success लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
success लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

17 सित॰ 2017

भविष्य के बारे में ज्यादा न सोचें जानिए क्यों?

By: Successlocator On: सितंबर 17, 2017
  • Share The Gag

  • एक बार एक देश के राजा ने मुल्ला नसीरूदीन को बुलाया और उस से पूछा कि तुम्हारे बारे में मैंने बहुत सुना है कि तुम बहुत चालाक हो इसलिए क्या तुम एक काम कर सकते हो जो मैं तुमसे कहने वाला हूँ।

    इस पर मुल्ला ने कहा मैं कुछ भी कर सकता हूँ बस आप एक बार आज्ञा दें। इस पर राजा ने कहा क्या तुम अपने इस प्रिय गधे को पढ़ना सिखा सकते हो इस पर मुल्ला ने कहा, हाँ क्यों नहीं मैं इसे आराम से सिखा सकता हूँ | इस पर राजा ने कहा ‘बकवास मत करो ‘ क्या गारंटी है तुम ऐसा कर सकते हो |

    मुल्ला ने जवाब दिया कि एक काम कीजिये आप मुझे पचास हजार स्वर्ण मुद्राएँ दीजिये उसके बाद मैं गारंटी लेता हूँ कि आठ साल के अंदर मैं इस गधे को पढना सिखा सकता हूँ इस पर राजा ने कहा अगर तुम ऐसा कर पाने में सफल नहीं होते हो तो मैं तुम्हे जेल में डाल दूंगा। मुल्ला ने हामी भर ली और वंहा से चला गया।

    घर आने के बाद मुल्ला से उसके एक दोस्त ने कहा ‘ मुल्ला तुमने ये क्या किया ? सब जानते है तुम ऐसा नहीं कर सकते फिर भी तुमने राजा को यह वचन दे दिया है क्या तुम्हे जेल जाने से डर नहीं लगता मुल्ला ने उत्तर दिया तुम इतना ज्यादा मत सोचो।

    क्योंकि आठ साल में तो या तो हमारा राजा नहीं रहेगा और हो सकता है मेरा गधा भी तब तक नहीं रहे लेकिन फिर भी अगर ऐसा होता है कि सात साल तक दोनों में से कोई भी नहीं जाता तो मेरे पास पूरा एक साल है कि मैं सोच सकता हूँ राजा की सज़ा से कैसे बचा जा सकता है।
    सोच ये ना रखें की मुझे रास्ता अच्छा मिले, बल्कि ये होना चाहिए कि मैं जहां पाव रखूं वो रास्ता अच्छा हो जाए. फर्क सिर्फ सोच का होता हैं सकारात्मक या नकारात्मक वरना सीढियां वही होती है जो किसी के लिए ऊपर जाती हैं, और किसी के लिए नीचे आती हैं साधारण और श्रेष्ठ में सिर्फ इतना सा अंतर है की साधारण उसको चुनते है जो आसान है लेकिन श्रेष्ठ उसे चुनता है जो मुश्किल है कोई फर्क नहीं पड़ता की लोग आपके बारे में क्या सोचते है, फर्क तो इससे पड़ता है की आप अपने बारे में क्या सोचते है  सफलता हमेशा अच्छे विचारों से आती हैं और अच्छे विचार अच्छे लोगों के सम्पर्क से आते हैं.

    8 सित॰ 2017

    गुरु दक्षिणा।

    By: Successlocator On: सितंबर 08, 2017
  • Share The Gag

  • एक पहुंचे हुए गुरु अपने चार शिष्यों के साथ रहते थे। शिष्यों को तरह तरह के ज्ञान बताते। एक दिन जब गुरु ने शिष्यों को कहा कि उनकी शिक्षा पूरी हो चुकी है तो वे गुरूजी से गुरुदक्षिणा मांगने का अनुरोध करने लगे।

    पहले तो गुरु ने उनको मना किया कि उन्हें गुरुदक्षिणा देने की कोई जरूरत नहीं है। लेकिन शिष्यों के बार बार अनुरोध करने पर गुरु ने कहा..

    "ठीक है अगर तुम मुझे देना ही चाहते हो तो मुझे ज्यादा कुछ नहीं चाहिए बाद एक टोकरा सुखी पत्तियां मेरे लिए ला दो।"

    शिष्यों ने सोचा कि गुरूजी को इतनी छोटी सी चीज चाहिए जिसको तो वे चुटकियों में ला सकते हैं। उन्होंने ख़ुशी ख़ुशी गुरू से आज्ञा ली और चल पड़े घने जंगल में सुखी पत्तियां ढूंढने।।

    जंगल में जाकर उन्होंने देखा कि वहां तो पेड़ों पर ही पत्तियां थी। कुछेक पत्तियां जमीन पर बिखरी पड़ी थी लेकिन वो तो बहुत थोड़ी सी थी। उनसे एक टोकरी तो क्या एक मुट्ठी भी न भरे। चारों शिष्य बहुत ही दुखी हो गए। सोचने लगे कि जंगल में तो इतनी सारी पत्तियां होनी चाहिए कि घर भर जाए लेकिन यहां तो एक टोकरी भरने को भी पत्तियां नहीं। वहां पास में एक लकड़हारा लकड़ियाँ काट रहा था। शिष्यों के पूछने पर उसने बताया कि सुखी पत्तियां सुबह ही समेट कर अपने घर ले जाकर आग जलाने में उपयोग में ले ली। उसने उन्हें बताया कि आगे एक गाँव है जहां एक व्यापारी सुखी पत्तियां कोई दे सकता है।

    चारों गाँव में गये। व्यापारी ने उन्हें बताया कि उसने तो पत्तियों के पत्तल बना बना कर बेच दिए। अब उसके पास एक भी सुखी पत्ती नहीं थी। चारों अत्यन्त मायूस हो गए। व्यापारी ने उन्हें एक औरत का पता बताया जिसके पास सुखी पत्तियां होने की संभावना थी। पर औरत के पास जाने पर पता चला कि औरत तरह तरह की पत्तियों से दवाइयां बनाती थी और उसके पास आज कोई सुखी पत्ती नहीं थी।

    दुखी होकर चारों गुरु के पास लौटे और सारा हाल कह दिया। उन्होंने बताया कि उन्हें अंदाजा नहीं था कि सुखी पत्तियों का भी इतना प्रयोग किया जाता।



    गुरु ने हंसते हुए कहा,"सुनो तुम सब, यह जो ज्ञान तुम्हें आज मिला है यही मेरी गुरुदक्षिणा है। कभी किसी चीज को छोटा मत समझो। हर छोटी से छोटी चीज बड़े से बड़ा काम कर सकती है। जो काम एक सुई कर सकती है वह काम क्या एक तलवार क्र सकती है भला। तुम्हें यही समझाने के लिए मैने तुम्हें पत्तियां लाने को कहा था। और चूँकि तुम समझ गए हो तुम्हें ज्ञान मिल गया है तो मुझे भी अपनी गुरुदक्षिणा मिल गयी है।"

    18 फ़र॰ 2017

    बिज़नस करने के लिए खुद के पास पैसा होना जरुरी नहीं।

    By: Successlocator On: फ़रवरी 18, 2017
  • Share The Gag

  • दोस्तों,जब भी आप बिज़नस का नाम सुनते है तो आपके मन में सबसे पहले तो यही ख्याल आता है,अम्बानी ,टाटा ,बिरला इत्यादि।उनके सामने हम अपने को आसपास भी नही पाते और सोचते है बिज़नस तो पैसे वाले ही कर सकते है पर हम भूल जाते है कि उनकी शुरुआत छोटे से ही की थी और वो हम जैसे ही थे , अब वे जिन बुलंदियों पर है वह शुरुआत में की गई कड़ी मेहनत का परिणाम है। कुछ मोटीवेट करने वाले लोग मिलते है तब जैसे तैसे आप बिज़नस का प्लान तो बना लेते है फिर आप सोंचते है पैसा तो है नहीं तो बिज़नस कहा से करेंगे ,और यही सोचकर आप अपने अच्छे खासे प्लान को समाप्त कर देते हो।आप सोचते है कि कुछ साल जॉब करके पैसे इकठ्ठा हो जायेंगे फिर बिज़नस करेगे और इस तरह आप फिर से अपनी दिनचर्या में व्यस्त हो जाते है,फिर किसी दिन जॉब से परेशांन होकर या किसी हमउम्र की सफलता देखकर फिर प्लान बनाते है ,उस प्लान का भी वही हाल होता है।

    ये मत समझिये की ये सिर्फ आपकी समस्या है आजकल सबकी यही समस्या है।क्योंकि ये हमें विरासत में मिला है ,हमारे पिताजी,दादाजी,मतलब हमारे परिवार में किसी ने भी बिज़नस के बारे में सोचा ही नही बस इसी वजह से उन्होंने सोचा अपने बच्चों को इंजीनियर या डॉक्टर बना देते है,अच्छी जॉब मिल जायेगी और सेट हो जाएंगे।और इस प्रकार वही विरासत हम अपने बच्चों को भी देते है।अब हमें वो सोच बदलनी है अपने सपनो को पूरा करने के लिए नाकि जॉब करके दुसरो के सपनो को पूरा करने के लिए।
    अब  मैं दोस्तों अपने मुख्य बिंदु पर आता हूं,की
     "बिज़नस करने के लिए खुद के पास पैसा होना जरुरी नहीं"
    है दोस्तों ये सत्य है क्योंकि पुरानी बातें हो गयी की खुद के पास पैसा नही तो व्यापर नही,पर दोस्तों आज का समय कहता है "बिज़नस तो दूसरों के पैसो से होता हे खुद के पैसो से तो इन्वेस्टमेंट होती है"और उसी को बिज़नस मेन कहते है।और वो कैसे वो भी मैं आपको अपनी इस पोस्ट में बताऊंगा।

    पैसा नहीं तो बिज़नस कैसे करे:-
    आजकल आपने सुना होगा की हर बिजनेसमैन अपना बिज़नस सेट करने के लिए खुद के पास पैसे होते हुए भी लोन लेता है,ये सबसे बढ़िया तरीका है बिज़नस करने का जी हा आपने सही पढ़ा लोन,लोन का नाम सुनकर घबराने की जरुरत नहीं है यदि अच्छा बिज़नस प्लान है तो लोन (कर्ज सरकार द्वारा)  लेने में डरना नहीं चाहिए क्योंकि आज कल सरकार बहुत प्रकार की योजनाएं चला रही है जिससे किसी व्यक्ति को बिज़नस में पैसो की समस्या न आये और कम ब्याज दरों में लोगो को लोन मिल पाए।हमें ऐसे ही स्कीमो का फायदा उठाना चाहिए क्योंकि न कर्ज का ज्यादा दबाब और न ही झिक झिक ,सबसे सेफ तरीका है। दूसरा तरीका है अपने प्लान को अपनी ही विचारधार वाले दोस्तों के समक्ष प्रस्तुत करे और उनसे इन्वेस्ट करने को कहे,।
    (पर मैं सबसे बढ़िया आईडिया लोन को ही मानूँगा क्योंकि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना में आपको वगैर गौरेन्टर और वगैर प्रॉपर्टी पेपर शो किये लोन आपके बिज़नस आईडिया बेस पर मिलता है)उसमे कुछ मार्जिन मनी भी रहती है उसे आप अपने बिज़नस के लिए किये हुए कार्यो को शो करके दिखा सकते है या किसी से लोन मिलने तक उधार ले सकते है।
    दोस्तों आपको हमारी पोस्ट कैसी लगी कमेंट में जरूर बताये और कोई भी सवाल कमेंट में पूछ सकते हैं।

    18 जन॰ 2017

    संस्कृत श्लोक -2-sanskrit shlok 2

    By: Successlocator On: जनवरी 18, 2017
  • Share The Gag

  • सत्येन रक्ष्यते धर्मो विद्याऽभ्यासेन रक्ष्यते । मृज्यया रक्ष्यते रुपं कुलं वृत्तेन रक्ष्यते ॥

     भावार्थ :
    धर्म का रक्षण सत्य से, विद्या का अभ्यास से, रुप का सफाई से, और कुल का रक्षण आचरण करने से होता है ।
    सत्येन धार्यते पृथ्वी सत्येन तपते रविः । सत्येन वायवो वान्ति सर्वं सत्ये प्रतिष्ठितम् ॥

     भावार्थ :
    सत्य से पृथ्वी का धारण होता है, सत्य से सूर्य तपता है, सत्य से पवन चलता है । सब सत्य पर आधारित है ।
    नास्ति सत्यसमो धर्मो न सत्याद्विद्यते परम् । न हि तीव्रतरं किञ्चिदनृतादिह विद्यते ॥

     भावार्थ :
    सत्य जैसा अन्य धर्म नहीं । सत्य से पर कुछ नहीं । असत्य से ज्यादा तीव्रतर कुछ नहीं ।
    सत्यमेव व्रतं यस्य दया दीनेषु सर्वदा । कामक्रोधौ वशे यस्य स साधुः – कथ्यते बुधैः ॥

