक आदमी प्रतीत हुआ खो गया है, एक भिक्षु डूब गया था। गिनती नौ होती थी। दस थे वे। दस ने नदी पार की थी। लौटकर बाहर आकर गिना, तो नौ मालूम होेते थै।

    प्रत्येक व्यक्ति अपने को गिनना छोड जाता था, शेष सबको गिन लेता था। वे रोने बेठ गए। सत्य की खोज का एक साथी खो गया था।एक यात्री उस रस्ते से निकल रहा था, दूसरे गांव तक जाने के लिए । उसने उनकी पीडा पूदभ्, उनके गिरते आंसू देखे। उसने पूछा, क्या कठिनाई है ?
    उन्होंने कहा- हम दस नदी में उतरे थे, एक साथी खो गया। उसके लिए हम रोते है। कैंसे खोंजे ? उसने देखा वे दस ही थे। वह हंसा और उसने कहा, तुम दस ही हो, व्यर्थ की खोज मत करो अपने रास्ते चला गया।
    उन्होने फिर से गिनती की कि हो सकता है, उनकी गिनती में भूल हो। लेकिन उस यात्री को पता भी न था। उनकी गिनती में भूूल न थी, वे गिनती तो ठीक ही जानते थे। भूल यहां थी कि कोई भी अपनी गिनती नहीं करता था।
    उन्होने बहुत बार गिना, फिर भी वे नौ ही थे। और तब उनमें से एक भिक्षु नदी के किनारे गया। उसने नदी में झांककर देखा। एक चट्टान के पास पानी स्थिर था। उसे अपनी ही परछाई नीचे पानी में दिखाई पडी। वह चिल्लाया, उसने अपने मित्रों को कहाः आओ,

    जिसे हम खोजते थे, वह मौजुद है। दसवां साथी मिल गया है। लेकिन पानी बहुत गहरा है। और उसे हम शायद निकाल न सकेंगे। लेकिन उसका अंतिम दर्शन तो कर लें। एक-एक व्यक्ति ने उस चट्टान के पास झांककर देखा, नीचे एक भिक्षु मौजुद था। सबकी परछाई नीचे बनती उन्हे दिखाई पडी। तब इतना तो तय हो गया, इतने डूबे पानी में वह मर गया हैं।
    वे उसका अंतिम संस्कार कर रहे थे। तब वह यात्री फिर वापस लौटा, उसने पूछा कि यह चिता किसके लिए जलाई हुई है ? यह क्या कर रहे हो ? उन नौ ही रोते हुए भिक्षुओं ने कहा, मित्र हमारा मर गया है। देख लिया हमने गहरे पानी में डूबी है उसकी लाश। निकालना तो संभव नहीं है। फिर वह मर भी गया होगा, हम उसका अंतिम दाह-संस्कार कर रहे है।

    उस यात्री ने फिर से गिनती की और उनसे कहा, पागलों! एक अर्थ में तुम सबने अपना ही दाह-संस्कार कर लिया है। तुमने जिसे दखा है पानी में, वह तुम्हीं हो। लेकिन पानी में देख सके तुम, लेकिन स्वयं में न देख सके! प्रतिबिंब को पकड सके जल में, लेकिन खुद पर तुम्हारी दृष्टि न जा सकी! तुमने अपना ही दाह-संस्कार कर लिया। और दसों ने मिलकर उस दसवें को दफना दिया है, जो खोया ही नहीं था।

    उसकी इस बात के कहते ही उन्हें स्मरण आया कि दसंवा तो मैं ही हूं। हर आदमी को खयाल आया कि वह दसंवा आदमी तो मैं ही हूं। और जिस सत्य की खोज वे पहाडों पर नहीं कर सकते थे, अपने ही गांव लौटकर वह खोज पूरी हो गई। वे दसों ही जागृत होकर, जान कर गांव वापस लौट गये थे।
    उन दस भिक्षुओं की कथा ही हम सभी की कथा है। एक को भर हम छोड जाते है- स्वंय को। और सब तरफ हमारी दृष्टि जाती है- शास्त्रो में खोजते हैं, शब्दों में खोजते हैं, शास्त्रों के वचनों में खोजते हैं, पहाडों पर, पर्वतों पर खोजते हैं, सेवा में, समाज सेवा में, प्रार्थना में, पूजा में खोजते है। सिर्फ एक व्यक्ति भर इस खोज से वंचित रह जाता है, वह दसवां आदमी वंचित रह जाता है, जो कि हम स्वयं है।

    स्वतंत्रता का अर्थ है- इस स्वयं को जानने से जो जीवन उपलब्ध होता है, उसका नाम स्वतंत्रता है। स्वतंत्र होना इस जगत में सबसे दूर्लभ बात है। स्वतंत्र वही हो सकता है, जो स्वंय को जानता हो। जो स्वंय को नहीं जानता, वह परतंत्र हो सकता है या स्वच्छंद हो सकता है, लेकिन स्वतंत्र नहीं।

    5 सित॰ 2017

    किसी को भी प्रभावित करने के लिए याद रखे ये बाते।

    By: Successlocator On: सितंबर 05, 2017
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  • दोस्तों आज हम आपको बताने जा रहे हैं जिंदगी के हर कुछ रोचक तथ्य जिससे कोई भी प्रभावित हो सकता है तो आइए जानते हैं।

    अगर आप सोचते हुए सोते हैं तो दिमाग नींद में भी सोचता रहता है जिससे आपको जागने पर आराम की फीलिंग नहीं आती और थकावट महसूस होती है।

    आमतौर पर किसी खास इंसान का भेजा हुआ एक ही संदेश आपको तुरंत स्ट्रेस से छुटकारा दिला सकता है और आपके मूड को ठीक कर सकता है।

    जब आप झूठ बोलते हैं तो आपकी नाक गर्म हो जाती है।

    अगर आपको रात में लंबी दूरी तक गाड़ी चलानी है तो कॉमेडी सुने तो कॉमेडी सुनते हुए नींद आना मुश्किल काम है।

    एक मनोवैज्ञानिक शोध कहता है कि जब आप सिंगल होते हैं तो हर जगह आपको खुश कपल्स दिखेंगे पर जब आप रिलेशनशिप में होते हैं तब आपको सिंगल लोग ज्यादा खुश दिखेंगे।

    प्यार में डूबे दो लोग जब एक दूसरे की आंखों में देखते हैं तो उनकी धड़कनें भी मिल जाती हैं।

    अगर आप किसी को पहले से संदेश भेजते हैं तब 90 प्रतिशत संभावना है कि वह इंसान आप में रुचि नहीं रखता है।

    अगर आपको लगता है कि कोई आपको गलत नंबर दे रहा है तो उसे चेक करने के लिए कुछ डिजिट बदलकर पढ़कर सुना दीजिए और अगर वो आपकी इस गलती को सही नहीं करता है तो समझ लीजिए कि दिया गया नंबर गलत है।

    किसी नई जगह अगर टैक्सी ड्राइवर आपसे पूछे कि क्या आप आसपास किसी जगह से है तो हां कर दीजिए क्योंकि कभी कबार ड्राइवर किराया बढ़ाने के लिए आपको दूर ले जाते हैं।

    महिलाएं सामान्य तौर पर ऐसे सवाल पूछती हैं जिनके जवाब हमें पहले से ही पता होते हैं इसलिए बेहतर होगा कि आप सच ही बता दें।

    मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि अगर आपकी दोस्ती 7 साल से ज्यादा टिक गई है तो संभावित है कि वो जिंदगी भर रहेगी।

    अपनी नाक बंद करके तीन बार निगलने से आपको हिचकी में राहत मिलेगी।

    जरूरत से कम नींद आप को निराशा और शराबखोरी करने की इच्छा की तरफ ढकेलती है।

    पुरुष 3 दिन के बाद ही प्यार में पड़ जाते हैं लेकिन महिलाएं कम से कम 18 दिन लेती हैं।

    दोस्तों हम उम्मीद करते हैं कि आपको हमारी पोस्ट अच्छी लगी होगी यदि आपको हमारी पोस्ट अच्छी लगी हो तो कृपया इसे लाइक जरुर करें और ऐसे ही रोचक पोस्ट पाने के लिए हमें फूलों जरुर करें धन्यवाद।

    4 सित॰ 2017

    फालतू विचारो को कैसे बंद करे।

    By: Successlocator On: सितंबर 04, 2017
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  • जीवन में हम कई सारी परेशानीयों से गुज़रते हैं। कुछ तकलीफ़ें हमें तोड़ कर रख देती हैं। तो कुछ समस्याएँ हमें शारीरिक और मानसिक रूप से और मज़बूत बना जाती हैं। यह तो देखने का नज़रिया है की आप जीवन में आने वाली चुनौतीयों का सामना किस attitude के साथ करते हैं। आज हम बात करने जा रहे हैं एक ऐसी मानसिक समस्या की जिसमें हमारा दिमाग फालतू के विचारों में खो जाता है। और ऐसे बेमानी विचारों के चलते हम अपने रोज़मररा के कामकाज में जी नहीं लगा पाते हैं। यह समस्या कम या ज़्यादा सब को होती ही है। जब हम सो जाते हैं तब भी हमारा दिमाग जागता ही रहता है। और कुछ ना कुछ सोचता रहता है। तो आइये फालतू के विचारों से मुक्ति पाने का आसान रास्ता खोजें।

    खुद को क्षमा करें
    कुछ लोग होते हैं जो छोटी छोटी गलतियों पर खुद से इतने खफा हो जाते हैं की, अपने आप को ही गंदी वाली गालियां देने लगते हैं। खुद को कोसने लगते हैं। यह आदत तुरंत बदल देनी चाहिए। खुद को समझाये की गलती तो पहले भी हुई है, अब भी होगी, और आगे भी हो सकती हैं। हार और गलती को सहजता से लें। कोई गलती इतनी बड़ी नहीं की माफ ना किया जा सके।

