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31 अग॰ 2018

कामयाबी किसे कहते है?What is success

By: Successlocator On: अगस्त 31, 2018
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    आज की इस भागती हुयी जिंदगी में हम सब सफलता या कामयाबी के लिए प्रयास कर रहे हैं|अक्सर ये सवाल लोगो के दिमाग में आता है कि कामयाब कैसे बनें – सफलता कैसे पायें | हम सभी किसी न किसी लक्ष्य या मकसद को लेके जीते हैं | उस लक्ष्य कि प्राप्ति के बाद एक नया लक्ष्य निर्धारित करते हैं | अपने लक्ष्यों तक पहुचना हम सभी का ध्येय रहता है | सफलता के सही मायने न पता होने की वजह से हम जिंदगी भर मायूस  ही महसूस करते रहते हैं | इस पोस्ट का मुख्य उद्देश्य यही है कि आपको सफल होने के सही मायने बताये जाए|

    सफलता क्या है ? कामयाबी किसे कहते हैं ?

    अपने किसी लक्ष्य को प्राप्त कर लेना ही सफलता कि परिभाषा है| करियर या जिंदगी के शुरुवात में आपने जो गोल या मकसद अपने लिए बनाये थे , अगर आपने उन्हें पा लिया है  तो आप सफल कहे जायेंगे |

    सफलता के सूत्र क्या हैं ?

    कहा जाता है कि सफलता का कोई शार्ट कट नहीं होता | सफल होने के कई सूत्र है |

    एक बेहतर इंसान कैसे बने

    कामयाब कैसे बनें – सफलता कैसे पायें

    हम यहाँ उन ईंटो का ज़िक्र कर रहे हैं जिनसे आप अपनी सफलता कि सीढीयाँ बना कर अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं

    लगातार प्रयास : एक दोहे में कहा गया है कि “करत करत अभ्यास ते जड़मति होते सुजन , रसरी आवत जात ते सिल पर पडत निसान”. इस दोहे का सीधा मतलब है लगातार प्रयास करना | अगर आप जिंदगी में सफल होना चाहते हैं तो बार बार अपने लक्ष्य कि प्राप्ति के प्रयास कीजिये | हर बार प्रयास कीजिये | थक के चूर हो जाईये मगर प्रयास बंद मत कीजिये | चेष्टा करना मत छोड़े | लगातार प्रयास करने से आप का लक्ष्य आपकी सकारत्मक उर्जा से आप के पास पहुच जाएगा

    अथक परिश्रम :अगर आप कामयाब होना चाहते हैं तो  परिश्रम करते रहिये | अपने आराम और सहूलियत को त्याग कर कर ही आप सफलतम व्यक्तियों में शुमार हो सकते हैं

    किसी उपलब्धि को छोटा न समझे – अपनी किसी भी उपलब्धि को कभी कम आंकिये | अपनी हर छोटी बड़ी उपलब्धि का सम्मान कीजिये |

    अतिविश्वास और आत्ममुग्धता से   खुद को बचाए : कामयाब होने कि सबसे बड़ी शर्त है कि खुद को अतिविश्वास और आत्ममुग्धता से   खुद को बचाए| अगर आप अतिविश्वास से भर गए तो आप अपने परिश्रम को बीच में छोड़ देंगे | और अगर आप आत्ममुग्धता से भर गए तो खुद को तुलनात्मक नज़रिए से नहीं देख पाएंगे

    बुरी और नकारात्मक संगति से दूर रहे – दुनिया ऐसे लोगो से भरी पड़ी है जो आपके अन्दर नकारात्मकता और अविश्वास कि भावना डालते हैं | वो खुद तो कुछ नहीं करते साथ ही आप को तरह तरह से अपने लक्ष्य से भटकाने का पूरा प्रयास करते हैं |

    सफल लोगों से मेल जोल बढ़ाये , उन्हें पढ़े – कहा जाता है कि आपके आस पास कि सकारत्मक उर्जा और नकारात्मक दोनों तरह की उर्जा आप को प्रभावित करती हैं | आप उन लोगो से मिलिए जो उद्यमी है , कर्मनिष्ठ और जिज्ञासु हैं | प्रोत्साहित करने वाले हैं और कामयाब हैं | आपको कुछ दिनों में ही अपने अन्दर बड़ा परिवर्तन नज़र आयेगा

    खुद पर विश्वास – अपने आप में विश्वास रखे | अपने भाग्योदय के लिए किसी अन्धविश्वास को न पाले | कर्म से बड़ा कुछ नहीं है | तुलसी दास ने कहा है

    “सकल पदारथ एही जग माहीं
    कर्महीन नर पावत नाही”

    कहने का तात्पर्य ये है कि सब कुछ इसी संसार में उपलब्ध है मगर उसकी कामना मात्र से काम नहीं चलेगा | उसे प्राप्त करने के लिए जीतोड़ म्हणत और लगातार कर्म करते रहने कि ज़रूरत है

    18 सित॰ 2017

    चंद्रमा और मूर्ख बंदर

    By: Successlocator On: सितंबर 18, 2017
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  • एक रात एक छोटा बंदर कुँए पर पानी पीने के लिए गया. जब उसने कुँए में झाँककर देखा तो उसे पानी में चंद्रमा झिलमिलाता हुआ दिखाई दिया. यह देखकर वह बहुत डर गया और दूसरे बंदरों को यह बात बताने के लिए दौड़ा.

    दोस्तों! वह चिल्लाया चंद्रमा पानी में गिर गया है।

    कहाँ! किस जगह! दूसरे बंदरों ने पूछा. मेरे साथ आओ! मैं तुम्हें दिखलाऊँगा! छोटे बंदर ने कहा.

    छोटा बंदर उन्हें कुँए तक ले गया. वे सभी झुंड बनाकर कुँए में झाँकने लगे.

    अरे हाँ! चंद्रमा तो पानी में गिर गया है, वे चिल्लाये हमारा सुंदर चंद्रमा कुँए में गिर गया! अब रात में अँधेरा हो जायेगा और हमें डर लगेगा! अब हम क्या करें!,

    मेरी बात सुनो एक बूढ़े बंदर ने कहा हम सिर्फ एक ही काम कर सकते हैं, हमें चंद्रमा को कुँए से निकालने की कोशिश करनी चाहिए,

    हाँ! हाँ! ज़रूर! सभी उत्साह से बोले हमें बताओ कि ऐसा कैसे करें,

    वो देखो कुँए के ऊपर पेड़ की एक डाली लटक रही है. हम सभी उससे लटक जायेंगे और चुटकियों में चंद्रमा को कुँए से निकाल लेंगे,

    बहुत अच्छा तरीका है, सब चिल्लाये चलो डाली से लटकें



    देखते ही देखते बहुत सारे बंदर उस पतली सी डाली से लटक गए और कुँए के भीतर झूलने लगे. उनमें से एक बंदर कुँए के भीतर पानी में हाथ डालकर चंद्रमा को निकालनेवाला ही था कि ऊपर पेड़ पर डाली चटक गई. सभी मूर्ख बन्दर कुँए में गिरकर पानी में डूब गए. चंद्रमा आकाश में स्थिर चमकता रहा.

    कुछ शायरियों से समझे जिंदगी को।

    1.हम फूल तो नहीं, पर महकना जानते है,

    बिना रोये, गम भुलाना जानते है

    लोग खुश होते है हमसे

    क्योकि, हम बिना मिले ही रिश्ते निभाना जानते है।


    2.क्या खूब लिखा है, किसी ने

    तू कर ले हिसाब, अपने हिसाब से,

    लेकिन ऊपर वाला लेगा हिसाब, अपने हिसाब से

    जिंदगी मे हम कितने सही और कितने गलत है,

    ये सिर्फ दो ही शक्स जानते है

    परमात्मा और अपनी अंतरआत्मा।



    3.किसीको गलत समझने से पहले

    एक बार उसके हालात समझने की कोशिश जरुर करे

    हम सही हो सकते है,

    लेकिन मात्र हमारे सही होने से सामने वाला गलत नही हो सकता।



    4.जिन्दगी एक हसीन ख़्वाब है

    जिसमें जीने की चाहत होनी चाहिये

    गम खुद ही खुशी में बदल जायेंगे

    सिर्फ मुस्कुराने की आदत होनी चाहिये।



    5.होगी किसी की ख्वाहिश चांद सितारे पाने की

    अपनी तो ख्वाहिश है खुद सितारा बनने की

    कोई चाहता होगा किसी को दिल में बसाना

    अपनी तो चाहत हर दिल में बस जाने की।



    6.समय की कीमत अखबार से पूछो

    जो सुबह चाय के साथ होता है वही रात को रद्दी हो जाता है

    जिंदगी में जो कुछ भी हासिल करना हो उसे वक्त पर हासिल करो

    क्योंकि जिंदगी मौके कम और अफसोस ज्यादा देती है।

    14 सित॰ 2017

    बुरा समय आने पर आपकी सहायक बनती हैं ये बातें, जानिए जीवन के इन नियमों को

    By: Successlocator On: सितंबर 14, 2017
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  • कई बार हमें अपने जीवन में असफलता मिलती है और हम निराश हो जाते हैं। आज हम आपको कुछ ऐसी जानकारी यहां दे रहें हैं जो असफल होने पर भी आपको जीवन से असंतुलित होने नहीं देंगी। जीवन में सफलता तथा असफलता साथ-साथ ही चलती है। कभी सफलता मिलती है तो खुशी होती है, पर जब असफलता मिलती है तब बहुत से लोग बहुत ज्यादा दुखी हो जाते हैं। वास्तव में असफलता भी सफलता की ही शुरुआत होती है। आज हम आपको जीवन के कुछ नियम यहां बताने जा रहें हैं जिनको जानने के बाद आप असफलता मिलने पर या बुरा समय आने पर अपने आप को संतुलित रख सकते हैं।वॉरेन बफे दुनिया के सबसे बड़े स्‍टॉक इन्‍वेस्‍टर हैं। उन्होंने कहा था कि बुरा समय सबके जीवन में आता ही है, पर उसको झेलने के कुछ रूल्स हैं। यदि आप इन रूल्स को फॉलो करते हैं तब आप बुरे समय के


    दुष्परिणाम से बच जाएंगे। बुरे समय के बाद में अच्छा समय भी आता है और वह आपको जीवन की नई-नई ऊचाइंयों पर ले जाता है। आज हम आपको इन रूल्स से ही मुखातिब करा रहें हैं, जो आपको जीवन में संभाले रखेंगे

    1 – कई लोग जीवन में असफल होने पर काफी परेशान हो जाते हैं। ऐसे में आप ध्यान रखें कि मुश्किल तथा नाकामी दोनों ही जीवन के हिस्से हैं। यदि आप इस बात को ध्यान रखेंगे तो यह बात आपको जीवन की मुश्किल परिस्थितियों में टूटने नहीं देंगे।

    2 – कई लोगों के जीवन में हालात समान नहीं रहते। ऐसे लोगों को यह ध्यान रखना चाहिए हर समय की तरह यह बुरा समय भी गुजर जाएगा। यह शब्द आपको बुरे हालत में भी हौसला बनाए रखने का संदेश देते हैं।

    3 – चिंता करने तथा ज्यादा सोचने से कुछ नहीं बदलता है। यह सोच आप में नया जोश पैदा करेगी तथा आपको नए सिरे से काम करने लिए प्रेरित करेगी।

    4 – कई लोग बुरे समय को देखते हुए अपने जीवन को रोक देते हैं। ऐसे लोगों को चिंता बहुत हो जाती है। इस प्रकार के लोगों को सोचना चाहिए जो होना होगा वह होकर रहेगा, आगे बढ़ते रहों। यह सोच इस प्रकार के लोगों को आगे बढ़ाती है तथा उनको कामयाबी दिलाती है।

    13 सित॰ 2017

    अब्राहिम लिंकन एक विचारधारा।

    By: Successlocator On: सितंबर 13, 2017
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  • अमरीका के 16वें राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन दास प्रथा खत्म करने जैसे बड़े-बड़े कामों के लिए जाने जाते हैं। एक बार वह कांग्रेस में हिस्सा लेने के लिए जा रहे थे, तभी रास्ते में उन्होंने एक असहाय सूअर को गहरे कीचड़ में धंसा देखा। उसकी पीड़ा ने उन्हें अधीर कर दिया। उन्होंने चालक से तुरंत गाड़ी रोकने के लिए कहा और जानवर को बाहर निकालने के लिए गाड़ी से उतरने लगे।
    यह देखकर चालक ने राष्ट्रपति से कहा, ‘‘आप जरूरी काम से कांग्रेस जा रहे हैं। ऐसा मत कीजिए, आपके कपड़े गंदे हो जाएंगे।’’
    इस पर लिंकन ने जवाब दिया, ‘‘सूअर का जीवन मेरे लिए ज्यादा महत्वपूर्ण है।’’
    लेकिन उनकी इस बात से चालक सहमत नहीं हुआ और बोला, ‘‘आप रहने दीजिए। मैं उस जानवर को निकालता हूं।’’
    ऐसा कह कर वह कीचड़ से सूअर को बाहर निकालने की कोशिश करने लगा। कीचड़ बहुत ज्यादा था और सूअर उसमें से निकल नहीं पा रहा था। अब लिंकन से रहा नहीं गया और वह भी कीचड़ में उतर पड़े। राष्ट्रपति और चालक की बहुत कोशिशों के बाद ही सूअर बाहर निकल सका। इस मशक्कत में लिंकन के सारे कपड़े कीचड़ से सन गए। चालक ने उनसे वापस घर चलकर कपड़े बदलने का निवेदन किया लेकिन लिंकन बोले, ‘‘कांग्रेस में समय से पहुंचना ज्यादा जरूरी है।’’
    वह कांग्रेस पहुंचे तो सभी उनकी हालत देखकर हैरान थे। जब यह पता लगा कि लिंकन ने किस तरह असहाय जानवर की रक्षा की तो क्या विरोधी और क्या समर्थक सभी उनके मुरीद हो गए। एक छोटे-से किसान के बेटे और अमरीका के सबसे लोकप्रिय राष्ट्रपति लिंकन की ख्याति का मूल था- उदारता और दूसरों की सहायता करने की प्रवृत्ति। लिंकन के इस सूत्र को याद रखा जाए तो हर कोई लोकप्रियता प्राप्त कर सकता है।

    11 सित॰ 2017

    भाग्यशाली कौन है?