     भावार्थ :
    'केवल सत्य' ऐसा जिसका व्रत है, जो सदा दीन की सेवा करता है, काम-क्रोध जिसके वश में है, उसी को ज्ञानी लोग 'साधु' कहते हैं ।
    सत्यमेव जयते नानृतम् सत्येन पन्था विततो देवयानः । येनाक्रमत् मनुष्यो ह्यात्मकामो यत्र तत् सत्यस्य परं निधानं ॥

     भावार्थ :
    जय सत्य का होता है, असत्य का नहीं । दैवी मार्ग सत्य से फैला हुआ है । जिस मार्ग पे जाने से मनुष्य आत्मकाम बनता है, वही सत्य का परम् धाम है ।
    सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयात् न ब्रूयात् सत्यमप्रियम् । नासत्यं च प्रियं ब्रूयात् एष धर्मः सनातनः ॥

     भावार्थ :
    सत्य और प्रिय बोलना चाहिए; पर अप्रिय सत्य नहीं बोलना और प्रिय असत्य भी नहीं बोलना यह सनातन धर्म है ।
    नानृतात्पातकं किञ्चित् न सत्यात् सुकृतं परम् । विवेकात् न परो बन्धुः इति वेदविदो विदुः ॥

     भावार्थ :
    वेदों के जानकार कहते हैं कि अनृत (असत्य) के अलावा और कोई पातक नहीं; सत्य के अलावा अन्य कोई सुकृत नहीं और विवेक के अलावा अन्य कोई भाई नहीं ।
    अग्निना सिच्यमानोऽपि वृक्षो वृद्धिं न चाप्नुयात् । तथा सत्यं विना धर्मः पुष्टिं नायाति कर्हिचित् ॥

     भावार्थ :
    अग्नि से सींचे हुए वृक्ष की वृद्धि नहीं होती, जैसे सत्य के बिना धर्म पुष्ट नहीं होता ।
    ये वदन्तीह सत्यानि प्राणत्यागेऽप्युपस्थिते । प्रमाणभूता भूतानां दुर्गाण्यतितरन्ति ते ॥

     भावार्थ :
    प्राणत्याग की परिस्थिति में भी जो सत्य बोलता है, वह प्राणियों में प्रमाणभूत है । वह संकट पार कर जाता है ।
    सत्यहीना वृथा पूजा सत्यहीनो वृथा जपः । सत्यहीनं तपो व्यर्थमूषरे वपनं यथा ॥

     भावार्थ :
    उज्जड जमीन में बीज बोना जैसे व्यर्थ है, वैसे बिना सत्य की पूजा, जप और तप भी व्यर्थ है ।
    भूमिः कीर्तिः यशो लक्ष्मीः पुरुषं प्रार्थयन्ति हि । सत्यं समनुवर्तन्ते सत्यमेव भजेत् ततः ॥

     भावार्थ :
    भूमि, कीर्ति, यश और लक्ष्मी, सत्य का अनुसरण करनेवाले पुरुष की प्रार्थना करते हैं । इस लिए सत्य को हि भजना चाहिए ।
    सत्यं स्वर्गस्य सोपानं पारावरस्य नौरिव । न पावनतमं किञ्चित् सत्यादभ्यधिकं क्वचित् ॥

     भावार्थ :
    समंदर के जहाज की तरह, सत्य स्वर्ग का सोपान है । सत्य से ज़ादा पावनकारी और कुछ नहीं ।
    सत्येन पूयते साक्षी धर्मः सत्येन वर्धते । तस्मात् सत्यं हि वक्तव्यं सर्ववर्णेषु साक्षिभिः ॥

     भावार्थ :
    सत्य वचन से साक्षी पावन बनता है, सत्य से धर्म बढता है । इस लिए सभी वर्णो में, साक्षी ने सत्य हि बोलना चाहिए ।
    तस्याग्निर्जलमर्णवः स्थलमरिर्मित्रं सुराः किंकराः कान्तारं नगरं गिरि र्गृहमहिर्माल्यं मृगारि र्मृगः । पातालं बिलमस्त्र मुत्पलदलं व्यालः श्रृगालो विषं पीयुषं विषमं समं च वचनं सत्याञ्चितं वक्ति यः ॥

     भावार्थ :
    जो सत्य वचन बोलता है, उसके लिए अग्नि जल बन जाता है, समंदर जमीन, शत्रु मित्र, देव सेवक, जंगल नगर, पर्वत घर, साँप फूलों की माला, सिंह हिरन, पाताल दर, अस्त्र कमल, शेर लोमडी, झहर अमृत, और विषम सम बन जाते हैं ।

    13 जन॰ 2017

    Andrew Carnegie की कहानी जिसने सफलता की परिभाशा ही बदल दी।

    By: Successlocator On: जनवरी 13, 2017
  • Share The Gag

  • स्वामी विवेकानंद ने कहा है कि दुनिया में तीन तरह के लोग होते हैं –
    1 . ये वो हैं जो समय के साथ खुद को नहीं बदलते और पिछड़ जाते हैं ,
    2. ये वो लोग हैं वो समय के साथ खुद को बदल लेते हैं और आगे बड़ जाते हैं
    3. ये वो लोग हैं जो समय के अनुसार नहीं बदलते बल्कि समय को ही अपने अनुसार बदल देते हैं और इन्हीं को युगपुरुष कहा जाता हैं जो सदियों में एक बार जन्म लेते हैं ।

    Andrew Carnegie ये नाम है उस शख्स का जिसे स्टील टाइकून(स्टील किंग) कहा जाता है । जो अपने धैर्य और परिश्रम की वजह से दुनियां के सबसे अमीर आदमी बने । इनका जन्म एक बहुत ही गरीब परिवार में हुआ था जिनके पास दो वक्त का खाना जुटाने के लिए भी पैसे नहीं थे और केवल एक कमरे का घर था । ये स्कॉटलैंड के रहने वाले थे लेकिन गरीबी और भुखमरी की वजह से ये लोग काम की तलाश में अमेरिका आ गए । घर की दरिद्रता की वजह से ऐन्ड्रू की पढ़ाई भी नहीं हो पायी और 13 साल की छोटी सी उम्र में घर घर का भार सँभालने की जिम्मेदारी कन्धों पे आ गयी ।
    13 साल के ऐन्ड्रू ने एक कपड़े बनाने की फैक्ट्री में छोटी सी नौकरी कर ली जहाँ उसे 12 घंटे और सातों दिन कठिन परिश्रम करना पढता , लेकिन जिस इंसान में लगन होती है वही कोयले से हीरा बनाने का माद्दा रखते हैं । ऐन्ड्रू काम से समय निकाल कर सफल लोगों की कहानियां पढता था उनसे प्रेरणा लेता था । धीरे -धीरे समय बीतता गया , ऐन्ड्रू ने कुछ दिन बाद एक पोस्टमैन की नौकरी भी की । शहर में बड़ी लाइब्रेरी थी जहाँ किताबों का विशाल संकलन था । ऐन्ड्रू वक्त निकाल कर लाइब्रेरी में पढता रहता था । यहाँ उसने कुछ इंटस्ट्री और बिज़निस के बारे में सीखा , नौकरी करते हुए कुछ पैसे इकट्ठे किये और धीरे धीरे स्टील बनाने वाली कम्पनीयों में इन्वेस्ट करने लगे जिससे उन्हें अच्छी इनकम हो जाती थी इसी तरह समय का चक्र चलता गया और फिर ऐन्ड्रू ने एक दिन अपनी खुद की कंपनी बनाने की सोची ।

    यही सोचकर Carnegie Steel Corporation नाम की एक कंपनी की स्थापना की शुरुआत में कंपनी औसत रही लेकिन ये ऐन्ड्रू कार्नेगी की मेहनत और लगन का ही नतीजा था की कुछ ही सालो में ऐन्ड्रू स्टील किंग बन गए और बहुत जल्द उन्हें Builders of America का अवार्ड मिला । एक समय था जब ऐन्ड्रू कार्नेगी की अकेली कंपनी पूरे ब्रिटेन से ज्यादा स्टील उत्पादन करती थी । और इसी लगन ने एक दिन ऐन्ड्रू को बना दिया “दुनिया का सबसे अमीर इंसान “, 1889 में ऐन्ड्रू कार्नेगी को दुनिया का सबसे अमीर इंसान घोषित किया गया ।
    अपनी लगन और परिश्रम से ऐन्ड्रू ने इतिहास को बदल कर रख दिया जिस व्यक्ति का परिवार एक समय भुखमरी से जूझा हो उसके लिए दुनिया का सबसे अमीर आदमी बनना एक मिशाल पेश करने से काम नहीं हैं ।

    तो मित्रों दृंढ निश्चय और मेहनत से पहाड़ो का भी सीना चीरा जा सकता है बस जरुरत है अपने आत्मविश्वाश को जगाने की

    9 जन॰ 2017

    रेलवे की ग्रुप डी की परीक्षा में रहे थे नाकाम, अब आईएएस की परीक्षा में दिखाया जलवा

    By: Successlocator On: जनवरी 09, 2017
  • Share The Gag
  • चाणक्य ने लिखा है कि शिक्षा आपकी बेहतरीन दोस्त है और शिक्षा ही जवानी, सुंदरता और पैसे को हरा सकती है। बहुत पहले पढ़ा चाणक्य का यह कोड अचानक ही आईएएस परीक्षा में टॉप करने वाली इरा सिंघल के घर में याद आ गई। महज 4 फुट 5 इंच की इरा ने अपने फौलादी इरादे और शिक्षा से उन लोगों की मानसिकता को हरा दिया है, जो महिलाओं और खासतौर पर विकलांगता को कमजोरी का प्रतीक मानती हैं। हमारा समाज शिक्षा से ही बदल सकता है। पढ़ाई ही वह कुंजी है, जिससे समाजिक बदलाव के बंद और अंधेरे कमरे खोले जा सकते हैं।

    अरस्तू ने कहा था कि शिक्षा की जड़े बहुत कड़वी लगती हैं, लेकिन उसका फल बहुत मीठा होता है। आईएएस परीक्षा में कामयाब कुछ ऐसे लोगों से भी मैं मिला जो पढ़ाई में बहुत सामान्य हैं, लेकिन मेहनत और सही दिशा ने उन्हें कामयाब बना दिया। दो दोस्तों की एक ऐसी ही कहानी है जो दूर-दराज के गांव और शहरों के छात्रों में प्रेरणा भरने का काम करेगी। इनका नाम सावन कुमार और आदित्य कुमार है। दोनों दिल्ली के एक ही कमरें में रहते थे। एक ही विषय मैथिली साहित्य से तैयारी कर रहे थे। पढ़ाई में दोनों औसत दर्जे के थे। कमोबेश एक जैसे ही पारिवारिक बैकग्राउंड से भी हैं। सावन कुमार के पिता जहां कंडक्टर रह चुके हैं, वहीं आदित्य कुमार के पिता किसान हैं। लेकिन पहले बात सावन कुमार की।

    खगड़िया जिले में हाई स्कूल में 65 फीसदी और इंटरमीडिएट में पचास फीसदी नंबर से पास हुए सावन कुमार ने दिल्ली आकर पढ़ाई में मेहनत की। ध्येय आईएएस इंस्टीट्यूट के विनय सिंह से मार्गदर्शन हासिल किया और अपने दोस्त आदित्य कुमार से हौसला लेकर आईएएस परीक्षा में 285 रैंक हासिल किया।
    सावन कुमार बताते हैं कि 2010 से पहले उन्होंने रेलवे के ग्रुप डी की परीक्षा भी दी, लेकिन उसे पास नहीं कर पाए। तभी आदित्य कुमार ने दिल्ली चलने को कहा। साल 2011 में जब प्रारंभिक परीक्षा नहीं पास कर पाया तो फिर रेलवे की परीक्षा देने की सोची, लेकिन मेरे दोस्त ने हौसला बढ़ाया और आज मैं कामयाब हो गया।

    वहीं बिहार में मधेपुरा के आदित्य कुमार कहते हैं कि हमारी शैक्षिक पृष्ठिभूमि औसत रही है। वह बताते हैं कि इसी के चलते हमारे जैसे छात्रों को संयम और पेशेवर तरीके से पढ़ाई करना बहुत जरूरी है। आदित्य कुमार आईएएस की परीक्षा में दो बार अंग्रेजी के विषय में फेल हो चुके थे, लेकिन उसके बावजूद हिम्मत नहीं हारे। छोटे शहर और गांव के छात्रों की यही कठोर मानसिकता और संघर्ष उनके हौसले के परचम को हमेशा इसी तरह लहराती रहेंगी।