    खुद से बातें करना बंद कर दो    
    जब हम किसी विषय पर अधिक चिंतन करते हैं। किसी बात को बहुत ज़्यादा गंभीरता से लेते हैं तो वह बात हमारे दिमाग पर सवार हो जाती है। और हम उसको सोच सोच कर खुद ही से बाते करना शुरू कर देते हैं। अगर अकेलापन महसूस हो रहा है तो दोस्तों से बात करें। परिवार के साथ समय बिताएँ। घूमने निकल जाएँ। पर पागलों की तरह खुद से ना बड़बड़ करें।

    स्वीकार करना सीखें।
    अगर आप को बे फिज़ूल बाते करने की आदत है। सोच में डूबे रहने की आदत है तो उसका स्वीकार करो। चूँकि जब तक आप यह मनोंगे नहीं की समस्या है, तब तक आप उसका समाधान नहीं ढूंढोगे। और समाधान नहीं ठुंढोगे तो ठीक कैसे हो सकोगे। और जब आप यह मान लोगे की आप को ज़्यादा सोचने की आदत है तो ही, आप खुद बख़ुद अपने आप को इस से दूर करना शुरू कर देंगे।

    व्यस्त रहें। खाली ना बैठे
    खाली दिमाग शैतान का अड्डा होता है। यह बात तो आजकल पाँच साल का बच्चा भी जानता है। इस लिए एक्टिव रहें। कुछ शौक पैदा करें। कोई लक्ष बनाएँ। किसी की मदद करें। किसी प्रवृति में हिस्सा लें। बस अकेले रह कर खाली ना बैठे। मक्खीयों को जीने दें।  

    फेसबुक और व्हाट्स उप की दुनियाँ से बाहर आयें
    आज कल सोशल मिडया का बड़ा ट्रेंड है। कई लोग दिन रात ऑनलाइन रह कर पता नहीं क्या तीर मारते रहते हैं। कुछ ज्ञानी लोग तो किसी पर्यटन स्थल पर जा कर भी, फोन में अपना मुह घुसेड़ कर बैठे रहते हैं। कोई तो 500 रुपए खर्च कर के मल्टीफ़्लेक्स सिनेमा जाते हैं और मूवी देखने की वजाय उसे अपने फोन पर रेकॉर्ड करते रहते हैं। ऐसे घनचक्कर लोगों का तो भगवान ही मालिक है। जितनी जल्दी हो सके उतनी जल्दी ऐसी फालतू आदतें बदल देना सही होता है।

    सकारात्मक सोच रखें
    कुछ लोग होते हैं जो सिर्फ ऐसा बोलते हैं की नहीं होगा। कैसे होगा। कब होगा। इस तरह के लोग वाकय में पृथ्वी का बोज बढ़ाने के लिए होते हैं। अगर इन्सान में किसी तरह का जोश नहीं। उत्साह नहीं। कुछ कर गुज़रने की चाह नहीं। ज़रा भी हिम्मत नहीं। तो ऐसा इन्सान खुद को ईश्वर की सब से उत्तम कलाकृति कैसे मान सकेगा। कहने का मतलब बड़ा साफ और सीधा है। खुद पर विश्वास करो। घमंड ना करो पर गर्व ज़रूर करो। पॉज़िटिव रहो और दरवाज़ा तब तक ठोकते रहो जब तक खुल ना जाए। मतलब प्रयत्नशील रहो। हार मत मानों। और अगर हार भी गए तो जिद्दी बन कर फिर से उसी रास्ते पर लगे रहो। यही success का फॉर्मूला है।

    22 अग॰ 2017

    जैसा जैसा सोचेगे वैसे वैसे बनते जायेंगे

    By: Successlocator On: अगस्त 22, 2017
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  • एक व्यक्ति जंगल मे लकड़ी काटने गया वहां पर उसने एक हथिनी को देख जो कि शिकारियों की गोली लगने की वजह से मार चुकी थी।और उसके कुछ ही दूरी पर उसका एक बच्चा उसके आसपास बेचैन हो कर घूम रहा था उस बच्चे को देखकर लकड़हारे को दया आ गयी और वो उस हाथी के बच्चे को घर ले आया ,ओर उसके पैर में एक पतली सांकड़ बांध दी।उस बच्चे ने उसे भरकस तोड़ने का प्रयास किया पर उस उम्र में वह उस सांकड़ को तोड़ पाने में सक्षम नही था,पर फिर भी वह रोज प्रयास करता था रोज दर रोज उसके प्रयास काम होते गए और उसने सोच लिया कि अब वह इसे नही तोड़ सकता अब उसने प्रयास करना भी छोड़ दिया अब वह धीरे धीरे बड़ा हुआ उस समय भी लकड़हारा उसे उसी सांकड़ से बांधता था और वह हाथी उस पतली सांकड़ के सहारे बंधा रहता था।एक दिन एक सज्जन पुरुष जो कि हाथियों की ताकत से वाकिफ थे उन्होंने उस लकड़हारे से पूछा भाई तू इस सांकड़ के सहारे इस हाथी को कैसे रोक लेते है।तब उसने एक दम सरल शब्दों में जवाब दिया कि जब यह बच्चा था तब से मैं इसे इसी सांकड़ से बांधता था उस समय इसने भरकस प्रयास किया पर उस समय वह इसे तोड़ने में सक्षम नही था,धीरे धीरे वह मंटा चला गया कि इसे तोड़ पाना उसके बस में नही है और अब तो वह प्रयास भी नही करता।
    ठीक उसी हाथी की तरह आज हमारी मानसिकता हो गयी है यदि हम किसी काम मे किसी वजह से असफल होते है तो हैम ये मान बैठते है कि अब ये काम हमारे बस से बाहर है और हम प्रयास जॉन भी बंद कर देते है और सेफ जॉन की तरफ आकर्षित होते है जी कि कोई छोटी मोटी नॉकरी जिससे हमारी जिंदगी आसानी से निकल जाए। इस तरह हमारी सोच दिन ब दिन ओर क्रुद्ध होती चली जाती है और सोचते है जो भाग्य में लिखा होगा तो मिलेगा ही औऱ इस तरह प्रयास करना धीरे धीरे बंद कर देते है।आपने एक कहावत तो सुनी ही होगा"मन के हारे हार है,मैन के जीते जीत"।
    कहने का आशय स्पष्ट है जब तक आप खुद हार नही मान तब तक हमे कोई नही हरा सकता और जब हम मन से हार मान लेते है  तब कोई कितना भी प्रयास कर ले हमे सफल नही बना सकता।इसलिए आप सारी बेड़ियो को तोड़ कर अपनी खोज में निकालिये।

                                         कविता
                                                               हरिवंश राय बच्चन
    तू खुद की खोज में निकल
    तू किस लिए हताश है, तू चल तेरे वजूद की
    समय को भी तलाश है
    समय को भी तलाश है
    जो तुझ से लिपटी बेड़ियाँ
    समझ न इन को वस्त्र तू .. (x२)
    ये बेड़ियां पिघाल के
    बना ले इनको शस्त्र तू
    बना ले इनको शस्त्र तू
    तू खुद की खोज में निकल
    Follow
    तू किस लिए हताश है, तू चल तेरे वजूद की
    समय को भी तलाश है
    समय को भी तलाश है
    चरित्र जब पवित्र है
    तोह क्यों है ये दशा तेरी .. (x२)
    ये पापियों को हक़ नहीं
    की ले परीक्षा तेरी
    की ले परीक्षा तेरी
    तू खुद की खोज में निकल
    तू किस लिए हताश है तू चल, तेरे वजूद की
    समय को भी तलाश है
    जला के भस्म कर उसे
    जो क्रूरता का जाल है .. (x२)
    तू आरती की लौ नहीं
    तू क्रोध की मशाल है
    तू क्रोध की मशाल है
    तू खुद की खोज में निकल
    तू किस लिए हताश है, तू चल तेरे वजूद की
    समय को भी तलाश है
    समय को भी तलाश है
    चूनर उड़ा के ध्वज बना
    गगन भी कपकाएगा .. (x२)
    अगर तेरी चूनर गिरी
    तोह एक भूकंप आएगा
    तोह एक भूकंप आएगा
    तू खुद की खोज में निकल
    तू किस लिए हताश है, तू चल तेरे वजूद की
    समय को भी तलाश है
    समय को भी तलाश है

    1 फ़र॰ 2017

    खुद को motivate करने के 16 तरीके

    By: Successlocator On: फ़रवरी 01, 2017
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  • हममें से सबसे अधिक motivated लोग भी- आप,मैं, Tony Robbins (a self-help expert like Shiv Khera) – कभी -कभार demotivated feel कर सकते हैं. यहाँ तक की , कभी-कभी हम इतना low feel कर सकते हैं  कि positive बदलाव के बारे में सोचना भी बहुत कठिन लगने लगता है.
    पर ये निराशाजनक नहीं है: छोटे छोटे steps लेकर आप सकारात्मक बदलाव के रास्ते पर वापस आ सकते हैं.

    हाँ , मैं जानता हूँ, कभी कभी ये असंभव लगता है. आपको कुछ करने का मन नहीं करता. मेरे साथ भी ये हुआ है,दरअसल अभी भी समय समय पर मैं ऐसा feel करता हूँ. आप अकेले नहीं हैं . लेकिन मैंने इस निराशा से बाहर निकलने के कुछ तरीके सीख लिए हैं, और हम आज उन्ही पर नज़र डालेंगे.

    जब बीमारी , चोट या life में चल रही किसी और समस्या के कारण में व्यायाम नहीं कर पाता तो उसे वापस से शुरू करना कठिन होता है. कई बार, मैं उसके बारे में सोचना भी नहीं चाहता . लेकिन मैं हमेशा उस  feeling से उबरने का कोई ना कोई रास्ता निकाल लेता हूँ, और यहाँ ऐसी ही कुछ बाते हैं जो मेरे लिए मददगार साबित होती हैं.