    By: Successlocator On: सितंबर 11, 2017
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  • दोस्तों आज मैं आपको भाग्यशाली और सफल लोगों के कुछ लक्षण बताने जा रहा हूं जिनका जिक्र महाभारत में विदुर जी ने किया हुआ है। अगर आपके पास भी है ये लक्षण तो आप भी हो सकते हैं जीवन में सफल। अगर आप जीवन में सफल होना चाहते हैं तो महात्मा विदुर जी ने जो बातें उनकी नीतियां में बताई है उन का अवश्य पालन करें। तो आइए जानते हैं उन नीतियों के बारे में।

    विदुर जी कहते हैं कि हमेशा स्वस्थ रहना मनुष्य जीवन का सबसे बड़ा वरदान होता है। जो मनुष्य ज्यादा से ज्यादा बीमारियों की गिरफ्त में रहता है उसे कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बीमार पुरुष कोई भी काम ठीक से नहीं कर पाता है ऐसे मनुष्य को अपने शरीर के नुकसान के साथ-साथ धन का भी नुकसान उठाना पड़ता है इसलिए कहा जाता है की बीमारियों से बचे रहना सबसे बड़ा सुख होता है।

    दूसरी बात है किसी से उधार ना लेना। मनुष्य को अपनी आय के अनुसार ही अपनी इच्छा रखनी चाहिए। कई लोगों का मन उनके वश में नहीं होता है और वह अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए दूसरों से उधार लेते हैं। दूसरों से उधार ले कर पाई हुई सुविधाएं कभी सुख नहीं देती हैं और कभी-कभार लोग लिए हुए कर्ज को चुका नहीं पाते हैं और उसके साथ-साथ अपने परिवार को भी परेशानी में डाल देते हैं। जो मनुष्य हमेशा क़र्ज़ से बचा रहता है वह सबसे ज्यादा भाग्यशाली होता है।

    तीसरी बात है अपने देश में रहना। कई कारणों से कई लोग अपना देश छोड़कर किसी ओर देश में रहने लगते हैं। ऐसा करने का कारण चाहे जो भी हो लेकिन जो अपने देश में रहने का सुख है वह और किसी देश में नहीं मिल सकता है। जो मनुष्य अपना पूरा जीवन अपने लोगों और अपने देश में बिताता है वह सबसे ज्यादा सुखी और भाग्यशाली होता है।

    चौथी बात है अच्छे लोगों की संगति होना। जो मनुष्य अच्छे और विद्वान लोगों से दोस्ती रखता है और उनके साथ अपना समय बिताता है वह बहुत ही सुखी माना जाता है। बुरे लोगों की संगति का परिणाम भी बुरा होता है। जो मनुष्य दुष्ट और हिंसक लोगों के साथ मेल मिलाप रखता है उसे आगे चलकर कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है इसलिए जिसकी दोस्ती अच्छे लोगों के साथ होती है वह सबसे अधिक भाग्यशाली होता है।

    पांचवी बात है जीवन यापन के लिए किसी पर निर्भर रहना। जो मनुष्य अपना और अपने परिवार का जीवन यापन करने के लिए खुद धन कमाने के काबिल होता है वह बहुत ही सुखी माना जाता है। कई लोग अपना जीवन चलाने के लिए दूसरों पर निर्भर रहते हैं ऐसे लोगों का ना तो कोई स्वाभिमान होता है और ना ही दूसरों की नजर में सम्मान इसलिए जो खुद मेहनत करके अपना जीवन चलाता है उसे सबसे अधिक सुखी माना जाता है।

    छठा है निडर होकर जीना। जिसकी अपने से ज्यादा ताकतवर इंसान से दुश्मनी होती है तो वह उसी दुश्मनी के बारे में सोचता है। ताकतवर इंसान उसे और उसके परिवार को किसी तरह का भी नुकसान पहुंचा सकता है। किसी बात या किसी मनुष्य से डरने वाला मनुष्य कभी भी अपने जीवन का आनंद नहीं ले पाता है इसलिए जो व्यक्ति बिना भय के अपना जीवन जीता है वह सबसे अधिक सुखी माना जाता है।

    तो दोस्तों यह थी वह बातें जिन के बारे में विदुर जी ने बताया है। इसको पढ़ने के लिए मैं आप सभी का धन्यवाद करता हूं। यदि आपको हमारी यह पोस्ट अच्छी लगी हो तो कृपया इसे लाइक कीजिए और ऐसी ही पोस्ट पाने के लिए हमें फॉलो जरुर कीजिए धन्यवाद।

    10 सित॰ 2017

    अब्दुल कलाम के कुछ प्रेरक वक्तव्य

    By: Successlocator On: सितंबर 10, 2017
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  • दुनिया की इस भीड़ में हमें अलग दिखने के लिए कुछ ना कुछ अलग करना पड़ेगा और साथ ही साथ कुछ चीज़ो का ध्यान रखना पड़ेगा उन में से सबसे पहला ह समय

    हम चाहें तो अपने आत्मविश्वास और मेहनत के बल पर अपना भाग्य खुद लिख सकते है और अगर हमको अपना भाग्य लिखना नहीं आता तो परिस्थितियां हमारा भाग्य लिख देंगी|

    विश्वास

    विश्वास में वो शक्ति है जिससे उजड़ी हुई दुनिया में प्रकाश लाया जा सकता है| विश्वास पत्थर को भगवान बना सकता है और अविश्वास भगवान के बनाए इंसान को भी पत्थर दिल बना सकता है|

    सोच

    बारिश की दौरान सारे पक्षी आश्रय की तलाश करते है लेकिन बाज़ बादलों के ऊपर उडकर बारिश को ही avoid कर देते है। समस्याए common है, लेकिन आपका नजरिया इनमे difference पैदा करता है।

    हार ना मानना

    बीच रास्ते से लौटने का कोई फायदा नहीं क्योंकि लौटने पर आपको उतनी ही दूरी तय करनी पड़ेगी जितनी दूरी तय करने पर आप लक्ष्य तक पहुँच सकते है|

    सफलता

    दूर से हमें आगे के सभी रास्ते बंद नजर आते हैं क्योंकि सफलता के रास्ते हमारे लिए तभी खुलते जब हम उसके बिल्कुल करीब पहुँच जाते है|

    समय

    आप यह नहीं कह सकते कि आपके पास समय नहीं है क्योंकि आपको भी दिन में उतना ही समय (24 घंटे) मिलता है जितना समय महान एंव सफल लोगों को मिलता है|

    जीवन

    जब तुम पैदा हुए थे तो तुम रोए थे जबकि पूरी दुनिया ने जश्न मनाया था। अपना जीवन ऐसे जियो कि तुम्हारी मौत पर पूरी दुनिया रोए और तुम जश्न मनाओ।

    लाइन अच्छी लगी हो तो शेयर जरूर करे

    6 सित॰ 2017

    बार बार अपमान करने वालो के साथ क्या करना चाहिए जानिए

    By: Successlocator On: सितंबर 06, 2017
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  • दोस्तों कई लोग ऐसे होते हैं जिन्हें दूसरों का बेवजह अपमान करने में आनंद मिलता है । ऐसे लोग बार-बार सबके सामने किसी ना किसी की बुराई करके उन्हें अपमानित करने की कोशिश करते रहते हैं। यदि आपके साथ भी कोई ऐसा करता है तो ऐसे में आपको क्या करना चाहिए इसका जवाब खुद भगवान श्रीकृष्ण ने दिया है।

    महाभारत में श्री कृष्ण और शिशुपाल का प्रसंग प्रसिद्ध है। उसी प्रसंग से हम यह सीख सकते हैं कि यदि कोई हमारा अपमान करता है तो हमें क्या करना चाहिए। महाभारत में कृष्ण और शिशुपाल का प्रसंग काफी चर्चा में रहा है । शिशुपाल श्री कृष्ण की बुआ का पुत्र था । श्री कृष्ण ने शिशुपाल की माता को यह वचन दिया था कि वह शिशुपाल की 100 गलतियां को माफ करेगा लेकिन सो गलतियां पूरी हो जाने के बाद वह उसे उचित दंड अवश्य देगा ।

    विदर्भ राजा के पांच पुत्र थे और उनकी पुत्री थी जिसका नाम था रुकमणी । रुकमणी के माता-पिता उसका विवाह भगवान श्रीकृष्ण के साथ करना चाहते थे लेकिन रुक्मी जो रुकमणी का बड़ा भाई था वह चाहता था कि रुक्मणी का विवाह शिशुपाल के साथ हो और इसलिए उसने रुकमणी टीका शिशुपाल के यहां भिजवा दिया। रुक्मणी श्रीकृष्ण से प्रेम करती थी और इसलिए रुक्मणी ने एक ब्राह्मण के हाथों श्रीकृष्ण को संदेश भिजवा दिया।

    भगवान श्री कृष्ण भी रुक्मणी को प्रेम करते थे और वह यह भी जानते थे कि रुकमणी के माता-पिता उसका विवाह उन्हीं के साथ करना चाहते हैं लेकिन उसका बड़ा भाई रुक्मी श्रीकृष्ण को शत्रु मानता है जिसके कारण यह विवाह नहीं होने देगा। श्रीकृष्ण ने रुक्मी के विरोध के बावजूद रुकमणी से विवाह कर लिया। इस विवाह को शिशुपाल ने अपना अपमान समझा और भगवान श्रीकृष्ण को अपना शत्रु समझने लगे।

    कुछ वक्त बाद जब युधिष्ठिर ने राज सूर्य यज्ञ का आयोजन किया तो उस आयोजन में सभी राजा आमंत्रित किया गए । उसी आयोजन में शिशुपाल भी आया था जब देवता की जगह पर श्रीकृष्ण का सम्मान और पूजा करते देखा तो शिशुपाल बहुत ही क्रोधित हो गया और उसने श्रीकृष्ण को अपशब्द कहने शुरू कर दिए। यज्ञ में उपस्थित सभी लोगों ने शिशुपाल को समझाने की बहुत कोशिश की लेकिन वह नहीं माना ।

    अर्जुन और भीम तक तो शिशुपाल को मारने के लिए खड़े हो गए थे लेकिन श्रीकृष्ण ने उन दोनों को रोक दिया । शिशुपाल लगातार गालियां देता रहा और श्रीकृष्ण उनकी गालियों को गिनते रहे। जब शिशुपाल ने सौ अपशब्द कह दिए तब श्री कृष्ण ने कहा अब तुम रुक जाओ वरना परिणाम अच्छा नहीं होगा । श्रीकृष्ण के समझाने के बावजूद भी शिशुपाल नहीं रूक पाया और अपने अपशब्द कहता रहा ।

    श्रीकृष्ण के समझाने के बाद शिशुपाल के मुंह से जैसे ही पहला अपशब्द निकला श्रीकृष्ण ने अपने सुदर्शन चक्र से शिशुपाल का मस्तक काट दिया।

    दोस्तों इस प्रसंग से हम सीख ले सकते हैं यदि कोई व्यक्ति बार-बार हमारा अपमान करता है तो उसे समझाने का पूरा प्रयास करना चाहिए लेकिन यदि बार बार समझाने के बाद भी वह व्यक्ति ना समझे और आप के मान सम्मान को ठेस पहुंचाता रहे तो फिर उसे उचित जवाब देना भी जरुरी है।

    ऐसे लोगों को चुप कराने के लिए हमें श्रेष्ठ काम करना चाहिए और उसकी बातों को गलत साबित कर देना चाहिए । दोस्तों भगवान श्री कृष्ण और शिशुपाल का ये प्रसंग हमें जीवन में इस तरह के लोगों से निपटने के लिए एक बहुत अच्छी सीख देता है । जिसे अपनाकर हम अपने जीवन में कई परेशानियों को खत्म कर सकते हैं।

    3 सित॰ 2017

    बीरबल की चतुराई पूर्ण 10 जवाब

    By: Successlocator On: सितंबर 03, 2017
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  • बीरबल द्वारा दिए गए 10 प्रश्नसर्वश्रेष्ठ ...

    1- ब्रह्मांड में सबसे सुंदर रचना क्या है?

    उत्तर: माँ

    2 - कौन सा सबसे अच्छा फूल है?

    उत्तर: कपास फ्लावर

    3 - कौन सी सुगंध है?