    1 नव॰ 2016

    आप की अदालत फेम रजत शर्मा की सफलता की कहानी Rajat Sharma Success Story in Hindi

    By: Successlocator On: नवंबर 01, 2016
  • Share The Gag

  • मित्रो हम अक्सर महापुरुषो , फ़िल्मी कलाकारो , टीवी कलाकारो ,क्रिकेटरों और नेताओं की जीवनी पढ़ते है लेकिन हमने कभी किसी न्यूज़ एंकर की जीवनी बनी हो ऐसा कभी नही सुना होगा क्योंकि न्यूज़ एंकर आते जाते रहते है लेकिन जो न्यूज़ एंकर सच्चाई के साथ अपना काम करते है वो आने वाले वालो में नही बल्कि हमेशा रहने वालो में रहते है | इन्ही न्यूज़ एंकर में रजत शर्मा एक ऐसा नाम है जिनके शो आप की अदालत को देश की सारी जनता एक साथ देखती है | आप की अदालत की माध्यम से उन्होंने कई कलाकारों ,नेताओ और जानी मानी हस्तियों से वो प्रश्न पूछे जिसे पूछने के लिए लोग इसलिए घबराते थे कि शायद ऐसा शो सफल ना हो सके लेकिन उन्होंने अपनी मुस्कुराहट के बल पर देश की जानी मानी हस्तियों से सब कुछ उगलवा दिया | आइये आपको उन्ही प्रेरणादायक रजत शर्मा की कहानी से आप लोगो को रूबरू करवाते है |
    Rajat Sharma रजत शर्मा का जन्म 18 फरवरी 1957 को दिल्ली में हुआ था | रजत जी बचपन में अपने साथ भाइयो ,  एक बहन , बीमार माँ और पिता के साथ पुरानी दिल्ली में 10×10 के एक छोटे से घर में रहते थे | उस समय उनके घर में बिजली और पानी के व्यवस्था भी नही हुआ करती थी | रजत जी पढने के लिए municipality school जाते थे | रजत जी ने बताया कि उनकी आर्थिक स्तिथि इतनी कमजोर थी कि वो पाउडर का दूध पीते थे जिसे गर्म पानी में डालकर पीते है | नहाने के लिए वो गली के नुक्कड़ पर लगे हुए एक सरकारी नल पर जाते  थे | जब घर में बिजली की व्यवस्था नही हुआ करती थी तो वो पढने के लिए नजदीकी रेलवे स्टेशन के लैंप के नीचे बैठकर पढ़ा करते थे | उस समय में पढने की लगन बहुत कम बच्चो में होती थी और बहुत कम बच्चे ज्यादा पढने  में विश्वास रखते थे लेकिन रजत जी को कुछ कर गुजरने की चाह ने पढाई में लगाये रखा |

    बचपन में उनके जीवन में एक ऐसी घटना हुयी जिसने उनके जीवन को बदलकर रख दिया | 60 के दशक में टीवी सेट कुछ ही घरो में हुआ करते थे | ऐसा मान सकते है कि 100 घरो में एक घर में टीवी हुआ करती थे | रजत जी के पडौसी के पास टीवी हुआ करती थी जहा पर सारा मोहल्ला टीवी देखने के लिए इक्ठटा हो जाता था | उस समय दूरदर्शन पर फिल्मे दो कड़ीयो में आती थी शनिवार को पहला भाग और रविवार को दूसरा भाग आता था  | एक दिन की बात है जब वो आठ साल के थे तब मनोज कुमार की “शहीद” फिल्म का पहला भाग उन्होंने अपने पडौसी के यहा देखा और दुसरे दिन जब फिल्म का दूसरा भाग देखने गये तब उनके पडौसी ने उन्हें अंदर नही आने दिया |

    अब रजत जी रोते हुए अपने घर आये क्योंकि वो फिल्म का आधा भाग नही देख पाए थे और उनके दिमाग में फिल्म के दुसरे भाग की बाते घूम रही थी | जब वो घर लौटे तो उनके पिताजी ने उनके रोने का कारण पूछा तोरजत जी ने बताया “पिताजी मै फिल्म देखने गया , आधी फिल्म कल देख ली थी और आज जब फिल्म का बाकी आधा भाग देखने गये तो उन्होंने दरवाजा बंद कर दिया “|  उस समय उनके पिताजी ने जो बात कही वो उनके दिल को छु गयी , उनके पिताजी ने कहा “बेटा , तुम किसी दुसरे को देखने के लिए तीसरे के घर में टीवी देखने जाते हो अगर दम है तो तुम कुछ ऐसा करके दिखाओ कि जिससे तुम्हे टीवी देखने की जरूरत न पड़े बल्कि टीवी पर तुम्हे लोग देखे ” |

    इसके बाद उन्होंने इस बात को अपने जीवन का उद्देश्य बना दिया और पढ़ाई में लगे रहे | उनके जीवन में पहला मौका तब आया जब उन्होंने M Com पुरी कर ली | M Com पुरी करने के बाद वो समर जॉब की तलाश में घूम रहे थे तभी उनकी मुलाकात जनार्धन ठाकुर से हुयी जिन्होंने उस दौरान आनन्दबाजार पत्रिका छोडी ही थी | आनदं बाजार पत्रिका को आप अच्छी तरह जानते होंगे जो मीडिया में आज बहुत बड़ी कंपनी बनकर उभरा है जिसे हम ABP के नाम से जानते है जिनका न्यूज़ चैनल वर्तमान में चल रहा है |

    जनार्धन ठाकुर उस समय एक नये सिंडिकेटेड कॉलम को शुरू करने की तैयारी कर रहे थे | उन्होंने रजत जी को Researcher के रूप में काम पर रख लिया | करीब तीन महीने तक उन्होंने अपनी गर्मियों की छुट्टियों में उनके साथ काम किया | 1982 में जब एक बार जब उन्होंने अपनी रिसर्च का इस्तेमाल करने की आज्ञा माँगी तब उन्होंने Onlooker magazine में अपनी पहली कहानी लिखी थी | जिसके लिए उनको 300 रूपये मिले थे जो उस समय के लिए बहुत मायने रखते थे | उस समय वो एक जगह जॉब भी कर रहे थे और उनको 400 रूपये महीना मिलता था | जब उनको एक कहानी के ही 300 रूपये मिले तो उनका रुझान मैगज़ीन में काम करने की तरफ चला गया |
    इसके बाद रजत जी ने Onlooker magazine में trainee reporter के रूप में काम करना शुरू कर दिया | 1984 में उनको ब्यूरो का प्रमुख बना दिया गया और उसके बाद उनको 1985 में एडिटर बना दिया गया | इसके बाद रजत जी को मुंबई बुलाया गया जिस समय उनके पास journalism में केवल तीन साल का अनुभव था | जब वहा पर दिग्गज अफसरों ने 28 साल के रजत शर्मा को एडिटर के रूप में देखा तो लोगो ने उन्हें अपनाने से मना कर दियालेकिन बाद में उनके काम को देखकर वो उनसे खुश हुए | उन्होंने उस समय एक दुसरी पत्रिका के साथ मिलकर चंद्रास्वामी पर स्टिंग ऑपरेशन भी किया था |  तीन साल बाद वो एडिटर के रूप में Sunday Observer में काम करने लगे और उसके बाद  The Daily में फिर उन्हें एडिटर का काम मिला |

    Rajat Sharma  रजत जी के जीवन में दूसरा महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब दस साल बाद 1992 में फ्लाइट के सफर में उनकी मुलाकात सुभाष चन्द्र से हुयी | सुभाष जी ने उस समय जी टीवी की शुरुवात की ही थी | जी टीवी भारत का पहला प्राइवेट एंटरटेनमेंट हिंदी चैनल है उससे पहले टीवी में दूरदर्शन के अलावा कोई चैनल नही था | सुभाष की एक दिलचस्प इंटरव्यू कार्यक्रम की तलाश में थे जिसमे वो सेलिब्रिटीज को बुलाकर उनसे सवालात करे | रजत जी उस फ्लाइट में उनको आप की आदालत का रफ़ आईडिया दिया था | इसके बाद कुछ समय तक उनसे मुलाक़ात नही हुयी थी |

    कुछ दिनों बाद सुभाष जी ने Rajat Sharma रजत जी को अपने ऑफिस में बुलाया और कहा “मै तुमको अपने शो का होस्ट बनाना चाहता हु ” | रजत जी को बिलकुल भी विश्वास नही हुआ क्योंकि इससे पहले टीवी पर आने के बारे में उन्होंने सपने में भी नही सोचा था | उनको उस समय लगा कि उनके पिताजी द्वारा कही बात अब सच होने जा रही है | Rajat Sharma रजत जी तुरंत राजी हो गये और 12 फरवरी 1993 को आप की अदालत का पहला शो रिकॉर्ड हुआ था | अब इससे पहले Rajat Sharma रजत जी ने कभी टीवी पर कोई प्रोग्राम नही किया था तो वो इसके लिए रिसर्च काफी कर रहे थे | अब ये तय किया गया कि सुबह 10 बजे से 12 बजे तक रिहर्सल करेंगे और 12:30 बजे पहला प्रोग्राम खुशवंत सिंह के साथ रिकॉर्ड होना था और उसी दिन दूसरा प्रोग्राम लालू यादव का करना तय किया गया था |

    अब उस दिन जब सब तैयारी हो गयी थी तब सुबह 11 बजे लालू यादव का फ़ोन आया कि “शाम को कुछ काम के कारण हम नही आ सकते है इसलिए यदि अभी समय हो तो इंटरव्यू ले लो “| अब रजत जी घबरा गये क्योंकि उस समय तक उन्होंने ज्यादा तैयारी भी नही की थी | उस समय लालू यादव बड़े नेता थे और वो इस इंटरव्यू को मिस नही करना चाहते थे इसलिए रजत जी ने लालू यादव को आने को बोल दिया | अब लालू यादव आ गये लेकिन रजत की इतनी तैयारी नही हो पायी थी इस कारण घबरा रहे थे | अब जब इंटरव्यू शुरू होने लगा तब लालू यादव ने रोकते हुए कहा कि “नया शो है नारियल तो फोड़ो ” | तब कही से नारियल लाया गया और स्टेज के बीच में लालू यादव ने नारियल फोड़ दिया जिससे पानी फर्श पर बिखर गया तब उसे साफ़ करने में तोडा ओर समय लग गया |

    इसके बाद इंटरव्यू शुरू हुआ और सवाल जवाब के बीच पहली रेकॉर्डींग पुरी हो गयी | इंटरव्यू खत्म होने पर रजत जी को चैन की साँस आयी | इसके बाद एक से बढकर एक नेता और कलाकार आप की अदालत में आये जिनको रजत जी ने पसीने ला दिए थे | इस शो की बदौलत आज रजत जी मीडिया की दुनिया में शीर्ष पर पहुच गये | इसके बाद उन्होंने सुभाष जी से बात कर न्यूज़ चैनल शुरू करने की बात की | 1995 में Rajat Sharma रजत जी ने पहला प्राइवेट बुलेटिन जी न्यूज़ पर चालु किया |

    इसके बाद Rajat Sharma के जीवन का तीसरा मोड़ तब आया जब उन्होंने अपने खुद का न्यूज़ चैनल शुरू करने का विचार बनाया जिसको उन्होंने देश के नाम पर इंडिया टीवी रखकर 2004 में लांच किया | इंडिया टीवी शुरूवाट में केवल सीरियस खबरे दिखाता था जिसमे महिला कल्याण या पशु कल्याण जैसे मुद्दे हुआ करते थे | अब उन्होंने इंडिया टीवी न्यूज़ चैनल की शुरुवात तो कर दी लेकिन शुरवात के दो सालो में ही उनके पास पैसो की कमी होने लग गयी थी | उस समय उन्होंने अपनी सारी प्रॉपर्टी बेचकर लोगो की त्नखाव्ह निकाली थी | इसके बाद उनके पास दो विकल्प रह गये थे कि या तो हार मानकर इस चैनल को बंद कर दे या कुछ बदलाव करे |

    2008 में उन्होंने अपने न्यूज़ चैनल में बदलाव करना शुरू किया और गम्भीर मुद्दों के अलावा लोकप्रिय खबरे भी दिखाना शुरू कर दिया | अब धीर धीरे चैनल की लोकप्रियता बढ़ने लगी थी और आठ महीनों में वो देश का दूसरा सबसे बड़ा न्यूज़ चैनल बन गया | अब उनके पास पैसो की भी कोई कमी नही रही | जब 2009 में इंडिया टीवी शिखर पर पहुच गया तब उन्होंने फिर गम्भीर मुद्दों पर न्यूज़ देना शुरू कर दिया जिसे लोगो ने अपना लिया | Rajat Sharma रजत जी ने जी टीवी से अपने नाटक आप की अदालत को इंडिया टीवी पर शिफ्ट कर लिया जो हर शनिवार को रात 10 बजे प्रसारित होता है जिसमे देश की जानी मानी हस्तिया आती है | 2015 में रजत शर्मा Rajat Sharma  को साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में अपूर्व योगदान के लिए भारत सरकार की तरफ से पद्म भूषण से भी सम्मानित किया गया |

    26 सित॰ 2016

    कुछ सवालों के जवाब से जानें क्या है आप की सफलता

    By: Successlocator On: सितंबर 26, 2016
  • Share The Gag
  • सफलता का अर्थ  असफलता नहीं , संभावनाओं का अंत है:

    Image result for self confidence
    हम  अक्सर सोचते है कि  सफलता हमारी किस्मत से मिलती है , हा , लेकिन ऐसा कुछ नहीं है . सफलता  का मतलब  आपने द्वारा  तय कि गयी लक्ष को पाना है | पर विजय पाना , हर दिन आपने आप में निखर लाना , जिस दिन आप आपने सपनो के तरफ बढ़ना चोर देंगे , उस दिन आपका  कुछ पाने कि चाहत ख़त्म हो जाएगी.