     1. One Goal  एक लक्ष्य
    पेट में यह पीकर...

    जब भी मैं  थोडा down हुआ हूँ , मैंने पाया है कि अक्सर ऐसा इसलिए होता है क्योंकि मेरी life में एक साथ बहुत कुछ चल रहा होता है. मैं बहुत कुछ करने की कोशिश कर रहा होता हूँ. और ये मेरी energy और motivation को ख़तम कर देता है. शायद ये सबसे common mistake है जो लोग करते हैं: वो एक साथ बहुत कुछ करने की कोशिश करते हैं. यदि एक समय में दो या उससे अधिक लक्ष्य achieve करने का प्रयास करते हैं तो आप अपनी  ( लक्ष्य पाने के लिए दो सबसे महत्त्वपूर्ण चीजें ) energy और focus बनाये नहीं रख पाते.  ये संभव नहीं है – मैंने कई बार कोशिश की है. आपको अभी के लिए कोई एक लक्ष्य चुनना होगा, और पूरी तरह से उसपर focus करना होगा. मुझे पाता है ये कठिन है, पर मैं अपने experience से बता रहा हूँ. एक बार आप अपना अभी का निर्धारित लक्ष्य प्राप्त कर लें फिर उसके बाद आप अपने बाकी लक्ष्य प्राप्त कर सकते हैं.

    2. Find Inspiration प्रेरणा खोजिये

    मुझे उन लोगों से प्रेरणा मिलती है जिन लोगों already वो achieve कर लिया है जो मैं करना चाहता हूँ, या वो लोग जो वही कर रहे हैं जो मैं करना चाहता हूँ. मैं औरों के blogs, books,magazines पढता हूँ. मैं अपने goals को Google करता हूँ , और success stories पढता हूँ.  Zen Habits ऐसी ही जगहों में से एक है, सिर्फ मुझसे ही नहीं बल्कि अन्य कई readers से जिन्होंने अद्भुत चीजें प्राप्त की हैं.
    3. Get Excited उत्साहित होइए

    ये सुनने में बहुत obvious सी बात लगती है, पर ज्यादातर लोग इस बारे में अधिक नहीं  सोचते हैं: अगर आप निराशा से निकलना चाहते हैं, तो किसी लक्ष्य के लिए उत्साहित हो जाइये. पर अगर आप motivated नहीं feel करते हैं तो आप excited कैसे feel करेंगे? Well, इसकी शुरुआत दूसरों से प्रेरणा लेकर होती है, लेकिन आपको दूसरों से उत्साह लेकर उसे अपनी उर्जा में बदलना होगा.मैंने पाया है कि  मैं अपनी wife और अन्य लोगों से बात करके, इस बारे में ज्यादा से ज्यादा पढ़कर, और इसे  visualize (दिमाग  में  goal achieve करने से होने वाले फायदे को देखना ) करके कि  successful होना कैसा लगेगा, excited feel करने लगता हूँ. एक बार ये कर लिया तो बस इसी energy को आगे carry करने और आगे बढ़ने की ज़रुरत रहती है.

    4.Build Anticipation अपेक्षा करें

    ये सुनने में कुछ कठिन लग सकता है, और अकी लोग इस tip को skip कर देंगे. लेकिन ये सचमुच काम करती है. कई बार असफल प्रयासों के बाद इसी टिप की वजह से मैं cigarette पीना छोड़ पाया.अगर आपको अपना goal achieve करने की प्रेरणा मिल जाती है तो  तुरंत उसे प्राप्त करने का प्रयास ना करें. हममें से कई लोग excited होके आज ही अपना काम शुरू करना चाहेंगे. ये एक गलती है. Future की कोई date set कीजिये – एक या दो हफ्ते बाद , या एक महीना भी  – और उसे अपनी Start Date बनाइये. उसे कैलेण्डर पर mark कर लीजिये. उस date को लेकर उत्साहित होइए. उसे अपने जीवन की  सबसे important date बना लीजिये. इस बीच अपना प्लान बनाइये. और नीचे दिए गए कुछ steps follow कीजिये. क्योंकि अपनी start delay करके आप anticipation build करते हैं और अपने लक्ष्य के प्रति अपनी उर्जा और ध्यान बढाते हैं.
    5. Post your goal  अपना लक्ष्य प्रकाशित करें

    अपने goal का एक बड़ा सा print निकाल लें. अपना लक्ष्य कुछ ही शब्दों में लिखें , जैसे कोई मन्त्र  (“Exercise 15 mins. Daily”), और उसे अपने दीवार या फ्रिज पर चिपका दें. इसे अपने घर में अपने office में लगा लें उसे अपने computer के desktop पर लगा लें. आप अपने goals के लिए बड़े reminders लगाना चाहते हैं , ताकि  आप अपने goal पर focus कर पाएं और उसे लेकर excited रह पाएं. अपने goal से सम्बंधित कोई picture लगाना भी  helpful हो सकता है  (like a model with sexy abs, for example).

    6.Commit Publicly सार्वजनिक रूप से प्रतिज्ञा लीजिये

    कोई भी दूसरों के सामने बुरा नहीं दिखना चाहता है . जो बात हमने publicly कही है उसे करने के लिए हम extra effort करते हैं. For example, जब मैं अपनी पहली मैराथन दौड़ दौड़ना चाहता था , तब मैंने अपने  local newspaper में इस बारे में एक column लिखना शुरू कर दिया. Guam की पूरी आबादी मेरे इस goal के बारे में जान गयी. अब मैं पीछे नहीं हट सकता था , हालांकि मेरी motivation कम -ज्यादा होती रही पर मैं इस goal को पकडे रहा और दौड़ complete की.आपको किसी newspaper में अपना goal commit करने की ज़रुरत नहीं है , पर आप इसे अपने family,friends, और co-workers से बता सकते हैं, और यदि आपका कोई blog है तो उसपर भी इस बारे में लिख सकते हैं.और खुद को जिम्मेदार ठेराइये – केवल एक बार commit मत करिए , बल्कि अपने progress के बारे में सभी को हर हफ्ते या महीने update करने के लिए भी commit करिए.

    7. Think about it daily इस बारे में रोज़ सोचिये



    यदि आप रोज़ अपने लक्ष्य के बारे में सोचते हैं तो उसके पूर्ण होने की संभावना कहीं अधिक है. इसीलिए अपने लक्ष्य को दीवार पर या desktop पर लगाना मददगार होता है . हर रोज़ खुद को reminder भेजना भी helpful होता है. और अगर आप रोज बस पांच मिनट भी ये छोटा सा काम करेंगे तो ये लगभग तय है की आपका लक्ष्य पूर्ण होगा.
    8. Get Support.  मदद लीजिये

    अकेले कुछ हांसिल करना कठिन होता है. जब मैंने मैराथन में दौड़ने का निश्चय किया था , तो मेरे साथ दोस्तों और परिवार का support था, और साथ ही Guam में दौड़ने वालों की एक अच्छी community भी थी  जो मेरे साथ दौड़ते थे और मुझे encourage करते थे. जब मैंने smoking quit करनी चाही तो मैंने एक online forum join कर लिया , जो मेरे लिए बहुत helpful रहा. और इस काम में मेरी wife Eva  ने हर कदम पर मेरा साथ दिया. मैं उसकी और अन्य लोगों की मदद के बिना ऐसा नहीं कर पाता. अपना support network खोजिये , अपने आस-पास  या online या दोनों जगह.

    9. Realize that there’s an ebb and flow इस बात को समझिये की उतार-चढ़ाव आते रहते हैं

    Motivation कोई ऐसी चीज नहीं है जो हमेशा आपके साथ रहे. ये आती है , जाती है और फिर आती है, ज्वार की तरह . इस बात को समझिये की भले ही ये चली जाए , पर वो हमेशा के लिए नहीं चली जाती . Motivation वापस आती है.  बस अपने लक्ष्य से जुड़े रहिये और motivation के वापस आने का इंतज़ार कीजिय. इस दौरान अपने लक्ष्य के बारे में पढ़िए , दूसरों से मदद मांगिये , और यहाँ बताई अन्य  कुछ चीजें कीजिये जब तक की आप का motivation वापस ना आ जाये.

    10. Stick with it. लगे रहिये

    आप चाहे जो कुछ भी करिए , पर हार नहीं मानिए. भले आप आज या इस हफ्ते बिलकुल  ही motivated ना feel कर रहे हों , पर अपना लक्ष्य छोड़िये नहीं. आपकी motivation फिर वापस आएगी . अपने लक्ष्य को एक लम्बी यात्रा की तरह देखिये , और बीच में जो demotivation  आता है वो महज़ एक speed-breaker है. छोटी मोती बाधाएं आने पर  आप यात्रा नहीं छोड़ते. लम्बे समय तक अपने लक्ष्य के साथ जुड़े रहिये , उतार-चढ़ाव पार कीजिये और आप वहां पहुँच जायेंगे.

    11.Start small. Really small छोटे, बहुत छोटे से शुरुआत कीजिये

    अगर आपको शुरुआत करने में दिक्कत  हो  रही है तो शायद इसकी वजह ये है की आप बहुत बड़ा सोच रहे हैं. यदि आप व्यायाम करना चाहता हैं, तो शायद आप सोच रहे हों की हफ्ते में पांच दिन intensely workout करना है. नहीं – इसकी जगह छोटे-छोटे baby steps लीजिये. सिर्फ दो मिनट व्यायाम कीजिये. मुझे पता है ये आपको अटपटा लग रहा होगा. ये इतना आसान है, आप fail नहीं हो सकते. पर आप इसे करिए . बस कुछ crunches, 2 pushups, और वहीँ थोड़ी सी jogging. जब आपने एक हफ्ते तक ये २ मिनट तक कर लेंगे , तो इसे बढाकर पांच मिनट कर दीजिये , और एक हफ्ते तक इसे कीजिये. एक महीने में आप 15-20 मिनट करने लगेंगे. सुबह जल्दी उठाना चाहते हैं ? सुबह पांच बजे उठने का मत सोचिये, इसकी जगह आप एक हफ्ते तक बस 10 मिनट पहले उठिए . एक बार आपने ये कर लिया , तो 10 मिनट और जल्दी उठिए. Baby Steps.