    उत्तर: बारिश से सूखे भूमि की सुगंध

    4 - मिठास क्या है?

    उत्तर: वॉयस

    5 - सर्वश्रेष्ठ दूध-

    उत्तर: माँ

    6- सबसे काला क्या है?

    उत्तर: ब्लर

    7 - सबसे अधिक वजनदार क्या है?

    उत्तर: पाप

    8 - सबसे सस्ता क्या है?

    उत्तर: परामर्श

    9 - सबसे महंगा क्या है?

    उत्तर- सहयोग

    10- कड़वा समय क्या है?

    उत्तर: सत्य



    बहुत खूबसूरत प्रश्न और उस प्रश्न का उत्तर

    प्रश्न: जीवन क्या है?

    उत्तर: जब कोई व्यक्ति पैदा होता है, तो उसके पास नाम नहीं, लेकिन साँस और

    जब भी वह मर जाता है, केवल नाम होता है लेकिन सांस

    "नाम" और "सांस" के बीच का अंतर "जीवन" ..

    31 अग॰ 2017

    महाभारत की इन तीन बातों का ख्याल mahabharat three quotes

    By: Successlocator On: अगस्त 31, 2017
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  • महाभारत के शांतिपर्व में पितामाह भीष्म ने युधिष्ठिर को कई ज्ञान की बातें बताई थीं। वे बातें न की सिर्फ उस समय में बल्कि आज के समय में भी बहुत उपयोगी मानी जाती है। महाभारत में तीन ऐसे लोगों के बारे में बताया गया है, जो किसी भी परिस्थिति का सामना आसानी से कर सकते हैं।


    न हि बुद्धयान्वितः प्राज्ञो नीतिशास्त्रविशारदः।
    निमज्जत्यापदं प्राप्य महतीं दारुणमपि।।
    अर्थात- बुद्धिमान, विद्वान और नीतिशास्त्र में निपुण व्यक्ति भारी और भयंकर विपत्ति आने पर भी उसमें फंसता नहीं है।
    महाभारत में दी गई एक कथा के अनुसार, पांडवों के वनवास के दौरान एक बार खुद यमराज ने युधिष्ठिर की बुद्धिमानी की परीक्षा लेनी चाही। इसी उद्देश्य से यमराज ने यक्ष का रूप धारण कर लिया।
    यक्षरूपी यमराज ने सरोवर के पास एक-एक करके सभी पांडवों की परीक्षा ली, जिसमें पार न करने की वजह से युधिष्ठिर को छोड़ कर बाकी चारों पांडव सरोवर के पास मृत पड़े थे। जब युधिष्ठिर ने अपने सभी भाइयों को मरा हुआ पाया तब यक्ष से उनको जीवित करने को कहा। यक्ष ने ऐसा करने के लिए युधिष्ठिर के सामने एक शर्त रखी।
    शर्त यह थी कि धर्म युधिष्ठिर से कुछ सवाल करेंगे और अगर युधिष्ठिर ने उनके सही जवाब दे दिए, तो वह यक्ष उसने सभी भाइयों को जीवित कर देगा। ऐसी विपरीत परिस्थिति में भी युधिष्ठिर ने अपनी बुद्धिमानी से यक्ष की परीक्षा पार कर ली और अपने सभी भाइयों को फिर से जीवित करा लिया।


    इसलिए कहते है बुद्धिमान मनुष्य अपनी सुझ-बूझ से हर परेशानी का हल निकल सकता है। कहा जाता है कि जब दुर्योधन का जन्म हुआ था, तब वह जन्म होते ही गीदड़ की तरह जोर-जोर से रोने लगा और शोर मचाने लगा। विदुर महाविद्वान थे, उन्होंने दुर्योधन को देखते ही धृतराष्ट्र को उसका त्याग कर देने की सलाह दी थी।
    वह जान समझ गए थे कि यह बालक ही कौरव वंश के विनाश का कारण बनेगा। इसके अलावा विदुर ने जीवनभर अपने विद्वान होने के प्रमाण दिए हैं। वे हर समय धृतराष्ट्र को सही सलाह देते थे, लेकिन अपने पुत्र के प्यार में धृतराष्ट्र विद्वान विदुर की बातों को समझ न सकें और इसी वजह से उनके कुल का नाश हो गया।
    श्रीकृष्ण एक सफल नीतिकार थे। वे सभी तरह की नीतियों के बारे में जानते थे। कौरवों ने जीवनभर पांडवों के लिए कोई न कोई परेशानियां खड़ी की, लेकिन श्रीकृष्ण ने अपनी सफल नीतियों से पांडवों को हर वक्त सहायता की।


    अगर पांडवों के पास श्रीकृष्ण के जैसे नीतिकार न होते तो शायद पांडव युद्ध में कभी विजयी नहीं हो पाते। उसी तरह नीतियों को जानने वाले और उनका पालन करने वाले व्यक्ति के सामने कैसी भी परेशानी आ जाएं, वह उसका सामान आसानी से कर लेता है।

    18 अग॰ 2017

    एक अंजान व्यक्ति के डायरी के कुछ अंश।

    By: Successlocator On: अगस्त 18, 2017
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  • दोस्तों ये मेरी पोस्ट एक अंजान व्यक्ति के डायरी के कुछ अंश बहुत ही अनोखा अध्याय है,मै ये नहीं जानता की ये किस व्यक्ति के है ये डायरिया मुझे एक मित्र के भंगार की दुकान पर मिली और मै उसे ले आया मैंने पढ़ा और मुझे अच्छा लगा तो मैंने सोचा की ये आप लोगो के साथ भी साझा करू शायद ये आप लोगो के भी जीवन में कुछ काम आये।मै ये अध्याय उस व्यक्ति के ही सब्दो में सीधे सीधे आपके समक्ष रखूँगा मैं इसमें किसी प्रकार का बदलाव नहीं करूँगा।
                                                                16 मई 1987
    आज शनिवार है ,आज का दिन काफी अच्छा रहा आज मैं सदानंद जी से मिला जिन्होंने मुझे व्यापर करने के फायदे बताये और कुछ नयी योजनाये भी बताई ।बहुत अच्छा लगा मुझे बहुत सारे व्यापर करने की योजनाएं बनाते और उन पर काम करते करते लगभग नौ महीने हो गए है और लगभग कोई भी व्यापर सफल नहीं रहा, मैंने सबसे पहले मजदूरों का ठेका लेने का काम चालू किया उसमे मै उन्हें सँभाल न पाया और वह ठेका मेरा एक महीने के अंदर खत्म हो गया ,फिर मैंने कपड़ो का व्यापार किया वह भी लगभग असफल रहा।इससे मै बहुत दुखी और आहत हुआ और लगभग दो तीन महीने से कुछ नहीं करने की सोच कर पूरा ध्यान नॉकरी पर लगाया।परंतु नॉकरी से मेरा मन ऊब जाता है ।आज फिर से मेरे मन में एक योजना आयी है और मै नॉकरी के साथ में उस काम को कर सकता हु।
    दोस्तों इस अंश में एक ऐसे व्यक्ति के बारे में बताया गया है जो कभी हार नहीं मानता एक बार असफल हुआ दुबारा पुनः प्रयास किया फिर असफल हुआ फिर नयी शक्ति के साथ प्रयाश को तत्पर ।
    दोस्तों ये डायरिया मैंने पूरी नहीं पढ़ी है मैं अभी इन्हें पढ़ रहा हु जैसे ही मुझे इसमें कुछ आप लोगो के लिए उपयोगी लगेगा मै जरूर बताऊंगा।

    4 मार्च 2017

    किस्मत कभी ख़राब नहीं होती।

    By: Successlocator On: मार्च 04, 2017
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  • लोगो को अक्सर आपने कहते हुए सुना होगा "यार मेरी तो किस्मत ही ख़राब है,मेरा कोई भी कम सही नहीं होता या फिर होते  होते रह जाता है"और इस तरह वो उदास रहते है। और कई बार तो ऐसा होता है कि वो अपना काम उतनी ईमानदारी से नहीं कर पाते जितनी उस काम को सफल होने के लिए चाहिए।दोस्तों अगर आप ऐसा सोचने वालो में से है तो ये पोस्ट आपके ही लिए है। और आज आप इसे इकमिनान से पढ़े ।मुझे यकीन है इस पोस्ट को पढ़ने के बाद आपके सोचने का नजरिया जरूर बदलेगा,और आप कामयाबी की नयी परिभाषा लिखेंगे।

    जब भी हमें अपने सोच के मुताबिक कुछ नहीं मिलता या फिर कभी कभी या कहे तो दो तीन बार लगातार असफलता हाथ लगती है तो हमारे मन में एक ही ख्याल आता है,मेरी किस्मत ही ख़राब है,और बस यही से चालू होती है हमारी नकारात्मक सोच जो समय के साथ बढ़ती जाती है अगर उसपर लगाम न लगाया जाये ।एक हमारे मित्र है ,जो हमेशा मिलते है तो बस यही कहते है भाई मेरी किस्मत बहुत ख़राब है मेरा कोई भी कम एक बार में तो होता ही नही हर काम तीसरी बार में होता है और उसकी बातों से ऐसा लगता भी था तो मैंने जानने के लिए मैंने उससे कुछ कामो पर नजर रखी और कुछ जगहों पर सही भी पाया। मेरे उस पर किये गए विश्लेषण से पता चला की उसने अपने दिमाग में ये गांठ बना रखी है जो काम उसका एक बार में होता है उसे वह नगण्य कर देता था  पर दोस्तों इसका ये मतलब नहीं उसका कोई काम एक बार में नहीं हो सकता बस सोच बदलने की और ईमानदारी से कम करने की जरुरत है । दोस्तों शायद आपको पता होगा की थॉमस अल्वा एडिशन अपने पहले अविष्कार में सफल होने से पहले 1000 बार फ़ैल हुए थे,आपकी जानकारी के लिए बता दू इलेक्ट्रिक बल्ब की खोज उन्होंने ही की थी,इस प्रकार की हजारों खोजें उनके नाम दर्ज है।

    किस्मत तो उनकी ख़राब होती है जो अपने काम में अपना 100% नहीं देते और बस कह देते है मेरी तो किस्मत ख़राब है,किस्मत को दोष देने से अच्छा है अपनी जिम्मेदारी लेना सीखे जिस दिन ये सीख गए समझो किस्मत कभी ख़राब ही नहीं थी।

    "ईमानदारी से की गई हर कोशिश में मिली असफलता का अर्थ,सफलता तक पहुचने में कुछ कदम ही शेष है।"।कहने का अर्थ है बस आप फिर प्रयाश करेंगे तो आप उसे प्राप्त कर ही लेंगे।एक सोच दिमाग में रख कर काम करना है कि दुनिया में ऐसा कोई काम नहीं जो मनुष्य नही कर सकता।

    26 फ़र॰ 2017

    हम कैसे माने की हम सफल है ?

    By: Successlocator On: फ़रवरी 26, 2017
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  • आज की पोस्ट हमारे उन सभी मित्रों के लिए है जो हमेशा इस असमंजस में रहते है कि हम सफल कब होंगे और पता कैसे चलेगा कि हम सफल हो गए। दोस्तों इसका सीधा जवाब है आप किसी और से न पूछ कर अपने आप से पूंछे ,अब आप में से कुछ कहेंगे कि अपने आप से कैसे पूंछे कुछ पता नहीं चलता,तो दोस्तों इसके लिए चलिये एक प्रयोग करते है ।
    सबसे पहले आप एक लक्ष्य निर्धारित कीजिए ,लक्ष्य छोटा या बड़ा कैसा भी हो सकता है जैसे उदहारण के लिए आपने लक्ष्य बनाया की मैं आज एक अध्याय समाप्त करूँगा रात्रि में सोने से पहले ,फिर आप उस अध्याय को पूरा करने का भरकस प्रयास करिये ।रात्रि में सोने से पहले आप अपने लक्ष्य को याद करिये और अपने पूरे दिन का अवलोकन करिये ,अपने आप से पूछिये की क्या आपने ईमानदारी से अपना काम किया ,क्या मेरा आज का अध्याय समाप्त हुआ । यदि इसके बाद आपको लगता है कि हां सचमुच मैंने अपना काम ईमानदारी से समाप्त किया है ,तो आप अपना आज का लक्ष्य पाने में सफल हो गए।सफलता बड़ी हो या छोटी उसका आंकलन आप ऐसे ही कर सकते है।
    बड़ी सफलता छोटी छोटी सफलताओ का समूह होती है,इसलिए बड़ी सफलता के लिए भी आप छोटे छोटे लक्ष्य बनाए,उन्हें पूरा करे और फिर उसे अपनी बड़ी सफलता के साथ जोड़ कर देखे की वो मेरे मुख्य लक्ष्य को कितना करीब लाती है। पर इन सबके लिए जरुरी है समय समय पर अपना  आंकलन जो हमें अपनी सही स्थिति का एहसास करता है और हमारी कमियों से  अवगत कराता है।
    तो दोस्तों आपको मेरी पोस्ट कैसी लगी आप हमें कमेंट में जरूर बताये आप हमसे कमेंट में कोई भी सवाल पूछ सकते है।

    1 फ़र॰ 2017

    खुद को motivate करने के 16 तरीके

    By: Successlocator On: फ़रवरी 01, 2017
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  • हममें से सबसे अधिक motivated लोग भी- आप,मैं, Tony Robbins (a self-help expert like Shiv Khera) – कभी -कभार demotivated feel कर सकते हैं. यहाँ तक की , कभी-कभी हम इतना low feel कर सकते हैं  कि positive बदलाव के बारे में सोचना भी बहुत कठिन लगने लगता है.
    पर ये निराशाजनक नहीं है: छोटे छोटे steps लेकर आप सकारात्मक बदलाव के रास्ते पर वापस आ सकते हैं.