     आज कल हर कोई सफ्फलता के पीछे भागता दिखाई देता है . माना जाता है कि  या तो आप सफल होंगे या असफल होंगे . कुछ लोगो के लिए सफलता और खुसी के मायेने लीक से हट कर होते है . ऐसे लोग ज़माने कि राइट रचे में सामिल नहीं होते  है.


    सफलता क्या है.? 

     सबसे बरी बात यह कि  सफलता कि परिभाषा  हर इनसान के लिए अलग अलग अलग है 
    कुछ लोगो का मानना है कि बरी कंपनी कि सीईओ  बनाना उनकी सफलता है . कुछ लोग मानते है कि उनके लिए स्प्रिचुअल  होना हि सफल होना  के बराबर है .  कुल मिला कर  सफलता का मतलब होता है , उस चीज को पन , जिसे आप पाने कि लम्बे  समय से कोशिस करते आये है या पाने के सपने देखते  आये है.


     सफलता के उल्टा क्या है ?

     Image result for self confidence

    सफलता के मने समझने के बाद बारी आती है , सफलता के उल्टा के जानने  कि  सीधे  भाषा में लोग इसे असफलता कहेंगे  और यही पर वह पूरी तरह से गलत होंगे . सफलता का उल्टा असफलता नही होता है.  किसी सफल व्यक्ति से पुच कर देखो वह व्ही कहेगा कि हर सफल क्यक्ति पाहले असफल हुआ है .
     आप सायेद जानते भी होंगे कि बल्व  बनाने से पहले थौमस एडिसन को बहुत बार असफलता हाँथ लगी थी  हेरी पातर  को लेखिका को भी कई प्रकाशको ने असफल  कहा था . 
     आप स्टीव जॉब्स के बारे में भी जानते होंगे, उनोहोने भी असफल हुए , हां लेकिन उनकी असफलता उन्हें रोक नही सकी .एडिसन ने हमें बल्व समेत कई चीजे दी. जे के  रोलिंग ने हमें हैरी पातर दिया , और स्टीव ने एप्पल दिया  , इन लोगो का सफलता को देखते हुआ , सफलता के उल्टा असफलता कहना ठीक नही है., 


    सफलता का उल्टा हार 

     सवाल व्ही का व्ही  रह गया कि  सफलता का उल्टा क्या हो सकता है , ? इजी भाषा में कहे तो सफलता का उल्टा हार मान लेना है. छोरना होता है..
    इसके लिए अंग्रेगी में एक वर्ड है .क्विटिंग. सुनने में अजीव लग सकता है . हा लेकिन सफलता का उल्टा यही है..
    अगर एडिसन ,जेके रोलिंग  और  स्टीव आगर हार मन लिए होते तो  आज हमारे पास न वल्व होता , न हैरी पॉटर होता , और न एप्पल होता .


    यह जाने कि मायेने 

    सफलता के उल्टा शब्द के जानने के बाद  इसके मायेने को समझने कि जरुरत है ,
    हम सोचते है कि सफलता किस्मत से मिलती है , लेकिन ऐसा कुछ भी नही है. सफलता का मतलब है , आपने द्वारा तय पर विजय लक्ष्य पन  और हर दिन आपने में निखर लाना , जिस दिन आप  सपने कि तरफ बढ़ना चोर देंगे , उ दिन आप में कुछ पाने कि चाहत हि ख़त्म हो जाएँगी. 

    अब आप समझ सकते है कि आपकी लाइफ   कहा जा कर THE END हो जाती है .


    23 सित॰ 2016

    कैसे डालें सुबह जल्दी उठने की आदत

    By: Successlocator On: सितंबर 23, 2016
  • Share The Gag






  • कैसे डालें सुबह जल्दी उठने की आदत


     to bed and early to rise makes a man healthy wealthy and wise
     Hi friends,
    हममें से ज्यादातर लोगों ने कभी ना कभी ये कोशिश ज़रूर की होगी कि रोज़ सुबह जल्दी उठा जाये. हो सकता है कि आपमें से कुछ लोग कामयाब भी हुए हों, पर अगर majority की बात की जाये तो वो ऐसी आदत डालने में सफल नहीं हो पाते. लेकिन आज जो article  मैं आपसे share कर रहा हूँ इस पढने के बाद आपकी सफलता की  probability निश्चित रूप से बढ़ जाएगी. यह article इस विषय पर दुनिया में सबसे ज्यादा पढ़े गए लेखों में से एक का Hindi Translation है. इसे Mr. Steve Pavlina ने लिखा है . इसका  title है “How to become an early riser.“.
    तो आइये जानें कि हम कैसे डाल सकते हैं सुबह जल्दी उठने की आदत.

     कैसे डालें सुबह जल्दी उठने की आदत?

    It is well to be up before daybreak, for such habits contribute to health, wealth, and wisdom.
       -Aristotle
    सूर्योदय  होने  से  पहले  उठाना  अच्छा  होता  है , ऐसी  आदत  आपको  स्वस्थ , समृद्ध  और  बुद्धिमान  बनती  है .
     सुबह  उठने  वाले  लोग  पैदाईशी  ऐसे  होते  हैं  या   ऐसा  बना  जा  सकता  है ? मेरे  case में  तो  निश्चित  रूप  से  मैं  ऐसा  बना  हूँ . जब  मैं  बीस  एक  साल  का  था  तब  शायद  ही  कभी  midnight से  पहले  बिस्तर  पे  जाता  था . और  मैं  लगभग  हमेशा  ही  देर  से  सोता  था. और  अक्सर  मेरी  गतिविधियाँ  दोपहर  से  शुरू  होती  थीं .
    पर  कुछ  समय  बाद  मैं  सुबह  उठने  और  successful  होने  के  बीच  के  गहरे  सम्बन्ध  को  ignore नहीं  कर  पाया , अपनी  life में  भी . उन  गिने  – चुने  अवसरों  पर  जब  भी   मैं  जल्दी  उठा  हूँ  तो  मैंने  पाया  है  कि  मेरी  productivity लगभग  हमेशा  ही  ज्यादा  रही  है , सिर्फ  सुबह  के  वक़्त  ही  नहीं  बल्कि  पूरे  दिन . और  मुझे  खुद अच्छा  होने  का  एहसास  भी  हुआ  है . तो  एक  proactive goal-achiever होने  के  नाते  मैंने सुबह  उठने  की  आदत  डालने  का  फैसला  किया . मैंने  अपनी  alarm clock 5 am पर  सेट  कर  दी …
    — और  अगली  सुबह  मैं  दोपहर  से  just पहले  उठा .
    ह्म्म्म…………
    मैंने  फिर  कई  बार  कोशिश  की , पर  कुछ  फायदा  नहीं  हुआ .मुझे  लगा  कि  शायद  मैं  सुबह  उठने  वाली  gene के  बिना  ही  पैदा  हुआ  हूँ . जब  भी  मेरा  alarm बजता  तो  मेरे  मन  में  पहला  ख्याल  यह  आता  कि  मैं  उस  शोर  को  बंद  करूँ  और  सोने  चला  जून . कई  सालों  तक  मैं  ऐसा  ही  करता  रहा , पर  एक  दिन  मेरे  हाथ  एक  sleep research लगी  जिससे  मैंने  जाना  कि  मैं  इस  problem को  गलत  तरीके  से  solve कर  रहा  था . और  जब  मैंने  ये  ideas apply   कीं  तो  मैं  निरंतर  सुबह   उठने  में  कामयाब  होने  लगा .
    गलत  strategy के  साथ  सुबह  उठने  की  आदत  डालना  मुश्किल  है  पर  सही  strategy के  साथ  ऐसा  करना  अपेक्षाकृत  आसान  है .
    सबसे  common गलत  strategy है  कि  आप  यह  सोचते  हैं  कि  यदि  सुबह  जल्दी  उठाना  है  तो  बिस्तर  पर  जल्दी  जाना  सही  रहेगा . तो  आप  देखते  हैं  कि  आप  कितने  घंटे  की  नीद  लेते  हैं , और  फिर  सभी  चीजों  को  कुछ  गहनते  पहले  खिसका  देते  हैं . यदि  आप  अभी  midnight से  सुबह  8 बजे  तक  सोते  हैं  तो  अब  आप  decide करते  हैं  कि  10pm पर  सोने  जायेंगे  और  6am पर  उठेंगे .  सुनने  में  तर्कसंगत  लगता  है  पर  ज्यदातर  ये  तरीका  काम  नहीं  करता .
    ऐसा  लगता  है  कि  sleep patterns को  ले  के  दो  विचारधाराएं हैं . एक  है  कि  आप  हर  रोज़  एक  ही  वक़्त  पर  सोइए  और  उठिए . ये  ऐसा  है  जैसे  कि  दोनों  तरफ  alarm clock लगी  हो —आप  हर  रात  उतने  ही  घंटे  सोने  का  प्रयास  करते  हैं . आधुनिक  समाज  में  जीने  के  लिए  यह  व्यवहारिक  लगता  है . हमें  अपनी  योजना  का  सही  अनुमान  होना  चाहिए . और  हमें  पर्याप्त  आराम  भी  चाहिए .
    दूसरी  विचारधारा  कहती  है  कि  आप  अपने  शरीर  की  ज़रुरत  को  सुनिए  और  जब  आप  थक  जायें  तो  सोने  चले  जाइये  और  तब  उठिए  जब  naturally आपकी  नीद  टूटे . इस  approach की  जड़  biology में  है . हमारे  शरीर  को  पता  होना  चाहिए  कि  हमें  कितना  rest चाहिए , इसलिए  हमें  उसे  सुनना  चाहिए .
    Trial and error से  मुझे  पता  चला  कि  दोनों  ही  तरीके  पूरी  तरह  से  उचित  sleep patterns नहीं  देते . अगर  आप  productivity की  चिंता  करते  हैं  तो  दोनों  ही  तरीके  गलत  हैं . ये  हैं  उसके  कारण :
    यदि  आप  निश्चित  समय  पे  सोते  हैं  तो  कभी -कभी  आप  तब  सोने  चले  जायेंगे  जब  आपको  बहुत  नीद  ना  आ  रही  हो . यदि  आपको  सोने  में  5 मिनट  से  ज्यादा  लग रहे  हों  तो  इसका  मतलब  है  कि  आपको  अभी  ठीक  से  नीद  नहीं  आ  रही  है . आप  बिस्तर  पर  लेटे -लेटे अपना  समय  बर्वाद  कर  रहे  हैं ; सो  नहीं  रहे  हैं . एक  और  problem ये  है  कि  आप  सोचते  हैं  कि  आपको  हर  रोज़  उठने  ही  घंटे  की  नीद  चाहिए , जो  कि  गलत  है . आपको  हर  दिन  एक  बराबर  नीद  की  ज़रुरत  नहीं  होती .
    यदि  आप  उतना  सोते  हैं  जितना  की  आपकी  body आपसे  कहती  है  तो  शायद  आपको  जितना  सोना  चाहिए  उससे  ज्यादा  सोएंगे —कई  cases में  कहीं  ज्यादा , हर  हफ्ते  10-15 घंटे  ज्यदा ( एक  पूरे  waking-day के  बराबर ) ज्यादातर  लोग  जो  ऐसे  सोते  हैं  वो  हर  दिन  8+ hrs सोते  हैं , जो  आमतौर  पर  बहुत  ज्यादा  है . और  यदि  आप  रोज़  अलग -अलग  समय  पर  उठ  रहे  हैं  तो  आप  सुबह  की  planning सही  से  नहीं  कर  पाएंगे . और  चूँकि  कभी -कभार  हमारी  natural rhythm घडी से  मैच  नहीं  करती  तो  आप  पायंगे  कि  आपका  सोने  का  समय  आगे  बढ़ता  जा   रहा  है .
    मेरे  लिए  दोनों  approaches को  combine करना  कारगर  साबित  हुआ . ये  बहुत  आसान  है , और  बहुत  से  लोग  जो  सुबह  जल्दी  उठते  हैं , वो  बिना  जाने  ही  ऐसा  करते  हैं , पर  मेरे  लिए  तो  यह  एक  mental-breakthrough था . Solution ये  था  की  बिस्तर  पर  तब  जाओ  जब  नीद  आ  रही  हो  ( तभी  जब  नीद  आ  रही  हो ) और  एक  निश्चित  समय  पर  उठो ( हफ्ते  के  सातों  दिन ). इसलिए  मैं  हर  रोज़  एक  ही  समय  पर  उठता  हूँ ( in my case 5 am) पर  मैं  हर  रोज़  अलग -अलग  समय  पर  सोने  जाता  हूँ .
    मैं  बिस्तर  पर  तब  जाता  हूँ  जब  मुझे  बहुत  तेज  नीद  आ  रही  हो . मेरा  sleepiness test ये  है  कि  यदि  मैं  कोई  किताब  बिना  ऊँघे  एक -दो  पन्ने  नहीं  पढ़  पाता  हूँ  तो  इसका  मतलब  है  कि  मै  बिस्तर  पर  जाने  के  लिए  तैयार  हूँ .ज्यादातर  मैं  बिस्तर  पे  जाने  के  3 मिनट  के  अन्दर  सो  जाता  हूँ . मैं  आराम  से  लेटता  हूँ  और  मुझे  तुरंत  ही  नीद  आ  जाति  है .  कभी  कभार  मैं  9:30 पे  सोने  चला  जाता  हूँ  और  कई  बार  midnight   तक  जगा  रहता  हूँ . अधिकतर  मैं  10 – 11 pm के  बीच  सोने चला  जाता  हूँ .अगर  मुझे   नीद  नहीं   आ  रही  होती  तो  मैं  तब  तक  जगा  रहता  हूँ  जब  तक  मेरी  आँखें  बंद  ना  होने  लगे . इस  वक़्त  पढना  एक  बहुत  ही  अच्छी activity है , क्योंकि  यह  जानना  आसान  होता  है  कि  अभी  और  पढना  चाहिए  या  अब  सो  जाना  चाहिए .
    जब  हर  दिन  मेरा  alarm बजता  है  तो  पहले  मैं  उसे  बंद  करता  हूँ , कुछ  सेकंड्स  तक  stretch करता  हूँ , और  उठ  कर  बैठ  जाता  हूँ . मैं  इसके  बारे  में  सोचता  नहीं . मैंने  ये  सीखा  है  कि  मैं  उठने  में  जितनी  देर  लगाऊंगा ,उतना  अधिक  chance है  कि  मैं  फिर  से  सोने  की  कोशिश  करूँगा .इसलिए  एक  बार  alarm बंद  हो  जाने के  बाद  मैं  अपने  दिमाग  में  ये  वार्तालाप  नहीं  होने  देता  कि  और  देर  तक  सोने  के  क्या  फायदे  हैं . यदि  मैं  सोना  भी  चाहता  हूँ , तो  भी  मैं  तुरंत  उठ  जाता  हूँ .
    इस  approach को  कुछ  दिन  तक  use करने  के  बाद  मैंने  पाया  कि  मेरे  sleep patterns एक  natural rhythm में  सेट  हो  गए  हैं . अगर  किसी  रात  मुझे  बहुत  कम  नीद  मिलती  तो  अगली  रात  अपने  आप  ही  मुझे  जल्दी  नीद  आ  जाती  और  मैं  ज्यदा  सोता . और  जब  मुझमे  खूब  energy होती  और  मैं  थका  नहीं  होता  तो  कम  सोता . मेरी  बॉडी  ने  ये  समझ  लिया  कि  कब  मुझे  सोने  के  लिए  भेजना  है  क्योंकि  उसे  पता  है  कि  मैं  हमेशा  उसी  वक़्त  पे  उठूँगा  और  उसमे  कोई  समझौता नहीं  किया  जा  सकता .
    इसका  एक  असर ये हुआ कि  मैं  अब  हर  रात  लगभग  90 मिनट  कम  सोता  ,पर  मुझे  feel होता  कि  मैंने  पहले  से ज्यादा  रेस्ट  लिया  है . मैं  अब  जितनी  देर  तक  बिस्तर  पर  होता  करीब  उतने  देर  तक  सो  रहा  होता .
    मैंने  पढ़ा  है  कि  ज्यादातर  अनिद्रा  रोगी  वो  लोग  होते  हैं  जो  नीद  आने  से  पहले  ही  बिस्तर  पर  चले  जाते  हैं . यदि  आपको  नीद  ना  आ  रही  हो  और  ऐसा  लगता  हो  कि  आपको  जल्द ही  नीद  नहीं  आ  जाएगी  , तो  उठ  जाइये  और  कुछ  देर  तक  जगे  रहिये . नीद  को  तब  तक  रोकिये  जब  तक  आपकी  body ऐसे  hormones ना  छोड़ने  लगे  जिससे आपको नीद ना आ जाये.अगर  आप  तभी  bed पे  जाएँ  जब  आपको  नीद  आ  रही  हो  और  एक  निश्चित  समय  उठें  तो  आप  insomnia का  इलाज  कर  पाएंगे .पहली  रात  आप  देर  तक  जागेंगे  , पर  बिस्तर  पर  जाते  ही  आपको  नीद  आ  जाएगी . .पहले  दिन  आप  थके  हुए  हो  सकते  हैं  क्योंकि  आप  देर  से  सोये  और  बहुत  जल्दी  उठ  गए , पर  आप  पूरे  दिन  काम  करते  रहेंगे  और  दूसरी  रात  जल्दी  सोने  चले  जायेंगे .कुछ  दिनों  बाद  आप  एक  ऐसे  pattern में  settle हो  जायेंगे  जिसमे  आप  लगभग  एक  ही  समय  बिस्तर  पर  जायंगे  और  तुरंत  सो  जायंगे .
    इसलिए   यदि  आप  जल्दी  उठाना  चाहते  हों  तो  ( या  अपने  sleep pattern को  control करना  चाहते  हों ), तो  इस  try करिए :  सोने  तभी  जाइये  जब  आपको  सच -मुच  बहुत  नीद  आ रही  हो  और  हर  दिन  एक  निश्चित  समय  पर  उठिए .