    12.Build on small successes छोटी छोटी उपलब्धियों के साथ आगे बढिए

    एक बार फिर , अगर आप एक हफ्ते तक छोटे लक्ष्य के साथ शुरू करेंगे तो आप सफल होंगे. अगर किसी बेहद आसान चीज से शुरुआत करेंगे तो आप fail नहीं हो सकते. भला कौन दो मिनट तक exercise नहीं कर सकता? ( यदि आप वो हैं, तो मैं माफ़ी मांगता हूँ) और आप successful feel करेंगे , आपको अन्दर से अच्छा लगेगा. इसी feeling के साथ और छोटे-छोटे steps लेते  जाइये . For example : अपनी exercise routine में दो-तीन मिनट add करिए. हर एक step के साथ (और हर स्टेप कम से कम एक हफ्ते चलना चाहिए), और आप और भी successful feel करेंगे. हर एक स्टेप बहुत बहुत छोटा रखिये और आप fail नहीं होंगे. दो महीने बाद , आपके छोटे छोटे कदम आपको बहुत सारी progress और success दिलाएंगे

    13.Read about it daily. रोज़ इसके बारे में पढ़ें

    जब मैं अपना motivation lose करता हूँ , मैं अपने लक्ष्य से सम्बंधित कोई किताब या ब्लॉग पढता हूँ. ये मुझे प्रेरित करता है और मुझे दृढ बनता है. किसी वजह से आप जो कुछ भी पढ़ते हैं वो आपको उस विषय में प्रेरित करता है और आपका ध्यान केन्द्रित करने में मदद करता है. इसलिए अगर आप पढ़ सकते हैं तो रोज़ अपने लक्ष्य के बारे में पढ़िए , खासतौर से तब जब आप motivated ना feel कर रहे हों.

    14.Call for help when your motivation ebbs  जब प्रेरणा कम हो तब मदद मांगिये

    समस्या है? मदद मांगिये. मुझे email करिए. कोई online forum join करिए. अपने लिए कोई partner खोजिये. अपनी माँ को call कीजिये. इससे मतलब नहीं है की सामने वाला कौन है , बस अपनी समस्या बताइए , इस बारे में बात करना आपके लिए helpful होगा. उनकी advice मांगिये . उनसे आपको demotivated state से निकालने के लिए मदद करने के लिए कहिये. ये काम करता है.

    15.Think about the benefits, not the difficulties. फायदों के बारे में सोचिये परेशानियों के बारे में नहीं

    एक common problem है कि हम ये सोचते हैंकि कोई चीज कितनी कठिन है . Exercise करना बहुत कठिन लगता है ! इसके बारे में सोचना ही आपको थका देता है.पर ये सोचना कि बजाये की कोई चीज कितनी कठिन है , ये सोचिये की उसके कितने फायदे हैं.   For Example, ये सोचने की  जगह कि  व्यायाम करना कितना कठिन है;आप ये सोचिये की ये करने के बाद आप कितना अच्छा feel करेंगे, और long run में आप कितने healthier और slimmer होंगे. किसी चीज के फायदे आपको energize कर देंगे.

    16.Squash negative thoughts; replace them with positive ones. नकारात्मक विचारों को त्यागिये और उन्हें सकारात्मक विचारों से बदल दीजिये

    अपने विचारों को monitor करना ज़रूरी है. आप जो negative self-talk करते हैं, जो दरअसल आपको demotivate कर रहा है  उसे पहचानिए. कुछ दिन बस ये जानने में बिताइए कि आपके अन्दर कौन कौन से नकारात्मक विचार हैं, और फिर कुछ दिनों  बाद उन्हें एक bug की तरह अपने अन्दर से निकालिए , और फिर उन्हें corresponding positive thought से replace कर दीजिये . अगर आप सोचते हैं कि ,” ये बहुत कठिन है” तो उसे ” मैं ये कर सकता हूँ” से बदल दीजिये . अगर वो Leo इसे कर सकता है , तो मैं भी! ये कुछ अटपटा सुने देता है , पर ये काम करता है. सचमुच.

    10 जन॰ 2017

    असफलता के बाद सफलता पाने वाले शख्श

    By: Successlocator On: जनवरी 10, 2017
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  • अगर आप असफलता से निराश हो चुके हैं और ऐसा सोच रहे हैं कि सबकुछ यहीं खत्म हो गया तो सफल व्यक्तियों के जीवन के बारे में पढ़ें. आपको पता चलेगा कि आप जिन सफल व्यक्तियों की तरह सफल होना चाहते हैं उन्होंने अपने जीवन में कितनी असफलता देखी और उसके बाद सफल हुए.

    विस्टन चर्चल अपनी ही पार्टी के विचारों से असहमत होकर 1929 से 1939 तक संघर्ष करते रहे.  लेकिन बाद में वे इंग्लैंड के प्रधानमंत्री चुने गए.

    थॉमस एडिसन जिनके नाम सबसे ज्यादा चीजों के आविष्कार करने का रिकॉर्ड है, उनके टीचर उनके बारे में कहा करते थे कि तुम जीवन में कभी भी कुछ भी नहीं सीख सकते क्योंकि तुम बेवकूफ हो.

    ओपरा विनफ्रे ऐसी सेलेब्रिटी हैं जिन्होंने गरीबी से अमीरी तक का सफर तय किया है. टेलीविजन टॉक शो के लिए मशहूर विनफ्रे अपने पहले टेलिविजन जॉब के दौरान ही लैंगिक उत्पीड़न का शिकार हुई थीं.

    वॉल्ट डिज्नी 20वीं शताब्दी के मनोरंजन क्षेत्र में अपने योगदान के लिए प्रसिद्ध हैं, लेकिन उनके न्यूज एडिटर ने उनसे कहा था कि तुम्हारे पास न तो कल्पना करने की क्षमता है और न ही कोई अच्छा आडिया. जिसके बाद डिज्नी के मेहनत का ही कमाल था कि'स्नो व्हाइट' फिल्म ने कई बड़े-बड़े उद्योगपतियों को प्रीमियर से पहले ही पछाड़ दिया था.

    स्टीवन स्पीलबर्ग फिल्म निर्देशन की दुनिया का एक बड़ा नाम है. उन्हें फिल्मी दुनिया में लिंकन जैसी फिल्म के लिए ऑस्कर तक मिल चुका है. उनकी प्रतिभा को यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफॉर्नियां नहीं परख पाई और उन्हें सिनेमा आर्ट्स में एडमिशन के लिए दो बार रिजेक्ट किया गया.


    आर.एच. मैसी ने अपने शुरुआती करियर के दौरान रिटेल कंपनी के क्षेत्र में काफी असफलता झेली लेकिन उनकी कंपनी के पास दुनिया का सबसे बड़ा डिपार्टमेंट स्टोर चेन है.

    सोयचिरो होंडा को जापानी बिजनेस कम्यूनिटी से बहिष्कृत कर दिया गया था, लेकिन बाद होंडा ने जापानी ऑटोमोटिव के क्षेत्र में क्रांति लाकर रख दिया था.

    केएफसी के फूड को अभी हर कोई खाना चाहता है लेकिन किसी समय हारलैंड डेविड सैंडर्स के नॉन-वेज फूड को खरीददार नहीं मिल रहा था. काफी मेहनत के बाद उन्होंने केएफसी का बिजनेस खड़ा किया.

    अमेरिका के पूर्व उपराष्ट्रपति डिक चेनी को येल यूनिवर्सिटी से निकाल दिया गया था बाद में काफी संघर्ष के बाद उन्होंने सफलता पाई.

    विज्ञान की दुनिया में क्रांति लाने वाले न्यूटन की मां ने उन्हें स्कूल भेजना बंद कर दिया था क्योंकि वे एक अच्छे स्टूडेंट नहीं थे.

    वेरा वैंग एक डिजाइनर हैं जिन्होंने अपने शुरुआती दिनों में काफी संघर्ष किया था लेकिन अभी उनका बिजनेस करीब 1 बिलियन डॉलर से भी ज्यादा का है.

    सिडनी पोइटियर हॉलीवुड के सुपरस्टार हैं, लेकिन उन्हें उनके पहले फिल्म के ऑडिशन के दौरान डायलॉग ठीक से नहीं बोल पाने के कारण फिल्म डायरेक्टर ने काफी डांट लगाई और कहा कि एक्टिंग तुम्हारे बस की बात नहीं है.

    अपने थ्योरी से भौतिक विज्ञान को नई दिशा देने वाले आइंस्टीन बचपन में ठीक से लोगों से कम्यूनिकेट तक नहीं कर पाते थे.

    फ्रेड एस्टेयर हॉलीवुड की दुनिया के लीजेंड हैं, लेकिन अपने पहले स्क्रीन टेस्ट के दौरान ही उन्हें यह सुनना पड़ा था कि तुम न गा सकते हो और न अभिनय कर सकते हो

    जे.के. राउलिंग की किताब हैरी पॉटर ने उन्हें अरबपति बना दिया लेकिन उन्होंने अपनी जिंदगी में खराब वक्त भी झेला है.

    चार्ल्स डार्विन को एक औसत दर्जे का स्टूडेंट समझा जाता था, उन्होंने मेडिसिन के क्षेत्र का करियर भी छोड़ दिया था और वे पादरी बनने के लिए स्कूल जाने लगे थे. उनकी थ्योरी ऑन द ओरिजिन ऑफ द स्पीसीज ने प्राकृतिक रहस्यों पर से कई पर्दे को हटाया.

    चित्रकला की दुनिया में वॉन गाग का नाम पूरी दुनिया आज आदर से लेती है लेकिन यह चित्रकार अपने पूरे जीवनकाल के दौरान सिर्फ एक चित्र ही बेच पाया वह भी अपने मरने से कुछ महीने पहले ही.

    इंडियाना जोन्स फिल्म की सफलता ने हैरिसन फोर्ड को फिल्म की दुनिया में स्थापित कर दिया हो लेकिन उनकी पहली फिल्म में किए गए एक्टिंग के बाद एक एग्जीक्यूटीव ने उन्हें अपने ऑफिस बुलाया और कहा कि तुम फिल्मों की दुनिया में कभी सफल नहीं हो सकते हो.