    हाँ , मैं जानता हूँ, कभी कभी ये असंभव लगता है. आपको कुछ करने का मन नहीं करता. मेरे साथ भी ये हुआ है,दरअसल अभी भी समय समय पर मैं ऐसा feel करता हूँ. आप अकेले नहीं हैं . लेकिन मैंने इस निराशा से बाहर निकलने के कुछ तरीके सीख लिए हैं, और हम आज उन्ही पर नज़र डालेंगे.

    जब बीमारी , चोट या life में चल रही किसी और समस्या के कारण में व्यायाम नहीं कर पाता तो उसे वापस से शुरू करना कठिन होता है. कई बार, मैं उसके बारे में सोचना भी नहीं चाहता . लेकिन मैं हमेशा उस  feeling से उबरने का कोई ना कोई रास्ता निकाल लेता हूँ, और यहाँ ऐसी ही कुछ बाते हैं जो मेरे लिए मददगार साबित होती हैं.

     1. One Goal  एक लक्ष्य
    पेट में यह पीकर...

    जब भी मैं  थोडा down हुआ हूँ , मैंने पाया है कि अक्सर ऐसा इसलिए होता है क्योंकि मेरी life में एक साथ बहुत कुछ चल रहा होता है. मैं बहुत कुछ करने की कोशिश कर रहा होता हूँ. और ये मेरी energy और motivation को ख़तम कर देता है. शायद ये सबसे common mistake है जो लोग करते हैं: वो एक साथ बहुत कुछ करने की कोशिश करते हैं. यदि एक समय में दो या उससे अधिक लक्ष्य achieve करने का प्रयास करते हैं तो आप अपनी  ( लक्ष्य पाने के लिए दो सबसे महत्त्वपूर्ण चीजें ) energy और focus बनाये नहीं रख पाते.  ये संभव नहीं है – मैंने कई बार कोशिश की है. आपको अभी के लिए कोई एक लक्ष्य चुनना होगा, और पूरी तरह से उसपर focus करना होगा. मुझे पाता है ये कठिन है, पर मैं अपने experience से बता रहा हूँ. एक बार आप अपना अभी का निर्धारित लक्ष्य प्राप्त कर लें फिर उसके बाद आप अपने बाकी लक्ष्य प्राप्त कर सकते हैं.

    2. Find Inspiration प्रेरणा खोजिये

    मुझे उन लोगों से प्रेरणा मिलती है जिन लोगों already वो achieve कर लिया है जो मैं करना चाहता हूँ, या वो लोग जो वही कर रहे हैं जो मैं करना चाहता हूँ. मैं औरों के blogs, books,magazines पढता हूँ. मैं अपने goals को Google करता हूँ , और success stories पढता हूँ.  Zen Habits ऐसी ही जगहों में से एक है, सिर्फ मुझसे ही नहीं बल्कि अन्य कई readers से जिन्होंने अद्भुत चीजें प्राप्त की हैं.
    3. Get Excited उत्साहित होइए

    ये सुनने में बहुत obvious सी बात लगती है, पर ज्यादातर लोग इस बारे में अधिक नहीं  सोचते हैं: अगर आप निराशा से निकलना चाहते हैं, तो किसी लक्ष्य के लिए उत्साहित हो जाइये. पर अगर आप motivated नहीं feel करते हैं तो आप excited कैसे feel करेंगे? Well, इसकी शुरुआत दूसरों से प्रेरणा लेकर होती है, लेकिन आपको दूसरों से उत्साह लेकर उसे अपनी उर्जा में बदलना होगा.मैंने पाया है कि  मैं अपनी wife और अन्य लोगों से बात करके, इस बारे में ज्यादा से ज्यादा पढ़कर, और इसे  visualize (दिमाग  में  goal achieve करने से होने वाले फायदे को देखना ) करके कि  successful होना कैसा लगेगा, excited feel करने लगता हूँ. एक बार ये कर लिया तो बस इसी energy को आगे carry करने और आगे बढ़ने की ज़रुरत रहती है.

    4.Build Anticipation अपेक्षा करें

    ये सुनने में कुछ कठिन लग सकता है, और अकी लोग इस tip को skip कर देंगे. लेकिन ये सचमुच काम करती है. कई बार असफल प्रयासों के बाद इसी टिप की वजह से मैं cigarette पीना छोड़ पाया.अगर आपको अपना goal achieve करने की प्रेरणा मिल जाती है तो  तुरंत उसे प्राप्त करने का प्रयास ना करें. हममें से कई लोग excited होके आज ही अपना काम शुरू करना चाहेंगे. ये एक गलती है. Future की कोई date set कीजिये – एक या दो हफ्ते बाद , या एक महीना भी  – और उसे अपनी Start Date बनाइये. उसे कैलेण्डर पर mark कर लीजिये. उस date को लेकर उत्साहित होइए. उसे अपने जीवन की  सबसे important date बना लीजिये. इस बीच अपना प्लान बनाइये. और नीचे दिए गए कुछ steps follow कीजिये. क्योंकि अपनी start delay करके आप anticipation build करते हैं और अपने लक्ष्य के प्रति अपनी उर्जा और ध्यान बढाते हैं.
    5. Post your goal  अपना लक्ष्य प्रकाशित करें

    अपने goal का एक बड़ा सा print निकाल लें. अपना लक्ष्य कुछ ही शब्दों में लिखें , जैसे कोई मन्त्र  (“Exercise 15 mins. Daily”), और उसे अपने दीवार या फ्रिज पर चिपका दें. इसे अपने घर में अपने office में लगा लें उसे अपने computer के desktop पर लगा लें. आप अपने goals के लिए बड़े reminders लगाना चाहते हैं , ताकि  आप अपने goal पर focus कर पाएं और उसे लेकर excited रह पाएं. अपने goal से सम्बंधित कोई picture लगाना भी  helpful हो सकता है  (like a model with sexy abs, for example).

    6.Commit Publicly सार्वजनिक रूप से प्रतिज्ञा लीजिये

    कोई भी दूसरों के सामने बुरा नहीं दिखना चाहता है . जो बात हमने publicly कही है उसे करने के लिए हम extra effort करते हैं. For example, जब मैं अपनी पहली मैराथन दौड़ दौड़ना चाहता था , तब मैंने अपने  local newspaper में इस बारे में एक column लिखना शुरू कर दिया. Guam की पूरी आबादी मेरे इस goal के बारे में जान गयी. अब मैं पीछे नहीं हट सकता था , हालांकि मेरी motivation कम -ज्यादा होती रही पर मैं इस goal को पकडे रहा और दौड़ complete की.आपको किसी newspaper में अपना goal commit करने की ज़रुरत नहीं है , पर आप इसे अपने family,friends, और co-workers से बता सकते हैं, और यदि आपका कोई blog है तो उसपर भी इस बारे में लिख सकते हैं.और खुद को जिम्मेदार ठेराइये – केवल एक बार commit मत करिए , बल्कि अपने progress के बारे में सभी को हर हफ्ते या महीने update करने के लिए भी commit करिए.

    7. Think about it daily इस बारे में रोज़ सोचिये



    यदि आप रोज़ अपने लक्ष्य के बारे में सोचते हैं तो उसके पूर्ण होने की संभावना कहीं अधिक है. इसीलिए अपने लक्ष्य को दीवार पर या desktop पर लगाना मददगार होता है . हर रोज़ खुद को reminder भेजना भी helpful होता है. और अगर आप रोज बस पांच मिनट भी ये छोटा सा काम करेंगे तो ये लगभग तय है की आपका लक्ष्य पूर्ण होगा.
    8. Get Support.  मदद लीजिये

    अकेले कुछ हांसिल करना कठिन होता है. जब मैंने मैराथन में दौड़ने का निश्चय किया था , तो मेरे साथ दोस्तों और परिवार का support था, और साथ ही Guam में दौड़ने वालों की एक अच्छी community भी थी  जो मेरे साथ दौड़ते थे और मुझे encourage करते थे. जब मैंने smoking quit करनी चाही तो मैंने एक online forum join कर लिया , जो मेरे लिए बहुत helpful रहा. और इस काम में मेरी wife Eva  ने हर कदम पर मेरा साथ दिया. मैं उसकी और अन्य लोगों की मदद के बिना ऐसा नहीं कर पाता. अपना support network खोजिये , अपने आस-पास  या online या दोनों जगह.

    9. Realize that there’s an ebb and flow इस बात को समझिये की उतार-चढ़ाव आते रहते हैं

    Motivation कोई ऐसी चीज नहीं है जो हमेशा आपके साथ रहे. ये आती है , जाती है और फिर आती है, ज्वार की तरह . इस बात को समझिये की भले ही ये चली जाए , पर वो हमेशा के लिए नहीं चली जाती . Motivation वापस आती है.  बस अपने लक्ष्य से जुड़े रहिये और motivation के वापस आने का इंतज़ार कीजिय. इस दौरान अपने लक्ष्य के बारे में पढ़िए , दूसरों से मदद मांगिये , और यहाँ बताई अन्य  कुछ चीजें कीजिये जब तक की आप का motivation वापस ना आ जाये.

    10. Stick with it. लगे रहिये

    आप चाहे जो कुछ भी करिए , पर हार नहीं मानिए. भले आप आज या इस हफ्ते बिलकुल  ही motivated ना feel कर रहे हों , पर अपना लक्ष्य छोड़िये नहीं. आपकी motivation फिर वापस आएगी . अपने लक्ष्य को एक लम्बी यात्रा की तरह देखिये , और बीच में जो demotivation  आता है वो महज़ एक speed-breaker है. छोटी मोती बाधाएं आने पर  आप यात्रा नहीं छोड़ते. लम्बे समय तक अपने लक्ष्य के साथ जुड़े रहिये , उतार-चढ़ाव पार कीजिये और आप वहां पहुँच जायेंगे.

    11.Start small. Really small छोटे, बहुत छोटे से शुरुआत कीजिये

    अगर आपको शुरुआत करने में दिक्कत  हो  रही है तो शायद इसकी वजह ये है की आप बहुत बड़ा सोच रहे हैं. यदि आप व्यायाम करना चाहता हैं, तो शायद आप सोच रहे हों की हफ्ते में पांच दिन intensely workout करना है. नहीं – इसकी जगह छोटे-छोटे baby steps लीजिये. सिर्फ दो मिनट व्यायाम कीजिये. मुझे पता है ये आपको अटपटा लग रहा होगा. ये इतना आसान है, आप fail नहीं हो सकते. पर आप इसे करिए . बस कुछ crunches, 2 pushups, और वहीँ थोड़ी सी jogging. जब आपने एक हफ्ते तक ये २ मिनट तक कर लेंगे , तो इसे बढाकर पांच मिनट कर दीजिये , और एक हफ्ते तक इसे कीजिये. एक महीने में आप 15-20 मिनट करने लगेंगे. सुबह जल्दी उठाना चाहते हैं ? सुबह पांच बजे उठने का मत सोचिये, इसकी जगह आप एक हफ्ते तक बस 10 मिनट पहले उठिए . एक बार आपने ये कर लिया , तो 10 मिनट और जल्दी उठिए. Baby Steps.

    12.Build on small successes छोटी छोटी उपलब्धियों के साथ आगे बढिए

    एक बार फिर , अगर आप एक हफ्ते तक छोटे लक्ष्य के साथ शुरू करेंगे तो आप सफल होंगे. अगर किसी बेहद आसान चीज से शुरुआत करेंगे तो आप fail नहीं हो सकते. भला कौन दो मिनट तक exercise नहीं कर सकता? ( यदि आप वो हैं, तो मैं माफ़ी मांगता हूँ) और आप successful feel करेंगे , आपको अन्दर से अच्छा लगेगा. इसी feeling के साथ और छोटे-छोटे steps लेते  जाइये . For example : अपनी exercise routine में दो-तीन मिनट add करिए. हर एक step के साथ (और हर स्टेप कम से कम एक हफ्ते चलना चाहिए), और आप और भी successful feel करेंगे. हर एक स्टेप बहुत बहुत छोटा रखिये और आप fail नहीं होंगे. दो महीने बाद , आपके छोटे छोटे कदम आपको बहुत सारी progress और success दिलाएंगे

    13.Read about it daily. रोज़ इसके बारे में पढ़ें

    जब मैं अपना motivation lose करता हूँ , मैं अपने लक्ष्य से सम्बंधित कोई किताब या ब्लॉग पढता हूँ. ये मुझे प्रेरित करता है और मुझे दृढ बनता है. किसी वजह से आप जो कुछ भी पढ़ते हैं वो आपको उस विषय में प्रेरित करता है और आपका ध्यान केन्द्रित करने में मदद करता है. इसलिए अगर आप पढ़ सकते हैं तो रोज़ अपने लक्ष्य के बारे में पढ़िए , खासतौर से तब जब आप motivated ना feel कर रहे हों.