    कैसे जीवन में सफल बनें kaise jeevan me safal bane

    By: Successlocator On: सितंबर 23, 2016
  • Share The Gag
  • आपकी उम्र चाहे जितनी भी हो, आप जहाँ भी रहते हों या जो भी आपके जीवन के लक्ष्य हो, सब का सर्वश्रेष्ठ लक्ष्य अपने जीवन में खुश और सफल होना होता है। अपने बाहरी जीवन (मतलब आपकी परिस्थितियाँ) और अंदरूनी जीवन (मतलब आपका भावात्मक जीवन) दोनों में सफलता पाने के तरीकों को सीखने के लिए इस लेख को पढ़ें।

    बाहरी सफलता प्राप्त करना

    1. अपने जुनून को पहचानें: सफलता पाने से पहले, आपको यह परिभाषित करना होगा कि आपके लिए सफलता का मतलब क्या है। यद्यपि आपको यह समझने में कई साल लग सकते हैं, कि आप अपने जीवन के साथ क्या करना चाहते हैं, परंतु अपने जुनून, चाहत, और मूल्य को पहचान ने से अपने जीवन का लक्ष्य बनाने में, और आपके जीवन को एक अर्थ मिलने में मदद होगी। नीचे दिए गए सवाल अपने आप से पूछें:

    • आप अपनी विरासत में क्या चाहतें हैं?
    • कैसे आप दूसरों के द्वारा याद किए जाना चाहते हैं?
    • कैसे आप अपने समुदाय को एक बेहतर जगह बनाना चाहते हैं?
    • आप अपने जीवन में किस विषय में रुची रखते हैं?

    2. अपने लक्ष्यों की, और उनको प्राप्त करने के लिए आप क्या करेंगे उसकी एक सूची बना लें: ध्यान रहे कि आप अपने सूची में अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों लक्ष्यों का उल्लेख करें; और आर्थिक/व्यवसाय के लक्ष्यों से परे सोचने की कोशिश करें।

    • विचार करें कि स्कूल में आपको कौन से विषय पढ़ने में आनंद आता था और क्यों। इससे आपको यह अंदाज़ा हो जाएगा कि आपके लिए क्या बेहतर है और आप किस में दिलचस्पी रखते हैं।

    3. उद्देश्यपूर्ण जीवन बिताएं: अपने सपनों को साकार करने और वह इंसान बनने के लिए जो आप बनना चाहते हैं, आपको अपने चाल-चलन पर ध्यान देना शुरू करना होगा। अपने आप से पूछें, कि जो मैं कर रहा हूँ, क्या वह मुझे वहाँ ले जाएगा जहाँ मैं जीवन में पहुंचना चाहता हूँ?

    • यदि अपने आप को हमेशा ऊबा हुआ पाते हैं, भूत या भविष्य के बारे में दिन में सपने देखते हैं या दिन खत्म होने का इंतजार करते रहते हैं, तो शायद आप ध्यान लगाकर कार्य नहीं कर रहे हैं। अपने व्यवसाय या अध्ययन के मुख्य विषय को अपने रुची के अनुसार बदलने का विचार करें, परंतु याद रखें, कि आपको ऐसे बदलाव का सामना करना पड़ेगा जिसके बारे में आपने सोचा भी नहीं होगा। क्या उस नौकरी से मिलने वाला वेतन आपके उपजीविका के लिए काफी है? क्या वह ऐसा क्षेत्र है जिससे आप कुछ समय बाद ऊब जाएंगे? क्या मैं सच में वह नौकरी करना चाहता हूँ?
    • अपने समय की कद्र करें। अपने फ्री-टाइम को बरबाद करने के बदले, उस समय में ऐसा कुछ करें जो आपको करना पसंद है। उदाहरण के लिए, अपने सप्ताहांत को टीवी देख कर बिताने के बदले, उस समय को अपने शौक पूरा करने में या अपने परिवार के साथ बिताएं।
    • याद रखें कि ‘समय की बरबादी’ की धारणा तुलनात्मक है। ज़रूरी नहीं जो भी काम आप करें वह औपचारिक तौर पर लाभकारी हो, परंतु वह मज़ेदार और दिलचस्प होना चाहिए।


    4. शिक्षित बनें: शिक्षा से आपको ज्ञान, कुशलता और अपनी अधिकतम क्षमता को प्राप्त करने की विश्वसनीयता मिलती है। आर्थिक सफलता के लिए, आँकड़ों के मुताबिक आप जितना ज़्यादा शिक्षित होते है (मतलब जितनी उच्च डिग्री आप प्राप्त करते हैं), आपकी पैसे कमाने की संभावना उतनी ज्यादा होती है।

    • सन 2013 में, हाई स्कूल ग्रैजुएट का मासिक वेतन लगभग रु15000, जबकि बैचलर डिग्री वालों का मासिक वेतन लगभग रु30000 तक होता था। और इसी वर्ष, अगर आप देखें तो, जिनके पास मास्टर या डॉक्टरेट की डिग्री है, उनका मासिक वेतन रु50000 या उससे ऊपर है।
    • यह जरूरी नहीं है कि सभी शिक्षण फॉर्मल हो। अपनी शिक्षा को उसी क्षेत्र में बढ़ाना (Apprenticeships) और लाँग-टर्म ट्रेनिंग-प्रोग्राम भी सकारात्मक तरीके से उच्च आय में सहयोगी होती हैं।

    5  अपनी आमदनी का प्रबंधन करें: अपने पैसों का प्रबंधन करना सीखने से एक लम्बी अवधी तक वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित की जा सकती है, फिर चाहे आपकी आय जितनी भी हो।

    • अपने खर्चो पर नज़र रखें। अपनी बैंक-स्टेट्मेंट को जाँचते रहे और देखें आप अपना पैसा कहाँ खर्च करते हैं। यदि आप ऑनलाइन बैंकिंग का इस्तेमाल करते हैं तो ध्यान रहे, कि आप अपने पर्सनल-रिकॉर्ड भी रखें। ऐसा करने से आपका फिज़ूल-खर्च कम होगा और साथ ही यह भी पता चलेगा कि आपकी बैंक- स्टेट्मेंट सही है।
    • अपनी आय को समझें। अपनी आय का हिसाब लगाते समय केंद्रीय, राज्य और सामाजिक सुरक्षा कर हिसाब रखना न भूलें क्योंकि यह कर आपकी कुल आय से काटा जाता है। बची रकम आपकी वास्तविक आय होती है जो आपको मिलती है।
    • प्राथमिकता के अनुसार खर्च करें। आपकी बुनियादी आवश्यकताएं जैसे रोटी, कपड़ा और मकान आपके खर्च की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। जब तक आप इन बुनियादी आवश्यकताओं से संतुष्ट नहीं हो जाएंगे, तब तक महंगी गाड़ियों, कपड़ों और छुट्टियों पर खर्च न करें। अपने आप से ईमानदार रहे और अपनी मूल आवश्यकताओं और सुख-साधन में अंतर करना जानें।
    • पैसे बचाएं। हर महीने आपको कुछ पैसे अपने बचत खाते में जमा करने चाहिए। अपने नियोक्ता से कहें कि आपकी आय में से कुछ रकम सीधा आपके बचत खाते में जमा कर दें।