    थियोडोर सिअस गेज़ेल जो डा. सीअस के नाम से मशहूर हैं उन्हें उनकी किताब के प्रकाशन के लिए 27 प्रकाशकों ने रिजेक्ट कर दिया था. उनकी किताब द कैट इन द हैट और ग्रीन एग्ज एंड हैम ने काफी लोकप्रियता दिलाई.

    ल्यूसिली बॉल अपनी बी ग्रेड फिल्मों के कारण क्वीन ऑफ बी मूवीज हो गई थीं, लेकिन उन्होंने अपना संघर्ष जारी रखा और आई लव लूसी में स्टारडम हासिल किया.


    फोर्ड मोटर ने आज दुनिया में तहलका मचा रखा है लेकिन कम लोगों को ही पता होगा कि हेनरी फोर्ड अपनी शुरुआती करियर में ऑटोमोबाइल बिजनेस में असफल रहे थे.
    वैक्यूम क्लिनर उत्पाद आज हर जगह उपयोग किया जा रहा है लेकिन इसे विकसित करने वाले सर जेम्स डायसन को काफी नुकसान उठाना पडा़ था और बाद में उन्हें इस बिजनेस में सफलता मिली.

    वैक्यूम क्लिनर उत्पाद आज हर जगह उपयोग किया जा रहा है लेकिन इसे विकसित करने वाले सर जेम्स डायसन को काफी नुकसान उठाना पडा़ था और बाद में उन्हें इस बिजनेस में सफलता मिली.

    स्टीफन किंग 'कैरी' नॉवेल लिखते वक्त इतनी परेशानी से घि‍रे थे कि उन्होंने लिखे गए सारे ड्राफ्ट को फाड़ दिया था. उन्होंने नॉवेल लिखने की दुनिया में काफी सफलता पाई और उनके नॉवेल की करीब 350 मीलियन कॉपियां अब तक बेची जा चुकी है.

    27 सित॰ 2016

    मार्क्स हि सफलता का पैमाना नहीं, marks hi safalta ka scale nahi. marks hi success ka scale( measure) nahi

    By: Successlocator On: सितंबर 27, 2016
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  • मार्क्स हि सफलता का पैमाना नहीं,  marks hi safalta ka scale nahi.


    marks  hi success ka scale( measure) nahi:





    NOte ::-- परीक्षाओ में  अच्छे अंक लाना  हर स्टूडेंट का पहला  प्रयाश होता है, किन्तु जीवन  में सफल ता का एक मात्र पैमाना नहीं है है. कई बार अच्छे अंक  संयोग के परिणामे भी होता है . इसलिए केवल इस्ससे  हि बेहतर कैरिएर कि  गर्णाति नहीं मिल जाती, बल्क्जी यह बड़ी चुनौती  कि वजह  बन जाते है. तब आपसे ज्ञान कि आपेक्षा  उसी अनुपात में कि जाती है.इसके बिपरीत कम अंक लाना कैरिएर का अंत या ढलान नहीं है.


    • दुनिया में ऐशे महापुरुषों कि फेहरिस्त लम्बी है , जिन्हें स्कूल और कॉलेज कि परीक्षाओ में अच्छे अंक नहीं आये ,जबकि वे क्लास कि अच्छे स्टूडेंट रहे  और उनका बाद का कैरिएर भी शानदार रहा .इसके उलट आनेक ऐशे लोग है,जो परीक्षाओ में अछि अंक लाते रहे  किन्तु व्यबहार और ज्ञान के क्षेत्र में असफल रहे. या कम सफल रहे .पहले श्रेणी के बड़े लोगो में जिनका नाम बरी सहजता से लिए जाते है .,, उनमे महात्मा गाँधी और अलबर्ट आइन्स्टीन के नाम लिए जा सकते है .इसलिए क्लास कि परीक्षा में अछे अंक लाने  के साथ साथ  जीवन और कैरिएर के व्य्बहरिक क्षेत्र भी अच्छे अंक पाने कि योग्यता विकशित करनी चाहिए और अगर क्लास कि परीक्षा में अच्छे अंक  नहीं ला सके , तो भी आप बेहतर कैरिएर पा सकते है. अंको के बारे में इन तथ्यों को समझना चाहिए :;;;
    मार्क्स  आना महज एक संयोग भी 

    • दुनिया के महान गनिताझ  में श्री निवास रामानुजन को गणित कि पहली परीक्षा में मात्र 57% अंक मिले थे . दुश्रे बिषय में भी उनको बहुत हि ख़राब अंक मिला . अगर अंको के हिशाब से बात करे तो इनके इतने बड़े गणितज होने का जरा भी असार नहीं थे ., लेकिन वो गणितज हुए .उनकी अंबक तालिका को देख कर  लोग अब ये आश्चर्य करते है कि . कि अंग्रेजी में 200 में ३८, और संस्कृत में 100 में 34 तथा  गणित में 150 में 85 अंक मिले थे. यही हाल गाँधी जी का  था |

     वे तो रामानुजन से भी एक कदम आगे थे 
    वे आपनी 10 कक्षा  कि परीक्षा में इतिहाश में हि फेल हो गए , जबकि  आज कि वास्तविकता  यह है कि शायद हि कोई इतिहाश कि पुस्तक हो, जिसमे गाँधी जी  का नाम न आता हो. उसी तरह महान व्य्व्शायी धीरू भाई अम्बानी  भी दशवी कि परीक्षाओ में गणित में फेल हो गए थे, लेकिन आपने करोवारि दिमाग से  उन्होंने दुनिया को लोहा मनवा लिया .कहने का मतलब यह कि परीक्षाओ में मिलने वाले अंक किसी कि सफलता का वाश्ताविकता पैमाने नहीं हो सकता  और न हि उसकी बौधिक क्षमता का .

    कम अंक निराश का कारन नहीं 


    कम अंक  आने कि बजह से कई छात्र निराश हो जाते है. कई तो आत्महत्या जैसी खतरनाक कदम भी उठा लेते है.बिन ये जाने कि उनकी जीवन में इशी निराशा में हि उनकी जीवन कि सबसे बड़ी सफलता छुपी हुई है . दुनिया के जितने सफल व्यक्ति हुए जिनका ये मानना रहा कि , जो व्यक्ति जितना जल्दी असफलता का स्वाद चखता है वो उतना हि सफल होता है .. अमेरिका के महान रास्ट्रपति abraham लिंकन  का हि उदहारण ले लीजिये . उनकी असफलता कि सूचि अगर देखोगे तो, फेहरिस्त बहुत लम्बी है लेकिन तब भी वे हार नहीं माने.
     और उन्होंने जो चाह वो बनकर हि दम लिए.

    नयी संभावनाओ कि खोज  

    नयी संभावनाओ कि खोज :;;' --- बिलगेट्स  विश्वविदालय  कि आपनी पहली परीक्षा में हि असफल रहे  थे.उन्हें हार वर्ड  यूनिवर्सिटी  से इसलिए निकाल दिया गया कि वह न्युन्ताम स्कोर  पाने में कामयाब नही रहे.फिर जब जीवन कि परीक्षा माइक्रोसॉफ्ट  के को फाउंडर  पाल एलेन  के साथ एक bussinessman के रूप में शुरू किया , तब भी आपने पहले हि प्रयाश में  उन्हें असफलता मिली ,लेकिन उन्होंने हार नही मानी .नयी संभावनाओं कि तलाश कि  और आपने सॉफ्टवेर  आईडिया को बढाया . इसमें अंतत : सफल रहे.

    रुचि के अनुसार कैरिएर ::-


    ब्रूसली ने कहा था कि ज़िन्दगी में अंको का हमरे लिए कोई मायने नहीं . बस आपको आपने पर बिश्वाश और संतुस्ट होना चाहिए. अनेक बिशेसज्ञ  और बारे काम्लोग मानते है कि परीक्षाओं में अंक अछे आये हो या ख़राब , इस पर समय बर्बाद नहीं करे  . इस पर समय बर्वाद कार्नर के बजाय छात्र को  व्यक्तित्व  और  ज्ञान  बढ़ने पर ध्यान केन्द्रित करे . इसके लिए आपने रूचि के  अनुशार  कैरिएर का चुनाव करे  और उनके अनुरूप  स्वम को बिकसित करे , या हामे करना चाहिए...





    सफलता अंक से नहीं , मनोबाल से.
    इस बात का हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि , सफलता केवल मार्क्स  से नहीं , बल्कि मनोबल से मिलती है. अगर किसी को बहुत अछेव मार्क्स मिले  हो,और उसका मनोबल कम्जूर हो, तो वह कभी सफल नहीं हो सकता है. जबकि कम अंक पाना  छात्र भी ऊँचे मनोबल कि बदौलत जीवन और कैरिएर के क्षेत्र में बड़ी सफलता प्राप्त कर लेता है .इसलिए परीक्षाओ में अच्छे अंक लाने का प्रयास करना  चाहिए , लेकिन इसे कैरिएर कि गारंटी नही  और सफलता का निर्णायक पैमाना नही मानना चाहिए .





    वाही काम करे , जिससे आपको लगाओ हो या प्यार हो.
    • स्टीव जॉब्स एप्पल कंपनी का संस्थापक , इन्होने कहा कि जीवन कभी कभी चोट तो देता है पर आस्था न खोये...
    स्टीव जॉब्स  कि ज़िन्दगी  ने दुनियाभर  में करोरो  लोगो को प्रभावित किया  है. उनके बातचीत करने के ढंग हो या प्रस्तुतिकरन  या फिर किसी भी उत्पाद को देखने और मार्किट  करने का ढंग  हो,सब कुछ बिलकुल अलग सोच लिए होता था .इशी अलग सोच ने उन्हें स्टीव जॉब्स  बनाया .आइये जानते है कि स्टीव जॉब्स कि सफलता  के मूल मंत्र क्या था .