    14.Call for help when your motivation ebbs  जब प्रेरणा कम हो तब मदद मांगिये

    समस्या है? मदद मांगिये. मुझे email करिए. कोई online forum join करिए. अपने लिए कोई partner खोजिये. अपनी माँ को call कीजिये. इससे मतलब नहीं है की सामने वाला कौन है , बस अपनी समस्या बताइए , इस बारे में बात करना आपके लिए helpful होगा. उनकी advice मांगिये . उनसे आपको demotivated state से निकालने के लिए मदद करने के लिए कहिये. ये काम करता है.

    15.Think about the benefits, not the difficulties. फायदों के बारे में सोचिये परेशानियों के बारे में नहीं

    एक common problem है कि हम ये सोचते हैंकि कोई चीज कितनी कठिन है . Exercise करना बहुत कठिन लगता है ! इसके बारे में सोचना ही आपको थका देता है.पर ये सोचना कि बजाये की कोई चीज कितनी कठिन है , ये सोचिये की उसके कितने फायदे हैं.   For Example, ये सोचने की  जगह कि  व्यायाम करना कितना कठिन है;आप ये सोचिये की ये करने के बाद आप कितना अच्छा feel करेंगे, और long run में आप कितने healthier और slimmer होंगे. किसी चीज के फायदे आपको energize कर देंगे.

    16.Squash negative thoughts; replace them with positive ones. नकारात्मक विचारों को त्यागिये और उन्हें सकारात्मक विचारों से बदल दीजिये

    अपने विचारों को monitor करना ज़रूरी है. आप जो negative self-talk करते हैं, जो दरअसल आपको demotivate कर रहा है  उसे पहचानिए. कुछ दिन बस ये जानने में बिताइए कि आपके अन्दर कौन कौन से नकारात्मक विचार हैं, और फिर कुछ दिनों  बाद उन्हें एक bug की तरह अपने अन्दर से निकालिए , और फिर उन्हें corresponding positive thought से replace कर दीजिये . अगर आप सोचते हैं कि ,” ये बहुत कठिन है” तो उसे ” मैं ये कर सकता हूँ” से बदल दीजिये . अगर वो Leo इसे कर सकता है , तो मैं भी! ये कुछ अटपटा सुने देता है , पर ये काम करता है. सचमुच.

    13 जन॰ 2017

    Andrew Carnegie की कहानी जिसने सफलता की परिभाशा ही बदल दी।

    By: Successlocator On: जनवरी 13, 2017
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  • स्वामी विवेकानंद ने कहा है कि दुनिया में तीन तरह के लोग होते हैं –
    1 . ये वो हैं जो समय के साथ खुद को नहीं बदलते और पिछड़ जाते हैं ,
    2. ये वो लोग हैं वो समय के साथ खुद को बदल लेते हैं और आगे बड़ जाते हैं
    3. ये वो लोग हैं जो समय के अनुसार नहीं बदलते बल्कि समय को ही अपने अनुसार बदल देते हैं और इन्हीं को युगपुरुष कहा जाता हैं जो सदियों में एक बार जन्म लेते हैं ।

    Andrew Carnegie ये नाम है उस शख्स का जिसे स्टील टाइकून(स्टील किंग) कहा जाता है । जो अपने धैर्य और परिश्रम की वजह से दुनियां के सबसे अमीर आदमी बने । इनका जन्म एक बहुत ही गरीब परिवार में हुआ था जिनके पास दो वक्त का खाना जुटाने के लिए भी पैसे नहीं थे और केवल एक कमरे का घर था । ये स्कॉटलैंड के रहने वाले थे लेकिन गरीबी और भुखमरी की वजह से ये लोग काम की तलाश में अमेरिका आ गए । घर की दरिद्रता की वजह से ऐन्ड्रू की पढ़ाई भी नहीं हो पायी और 13 साल की छोटी सी उम्र में घर घर का भार सँभालने की जिम्मेदारी कन्धों पे आ गयी ।
    13 साल के ऐन्ड्रू ने एक कपड़े बनाने की फैक्ट्री में छोटी सी नौकरी कर ली जहाँ उसे 12 घंटे और सातों दिन कठिन परिश्रम करना पढता , लेकिन जिस इंसान में लगन होती है वही कोयले से हीरा बनाने का माद्दा रखते हैं । ऐन्ड्रू काम से समय निकाल कर सफल लोगों की कहानियां पढता था उनसे प्रेरणा लेता था । धीरे -धीरे समय बीतता गया , ऐन्ड्रू ने कुछ दिन बाद एक पोस्टमैन की नौकरी भी की । शहर में बड़ी लाइब्रेरी थी जहाँ किताबों का विशाल संकलन था । ऐन्ड्रू वक्त निकाल कर लाइब्रेरी में पढता रहता था । यहाँ उसने कुछ इंटस्ट्री और बिज़निस के बारे में सीखा , नौकरी करते हुए कुछ पैसे इकट्ठे किये और धीरे धीरे स्टील बनाने वाली कम्पनीयों में इन्वेस्ट करने लगे जिससे उन्हें अच्छी इनकम हो जाती थी इसी तरह समय का चक्र चलता गया और फिर ऐन्ड्रू ने एक दिन अपनी खुद की कंपनी बनाने की सोची ।

    यही सोचकर Carnegie Steel Corporation नाम की एक कंपनी की स्थापना की शुरुआत में कंपनी औसत रही लेकिन ये ऐन्ड्रू कार्नेगी की मेहनत और लगन का ही नतीजा था की कुछ ही सालो में ऐन्ड्रू स्टील किंग बन गए और बहुत जल्द उन्हें Builders of America का अवार्ड मिला । एक समय था जब ऐन्ड्रू कार्नेगी की अकेली कंपनी पूरे ब्रिटेन से ज्यादा स्टील उत्पादन करती थी । और इसी लगन ने एक दिन ऐन्ड्रू को बना दिया “दुनिया का सबसे अमीर इंसान “, 1889 में ऐन्ड्रू कार्नेगी को दुनिया का सबसे अमीर इंसान घोषित किया गया ।
    अपनी लगन और परिश्रम से ऐन्ड्रू ने इतिहास को बदल कर रख दिया जिस व्यक्ति का परिवार एक समय भुखमरी से जूझा हो उसके लिए दुनिया का सबसे अमीर आदमी बनना एक मिशाल पेश करने से काम नहीं हैं ।

    तो मित्रों दृंढ निश्चय और मेहनत से पहाड़ो का भी सीना चीरा जा सकता है बस जरुरत है अपने आत्मविश्वाश को जगाने की

    12 जन॰ 2017

    अगर सफल होना है तो लोगों की परवाह करना छोड़ दो|

    By: Successlocator On: जनवरी 12, 2017
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  • दोस्तों असफलता अपनी मंजिल को पाने का एक महत्वपूर्ण पहलू है. अगर हमें सफल होना है तो अपनी असफलताओं का डट कर मुकाबला करना होगा. आप दुनिया के कितने भी अच्छे से अच्छे काम की शुरुआत करने की कोशिश कीजिये, आपको कोई न कोई तो उसके बारे में नकारात्मक विचार देने वाला मिल ही जायेगा. अपनी जिन्दगी के सफ़र में हमारा कई बार असफलताओं से सामना हो सकता है. इस दौरान हम यह सोच कर कि लोग हमारे बारे में क्या कहेंगे, हमारी इज्जत का क्या होगा, रिश्तेदारों को हम क्या जबाब देंगे, हम मानसिक तनाव तो झेलते ही है साथ ही साथ हम अपने जीवन का भी नाश कर लेते हैं.

    अगर आगे बढ़ना है तो ये मत सोचो की लोग क्या कहेंगे? सीधी सी बात है दोस्तों अगर सफल होना है तो लोगो की परवाह करना छोड़ दो. जो आपको अच्छा और सच्चा लगे बस वही काम करते रहो. मैं यह नहीं कहता कि हमें किसी की राय नहीं लेनी चाहिए या फिर किसी का सुझाव नहीं मानना चाहिए, बल्कि हमें हर एक व्यक्ति के विचार सुनने चाहिए और जो विचार हमें अच्छे और सच्चे लगे उन्हें अपने जीवन में, अपने काम में अपना लेने चाहिए. लेकिन दोस्तों बहुत बार देखा जाता है कि हम दूसरों की बातों से  निरासा के जाल में घिर जाते हैं.
    इस बात को अच्छे से समझने के लिए ये कहानी जरुर पढ़ें और उसके बाद मैं अपनी कुछ personal experience share करने की कोशिश करूँगा. उम्मीद है आप लोगों को मेरी यह कोशिश ज़रूर पसंद आएगी.

    एक बार रामलाल नाम का व्यक्ति अपने बेटे को गधे पर बैठा कर कहीं जा रहा था. कुछ दूर चलने पर उन्हें दो लोगो को आपस में बात करते हुए दिखाई दिए वो कह रहे थे “देखो भाई आज कल क्या जमाना आ गया है. बेटा मजे से गधे पर सवारी कर रहा है और बाप पैदल चल रहा है.”

    दुसरे ने कहा “हां भाई अब बच्चों में पहले जैसे संस्कार कहाँ.”

    यह सब सुन कर रामलाल ने तुरंत अपने बेटे को गधे से नीचे उतार दिया और खुद उस गधे पर बैठ गये और चलने लगे. कुछ दूर चलने के बाद रामलाल को कुछ महिलाएं यह कहते हुए सुनाई दी कि “अरे! ये देखो कितना बुरा बाप, खुद तो गधे पर बैठा है और बेचारे बच्चे को पैदल चला रहा है.”


    महिलाओं की बात सुन कर रामलाल ने अपने बेटे को भी अपने साथ गधे पर बैठा लिया और आगे चलने लगे. कुछ दूर चलने पर उन्हें एक बुजुर्ग व्यक्ति मिला और रामलाल को कहने लगा “अरे मुर्ख व्यक्ति! तुम्हे शर्म नही आती है? एक बेजान प्राणी पर दोनों बाप-बेटा बैठे हो. इस बेचारे गधे पर कुछ तो दया करो.” उस बुजुर्ग की बातें सुनकर रामलाल का दिमाग खराब होने लगा. फिर उसने सोचा कि अब हम दोनों पैदल ही चलेंगे. फिर दोनों बाप और बेटा गधे के साथ पैदल ही चलने लगे. वो तीनो कुछ दूर ही चले थे कि रामलाल को कुछ लोग उन पर जोर-जोर से हँसते हुए दिखाई दिए और कह रहे थे कि “ये देखो दुनिया के सबसे बड़े मुर्ख जो इतना अच्छा गधा होते हुआ भी दोनों पैदल चल रहे है.”


    तो दोस्तों इस कहानी का एक मात्र आशय ही की आपको समझाना दुनिया की परवाह किये बिना जो आपका दिल कहे करिये ।और आपने वो कहावत तो सुनी ही होगी

    "जब जब जिस पर दुनिया हसी है तब तब उसी ने इतिहास रचा है"।

    11 जन॰ 2017

    संस्कृत श्लोक - sanskrit shloka

    By: Successlocator On: जनवरी 11, 2017
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  • आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः । नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति ।।

     भावार्थ :
    मनुष्य का सबसे बड़ा दुश्मन उसमे बसने वाला आलस्य हैं । मनुष्य का सबसे बड़ा मित्र उसका परिश्रम हैं जो हमेशा उसके साथ रहता हैं इसलिए वह दुखी नहीं रहता ।

    यथा ह्येकेन चक्रेण न रथस्य गतिर्भवेत् । एवं परुषकारेण विना दैवं न सिद्ध्यति ॥

     भावार्थ :
    रथ कभी एक पहिये पर नहीं चल सकता हैं उसी प्रकार पुरुषार्थ विहीन व्यक्ति का भाग्य सिद्ध नहीं होता ।
    जाड्यं धियो हरति सिंचति वाचि सत्यं , मानोन्नतिं दिशति पापमपाकरोति । चेतः प्रसादयति दिक्षु तनोति कीर्तिं , सत्संगतिः कथय किं न करोति पुंसाम् ॥

     भावार्थ :
    अच्छी संगति जीवन का आधार हैं अगर अच्छे मित्र साथ हैं तो मुर्ख भी ज्ञानी बन जाता हैं झूठ बोलने वाला सच बोलने लगता हैं, अच्छी संगति से मान प्रतिष्ठा बढ़ती हैं पापी दोषमुक्त हो जाता हैं । मिजाज खुश रहने लगता हैं और यश सभी दिशाओं में फैलता हैं, मनुष्य का कौन सा भला नहीं होता ।
    अयं निजः परो वेति गणना लघु चेतसाम् । उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम् ॥

     भावार्थ :
    तेरा मेरा करने वाले लोगो की सोच उन्हें बहुत कम देती हैं उन्हें छोटा बना देती हैं जबकि जो व्यक्ति सभी का हित सोचते हैं उदार चरित्र के हैं पूरा संसार ही उसका परिवार होता हैं ।
    पुस्तकस्था तु या विद्या ,परहस्तगतं च धनम् । कार्यकाले समुत्तपन्ने न सा विद्या न तद् धनम् ॥

     भावार्थ :
    किताबों मे छपा अक्षर ज्ञान एवम दूसरों को दिया धन यह दोनों मुसीबत में कभी काम नहीं आते ।
    अलसस्य कुतो विद्या , अविद्यस्य कुतो धनम् । अधनस्य कुतो मित्रम् , अमित्रस्य कुतः सुखम् ॥