    6. अपने समय का प्रबंधन करें: ज़रूरी कार्य को आखिरी समय तक टालते रहने से आपको बिन बात का तनाव होगा और गलतियाँ होने की संभावना बढ़ेगी। अपने समय का प्रबंधन ऐसे करें ताकि कोई भी काम सही ढंग से करने के लिए आपके पास काफी समय रहें।

    • अपने आपको पूरा दिन, हफ्ते और महीने तक सुनियोजित रखने के लिए कागज़ या इलेक्ट्रानिक प्लानर का इस्तेमाल करें।
    • जो भी कार्य आपको एक दिन में करने हैं, उनकी एक सूची बनाएं और जैसे-जैसे वह काम खत्म होते जाएंगे, वैसे-वैसे उनके सामने सही (राइट) का चिन्ह लगाते रहें। ऐसा करने से आप व्यवस्थित और प्रोत्साहित बने रहेंगे।

    अंदरूनी सफलता प्राप्त करना
    1. मौजूद लम्हों का आनंद लें: यदि आप हमेशा अपने अतीत के बारे में ही सोच रहे हैं या भविष्य के बारे में दिन में सपने देखते हैं, तो आप अपने जीवन के मौजूद लम्हों को खो देंगे। याद रखें कि अतीत और भविष्य केवल एक भ्रम है और वास्तविक जीवन यहाँ और आज है।

    • नकारात्मक विचारों पर ध्यान देना शुरू करें ताकि आप उनसे आसानी से निपट सकें और मौजूद लम्हों का आनंद ले सकें। यदि आपके दिमाग में कोई नकारात्मक विचार आएं तो उन्हें स्वीकार करें, उन्हें नकारात्मक विचार का लेबल करें और फिर उन्हें निकाल दें।
    • अपने आस-पास की छोटी-छोटी चीज़ों पर ध्यान देने की आदत डालें। आपकी त्वचा को छूने वाली सूरज की किरणें, नंगे पांव चलते समय महसूस होती ज़मीन या रेस्तरां में लगी चित्रकारी को सराहें। ऐसी चीज़ों पर ध्यान देने से आप अपने भटकते दिमाग को शान्त कर सकते हैं और हर लम्हे को सराह सकते हैं।


    2. अपने जीवन की तुलना दूसरों के जीवन के साथ न करें: दुर्भाग्य-वश, बहुत से लोग अपनी सफलता की तुलना अपने आस-पास के लोगों की सफलता से करते हैं। यदि आप मुकम्मल और खुश होना चाहते हैं, तो अपने जीवन की तुलना दूसरों के जीवन के साथ करना बंद करें।

    • बहुत से लोग अपने जीवन की विफलता की तुलना दूसरे लोगों के जीवन की सफलता से करते हैं। याद रखें कि दूसरों का जीवन हमें चाहे जितना भी सम्पूर्ण लगे, परंतु हर कोई अपने जीवन में ट्रेजडी, असुरक्षित, और दूसरी कठिनाइयों का सामना करते हैं, जो हमें दिखाई नहीं देता है।
    • अपने जीवन की तुलना अपने से “बेहतर लोगों” से करने के बजाय, उन लोगों के बारे में सोचें जो बेघर हैं, लम्बे समय से बीमार है या जो गरीबी में रह रहे हैं। ऐसा करने से आपको अपने जीवन को कोसने के बजाय, जो आपके पास है उन्हें सराहने में मदद मिलेगी।


    3. अपने जीवन में मिलें सुख का शुक्रिया अदा करें: आपने जीवन में कितना कुछ प्राप्त किया है, इससे आपको कोई फर्क नहीं पड़ता है, और आप हमेशा इस बात को लेकर दुखी होते हैं, जो आपके पास नहीं है। इसके बजाय, आपके पास जो है, उसमें संतुष्ट हो जाएं। भौतिक चीज़ों से परे सोचें, अपने प्रियजनों को सराहें और खुशनुमा लम्हों को याद करें।
    4. अपनी सेहत का ध्यान रखें: शरीर स्वस्थ रहने से, आपका दिल और दिमाग भी स्वस्थ रहते है। संतुलित आहार का सेवन करें, और ध्यान रखें कि आप आवश्यक पोषक तत्वों को नजरंदाज नहीं कर रहे हैं। स्वास्थ्य संबंधित आने वाली समस्याएं, जैसे एनर्जी की कमी या एकाग्रता का अभाव, और उसका इलाज के लिए अपने डाक्टर या न्यूट्रिशनिस्ट या किसी स्वस्थ विशेषज्ञ से मिलें। अच्छे से व्यायाम करें, परंतु व्यायाम जो आपको नापसंद है, उन्हें सिर्फ इसलिए न करें कि वह करने हैं, बल्कि ऐसे व्यायाम करें जो आपके पसंदीदा है।

    खुद को सही वातावरण में ढालें

    1. वातावरण: हमारे आस-पास का वातावरण हम पर और हमारे होश (अवचेतन और अचेतन) पर काफी हद तक असर डालता है। इनमें जिस जगह हम रहते हैं, हमारे दोस्त, जो भी हम पढ़ते हैं, जिन लोगों को हम देखते हैं, ऐसी बहुत सी बातें शामिल है। वातावरण संक्रामक होता है। थॉमस ए. एडिसन ने कहा था कि वह एक सफल आविष्कारक इसलिए बन पाए क्योंकि वह ऐसे लोगों के साथ थे जो उनसे कई ज़्यादा होशियार थे और [१] फिर वह उनसे सीख पाएं। ज्यादातर हम अपनी सोच को[२] वातावरण के अधीन करते है।

    • इस परीक्षण को करने की कोशिश करें। कुछ समय के लिए ऐसे लोगों के साथ मिल जाएं, जो जूआ खेलते हैं, या वह सब करते जिसमें उनकी दिलचस्पी हो, और फिर अपने विचार और भावनाओं को जाँचें करें। संभवतः आपकी सोच उस वातावरण के अधीन हो जाएगी, जिस वातावरण में आप फिलहाल है। क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि जब आप किसी सुंदर झील या सुंदर कुदरती वातावरण में जाते हैं तो आप भी निर्मल और शांत महसूस करने लगते है?

    2. दीर्घ-वातावरण (Macro-Environment): जिस स्थिति में हम सबसे ज़्यादा अपना समय व्यतीत करते हैं वह दीर्घ-वातावरण (Macro-Environment) कहलाता है। जिस जगह पर आप रहते है, जहाँ काम करते है, जिन दोस्तों के साथ सबसे ज़्यादा समय व्यतीत करते है इत्यादि। यह सब दीर्घ-वातावरण के भाग है। सफल बनने के लिए यह बहुत ज़रूरी है कि आप अपने आप को इस वातावरण में ढालें ताकि आप लगातार प्रेरित रहें। इसमें आप भी शामिल है, यदि आप खुद के साथ ज़्यादा समय बिताते हैं, (तो यहाँ आप खुद एक वातावरण है) और यदि आपका दिमाग प्रतिक्रियाशील है तो आपकी सोच भी प्रतिक्रियाशील होगी जब तक आप अपना वातावरण बदल न दें।
    3. सूक्ष्म-वातावरण (Micro-Environment): ऐसी स्थिति जहां हम अपना अधिक समय नहीं बिताते हैं, जैसे, कॉफ़ी-शॉप, वह लोग जिनको आप केवल नमस्ते करते हैं, पंसारी की दुकान, बार में मिलने वाले नए लोग इत्यादि। यह आप पर दीर्घकालीन प्रभाव नहीं डालते हैं, जब तक आप इन्हें दीर्घ-वातावरण में न बदल दें।

    सलाह

    • जिस भी चीज़ से आपको प्रेरणा मिलती है उससे अपने आप को प्रेरित रखें: संगीत, फोटोग्राफी, फैशन इत्यादि। एक सही प्रेरणा आपके कुछ करने की इच्छा को ज़्यादा प्रोत्साहित करेगी।
    • अपने जीवन में सकारात्मक रोल-मॉडल्स होने से आप प्रेरित रहते हैं और आपको वह सही दिशा में जाने के लिए मदद करते हैं। आपके रोल-मॉडल्स आपके जानने वाले हो भी सकते हैं या नहीं भी हो सकते। अपने रोल-मॉडल के जीवन के बारे में जानिए और उनकी जीवन शैली को अपनाने की कोशिश करें।

    चेतावनी

    • दूसरों की उन्नति से ईर्ष्या न करें, बल्कि ऊँची मंज़िलों तक पहुँचने के लिए कड़ा परिश्रम करें।

    19 सित॰ 2016

    सफलता की ओर कदम Steps toward Your Dreams

    By: Successlocator On: सितंबर 19, 2016
  • Share The Gag

  • इस दुनिया में 90% लोग अपने साथ धोखा कर रहे है, जानना चाहोगे कैसे ? क्योंकि ये वो लोग है जो सिर्फ जीने के लिए जी रहे है, ये भूल चुके है की इनके सपने क्या है, इनके जीवन में सिर्फ जरूरते है, शिकायतें है और अपने आप के लिए झूठी तसल्ली है, इन्होंने समझौता कर लिया है |

    ये सब डर की वजह से बिना कोशिश किये ही हार मान बैठे है, ये लोग आराम से अपनी जिंदगी जी रहे है लेकिन इसके बावजूद भी ये अपने जीवन से संतुष्ट नहीं है क्योंकि ये सब के सब वो नहीं कर रहे है जो करने की क्षमता इनमें है, और जब हम हालातों से समझौता कर लेते है तो जिंदगी बड़ी नीरस हो जाती है |

    पिछले दिनों मैं एक सेमिनार के लिए जयपुर से दिल्ली जा रहा था ट्रेन में मेरे सामने वाली बर्थ पर रवि नाम के एक युवक से थोड़ी ही देर में मेरी अच्छी जान पहचान हो गयी, उसने बताया वह मेकैनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा है जयपुर में और यह पूरा होते ही कोई जॉब ज्वाइन कर लेगा | जब मैंने उससे पूछा की आप का सबसे बड़ा ड्रीम क्या है ? तो काफी देर सोचने के बाद बोला मैं पायलट बनना चाहता हूँ लेकिन ? लेकिन क्या मैंने पूछा तो उसने कहा की घरवाले इसकी अनुमति नहीं दे रहे है वो चाहते है की मैं कोई अच्छा सा जॉब करूँ और इतना कह कर वो चुप हो गया लेकिन जो चमक उसके चेहरे पर पायलट बनने वाले सपने को बताते वक्त थी वो अब ग़ायब हो चुकी थी | और लगभग तीन घंटे की बातचीत से मेरा ध्यान उन मुद्दों पर गया जिनकी वजह से हम अपने सपनों को जीना छोड़ देते है वे है :
    1. खुद पर विश्वास न होना ( Lake Of  Self Confidence )

    यह एक ऐसी वजह है जिसकी वजह से ज्यादातर लोग अपने सपने को सिर्फ सपना समझ हमेशा के लिए भूल जाते है | हम सपने तो बड़े बड़े देखते है लेकिन अंदर से हम बहुत डरे हुए है और उस सपने को लेकर खुद को ही नहीं समझा पाते है की यह मैं कर सकता हूँ , और जब हम स्वंय ही पूरी तरह से निश्चिंत नहीं है तो दूसरों को क्या बताएँगे ? नतीजा बिना खुद पर विश्वास के जब हम दूसरों को अपने सपने बताते है तो वो आसानी से हमें डरा देते है और हम उसी 90%  वाली श्रेणी में रह जाते है |

    2. लोग क्या कहेंगे  ( What will People Say )

    सबसे बड़ा रोग क्या कहेंगे लोग,  यह हमारा बहुत बड़ा डर है और इस वजह से हम अपने सपनों की दिशा में कदम उठाने से पहले हार मान लेते है, हम सोचते है क्या होगा जब वह मुझे यह करते हुए देखेंगा, क्या जवाब दूँगा, रिश्तेदार क्या सोचेंगे, परिवार वाले क्या कहेंगे, दोस्त क्या कहेंगे ? आप जिन लोगों के बारे में सोच रहे हो वो यदि आप पर हसतें है आप को रोकते है, टोकते है तो यकीन कीजियेगा ये सब भी उस 90%  श्रेणी में है जो एक तय दायरे में ही सोच पाते है, पर तुम्हारी पहचान  उनकी सोच से नहीं तुम्हारी सोच से बनेगी |
    3. असफलता का डर ( Fear Of Failure )