    LIFE IS EASY:


    • वही काम करे जिसे आपको प्यार हो .दुनियाभर में कई लोग ऐशे है , जो एषा काम कर रहे है , जो उन्हें दिल से पसंद नहीं , अगर एषा हो जाए कि जिसे जो काम पसंद है, वाही करे ,तब दुनिया हि बदल जाएँगी 
    • दुनिया को बताओ कि आप कौन है,और दुनिया को बदलना का मादा आप में नही होगा.,तब तक आपको दुनिया नहीं पहचानेगी.
    • आपने जीवनकाल में बिभिन्य विषयो का अध्यन करो .भले वह तुम्हे तुरंत लाभ नही पहुचायेगा ,लेकिन अगर तुम्हारी उसमे जरा भी रूचि है,तो ओ आपकी गुणों को जरा भी जरुर बढ़ाएगा .और एक दिन बड़ा लाभ पहुचायेगा.
    • जिंदगी में मना करना खूब सीखना चाहिए , इसका फायेदा भी मिलता है . मै 1997 में वापस एप्पल में आया था , तब कंपनी का ३५० उत्पाद था .मात्र मैंने कंपनी उत्पादों कि संख्या १० कर दिया , १० उत्पादों पर ध्यान केंद्रीयत किया और सफलता पाई..

    • जब तक आप आपने ग्राहक को अलग तरह कि  अनुभव नहीं देंगे,वे आपके उत्पाद कि तारफ आकर्षित नहीं होंगे बिलकुल नहीं होंगे...

    26 सित॰ 2016

    जिंदगी से जुड़े 10 भ्रम

    By: Successlocator On: सितंबर 26, 2016
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  • जिंदगी से जुड़े 10 भ्रम:

     

    • सफलता का मतलब?: हमें अक्सर लगता है कि सफल व्यक्ति बहुत अमीर होता है। जबकि, सफलता का पैमाना पैसा नहीं है। आप तब सफल होंगे, जब अपने मन का काम करेंगे, न कि पैसा कमाने के लिए काम करेंगे। अगर आपको लिखना अच्छा लगता है तो कभी कुछ दिल से लिखकर देखिए, आपको सफलता और संतुष्टि, दोनों का अहसास मिलेगा :)
    • 4 दिन की जिंदगी को भ्रमों के बीच न जिएं। जितनी जल्दी हो सके, इन भ्रमों से निजात पाएं। क्लिक करके जानिए, कौन से 10 भ्रम आपको जिंदगी को पूरी तरह जीने से रोक रहे हैं...
    • अभी मेहनत करो, फिर जीवन भर आराम: कल किसने देखा है? अभी पढ़ाई की टेंशन है। फिर करियर बनाना है, फिर भविष्य की चिंता... वगैरह, वगैरह। क्या कभी सोचा है कि इस बीच हम जीना तो भूल ही जाते हैं? तो जो आज है, अभी है, उसे जियो।
    • परिश्रम सफलता की कुंजी है: बचपन से यही पढ़ते और सुनते आ रहे हैं। बेशक, परिश्रम का कोई विकल्प नहीं है, लेकिन हार्ड वर्क की जगह अगर स्मार्ट वर्क किया जाए तो आपको सफलता भी मिलेगी और अपने लिए कुछ समय भी :)
    • काश, जिंदगी इतनी उलझी न होती: जिंदगी की उलझनें ही हैं, जो उसे इतना खूबसूरत बनाती हैं, नहीं तो जिंदगी बोरिंग नहीं हो जाएगी। क्योंकि आपको तो फिर सब पता होगा कि अगर आपने ऐसा किया तो कायदे से आपके साथ ऐसा होना चाहिए।
    • आने वाला कल बेहतर होगा: ईमानदारी से कहा जाए तो जिंदगी कभी खुद बेहतर नहीं होती, बल्कि हम खुद को बेहतर बनाकर जिंदगी को बेहतर बनाते हैं।
    • प्यार बहुत जरूरी है: हां, प्यार बहुत जरूरी है, लेकिन किसी और के प्यार से कहीं ज्यादा जरूरी है आपका खुद का प्यार। जब तक आप खुद को प्यार नहीं करेंगे, तब तक आप किसी और से प्यार मिलने की उम्मीद कैसे लगा सकते हैं?
    • जिंदगी एक दौड़ है: हम अक्सर कहते हैं कि हम सब रैट रेस में हैं, और हमारी यह रेस तभी से शुरू हो जाती है, जब हम स्कूल जाना शुरू करते हैं। बेहतर होगा कि इस रेस में किसी और से प्रतिस्पर्धा करने की बजाए खुद से प्रतिस्पर्धा कीजिए, और खुद को दिन पर दिन और बेहतर बनाइए। बाकी सबको उनकी दौड़ पूरी करने दीजिए, और आप अपनी दौड़ को जीकर देखिए।

     

    24 सित॰ 2016

    आदतों से छुटकारा : सफलता की सीढ़ी

    By: Successlocator On: सितंबर 24, 2016
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  • यह पोस्ट मेरे प्रिय ब्लौगर लियो बबौटा की एक पोस्ट का अनुवाद है जिसमें हमेशा की तरह मैंने मामूली फेरबदल किये हैं.
    आपबहुत से लोग अपने जीवन के बहुत से पक्षों में इतना फेरबदल करना चाहते कि उन्हें समझ में ही नहीं आता कि शुरुआत कहाँ से करें.

    यह मुश्किल जान पड़ता है: लोग अपनी जीवन शैली में सुधार लाना चाहते हैं. वे चाहते हैं कि उनकी कुछ आदतें जैसे स्मोकिंग करना और जंक फ़ूड खाना नियंत्रित हो जाएँ, वे बेहतर तरीकों से काम कर सकें, उनके खर्चे सीमा में हों, उनके जीवन में सरलता-सहजता आये, उन्हें परिवार के साथ समय व्यतीत करने को मिले, वे अपने शौक पूरे कर सकें…


    लेकिन शुरुआत कहाँ से करें?

    यह मुश्किल नहीं है – पांच साल पहले मेरी हालत भी ऊपर जैसी ही थी. एक-एक करके मैंने अपनी आदतें बदलीं.:

    * मैंने स्मोकिंग छोडी (और बाद में तो मैंने कई मैराथन दौड़ भी पूरी कीं).
    * स्वास्थ्यकर भोजन अपनाया (अब मैं पूर्णतः शाकाहारी बन गया हूँ).
    * कर्जे से मुक्ति पाई और पैसे बचाए (अब मुझे धनाभाव नहीं है).
    * अपने जीवन को सरल-सहज बनाया.
    * वह काम किया जो मुझे प्रिय है.
    * सुबह जल्दी उठना शुरू किया और रचनात्मकता बढ़ाई.

    यह लिस्ट और भी लंबी हो सकती है. मैं कोई डींगें नहीं हांक रहा हूँ बल्कि यह बताना चाहता हूँ कि यह सब संभव है. यह सब मैंने छः बच्चों के पालन-पोषण के साथ और तीन अलग-अलग तरह के काम करते हुए किया (जिसमें मुझे मेरी पत्नी इवा की भरपूर मदद मिली).


    आप लोगों में से कई मेरे हालात से गुज़र चुके होंगे. मेरे एक पाठक क्रेग ने मुझे बताया:

    • “मानसिक, शारीरिक, और आर्थिक तौर पर पिछले पांच-सात साल मेरे लिए नर्क की तरह रहे हैं. उसके पहले मैं आत्मविश्वास से लबरेज खुशनुमा आदमी था और जो चाहे वह कर सकता था. मुझे नहीं पता कि मेरी ज़िंदगी किस तरह से ढलान पर आ गयी पर अब मैं अपना आत्मविश्वास खो चुका हूँ. मैं तनाव और चिंताओं से बोझिल हूँ. मेरा वजन लगभग 15-20 किलो बढ़ गया है. दिनभर में एक पैकेट सिगरेट फूंक देता हूँ. सच कहूं तो मैं अब खुद को आईने में देखना भी पसंद नहीं करता.”


    आगे वह लिखता है:


    • “रोज़ सबेरे पेट में कुलबुलाहट के साथ ही मेरी नींद खुलती है और मुझे लगता है कि आज का दिन बुरा गुजरेगा. मैं अक्सर देर से सोता हूँ और सुबह उनींदा महसूस करता हूँ. इन मुश्किलों से निबटने के लिए मैंने हर तरह की चीज़ें करके देखीं पर कुछ काम नहीं बना. मैं बस यही चाहता हूँ कि कम-से-कम मेरे दिन की शुरुआत की कुछ बेहतर हो जाए”.

    फिर उसने मुझसे सबसे ज़रूरी प्रश्न पूछा: “आपने अपने जीवन को रूपांतरित करने के लिए 2005 में इतने बड़े बदलाव कैसे कर लिए? आपने सुबह जल्दी उठकर सकारात्मत्कता के साथ अपने दिन की शुरुआत करना कैसे सीखा?”

    वर्ष 2005 में मैं ज़िंदगी के बुरे दौर से गुज़र रहा था और अपने जीवन में इतने सारे बदलाव कर रहा था कि मैं उनमें उलझ कर रह गया. इस सबसे मन में बड़ी गहरी हताशा घर कर रही थी.

    फिर मैंने (इवा से शादी करने के अलावा) अपने जीवन का एक बेहतरीन निर्णय लिया.


    मैंने सिर्फ एक ही आदत का चुनाव किया.

    बाकी आदतें पीछे आतीं रहीं. एक ही आदत को ध्येय बनाकर शुरुआत करने के ये चार परिणाम निकले.

    1. एक आदत को ढाल पाना मेरे बस में रहा. एक आदत विकसित की जा सकती है – 15 आदतों को बदलने का प्रयास करना कठिन है.

    2. इससे मैं एक जगह फोकस कर सका. मैं अपनी समस्त ऊर्जा को एक जगह लगा सका. जब आप बहुत सी आदतें एक-साथ बदलना चाहते हैं तो वे एक-दूसरे में उलझकर आपकी ऊर्जा नष्ट करतीं हैं और आप असफल हो जाते हैं.