     भावार्थ :
    जो आलस करते हैं उन्हें विद्या नहीं मिलती, जिनके पास विद्या नहीं होती वो धन नहीं कमा सकता, जो निर्धन हैं उनके मित्र नहीं होते और मित्र के बिना सुख की प्राप्ति नहीं होती ।
    बलवानप्यशक्तोऽसौ धनवानपि निर्धनः । श्रुतवानपि मूर्खोऽसौ यो धर्मविमुखो जनः ॥

     भावार्थ :
    जो व्यक्ति कर्मठ नहीं हैं अपना धर्म नहीं निभाता वो शक्तिशाली होते हुए भी निर्बल हैं, धनी होते हुए भी गरीब हैं और पढ़े लिखे होते हुये भी अज्ञानी हैं ।
    चन्दनं शीतलं लोके ,चन्दनादपि चन्द्रमाः । चन्द्रचन्दनयोर्मध्ये शीतला साधुसंगतिः ॥

     भावार्थ :
    चन्दन को संसार में सबसे शीतल लेप माना गया हैं लेकिन कहते हैं चंद्रमा उससे भी ज्यादा शीतलता देता हैं लेकिन इन सबके अलावा अच्छे मित्रो का साथ सबसे अधिक शीतलता एवम शांति देता हैं ।
    अष्टादश पुराणेषु व्यासस्य वचनद्वयम् । परोपकारः पुण्याय पापाय परपीडनम् ॥

     भावार्थ :
    महर्षि वेदव्यास ने अपने पुराण में दो बाते कही हैं जिनमें पहली हैं दूसरों का भला करना पुण्य हैं और दूसरी दुसरो को अपनी वजह से दुखी करना ही पापा है ।
    श्रोत्रं श्रुतेनैव न कुंडलेन , दानेन पाणिर्न तु कंकणेन , विभाति कायः करुणापराणां , परोपकारैर्न तु चन्दनेन ॥

     भावार्थ :
    कुंडल पहन लेने से कानों की शोभा नहीं बढ़ती,कानों की शोभा शिक्षा प्रद बातों को सुनने से बढ़ती हैं । उसी प्रकार हाथों में कंगन धारण करने से वे सुन्दर नहीं होते उनकी शोभा शुभ कार्यों अर्थात दान देने से बढ़ती हैं । परहित करने वाले सज्जनों का शरीर भी चन्दन से नहीं अपितु परहित मे किये गये कार्यों से शोभायमान होता हैं ।
    पुस्तकस्था तु या विद्या ,परहस्तगतं च धनम् । कार्यकाले समुत्तपन्ने न सा विद्या न तद् धनम् ॥

     भावार्थ :
    किताबों मे छपा अक्षर ज्ञान एवम दूसरों को दिया धन यह दोनों मुसीबत में कभी काम नहीं आते ।
    सहसा विदधीत न क्रियामविवेकः परमापदां पदम् । वृणते हि विमृश्यकारिणं गुणलुब्धाः स्वयमेव संपदः ॥

     भावार्थ :
    जल्दबाजी में कोई कार्य नहीं करना चाहिए क्यूंकि बिना सोचे किया गया कार्य घर में विपत्तियों को आमंत्रण देता हैं । जो व्यक्ति सहजता से सोच समझ कर विचार करके अपना काम करते हैं लक्ष्मी स्वयम ही उनका चुनाव कर लेती हैं ।
    वयसि गते कः कामविकारः,शुष्के नीरे कः कासारः। क्षीणे वित्ते कः परिवारः,ज्ञाते तत्त्वे कः संसारः ॥

     भावार्थ :
    आयु बीत जाने के बाद काम भाव नहीं रहता, पानी सूख जाने पर तालाब नहीं रहता, धन चले जाने पर परिवार नहीं रहता और तत्त्व ज्ञान होने के बाद संसार नहीं रहता ।
    दिनयामिन्यौ सायं प्रातः,शिशिरवसन्तौ पुनरायातः। कालः क्रीडति गच्छत्यायुस्तदपि न मुन्च्त्याशावायुः॥

     भावार्थ :
    दिन और रात, शाम और सुबह, सर्दी और बसंत बार-बार आते-जाते रहते है काल की इस क्रीडा के साथ जीवन नष्ट होता रहता है पर इच्छाओ का अंत कभी नहीं होता है ।
    विद्या मित्रं प्रवासेषु ,भार्या मित्रं गृहेषु च । व्याधितस्यौषधं मित्रं , धर्मो मित्रं मृतस्य च ॥

     भावार्थ :
    यात्रा के समय ज्ञान एक मित्र की तरह साथ देता हैं घर में पत्नी एक मित्र की तरह साथ देती हैं, बीमारी के समय दवाएँ साथ निभाती हैं अंत समय में धर्म सबसे बड़ा मित्र होता हैं ।
    सत्संगत्वे निस्संगत्वं,निस्संगत्वे निर्मोहत्वं। निर्मोहत्वे निश्चलतत्त्वं,निश्चलतत्त्वे जीवन्मुक्तिः॥

     भावार्थ :
    सत्संग से वैराग्य, वैराग्य से विवेक, विवेक से स्थिर तत्त्वज्ञान और तत्त्वज्ञान से मोक्ष की प्राप्ति होती है ।
    मा कुरु धनजनयौवनगर्वं,हरति निमेषात्कालः सर्वं। मायामयमिदमखिलम् हित्वा,ब्रह्मपदम् त्वं प्रविश विदित्वा॥

     भावार्थ :
    धन, शक्ति और यौवन पर गर्व मत करो, समय क्षण भर में इनको नष्ट कर देता है| इस विश्व को माया से घिरा हुआ जान कर तुम ब्रह्म पद में प्रवेश करो ।
    योगरतो वाभोगरतोवा,सङ्गरतो वा सङ्गवीहिनः। यस्य ब्रह्मणि रमते चित्तं,नन्दति नन्दति नन्दत्येव॥

     भावार्थ :
    कोई योग में लगा हो या भोग में, संग में आसक्त हो या निसंग हो, पर जिसका मन ब्रह्म में लगा है वो ही आनंद करता है, आनंद ही करता है ।
    क्रोधो वैवस्वतो राजा तॄष्णा वैतरणी नदी। विद्या कामदुघा धेनु सन्तोषो नन्दनं वनम्॥

     भावार्थ :
    क्रोध यमराज के समान है और तृष्णा नरक की वैतरणी नदी के समान। विद्या सभी इच्छाओं को पूरी करने वाली कामधेनु है और संतोष स्वर्ग का नंदन वन है ।
    लोभमूलानि पापानि संकटानि तथैव च। लोभात्प्रवर्तते वैरं अतिलोभात्विनश्यति॥

     भावार्थ :
    लोभ पाप और सभी संकटों का मूल कारण है, लोभ शत्रुता में वृद्धि करता है, अधिक लोभ करने वाला विनाश को प्राप्त होता है ।
    बालस्तावत् क्रीडासक्त तरुणस्तावत् तरुणीसक्तः। वृद्धस्तावच्चिन्तासक्त परे ब्रह्मणि कोऽपि न सक्तः॥

     भावार्थ :
    बचपन में खेल में रूचि होती है , युवावस्था में युवा स्त्री के प्रति आकर्षण होता है, वृद्धावस्था में चिंताओं से घिरे रहते हैं पर प्रभु से कोई प्रेम नहीं करता है ।
    नलिनीदलगतजलमतितरलम्, तद्वज्जीवितमतिशयचपलम्। विद्धि व्याध्यभिमानग्रस्तं,लोक शोकहतं च समस्तम्॥

     भावार्थ :
    जीवन कमल-पत्र पर पड़ी हुई पानी की बूंदों के समान अनिश्चित एवं अल्प (क्षणभंगुर) है। यह समझ लो कि समस्त विश्व रोग, अहंकार और दु:ख में डूबा हुआ है ।
    धॄति: क्षमा दमोऽस्तेयं शौचमिन्द्रियनिग्रह:। धीर्विद्या सत्यमक्रोधो दशकं धर्मलक्षणम्॥

     भावार्थ :
    धर्म के दस लक्षण हैं - धैर्य, क्षमा, आत्म-नियंत्रण, चोरी न करना, पवित्रता, इन्द्रिय-संयम, बुद्धि, विद्या, सत्य और क्रोध न करना ।
    अभिवादनशीलस्य नित्यं वॄद्धोपसेविन:। चत्वारि तस्य वर्धन्ते आयुर्विद्या यशो बलम्॥

     भावार्थ :
    विनम्र और नित्य अनुभवियों की सेवा करने वाले में चार गुणों का विकास होता है - आयु, विद्या, यश और बल ।
    चित्तोद्वेगं विधायापि हरिर्यद्यत् करिष्यति। तथैव तस्य लीलेति मत्वा चिन्तां द्रुतं त्यजेत॥

     भावार्थ :
    चिंता और उद्वेग में संयम रख कर और ऐसा मान कर कि श्रीहरि जो जो भी करेंगे वह उनकी लीला मात्र है, चिंता को शीघ्र त्याग दें ।
    यावद्वित्तोपार्जनसक्त तावन्निजपरिवारो रक्तः। पश्चाज्जीवति जर्जरदेहे, वार्तां कोऽपि न पृच्छति गेहे॥

     भावार्थ :
    जब तक व्यक्ति धनोपार्जन में समर्थ है, तब तक परिवार में सभी उसके प्रति स्नेह प्रदर्शित करते हैं परन्तु अशक्त हो जाने पर उसे सामान्य बातचीत में भी नहीं पूछा जाता है ।
    अनाहूतः प्रविशति अपृष्टो बहुभाषते। अविश्वस्ते विश्वसिति मूढ़चेता नराधमः॥

     भावार्थ :
    मनुष्यों में सबसे अधम अर्थात नीच पुरुष वही है, जो बिना बुलाए किसी के यहाँ जाता है और बिना पूछे अधिक बोलता है साथ ही जिसपर विश्वास न किया जाये उसपर भी विश्वास करता है, उसे ही मूढ़, चेता, तथा अधम पुरुष कहा गया है ।
    एकोधर्मः परं श्रेयः क्षमैका शांतिरुत्तमा विद्यैका परमा तृप्तिः अहिंसैका सुखावहा॥

     भावार्थ :
    एक ही धर्म श्रेठ एवं कल्याणकारी होता है । शान्ति का सर्वोत्तम रूप क्षमा है, सबसे बड़ी तृप्ति विद्या से प्राप्त होती है तथा अहिंसा सुख देने वाली है ।
    दर्शने स्पर्शणे वापि श्रवणे भाषणेऽपि वा। यत्र द्रवत्यन्तरङ्गं स स्नेह इति कथ्यते॥

     भावार्थ :
    यदि किसी को देखने से या स्पर्श करने से, सुनने से या बात करने से हृदय द्रवित हो तो इसे स्नेह कहा जाता है ।
    उत्साहो बलवानार्य नास्त्युत्साहात्परं बलम्। सोत्साहस्य च लोकेषु न किंचिदपि दुर्लभम्॥

     भावार्थ :
    उत्साह श्रेष्ठ पुरुषों का बल है, उत्साह से बढ़कर और कोई बल नहीं है। उत्साहित व्यक्ति के लिए इस लोक में कुछ भी दुर्लभ नहीं है ।
    अतितॄष्णा न कर्तव्या तॄष्णां नैव परित्यजेत्। शनै: शनैश्च भोक्तव्यं स्वयं वित्तमुपार्जितम् ॥

     भावार्थ :
    अधिक इच्छाएं नहीं करनी चाहिए पर इच्छाओं का सर्वथा त्याग भी नहीं करना चाहिए। अपने कमाये हुए धन का धीरे-धीरे उपभोग करना चाहिये ।
    पातितोऽपि कराघातै-रुत्पतत्येव कन्दुकः। प्रायेण साधुवृत्तानाम-स्थायिन्यो विपत्तयः॥

     भावार्थ :
    हाथ से पटकी हुई गेंद भी भूमि पर गिरने के बाद ऊपर की ओर उठती है, सज्जनों का बुरा समय अधिकतर थोड़े समय के लिए ही होता है ।
    न ही कश्चित् विजानाति किं कस्य श्वो भविष्यति। अतः श्वः करणीयानि कुर्यादद्यैव बुद्धिमान्॥

     भावार्थ :
    कल क्या होगा यह कोई नहीं जानता है इसलिए कल के करने योग्य कार्य को आज कर लेने वाला ही बुद्धिमान है ।
    नारिकेलसमाकारा दृश्यन्तेऽपि हि सज्जनाः। अन्ये बदरिकाकारा बहिरेव मनोहराः॥

     भावार्थ :
    सज्जन व्यक्ति नारियल के समान होते हैं, अन्य तो बदरी फल के समान केवल बाहर से ही अच्छे लगते हैं ।
    अधमाः धनमिच्छन्ति धनं मानं च मध्यमाः । उत्तमाः मानमिच्छन्ति मानो हि महताम् धनम्॥

     भावार्थ :
    निम्न कोटि के लोग केवल धन की इच्छा रखते हैं, उन्हें सम्मान से कोई मतलब नहीं होता है । जबकि एक मध्यम कोटि का व्यक्ति धन और मान दोनों की इच्छा रखता है । और उत्तम कोटि के लोगों के लिए सम्मान हीं सर्वोपरी होता है सम्मान धन से ज्यादा महत्वपूर्ण होता है ।
    यस्तु सञ्चरते देशान् सेवते यस्तु पण्डितान् । तस्य विस्तारिता बुद्धिस्तैलबिन्दुरिवाम्भसि ॥