    क्या होगा यदि मैं इस काम में सफल नहीं हो पाया तो ? क्या होगा यदि मेरा बिज़नेस नहीं चल पाया तो ? क्या होगा यदि उसने मेरा प्रस्ताव नहीं माना तो, क्या …क्या …क्या  इतने सारे सवाल और इनकी वजह असफल होने का डर | ये सारे डर जो की काल्पनिक है लेकिन हम इन पर इतना ध्यान देते है की ये हकीकत में बदलने लगते है, हम में से ज्यादातर लोग तो वो काम शुरू ही नहीं कर पाते है वजह  हमारा ये डर की कहीं असफल न हो जाये, आप अभी कोनसे सफल हो जो असफल हो जाओगे या यदि सफल हो भी तो इतिहास उठाकर देख लो की क्या सफलता स्थाई है ? और इतना ही नहीं अपने इस डर की वजह से हम दोष देते है हालातों को, ज़माने को और कहते है यदि ऐसा नहीं होता तो हम ये कर लेते वो कर लेते, ध्यान रहे हम यदि वह चुनते है जो आसान है तो  जिंदगी मुश्किल होगी, और यदि वो चुनते है जो मुश्किल है तो जिंदगी आसान होगी |



    सपने हमारे भी सच हो सकते है यदि इन पांच छोटी छोटी बातों का ध्यान यदि हम रखे तो |

    1. अपने सपने को लिखो ( Write down your Dreams )

    90% लोगों की तरह सोचना बंद करो, बड़ा सोचों कुछ ऐसा जो तुम्हे पसंद हो, कुछ ऐसा जिसे दूसरों को बताते वक्त तुममे जोश आ जाये, तुम्हारे रोंगटे खड़े हो जाये, कुछ ऐसा जिसके बारे में तुम बहुत Passionate हो, और उसको अपनी व्यक्तिगत डायरी में लिख डालो, एक चार्ट पेपर पर लिखकर अपने कमरे में चिपका दो ( और ख़बरदार जो यह सोचा की किसी ने देख लिया तो ) यह तुम्हें रोज़ दिखाई देना चाहिए ताकि एहसास दिलाता रहे की यह तुम्हारा सपना है |

    2. अपने आप से वादा करो ( Personal Commitment )

    अपने सपने और जीवन की ज़िम्मेदारी स्वंय लो और खुद से वादा करो की मैं इसे पूरा करूँगा /करुँगी, रोज़ दस मिनट अपने सपने को याद करने और खुद से बात करने का वक्त निकालो और अपना आकलन करते रहो, ध्यान रहे लोगों की नजर में तुम क्या हो इससे खास फर्क नहीं पड़ता लेकिन अपनी नजर में तुम क्या हो इस पर तुम्हारी पूरी जिंदगी टिकी हुई है |

    3. अपना मार्गदर्शक चुनों ( Find your Mentor )

    आपका सपना जिस भी क्षेत्र से सम्बन्धित है उससे जुड़े हुए सफल लोगों को खोजों, किताबें पढ़ो, इन्टरनेट पर सर्च करो, और यदि संभव हो तो उनसे मिलो, अच्छे सेमिनार में जाओ, ये वो लोग है जो आपको राह दिखायेंगे, हम क्या है इसमें हमारी संगती की बड़ी भूमिका होती है और हम क्या बनेंगे यह भी हमारी संगती ही तय करती है, इसलिए हमारी संगती हमारे सपने के अनुसार ही होनी चाहिए |

    4. छोटे छोटे कदम तय करो ( Set Small steps )

    सपना बड़ा ज़रुर देखे लेकिन उस तक पहुँचने के लिए छोटे छोटे कदम तय करे अपने सपने को टुकडों में बाँट ले और तय करे की अपनी मंज़िल तक पहुँचने से पहले वो कोनसे छोटे लक्ष्य होंगे जिनको मुझे पाना है और उन छोटे लक्ष्यों को समय सीमा दे , ताकि आप आकलन कर पाए की कहाँ सुधार की जरूरत है, और जब भी इन छोटे लक्ष्यों को पूरा करे अपने आप को शाबाशी देना न भूले, ये आपको उत्साहित बनाये रखेंगे |

    5. सीखना जारी रखों ( Always Learn )

    हमारी जिंदगी अपने आप में एक पाठशाला है जहाँ हम हमेशा कुछ न कुछ सीखते रहते है, अपने सपने को हक़ीकत में बदलने के दौरान बहुत बार ऐसा होगा की हम गिरेंगे, विफल होंगे, लेकिन प्रत्येक अवसर हमें कुछ न कुछ सिखाएगा अंत: ऐसी परिस्थिति में दो सवाल अपने आप से पूछना – मैंने इस से क्या सीखा ? और इस सीख को आने वाली जिंदगी में कैसे उपयोग करूँगा |

    अपने सपने को पूरा करने में दर्द तो बहुत होगा, मुश्किलें आएँगी लेकिन याद रखना वो ही लोग टॉप 10% में पहुँच पाते है जो लगातार अपने सपने को पूरा करने में लगे रहते है अंत: जिंदगी में खास परिणाम पाने के लिए काम भी खास ही करने होंगे और जब काम खास हो तो उनके तरीके भी खास ही होंगे |

    10 Good Habits For Success Life in Hindi

    By: Successlocator On: सितंबर 19, 2016
  • Share The Gag

  • 10 Good Habits For Success Life in Hindi
    दीपावली के दिन राम अपना 14 साल का वन वास पूरा कर अयोध्या में अपने घर वापस लौटे थे, इस लिए इस त्योहार को अंधकार पे प्रकाश का विजय भी माना जाता है और हम लोग आज भी इस ख़ुशी में अपने घर दीपावली के दिन दियें जला कर रोशनी करते है और अंधकार का नाश करते है ।

    दीपावली की दूसरे दिन से राम राज्य की शुरुआत हुईं इस लिए हम उसे नया साल मानते है ।
    दीपावली के बाद से हम हिंदू भाइयों का नया साल आरंभ होता है और वैसे हमारे देश की एकता और भाईचारे की वजह से यह दीपावली का त्योहार सिर्फ हिंदू ही मनाते है ऐसा नहीं है, दीपावली सभी धर्मों के लोग साथ मिलकर मनाते है ।

    दीपावली ख़ुशियों का त्योहार है और यह मेरा सबसे पसंदीदा त्योहार भी है, क्योंकि दीपावली पे अच्छी छुट्टियाँ मिलती है, हमें अपने Friends और Relative से मिलना होता है, और सबसे बेहतरीन बात यह है इस त्योहार की के हम पुराने विचार, समस्या को पिछले साल में छोड़ कर नए विचार नए संकल्प के साथ एक बेहतर ढंग से नए साल की शुरुआत कर सकते है ।

    हम इस नए साल में अपने जीवन में संकल्पों का दिया जला कर निराशा के अंधकार को भगाकर सफलता और ख़ुशियों का प्रकाश स्थापित करे यही मेरी शुभकामना है ।

    यहाँ हम कुछ अच्छी और सकारात्मक आदतों के बारे में बात करेंगे, जो आप इस नए साल में संकल्प लेकर कुछ अच्छी आदतों को अपने जीवन में अपना ये और यकीन रखिए ये छोटी छोटी आदतें आने वाले साल में एक बड़ा बदलाव लेकर आयेगी आपके जीवन में और यही आदतें आपको सफलता अर्जित करने में सबसे ज्यादा मददगार होगी ।

    हम यहाँ 10 सकारात्मक आदतें (Good Habits) लिख रहे है आपको इस में से कुछ आदतें अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लेना है ।

    1 – सुबह जल्दी उठना । ( Wake up Early )

    Good Habits में सबसे प्राथमिक है यह आदत, सुबह जल्दी उठने के बहुत फायदे है आप एक बार इस आदत को अपना कर देखे और ये आपके पूरे जीवन को बदल देगी । इसका सकारात्मक परिणाम आप सिर्फ एक महीने में ही देख सकेंगे ।

    2 – ध्यान, योग और व्यायाम करना ।  ( Practice Meditation And Keep Exercise )

    ध्यान के बारे में जितनी बात करे उतनी कम है, यह वो खजाना है जो आपके जीवन को सुख, शांति और सफलता से तरबतर करने की शक्ति रखता है, योग और व्यायाम से आप हमेशा युवा और ऊर्जावान रहेंगे ।

    3 – किताबें पढ़ना । ( Read Positive Books )

    हर दिन 30 मिनट कुछ अच्छा सकारात्मक पढ़ें, आपके आत्मविकास में सबसे उपयोगी कोई आदत है तो वो है सकारात्मक पुस्तकें यह आदत आपका दृष्टिकोण और पूरी Personality बदल के रख देगी ।

    4 –  कुटेव दूर करे । ( Leave Bad Habits )

    तम्बाकू, बीडी, सिगरेट, जंक फूड का अगर आप सेवन करते हो तो इस चीजों को त्याग करे और कोई भी खराब आदत हो जैसे बात बात पर गुस्सा करना, किसी की बुराई या ईर्षा करना इन सब बुरी आदतों को हमें संकल्प लेकर जड़ मूल से उखाड़ फेंकना है ।

    5 – समय बर्बादी से बचना । ( Avoiding Waste Time )

    फ़ालतू में Whatsapp, Facebook और Internet के उपयोग से बचे, ज्यादा टीवी देखने से भी बचे, बिना मतलब की  चर्चा से दूर रहे और अपना पूरा समय अपने Goal Achieve करने में लगाए ।

    6 – अपना लक्ष्य तय करना । ( Set Your Goal )

    आप एक साल बाद अपने आप को कहा देखना चाहते है यह सुनिश्चित कर Goal (लक्ष्य) तय करो और इस Goal को अपनी Inspirational (प्रेरणा) बनाकर हररोज काम करे हररोज अपने लक्ष्य तरफ आगे बढ़े ।

    7 – अपने परिवार के लिए समय निकाले । ( Spend Some Time With Family )

    रोज़ सुबह या शाम अपने परिवार के साथ बैठकर चर्चा करे, इससे आपका पारिवारिक जीवन सुखी समृद्ध और सफल होने के साथ आप एक अच्छे पिता, माता, भाई, बहन और बेटी बन पायेंगे ।

    8 – पूर्वाग्रहों, आग्रहों का विसर्जन करे । ( Forgot Past )

    बीते सालों में कोई भी नकारात्मक घटना आपके दिलों दिमाग में घर कर चुकी हो या किसी के साथ आपके संबंध खराब हुये है तो आप उस घटना को भूल कर एक नईं शुरुआत करे ।

    9 – किसी की मुस्कान बने । ( Make Someone Smile )

    इस नए साल में हम संकल्प करे कि हमारे आसपास के लोगों की हम निस्वार्थ भाव से मदद करे और किसी के चेहरे पे मुस्कान लाने में कामयाब हो ।

    10 – सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाएं । ( Be Positive )

    नए साल में हम नकारात्मक दृष्टिकोण को त्याग कर सकारात्मक सोच अपनाएं और जो होता है वो अच्छा होता है मानकर हम हर मुश्किलों में हर विफलताओं में हर आपतियों में हम अवसर खोजें और आगे बढ़े ।


    यहाँ हमने कुछ अच्छी आदतें लिखी है आप इनमें से कुछ आदतों को अपने जीवन में स्थान दे और इस दीवाली पे परिवर्तन और सफलता की एक नयी शुरुआत करे ।

    17 सित॰ 2016

    आज ही क्यों नहीं ?

    By: Successlocator On: सितंबर 17, 2016
  • Share The Gag



  • आज ही क्यों नहीं ?




    काल करे सो आज कर

    आज ही क्यों नहीं ? 