    3. इससे मुझे यह भी पता चला कि आदतों को कैसे बदला जाता है – और इस ज्ञान को मैं दूसरी आदतें बदलने में प्रयुक्त कर सका.

    4. इसमें मिली सफलता से मैंने अपनी ऊर्जा और उत्साह को अगली चीज़ हासिल करने में लगाया.

    ऊपर कही गयी बातों में प्रत्येक का बहुत महत्व है. मैं पहली तीन बातों के विस्तार में नहीं जाऊंगा क्योंकि मुझे लगता है कि वे स्वयं अपने बारे में बहुत कुछ कह देतीं हैं. चौथा बिंदु इनमें सर्वाधिक महत्वपूर्ण है और इसपर कुछ चर्चा की जा सकती है (नीचे पढ़ें).

    कौन सी आदत चुनें?

    मैंने सबसे पहले स्मोकिंग छोड़ने के बारे में सोचा क्योंकि मेरे लिए यह सबसे ज्यादा ज़रूरी था. आज पीछे मुड़कर देखने पर लगता है कि इस आदत को बदलना वाकई सबसे ज्यादा कठिन था. मैं सभी को यह सलाह दूंगा कि सबसे पहले उस आदत को बदलने की सोचें जिससे बाहर निकलना सबसे आसान हो.

    लेकिन सच तो यह है कि इस बात का कोई ख़ास महत्व नहीं है. यदि अप अपनी 15 आदतों को बदलना चाहते हों और वे सभी एक समान महत्वपूर्ण हों तो उनमें से किसी का भी चुनाव randomly किया जा सकता है.

    लंबी योजना में इस बात का अधिक महत्व नहीं है कि आपने किस चीज़ से शुरुआत की. आज से पांच साल बाद आप पलटकर देखेंगे तो इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ेगा कि आपने किन आदतों को बदलने से शुरुआत की थी. अभी आपको यह बात ज़रूरी लगती है पर सवाल आपने एक महीने भर का नहीं है – यह आपके पूरे जीवन की बेहतरी के लिए है.

    कोई एक आदत चुन लें. कोई सी भी. कोई आसान सी चुन लें. बात सिर्फ इतनी है कि आप शुरुआत भर कर दें.
    सफलता की सीढ़ियाँ

    एक आदत का चुनाव कर लेने से उसे आधार बनाकर स्वयं में महत्वपूर्ण और दूरगामी परिवर्तन किये जा सकते हैं. यदि आपने इसके बारे में पहले नहीं सोचा है तो यह समय बहुत महत्वपूर्ण है. आपको इस क्षण स्वयं को टटोलना शुरू कर देना चाहिए. आप परिपूर्ण नहीं हैं. यदि आप प्रयास करेंगे तो आप अपने भीतर उन कमियों या खामियों को खोज सकेंगे जिनके निराकरण से आपके जीवन में बेहतर बदलाव आयें.

    90 के दशक में मैंने बिल गेट्स की एक किताब पढ़ी थी जिसमें उसने अपनी ‘सफलता की सीढ़ियों’ के बारे में लिखा है. उसने MS-DOS बनाया और उसकी सफलता को आधार बनाकर MS-Word और फिर विन्डोज़, फिर विन्डोज़ 95, फिर एक्सेल, ऑफिस, इंटरनेट एक्स्प्लोरर… और भी बहुत कुछ (यह क्रम गड़बड़ हो सकता है पर उसकी बात गैरज़रूरी है)

    मैं बिल गेट्स का कोई फैन नहीं हूँ लेकिन उसका परखा और सुझाया गया सिद्धांत न केवल बिजनेस में बल्कि जीवन के किसी भी क्षेत्र में लागू किया जा सकता है और वह यह है कि एक आदत बदलने से मिलनेवाली सफलता से आप शानदार अनुभव करेंगे. आप इससे इतने उत्साह में डूब जायेंगे कि आप फ़ौरन दूसरी आदत से पीछा छुड़ाने की सोचेंगे. यदि शुरुआत में आपने अपना ध्यान केवल एक ही आदत पर केन्द्रित रखा तो आपको आगे और भी सफलता मिलेगी और आप और आगे बढ़ते चले जायेंगे.

    फिर जल्द ही आप शिखर पर होंगे और लोग आपसे पूछेंगे कि आपने यह कैसे किया. तब आप मेरा नाम नहीं लेना पर बिल गेट्स के बारे में ज़रूर बताना क्योंकि उसका अहसान चुकाना बहुत ज़रूरी है:)

    23 सित॰ 2016

    कैसे जीवन में सफल बनें kaise jeevan me safal bane

    By: Successlocator On: सितंबर 23, 2016
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  • आपकी उम्र चाहे जितनी भी हो, आप जहाँ भी रहते हों या जो भी आपके जीवन के लक्ष्य हो, सब का सर्वश्रेष्ठ लक्ष्य अपने जीवन में खुश और सफल होना होता है। अपने बाहरी जीवन (मतलब आपकी परिस्थितियाँ) और अंदरूनी जीवन (मतलब आपका भावात्मक जीवन) दोनों में सफलता पाने के तरीकों को सीखने के लिए इस लेख को पढ़ें।

    बाहरी सफलता प्राप्त करना

    1. अपने जुनून को पहचानें: सफलता पाने से पहले, आपको यह परिभाषित करना होगा कि आपके लिए सफलता का मतलब क्या है। यद्यपि आपको यह समझने में कई साल लग सकते हैं, कि आप अपने जीवन के साथ क्या करना चाहते हैं, परंतु अपने जुनून, चाहत, और मूल्य को पहचान ने से अपने जीवन का लक्ष्य बनाने में, और आपके जीवन को एक अर्थ मिलने में मदद होगी। नीचे दिए गए सवाल अपने आप से पूछें:

    • आप अपनी विरासत में क्या चाहतें हैं?
    • कैसे आप दूसरों के द्वारा याद किए जाना चाहते हैं?
    • कैसे आप अपने समुदाय को एक बेहतर जगह बनाना चाहते हैं?
    • आप अपने जीवन में किस विषय में रुची रखते हैं?

    2. अपने लक्ष्यों की, और उनको प्राप्त करने के लिए आप क्या करेंगे उसकी एक सूची बना लें: ध्यान रहे कि आप अपने सूची में अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों लक्ष्यों का उल्लेख करें; और आर्थिक/व्यवसाय के लक्ष्यों से परे सोचने की कोशिश करें।

    • विचार करें कि स्कूल में आपको कौन से विषय पढ़ने में आनंद आता था और क्यों। इससे आपको यह अंदाज़ा हो जाएगा कि आपके लिए क्या बेहतर है और आप किस में दिलचस्पी रखते हैं।

    3. उद्देश्यपूर्ण जीवन बिताएं: अपने सपनों को साकार करने और वह इंसान बनने के लिए जो आप बनना चाहते हैं, आपको अपने चाल-चलन पर ध्यान देना शुरू करना होगा। अपने आप से पूछें, कि जो मैं कर रहा हूँ, क्या वह मुझे वहाँ ले जाएगा जहाँ मैं जीवन में पहुंचना चाहता हूँ?

    • यदि अपने आप को हमेशा ऊबा हुआ पाते हैं, भूत या भविष्य के बारे में दिन में सपने देखते हैं या दिन खत्म होने का इंतजार करते रहते हैं, तो शायद आप ध्यान लगाकर कार्य नहीं कर रहे हैं। अपने व्यवसाय या अध्ययन के मुख्य विषय को अपने रुची के अनुसार बदलने का विचार करें, परंतु याद रखें, कि आपको ऐसे बदलाव का सामना करना पड़ेगा जिसके बारे में आपने सोचा भी नहीं होगा। क्या उस नौकरी से मिलने वाला वेतन आपके उपजीविका के लिए काफी है? क्या वह ऐसा क्षेत्र है जिससे आप कुछ समय बाद ऊब जाएंगे? क्या मैं सच में वह नौकरी करना चाहता हूँ?
    • अपने समय की कद्र करें। अपने फ्री-टाइम को बरबाद करने के बदले, उस समय में ऐसा कुछ करें जो आपको करना पसंद है। उदाहरण के लिए, अपने सप्ताहांत को टीवी देख कर बिताने के बदले, उस समय को अपने शौक पूरा करने में या अपने परिवार के साथ बिताएं।
    • याद रखें कि ‘समय की बरबादी’ की धारणा तुलनात्मक है। ज़रूरी नहीं जो भी काम आप करें वह औपचारिक तौर पर लाभकारी हो, परंतु वह मज़ेदार और दिलचस्प होना चाहिए।


    4. शिक्षित बनें: शिक्षा से आपको ज्ञान, कुशलता और अपनी अधिकतम क्षमता को प्राप्त करने की विश्वसनीयता मिलती है। आर्थिक सफलता के लिए, आँकड़ों के मुताबिक आप जितना ज़्यादा शिक्षित होते है (मतलब जितनी उच्च डिग्री आप प्राप्त करते हैं), आपकी पैसे कमाने की संभावना उतनी ज्यादा होती है।

    • सन 2013 में, हाई स्कूल ग्रैजुएट का मासिक वेतन लगभग रु15000, जबकि बैचलर डिग्री वालों का मासिक वेतन लगभग रु30000 तक होता था। और इसी वर्ष, अगर आप देखें तो, जिनके पास मास्टर या डॉक्टरेट की डिग्री है, उनका मासिक वेतन रु50000 या उससे ऊपर है।
    • यह जरूरी नहीं है कि सभी शिक्षण फॉर्मल हो। अपनी शिक्षा को उसी क्षेत्र में बढ़ाना (Apprenticeships) और लाँग-टर्म ट्रेनिंग-प्रोग्राम भी सकारात्मक तरीके से उच्च आय में सहयोगी होती हैं।

    5  अपनी आमदनी का प्रबंधन करें: अपने पैसों का प्रबंधन करना सीखने से एक लम्बी अवधी तक वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित की जा सकती है, फिर चाहे आपकी आय जितनी भी हो।