     भावार्थ :
    वह व्यक्ति जो विभिन्न देशों में घूमता है और विद्वानों की सेवा करता है । उस व्यक्ति की बुद्धि का विस्तार उसी तरह होता है, जैसे तेल का बून्द पानी में गिरने के बाद फैल जाता है ।
    द्वौ अम्भसि निवेष्टव्यौ गले बद्ध्वा दृढां शिलाम् । धनवन्तम् अदातारम् दरिद्रं च अतपस्विनम्॥

     भावार्थ :
    दो प्रकार के लोग होते हैं, जिनके गले में पत्थर बांधकर उन्हें समुद्र में फेंक देना चाहिए । पहला, वह व्यक्ति जो अमीर होते हुए दान न करता हो । दूसरा, वह व्यक्ति जो गरीब होते हुए कठिन परिश्रम नहीं करता हो ।
    यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः। यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः॥

     भावार्थ :
    जिस कुल में स्त्रीयाँ पूजित होती हैं, उस कुल से देवता प्रसन्न होते हैं। जहाँ स्त्रीयों का अपमान होता है, वहाँ सभी ज्ञानदि कर्म निष्फल होते हैं।
    विद्वत्वं च नृपत्वं च नैव तुल्यं कदाचन । स्वदेशे पूज्यते राजा विद्वान् सर्वत्र पूज्यते ॥

     भावार्थ :
    विद्वान और राजा की कोई तुलना नहीं हो सकती है । क्योंकि राजा तो केवल अपने राज्य में सम्मान पाता है, जबकि विद्वान जहाँ-जहाँ भी जाता है वह हर जगह सम्मान पाता है ।
    शतेषु जायते शूरः सहस्रेषु च पण्डितः । वक्ता दशसहस्रेषु दाता भवति वा न वा॥

     भावार्थ :
    सैकड़ों में कोई एक शूर-वीर होता है, हजारों में कोई एक विद्वान होता है, दस हजार में कोई एक वक्ता होता है और दानी लाखों में कोई विरला हीं होता है ।
    शोचन्ति जामयो यत्र विनश्यत्याशु तत्कुलम्। न शोचन्ति नु यत्रता वर्धते तद्धि सर्वदा॥

     भावार्थ :
    जिस कुल में बहू-बेटियां क्लेश भोगती हैं वह कुल शीघ्र नष्ट हो जाता है। किन्तु जहाँ उन्हें किसी तरह का दुःख नहीं होता वह कुल सर्वदा बढ़ता ही रहता है।
    परो अपि हितवान् बन्धुः बन्धुः अपि अहितः परः । अहितः देहजः व्याधिः हितम् आरण्यं औषधम् ॥

     भावार्थ :
    कोई अपरिचित व्यक्ति भी अगर आपकी मदद करे, तो उसे परिवार के सदस्य की तरह महत्व देना चाहिए । और अगर परिवार का कोई अपना सदस्य भी आपको नुकसान पहुंचाए तो उसे महत्व देना बंद कर देना चाहिए । ठीक उसी तरह जैसे शरीर के किसी अंग में कोई बीमारी हो जाए, तो वह हमें तकलीफ पहुँचाने लगती है । जबकि जंगल में उगी हुई औषधी हमारे लिए लाभकारी होती है ।
    तडागकृत् वृक्षरोपी इष्टयज्ञश्च यो द्विजः । एते स्वर्गे महीयन्ते ये चान्ये सत्यवादिनः ॥

     भावार्थ :
    तालाब बनवाने, वृक्षरोपण करने, अैर यज्ञ का अनुष्ठान करने वाले द्विज को स्वर्ग में महत्ता दी जाती है, इसके अतिरिक्त सत्य बोलने वालों को भी महत्व मिलता है ।
    दातव्यं भोक्तव्यं धनविषये सञ्चयो न कर्तव्यः । पश्येह मधुकरिणां सञ्चितमर्थं हरन्त्यन्ये ॥

     भावार्थ :
    धन दूसरों को दिया जाना चाहिए, अथवा उसका स्वयं भोग करना चाहिए । किंतु उसका संचय नहीं करना चाहिए । ध्यान से देखो कि मधुमक्खियों के द्वारा संचित धन अर्थात् शहद दूसरे हर ले जाते हैं ।
     दानं भोगं नाशस्तिस्रो गतयो भवन्ति वित्तस्य । यो न ददाति न भुङ्क्ते तस्य तृतिया गतिर्भवति ॥
    भावार्थ :
    धन की संभव नियति तीन प्रकार की होती है । पहली है उसका दान, दूसरी उसका भोग, और तीसरी है उसका नाश । जो व्यक्ति उसे न किसी को देता है और न ही उसका स्वयं भोग करता है, उसके धन की तीसरी गति होती है, अर्थात् उसका नाश होना है ।
    लोभेन बुद्धिश्चलति लोभो जनयते तृषाम् । तृषार्तो दुःखमाप्नोति परत्रेह च मानवः ॥

     भावार्थ :
    लोभ से बुद्धि विचलित हो जाती है, लोभ सरलता से न बुझने वाली तृष्णा को जन्म देता है । जो तृष्णा से ग्रस्त होता है वह दुःख का भागीदार बनता है, इस लोक में और परलोक में भी ।
    लोभात्क्रोधः प्रभवति लोभात्कामः प्रजायते । लोभान्मोहश्च नाशश्च लोभः पापस्य कारणम् ॥

     भावार्थ :
    लोभ से क्रोध का भाव उपजता है, लोभ से कामना या इच्छा जागृत होती है, लोभ से ही व्यक्ति मोहित हो जाता है, यानी विवेक खो बैठता है, और वही व्यक्ति के नाश का कारण बनता है । वस्तुतः लोभ समस्त पाप का कारण है ।
    एवं च ते निश्चयमेतु बुद्धिर्दृष्ट्वा विचित्रं जगतः प्रचारम् । सन्तापहेतुर्न सुतो न बन्धुरज्ञाननैमित्तिक एष तापः ॥

     भावार्थ :
    इस संसार की विचित्र गति को देखकर आपकी बुद्धि यह निश्चित समझे कि मनुष्य के मानसिक कष्ट या संताप के लिए उसका पुत्र अथवा बंधु कारण नहीं है, बल्कि दुःख का असली निमित्त तो अज्ञान है ।
    न जातु कामः कामानामुपभोगेन शाम्यति । हविषा कृष्णवर्त्मेव भूय एव अभिवर्तते ॥

     भावार्थ :
    मनुष्य की इच्छा कामनाओं के अनुरूप सुखभोग से नहीं तृप्त होती है । यानी व्यक्ति की इच्छा फिर भी बनी रहती है । असल में वह तो और बढ़ने लगती है, ठीक वैसे ही जैसे आग में इंधन डालने से वह अधिक प्रज्वलित हो उठती है ।
    संसारकटुवृक्षस्य द्वे फले अमृतोपमे । सुभाषितरसास्वादः सङ्गतिः सुजने जने ॥

     भावार्थ :
    संसार रूपी कड़ुवे पेड़ से अमृत तुल्य दो ही फल उपलब्ध हो सकते हैं, एक है मीठे बोलों का रसास्वादन और दूसरा है सज्जनों की संगति ।

    10 जन॰ 2017

    असफलता के बाद सफलता पाने वाले शख्श

    By: Successlocator On: जनवरी 10, 2017
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  • अगर आप असफलता से निराश हो चुके हैं और ऐसा सोच रहे हैं कि सबकुछ यहीं खत्म हो गया तो सफल व्यक्तियों के जीवन के बारे में पढ़ें. आपको पता चलेगा कि आप जिन सफल व्यक्तियों की तरह सफल होना चाहते हैं उन्होंने अपने जीवन में कितनी असफलता देखी और उसके बाद सफल हुए.

    विस्टन चर्चल अपनी ही पार्टी के विचारों से असहमत होकर 1929 से 1939 तक संघर्ष करते रहे.  लेकिन बाद में वे इंग्लैंड के प्रधानमंत्री चुने गए.

    थॉमस एडिसन जिनके नाम सबसे ज्यादा चीजों के आविष्कार करने का रिकॉर्ड है, उनके टीचर उनके बारे में कहा करते थे कि तुम जीवन में कभी भी कुछ भी नहीं सीख सकते क्योंकि तुम बेवकूफ हो.

    ओपरा विनफ्रे ऐसी सेलेब्रिटी हैं जिन्होंने गरीबी से अमीरी तक का सफर तय किया है. टेलीविजन टॉक शो के लिए मशहूर विनफ्रे अपने पहले टेलिविजन जॉब के दौरान ही लैंगिक उत्पीड़न का शिकार हुई थीं.

    वॉल्ट डिज्नी 20वीं शताब्दी के मनोरंजन क्षेत्र में अपने योगदान के लिए प्रसिद्ध हैं, लेकिन उनके न्यूज एडिटर ने उनसे कहा था कि तुम्हारे पास न तो कल्पना करने की क्षमता है और न ही कोई अच्छा आडिया. जिसके बाद डिज्नी के मेहनत का ही कमाल था कि'स्नो व्हाइट' फिल्म ने कई बड़े-बड़े उद्योगपतियों को प्रीमियर से पहले ही पछाड़ दिया था.

    स्टीवन स्पीलबर्ग फिल्म निर्देशन की दुनिया का एक बड़ा नाम है. उन्हें फिल्मी दुनिया में लिंकन जैसी फिल्म के लिए ऑस्कर तक मिल चुका है. उनकी प्रतिभा को यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफॉर्नियां नहीं परख पाई और उन्हें सिनेमा आर्ट्स में एडमिशन के लिए दो बार रिजेक्ट किया गया.


    आर.एच. मैसी ने अपने शुरुआती करियर के दौरान रिटेल कंपनी के क्षेत्र में काफी असफलता झेली लेकिन उनकी कंपनी के पास दुनिया का सबसे बड़ा डिपार्टमेंट स्टोर चेन है.

    सोयचिरो होंडा को जापानी बिजनेस कम्यूनिटी से बहिष्कृत कर दिया गया था, लेकिन बाद होंडा ने जापानी ऑटोमोटिव के क्षेत्र में क्रांति लाकर रख दिया था.

    केएफसी के फूड को अभी हर कोई खाना चाहता है लेकिन किसी समय हारलैंड डेविड सैंडर्स के नॉन-वेज फूड को खरीददार नहीं मिल रहा था. काफी मेहनत के बाद उन्होंने केएफसी का बिजनेस खड़ा किया.

    अमेरिका के पूर्व उपराष्ट्रपति डिक चेनी को येल यूनिवर्सिटी से निकाल दिया गया था बाद में काफी संघर्ष के बाद उन्होंने सफलता पाई.

    विज्ञान की दुनिया में क्रांति लाने वाले न्यूटन की मां ने उन्हें स्कूल भेजना बंद कर दिया था क्योंकि वे एक अच्छे स्टूडेंट नहीं थे.

    वेरा वैंग एक डिजाइनर हैं जिन्होंने अपने शुरुआती दिनों में काफी संघर्ष किया था लेकिन अभी उनका बिजनेस करीब 1 बिलियन डॉलर से भी ज्यादा का है.

    सिडनी पोइटियर हॉलीवुड के सुपरस्टार हैं, लेकिन उन्हें उनके पहले फिल्म के ऑडिशन के दौरान डायलॉग ठीक से नहीं बोल पाने के कारण फिल्म डायरेक्टर ने काफी डांट लगाई और कहा कि एक्टिंग तुम्हारे बस की बात नहीं है.

    अपने थ्योरी से भौतिक विज्ञान को नई दिशा देने वाले आइंस्टीन बचपन में ठीक से लोगों से कम्यूनिकेट तक नहीं कर पाते थे.

    फ्रेड एस्टेयर हॉलीवुड की दुनिया के लीजेंड हैं, लेकिन अपने पहले स्क्रीन टेस्ट के दौरान ही उन्हें यह सुनना पड़ा था कि तुम न गा सकते हो और न अभिनय कर सकते हो

    जे.के. राउलिंग की किताब हैरी पॉटर ने उन्हें अरबपति बना दिया लेकिन उन्होंने अपनी जिंदगी में खराब वक्त भी झेला है.

    चार्ल्स डार्विन को एक औसत दर्जे का स्टूडेंट समझा जाता था, उन्होंने मेडिसिन के क्षेत्र का करियर भी छोड़ दिया था और वे पादरी बनने के लिए स्कूल जाने लगे थे. उनकी थ्योरी ऑन द ओरिजिन ऑफ द स्पीसीज ने प्राकृतिक रहस्यों पर से कई पर्दे को हटाया.

    चित्रकला की दुनिया में वॉन गाग का नाम पूरी दुनिया आज आदर से लेती है लेकिन यह चित्रकार अपने पूरे जीवनकाल के दौरान सिर्फ एक चित्र ही बेच पाया वह भी अपने मरने से कुछ महीने पहले ही.

    इंडियाना जोन्स फिल्म की सफलता ने हैरिसन फोर्ड को फिल्म की दुनिया में स्थापित कर दिया हो लेकिन उनकी पहली फिल्म में किए गए एक्टिंग के बाद एक एग्जीक्यूटीव ने उन्हें अपने ऑफिस बुलाया और कहा कि तुम फिल्मों की दुनिया में कभी सफल नहीं हो सकते हो.