    एक बार की बात है कि एक शिष्य अपने गुरु का बहुत आदर-सम्मान किया करता था |गुरु भी अपने इस शिष्य से बहुत स्नेह करते थे लेकिन  वह शिष्य अपने अध्ययन के प्रति आलसी और स्वभाव से दीर्घसूत्री था |सदा स्वाध्याय से दूर भागने की कोशिश  करता तथा आज के काम को कल के लिए छोड़ दिया करता था | अब गुरूजी कुछ चिंतित रहने लगे कि कहीं उनका यह शिष्य जीवन-संग्राम में पराजित न हो जाये|आलस्य में व्यक्ति को अकर्मण्य बनाने की पूरी सामर्थ्य होती है |ऐसा व्यक्ति बिना परिश्रम के ही फलोपभोग की कामना करता है| वह शीघ्र निर्णय नहीं ले सकता और यदि ले भी लेता है,तो उसे कार्यान्वित नहीं कर पाता| यहाँ तक कि  अपने पर्यावरण के प्रति  भी सजग नहीं रहता है और न भाग्य द्वारा प्रदत्त सुअवसरों का लाभ उठाने की कला में ही प्रवीण हो पता है | उन्होंने मन ही मन अपने शिष्य के कल्याण के लिए एक योजना बना ली |एक दिन एक काले पत्थर का एक टुकड़ा उसके हाथ में देते हुए गुरु जी ने कहा –‘मैं तुम्हें यह जादुई पत्थर का टुकड़ा, दो दिन के लिए दे कर, कहीं दूसरे गाँव जा रहा हूँ| जिस भी लोहे की वस्तु को तुम इससे स्पर्श करोगे, वह स्वर्ण में परिवर्तित हो जायेगी| पर याद रहे कि दूसरे दिन सूर्यास्त के पश्चात मैं इसे तुमसे वापस ले लूँगा|’


    शिष्य इस सुअवसर को पाकर
     बड़ा प्रसन्न हुआ लेकिन आलसी होने के कारण उसने अपना पहला दिन यह कल्पना करते-करते बिता दिया कि जब उसके पास बहुत सारा स्वर्ण होगा तब वह कितना प्रसन्न, सुखी,समृद्ध और संतुष्ट रहेगा, इतने नौकर-चाकर होंगे कि उसे पानी पीने के लिए भी नहीं उठाना पड़ेगा | फिर दूसरे दिन जब वह  प्रातःकाल जागा,उसे अच्छी तरह से स्मरण था कि आज स्वर्ण पाने का दूसरा और अंतिम दिन है |उसने मन में पक्का विचार किया कि आज वह गुरूजी द्वारा दिए गये काले पत्थर का लाभ ज़रूर उठाएगा | उसने निश्चय किया कि वो बाज़ार से लोहे के बड़े-बड़े सामान खरीद कर लायेगा और उन्हें स्वर्ण में परिवर्तित कर देगा. दिन बीतता गया, पर वह इसी सोच में बैठा रहा की अभी तो बहुत समय है, कभी भी बाज़ार जाकर सामान लेता आएगा. उसने सोचा कि अब तो  दोपहर का भोजन करने के पश्चात ही सामान लेने निकलूंगा.पर भोजन करने के बाद उसे विश्राम करने की आदत थी , और उसने बजाये उठ के मेहनत करने के थोड़ी देर आराम करना उचित समझा. पर आलस्य से परिपूर्ण उसका शरीर नीद की गहराइयों में खो गया, और जब वो उठा तो सूर्यास्त होने को था. अब वह जल्दी-जल्दी बाज़ार की तरफ भागने लगा, पर रास्ते में ही उसे गुरूजी मिल गए उनको देखते ही वह उनके चरणों पर गिरकर, उस जादुई पत्थर को एक दिन और अपने पास रखने के लिए याचना करने लगा लेकिन गुरूजी नहीं माने और उस शिष्य का धनी होने का सपना चूर-चूर हो गया | पर इस घटना की वजह से शिष्य को एक बहुत बड़ी सीख मिल गयी: उसे अपने आलस्य पर पछतावा होने लगा, वह समझ गया कि आलस्य उसके जीवन के लिए एक अभिशाप है और उसने प्रण किया कि अब वो कभी भी काम से जी नहीं चुराएगा और एक कर्मठ, सजग और सक्रिय व्यक्ति बन कर दिखायेगा.
     मित्रों, जीवन में हर किसी को एक से बढ़कर एक अवसर मिलते हैं , पर कई लोग इन्हें बस अपने आलस्य के कारण गवां देते हैं. इसलिए मैं यही कहना चाहती हूँ कि यदि आप सफल, सुखी, भाग्यशाली, धनी अथवा महान  बनना चाहते हैं तो आलस्य और दीर्घसूत्रता को त्यागकर, अपने अंदर विवेक, कष्टसाध्य श्रम,और सतत् जागरूकता जैसे गुणों को विकसित कीजिये और जब कभी आपके मन में किसी आवश्यक काम को टालने का विचार आये तो स्वयं से एक प्रश्न कीजिये – “आज ही क्यों नहीं ?”

    ◆और पढे:

    15 सित॰ 2016

    सफलता की हत्या करने वाले हथियार

    By: Successlocator On: सितंबर 15, 2016
  • Share The Gag
  • सफलता की हत्या करने वाले हथियार


    दुनिया के प्रत्येक व्यक्ति की अपनी इच्छाएं (Desires) होती हैं और अपनी इन इच्छाओं के अनुरूप ही व्यक्ति जीवन (Life) जीना चाहता है। इन इच्छाओं में से कुछ तो जीवन में Positive Effect डालती हैं और कुछ जीवन में Negative Effect डालती हैं। जीवन में इच्छाएं रखना तो बहुत अच्छी बात है लेकिन अपनी Negative Desires का गुलाम बन जाना और अपनी इन Negative Desires के अनुरूप ही अपने विचार बना लेना किसी भी व्यक्ति को सफलता (Success) से बहुत दूर ले जा सकता है।

    हम में से बहुत से ऐसे लोग हैं जो अपनी Positive Desires को अपने जीवन में जगह नहीं देते हैं और अपनी इन इच्छाओं का गला घोट देते हैं। बहुत से लोग जीवन में ऐसे Negative Thoughts अपना लेते हैं जिससे वह सफलता को कभी नहीं पा सकते। इन Negative Thoughts को ऐसा हथियार माना जा सकता है जो किसी के भी जीवन में असफलता को ला सकता हैं। हमें ऐसे हथियारों से बचना चाहिए।

    आज मैं आपसे ऐसे ही कुछ सफलता को नष्ट करने वाले हथियारों के बारे में बात करना चाहता हूँ। आपसे निवेदन है कि आप इस लेख को पढ़ने के बाद बताए गए हथियारों को अपने जीवन से हमेशा के लिए दूर कर दें ताकि आप Positive Desires को अपनाएं और सफलता की राह पर चल सकें।






    1- खुद को नाकाबिल समझने का विचार
    बहुत से लोग अपने को नाकाबिल समझने का विचार अपना लेते हैं और पूरी जिंदगी ऐसे ही हाथ पर हाथ रखे बैठे रहते हैं। ऐसे लोगों को आपने कुछ इस तरह की बातें कहता सुना होगा--

    a- "मैं ऐसा नहीं कर सकता", 
    b- "मुझमे इतनी समझदारी नहीं है कि मैं यह काम कर सकूँ",
    c- "अगर मैं कोशिश करूँगा तब भी सफल नहीं हो सकता", 
    d- "मेरे पास इस काम को करने के लिए अनुभव की कमी है", 
    e- "मैं IAS बनना चाहता था लेकिन मैं बन नहीं सकता", आदि।

    खुद को नाकाबिल समझने के यह ऐसे विचार हैं जो कभी भी किसी को सफलता की राह पर नहीं ले जा सकते। इन विचारों को तुरंत नष्ट कर दें और Positive Thoughts को अपने जीवन में जगह दें। आप एक काबिल इंसान हैं। 

    2- प्रतियोगिताओं से दूर भागने का विचार
    जीवन एक प्रतियोगिता भी है। बहुत से Competitions जीवन के लिए बहुत जरुरी होते हैं लेकिन इनसे दूर भागना केवल एक ही परिणाम देता है और वह है- असफलता। बहुत से लोग जीवन की प्रतियोगिताओं से दूर भागना चाहते हैं और कहते हैं--

    a- "इस कार्य को करने के लिए तो पहले से ही बहुत सारे लोग हैं , मैं कैसे कर पाउँगा", 
    b- "इस Company में केवल 5 Vacancy हैं और 50000 आवेदन अब तक आ चुके  है, ऐसे में मैं आवेदन करके सफल नहीं हो सकता",
    c- "अरे ! इस काम में तो एक से एक अनुभवी व्यक्ति हैं , मैं इस काम में सफल नहीं हो सकता", आदि। 

    इस तरह के विचार रखने वाला व्यक्ति प्रतियोगिता का हिस्सा बनने से घबराता है और जीवन में असफल रह जाता है। अगर आपके अंदर ऐसे विचार हैं तो उन्हें तुरंत कुचल दीजिये और यह बात हमेशा याद रखिये कि किसी भी बड़ी प्रतियोगिता में सबसे पहला स्थान रखने वाला व्यक्ति भी आप जैसा ही है। जब वह सफल हो सकता है तो आप भी सफल हो सकते हैं। 

    3- खुद को एक सीमित दायरे में समेट लेने का विचार
    कुछ लोग खुद के लिए एक दायरा बना लेते हैं और यह सोच लेते हैं कि अब इस दायरे से बाहर नहीं निकलना है। वह लोग कुछ अलग करने से घबराते हैं, कुछ नया करने की उनमे हिम्मत नहीं होती। अपने इन्ही विचारों के कारण वह कोई सफलता भी प्राप्त नहीं कर पाते हैं। ऐसे लोगों को आपने कहते सुना होगा कि-

    a- "मैं जो काम कर रहा हूँ वह सही है, यह काम छोड़कर दूसरा काम करने की हिम्मत मुझमे नहीं है",
    b- "मैं जहाँ हूँ वहां सही हूँ", 
    c- "इतना ही काम मेरे लिए बहुत है , इतने में ही मेरा घर का खर्च चल जाता है", 
    d- "ज्यादा पैसा कमा के क्या करना है, इतने में ही मैं खुश हूँ" , आदि। 

    इस तरह के विचार अपने सपनों की हत्या करने वाले होते हैं। प्रत्येक व्यक्ति को अपना दायरा बढ़ाते रहना चाहिए। बहुत से सपने रखने चाहिए और उन्हें पूरा करने के लिए हमेशा कुछ अलग, कुछ नया, कुछ बड़ा करने के बारे में लगातार सोचते और करते रहना चाहिए।

    4- पारिवारिक जिम्मेदारी का बहाना बनाना
    पारिवारिक जिम्मेदारी (Family Responsibility) को निभाना एक बहुत अच्छी बात है लेकिन इसको अपने जीवन में असफलता का एक कारण बना लेना बहुत बड़ी गलती है। बहुत से लोगों को आपने यह बहाना बनाते सुना होगा--

    a- "अब मैं किसी प्रतियोगिता की तैयारी नहीं कर सकता क्योकि अब मुझ पर पारिवारिक जिम्मेदारी आ गई है", 
    b- "मैं अब नौकरी बदलने का Risk नहीं ले सकता क्योकि मेरे पास एक परिवार की जिम्मेदारी है", 
    c- "अरे भाई ! पारिवारिक जिम्मेदारी के कारण बहुत से सपनों को खोना पड़ता है", आदि। 

    इस तरह के विचार रखने वाले व्यक्ति न तो कभी खुद आगे बढ़ पाते हैं और न ही अपने परिवार का सही मायने में ध्यान रख पाते हैं। यह बात सही है कि बहुत से लोगों के पास सफल होने से पहले ही पारिवारिक जिम्मेदारी आ जाती है लेकिन यह बात भी सही है कि पारिवारिक जिम्मेदारी को निभाते हुए भी सफलता प्राप्त की जा सकती है। खुद पर विश्वास रखिये, यकीन मानिये कि आप भी सफल हो सकते हैं क्योकि बहुत से लोग पारिवारिक जिम्मेदारी के साथ बहुत सी बड़ी सफलताएं प्राप्त कर चुके हैं। 

    5- खुद के बारे में नहीं सोचना
    बहुत से लोग ऐसे होते हैं जो पूरी दुनिया के बारे में तो सोच लेते हैं लेकिन खुद के बारे में सोचने का उनके पास समय नहीं होता है। आपने कुछ लोगों से यह कहते सुना होगा--

    a- "दूसरों के बारे में सोचना ही असली जिंदगी है तो अपने बारे में क्या सोचें?"
    b- "हम दूसरों के बारे में सोचेंगे तभी वह हमारे बारे में सोचेंगे",
    c- "मेरी जिंदगी तो अपने परिवार के बारे में ही सोचते हुए निकल गई",
    d- "अपने बारे में सोचने का कभी Time ही नहीं मिला", आदि। 

    दूसरों के बारे में सोचना बहुत अच्छी बात है लेकिन हम दूसरों के बारे में तभी अच्छा सोच सकते हैं जब खुद के बारे में अच्छा सोचें। खुद के बारे में जब आप अच्छा सोचेंगे तभी आप अच्छे बनेंगे और अच्छा बनने के बाद ही आप दूसरों के बारे में अच्छा सोच सकते हैं। अतः खुद के बारे में सोचने का समय निकालिये। खुद को इतना मजबूत और सफल बनाइये कि आप ऐसा ही बनने के लिए दूसरों की मदद कर सकें।


    यह कुछ ऐसे हथियार हैं जिनका उपयोग हम करने लगते हैं और जीवन में असफल हो जाते हैं। इन हथियारों को हमेशा के लिए नष्ट कर दीजिये वरना एक दिन यही आपको नष्ट कर देंगे। जीवन में कुछ न करके मरने से अच्छा है कुछ अच्छा करने की कोशिश करके मर जाना। जीवन एक बार मिलता  है, अच्छा और सुखद यही होगा कि इस जीवन को सफल बनाया जाये। कुछ अच्छा सोचा जाये। कुछ अच्छा किया जाये।