    • अपने खर्चो पर नज़र रखें। अपनी बैंक-स्टेट्मेंट को जाँचते रहे और देखें आप अपना पैसा कहाँ खर्च करते हैं। यदि आप ऑनलाइन बैंकिंग का इस्तेमाल करते हैं तो ध्यान रहे, कि आप अपने पर्सनल-रिकॉर्ड भी रखें। ऐसा करने से आपका फिज़ूल-खर्च कम होगा और साथ ही यह भी पता चलेगा कि आपकी बैंक- स्टेट्मेंट सही है।
    • अपनी आय को समझें। अपनी आय का हिसाब लगाते समय केंद्रीय, राज्य और सामाजिक सुरक्षा कर हिसाब रखना न भूलें क्योंकि यह कर आपकी कुल आय से काटा जाता है। बची रकम आपकी वास्तविक आय होती है जो आपको मिलती है।
    • प्राथमिकता के अनुसार खर्च करें। आपकी बुनियादी आवश्यकताएं जैसे रोटी, कपड़ा और मकान आपके खर्च की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। जब तक आप इन बुनियादी आवश्यकताओं से संतुष्ट नहीं हो जाएंगे, तब तक महंगी गाड़ियों, कपड़ों और छुट्टियों पर खर्च न करें। अपने आप से ईमानदार रहे और अपनी मूल आवश्यकताओं और सुख-साधन में अंतर करना जानें।
    • पैसे बचाएं। हर महीने आपको कुछ पैसे अपने बचत खाते में जमा करने चाहिए। अपने नियोक्ता से कहें कि आपकी आय में से कुछ रकम सीधा आपके बचत खाते में जमा कर दें।

    6. अपने समय का प्रबंधन करें: ज़रूरी कार्य को आखिरी समय तक टालते रहने से आपको बिन बात का तनाव होगा और गलतियाँ होने की संभावना बढ़ेगी। अपने समय का प्रबंधन ऐसे करें ताकि कोई भी काम सही ढंग से करने के लिए आपके पास काफी समय रहें।

    • अपने आपको पूरा दिन, हफ्ते और महीने तक सुनियोजित रखने के लिए कागज़ या इलेक्ट्रानिक प्लानर का इस्तेमाल करें।
    • जो भी कार्य आपको एक दिन में करने हैं, उनकी एक सूची बनाएं और जैसे-जैसे वह काम खत्म होते जाएंगे, वैसे-वैसे उनके सामने सही (राइट) का चिन्ह लगाते रहें। ऐसा करने से आप व्यवस्थित और प्रोत्साहित बने रहेंगे।

    अंदरूनी सफलता प्राप्त करना
    1. मौजूद लम्हों का आनंद लें: यदि आप हमेशा अपने अतीत के बारे में ही सोच रहे हैं या भविष्य के बारे में दिन में सपने देखते हैं, तो आप अपने जीवन के मौजूद लम्हों को खो देंगे। याद रखें कि अतीत और भविष्य केवल एक भ्रम है और वास्तविक जीवन यहाँ और आज है।

    • नकारात्मक विचारों पर ध्यान देना शुरू करें ताकि आप उनसे आसानी से निपट सकें और मौजूद लम्हों का आनंद ले सकें। यदि आपके दिमाग में कोई नकारात्मक विचार आएं तो उन्हें स्वीकार करें, उन्हें नकारात्मक विचार का लेबल करें और फिर उन्हें निकाल दें।
    • अपने आस-पास की छोटी-छोटी चीज़ों पर ध्यान देने की आदत डालें। आपकी त्वचा को छूने वाली सूरज की किरणें, नंगे पांव चलते समय महसूस होती ज़मीन या रेस्तरां में लगी चित्रकारी को सराहें। ऐसी चीज़ों पर ध्यान देने से आप अपने भटकते दिमाग को शान्त कर सकते हैं और हर लम्हे को सराह सकते हैं।


    2. अपने जीवन की तुलना दूसरों के जीवन के साथ न करें: दुर्भाग्य-वश, बहुत से लोग अपनी सफलता की तुलना अपने आस-पास के लोगों की सफलता से करते हैं। यदि आप मुकम्मल और खुश होना चाहते हैं, तो अपने जीवन की तुलना दूसरों के जीवन के साथ करना बंद करें।

    • बहुत से लोग अपने जीवन की विफलता की तुलना दूसरे लोगों के जीवन की सफलता से करते हैं। याद रखें कि दूसरों का जीवन हमें चाहे जितना भी सम्पूर्ण लगे, परंतु हर कोई अपने जीवन में ट्रेजडी, असुरक्षित, और दूसरी कठिनाइयों का सामना करते हैं, जो हमें दिखाई नहीं देता है।
    • अपने जीवन की तुलना अपने से “बेहतर लोगों” से करने के बजाय, उन लोगों के बारे में सोचें जो बेघर हैं, लम्बे समय से बीमार है या जो गरीबी में रह रहे हैं। ऐसा करने से आपको अपने जीवन को कोसने के बजाय, जो आपके पास है उन्हें सराहने में मदद मिलेगी।


    3. अपने जीवन में मिलें सुख का शुक्रिया अदा करें: आपने जीवन में कितना कुछ प्राप्त किया है, इससे आपको कोई फर्क नहीं पड़ता है, और आप हमेशा इस बात को लेकर दुखी होते हैं, जो आपके पास नहीं है। इसके बजाय, आपके पास जो है, उसमें संतुष्ट हो जाएं। भौतिक चीज़ों से परे सोचें, अपने प्रियजनों को सराहें और खुशनुमा लम्हों को याद करें।
    4. अपनी सेहत का ध्यान रखें: शरीर स्वस्थ रहने से, आपका दिल और दिमाग भी स्वस्थ रहते है। संतुलित आहार का सेवन करें, और ध्यान रखें कि आप आवश्यक पोषक तत्वों को नजरंदाज नहीं कर रहे हैं। स्वास्थ्य संबंधित आने वाली समस्याएं, जैसे एनर्जी की कमी या एकाग्रता का अभाव, और उसका इलाज के लिए अपने डाक्टर या न्यूट्रिशनिस्ट या किसी स्वस्थ विशेषज्ञ से मिलें। अच्छे से व्यायाम करें, परंतु व्यायाम जो आपको नापसंद है, उन्हें सिर्फ इसलिए न करें कि वह करने हैं, बल्कि ऐसे व्यायाम करें जो आपके पसंदीदा है।

    खुद को सही वातावरण में ढालें

    1. वातावरण: हमारे आस-पास का वातावरण हम पर और हमारे होश (अवचेतन और अचेतन) पर काफी हद तक असर डालता है। इनमें जिस जगह हम रहते हैं, हमारे दोस्त, जो भी हम पढ़ते हैं, जिन लोगों को हम देखते हैं, ऐसी बहुत सी बातें शामिल है। वातावरण संक्रामक होता है। थॉमस ए. एडिसन ने कहा था कि वह एक सफल आविष्कारक इसलिए बन पाए क्योंकि वह ऐसे लोगों के साथ थे जो उनसे कई ज़्यादा होशियार थे और [१] फिर वह उनसे सीख पाएं। ज्यादातर हम अपनी सोच को[२] वातावरण के अधीन करते है।

    • इस परीक्षण को करने की कोशिश करें। कुछ समय के लिए ऐसे लोगों के साथ मिल जाएं, जो जूआ खेलते हैं, या वह सब करते जिसमें उनकी दिलचस्पी हो, और फिर अपने विचार और भावनाओं को जाँचें करें। संभवतः आपकी सोच उस वातावरण के अधीन हो जाएगी, जिस वातावरण में आप फिलहाल है। क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि जब आप किसी सुंदर झील या सुंदर कुदरती वातावरण में जाते हैं तो आप भी निर्मल और शांत महसूस करने लगते है?

    2. दीर्घ-वातावरण (Macro-Environment): जिस स्थिति में हम सबसे ज़्यादा अपना समय व्यतीत करते हैं वह दीर्घ-वातावरण (Macro-Environment) कहलाता है। जिस जगह पर आप रहते है, जहाँ काम करते है, जिन दोस्तों के साथ सबसे ज़्यादा समय व्यतीत करते है इत्यादि। यह सब दीर्घ-वातावरण के भाग है। सफल बनने के लिए यह बहुत ज़रूरी है कि आप अपने आप को इस वातावरण में ढालें ताकि आप लगातार प्रेरित रहें। इसमें आप भी शामिल है, यदि आप खुद के साथ ज़्यादा समय बिताते हैं, (तो यहाँ आप खुद एक वातावरण है) और यदि आपका दिमाग प्रतिक्रियाशील है तो आपकी सोच भी प्रतिक्रियाशील होगी जब तक आप अपना वातावरण बदल न दें।
    3. सूक्ष्म-वातावरण (Micro-Environment): ऐसी स्थिति जहां हम अपना अधिक समय नहीं बिताते हैं, जैसे, कॉफ़ी-शॉप, वह लोग जिनको आप केवल नमस्ते करते हैं, पंसारी की दुकान, बार में मिलने वाले नए लोग इत्यादि। यह आप पर दीर्घकालीन प्रभाव नहीं डालते हैं, जब तक आप इन्हें दीर्घ-वातावरण में न बदल दें।

    सलाह

    • जिस भी चीज़ से आपको प्रेरणा मिलती है उससे अपने आप को प्रेरित रखें: संगीत, फोटोग्राफी, फैशन इत्यादि। एक सही प्रेरणा आपके कुछ करने की इच्छा को ज़्यादा प्रोत्साहित करेगी।
    • अपने जीवन में सकारात्मक रोल-मॉडल्स होने से आप प्रेरित रहते हैं और आपको वह सही दिशा में जाने के लिए मदद करते हैं। आपके रोल-मॉडल्स आपके जानने वाले हो भी सकते हैं या नहीं भी हो सकते। अपने रोल-मॉडल के जीवन के बारे में जानिए और उनकी जीवन शैली को अपनाने की कोशिश करें।

    चेतावनी

    • दूसरों की उन्नति से ईर्ष्या न करें, बल्कि ऊँची मंज़िलों तक पहुँचने के लिए कड़ा परिश्रम करें।