    थियोडोर सिअस गेज़ेल जो डा. सीअस के नाम से मशहूर हैं उन्हें उनकी किताब के प्रकाशन के लिए 27 प्रकाशकों ने रिजेक्ट कर दिया था. उनकी किताब द कैट इन द हैट और ग्रीन एग्ज एंड हैम ने काफी लोकप्रियता दिलाई.

    ल्यूसिली बॉल अपनी बी ग्रेड फिल्मों के कारण क्वीन ऑफ बी मूवीज हो गई थीं, लेकिन उन्होंने अपना संघर्ष जारी रखा और आई लव लूसी में स्टारडम हासिल किया.


    फोर्ड मोटर ने आज दुनिया में तहलका मचा रखा है लेकिन कम लोगों को ही पता होगा कि हेनरी फोर्ड अपनी शुरुआती करियर में ऑटोमोबाइल बिजनेस में असफल रहे थे.
    वैक्यूम क्लिनर उत्पाद आज हर जगह उपयोग किया जा रहा है लेकिन इसे विकसित करने वाले सर जेम्स डायसन को काफी नुकसान उठाना पडा़ था और बाद में उन्हें इस बिजनेस में सफलता मिली.

    वैक्यूम क्लिनर उत्पाद आज हर जगह उपयोग किया जा रहा है लेकिन इसे विकसित करने वाले सर जेम्स डायसन को काफी नुकसान उठाना पडा़ था और बाद में उन्हें इस बिजनेस में सफलता मिली.

    स्टीफन किंग 'कैरी' नॉवेल लिखते वक्त इतनी परेशानी से घि‍रे थे कि उन्होंने लिखे गए सारे ड्राफ्ट को फाड़ दिया था. उन्होंने नॉवेल लिखने की दुनिया में काफी सफलता पाई और उनके नॉवेल की करीब 350 मीलियन कॉपियां अब तक बेची जा चुकी है.

    कभी पिता संग बेचा करते थे जूस, फिर कैसेट बेच खड़ी की अरबों रूपये की कंपनी

    By: Successlocator On: जनवरी 10, 2017
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  • आज जिस शख्स के सफलता की कहानी हम पेश कर रहे हैं उन्हें हर कोई जानता है लेकिन उनके संघर्ष की कहानी बहुत कम लोग ही जानते। जी हाँ सफलता की यह कहानी है भारत की सबसे बड़ी म्यूजिक कंपनियों में शुमार टी-सीरीज के संस्थापक गुलशन कुमार की। आज भले ही गुलशन कुमार हमारे बीच नहीं हैं किन्तु उनकी कारोबारी सफलता आज भी चर्चा का बिषय है।
    दिल्ली के एक गरीब पंजाबी परिवार में पैदा लिए गुलशन कुमार बचपन से ही अपने पिता के जूस की दूकान पर काम में हाथ बटाना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे उन्हें कारोबार में ही दिलचस्पी पैदा हो गयी। 23 साल की उम्र में उन्होंने ख़ुद के एक कारोबार शुरू करने की दिशा में काम शुरू कर दिया।

    फैमिली की मदद से उन्होंने एक दुकान को टेकओवर किया और फिर ऑडियो कैसेट बेचना शुरू किया। उन्होंने अपने ऑडियो कैसेट के बिजनेस को ‘सुपर कैसेट्स इंडस्ट्रीज लिमिटेड’ के नाम से दुनिया के सामने पेश किया।
    गुलशन कुमार ओरिजिनल गानों को दूसरी आवाजों में रिकॉर्ड कर कम दामों में बेचने शुरू कर दिए। जहाँ अन्य कंपनियां एक कैसेट को 28 रुपए में बेचती वही गुलशन कुमार उसे महज़ 15 रूपये में बेचते। 70 के दशक में उनकी कैसेट के डिमांड बहुत बढ़ गए। फिर उन्होंने भक्ति गानों की सीरीज़ भी निकली। उन्होंने खुद भी कई भक्ति गानें गाये जो आज भी मशहूर है। धीरे-धीरे वो म्यूजिक इंडस्ट्री के सफल बिजनेसमैन में शुमार हो गए।
    कैसेट की दुनिया में सफलता मचाने के बाद उन्होंने फ़िल्मी दुनिया का रुख किया। इसके बाद वे म्यूजिक और बॉलीवुड फिल्मों के अलावा हिंदू पौराणिक कथाओं से संबंधित फिल्मों और सीरियल्स को भी प्रोड्यूस करने लगे। अपनी तरक्की को देखते हुए गुलशन कुमार ने कमाई का एक हिस्सा समाजिक और धार्मिक संगठनों को दान देना शुरू कर दिए।
    धर्म के  प्रति उनकी अभिन्न रूची की बदौलत उन्होंने माता वैष्णो देवी के दरबार में भंडारा का आयोजन शुरू कर दिया। गुलशन कुमार का यह भंडारा श्री माता वैष्णो देवी मंदिर में आने वाले भक्तों को नि:शुल्क भोजन उपलब्ध कराता है। ख़बरों की मानें तो जब अबु सलेम ने गुलशन कुमार से हर महीने 5 लाख रुपए फिरौती माँगा था तो उन्होंने फिरौती देने की बजाय उस रूपये से भंडारा शुरू कर दिया था।

    12 अगस्त 1997 को मुम्बई के साउथ अंधेरी इलाके में स्थित जीतेश्वर महादेव मंदिर के बाहर गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गई थी। फिर 19 साल की उम्र में उनके बेटे भूषण कुमार ने कंपनी की कमान संभाली। उनकी बेटी तुलसी कुमार एक जानी-मानी प्लेबैक सिंगर है। आज टी-सीरीज भारत की सबसे बड़ी म्यूजिक इंडस्ट्री में से एक है। गुलशन कुमार की कारोबारी सफलता के साथ-साथ उनकी भक्ति-भावना भी लोगों के लिए प्रेरणादायक है।

    15 सित॰ 2016

    सफलता की हत्या करने वाले हथियार

    By: Successlocator On: सितंबर 15, 2016
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  • सफलता की हत्या करने वाले हथियार


    दुनिया के प्रत्येक व्यक्ति की अपनी इच्छाएं (Desires) होती हैं और अपनी इन इच्छाओं के अनुरूप ही व्यक्ति जीवन (Life) जीना चाहता है। इन इच्छाओं में से कुछ तो जीवन में Positive Effect डालती हैं और कुछ जीवन में Negative Effect डालती हैं। जीवन में इच्छाएं रखना तो बहुत अच्छी बात है लेकिन अपनी Negative Desires का गुलाम बन जाना और अपनी इन Negative Desires के अनुरूप ही अपने विचार बना लेना किसी भी व्यक्ति को सफलता (Success) से बहुत दूर ले जा सकता है।

    हम में से बहुत से ऐसे लोग हैं जो अपनी Positive Desires को अपने जीवन में जगह नहीं देते हैं और अपनी इन इच्छाओं का गला घोट देते हैं। बहुत से लोग जीवन में ऐसे Negative Thoughts अपना लेते हैं जिससे वह सफलता को कभी नहीं पा सकते। इन Negative Thoughts को ऐसा हथियार माना जा सकता है जो किसी के भी जीवन में असफलता को ला सकता हैं। हमें ऐसे हथियारों से बचना चाहिए।

    आज मैं आपसे ऐसे ही कुछ सफलता को नष्ट करने वाले हथियारों के बारे में बात करना चाहता हूँ। आपसे निवेदन है कि आप इस लेख को पढ़ने के बाद बताए गए हथियारों को अपने जीवन से हमेशा के लिए दूर कर दें ताकि आप Positive Desires को अपनाएं और सफलता की राह पर चल सकें।






    1- खुद को नाकाबिल समझने का विचार
    बहुत से लोग अपने को नाकाबिल समझने का विचार अपना लेते हैं और पूरी जिंदगी ऐसे ही हाथ पर हाथ रखे बैठे रहते हैं। ऐसे लोगों को आपने कुछ इस तरह की बातें कहता सुना होगा--

    a- "मैं ऐसा नहीं कर सकता", 
    b- "मुझमे इतनी समझदारी नहीं है कि मैं यह काम कर सकूँ",
    c- "अगर मैं कोशिश करूँगा तब भी सफल नहीं हो सकता", 
    d- "मेरे पास इस काम को करने के लिए अनुभव की कमी है", 
    e- "मैं IAS बनना चाहता था लेकिन मैं बन नहीं सकता", आदि।

    खुद को नाकाबिल समझने के यह ऐसे विचार हैं जो कभी भी किसी को सफलता की राह पर नहीं ले जा सकते। इन विचारों को तुरंत नष्ट कर दें और Positive Thoughts को अपने जीवन में जगह दें। आप एक काबिल इंसान हैं। 

    2- प्रतियोगिताओं से दूर भागने का विचार
    जीवन एक प्रतियोगिता भी है। बहुत से Competitions जीवन के लिए बहुत जरुरी होते हैं लेकिन इनसे दूर भागना केवल एक ही परिणाम देता है और वह है- असफलता। बहुत से लोग जीवन की प्रतियोगिताओं से दूर भागना चाहते हैं और कहते हैं--

    a- "इस कार्य को करने के लिए तो पहले से ही बहुत सारे लोग हैं , मैं कैसे कर पाउँगा", 
    b- "इस Company में केवल 5 Vacancy हैं और 50000 आवेदन अब तक  चुके  है, ऐसे में मैं आवेदन करके सफल नहीं हो सकता",
    c- "अरे ! इस काम में तो एक से एक अनुभवी व्यक्ति हैं , मैं इस काम में सफल नहीं हो सकता", आदि। 

    इस तरह के विचार रखने वाला व्यक्ति प्रतियोगिता का हिस्सा बनने से घबराता है और जीवन में असफल रह जाता है। अगर आपके अंदर ऐसे विचार हैं तो उन्हें तुरंत कुचल दीजिये और यह बात हमेशा याद रखिये कि किसी भी बड़ी प्रतियोगिता में सबसे पहला स्थान रखने वाला व्यक्ति भी आप जैसा ही है। जब वह सफल हो सकता है तो आप भी सफल हो सकते हैं। 

    3- खुद को एक सीमित दायरे में समेट लेने का विचार
    कुछ लोग खुद के लिए एक दायरा बना लेते हैं और यह सोच लेते हैं कि अब इस दायरे से बाहर नहीं निकलना है। वह लोग कुछ अलग करने से घबराते हैं, कुछ नया करने की उनमे हिम्मत नहीं होती। अपने इन्ही विचारों के कारण वह कोई सफलता भी प्राप्त नहीं कर पाते हैं। ऐसे लोगों को आपने कहते सुना होगा कि-

    a- "मैं जो काम कर रहा हूँ वह सही है, यह काम छोड़कर दूसरा काम करने की हिम्मत मुझमे नहीं है",
    b- "मैं जहाँ हूँ वहां सही हूँ", 
    c- "इतना ही काम मेरे लिए बहुत है , इतने में ही मेरा घर का खर्च चल जाता है", 
    d- "ज्यादा पैसा कमा के क्या करना है, इतने में ही मैं खुश हूँ" , आदि। 

    इस तरह के विचार अपने सपनों की हत्या करने वाले होते हैं। प्रत्येक व्यक्ति को अपना दायरा बढ़ाते रहना चाहिए। बहुत से सपने रखने चाहिए और उन्हें पूरा करने के लिए हमेशा कुछ अलग, कुछ नया, कुछ बड़ा करने के बारे में लगातार सोचते और करते रहना चाहिए।

    4- पारिवारिक जिम्मेदारी का बहाना बनाना
    पारिवारिक जिम्मेदारी (Family Responsibility) को निभाना एक बहुत अच्छी बात है लेकिन इसको अपने जीवन में असफलता का एक कारण बना लेना बहुत बड़ी गलती है। बहुत से लोगों को आपने यह बहाना बनाते सुना होगा--

    a- "अब मैं किसी प्रतियोगिता की तैयारी नहीं कर सकता क्योकि अब मुझ पर पारिवारिक जिम्मेदारी  गई है", 
    b- "मैं अब नौकरी बदलने का Risk नहीं ले सकता क्योकि मेरे पास एक परिवार की जिम्मेदारी है", 
    c- "अरे भाई ! पारिवारिक जिम्मेदारी के कारण बहुत से सपनों को खोना पड़ता है", आदि। 

    इस तरह के विचार रखने वाले व्यक्ति तो कभी खुद आगे बढ़ पाते हैं और ही अपने परिवार का सही मायने में ध्यान रख पाते हैं। यह बात सही है कि बहुत से लोगों के पास सफल होने से पहले ही पारिवारिक जिम्मेदारी जाती है लेकिन यह बात भी सही है कि पारिवारिक जिम्मेदारी को निभाते हुए भी सफलता प्राप्त की जा सकती है। खुद पर विश्वास रखिये, यकीन मानिये कि आप भी सफल हो सकते हैं क्योकि बहुत से लोग पारिवारिक जिम्मेदारी के साथ बहुत सी बड़ी सफलताएं प्राप्त कर चुके हैं। 

    5- खुद के बारे में नहीं सोचना
    बहुत से लोग ऐसे होते हैं जो पूरी दुनिया के बारे में तो सोच लेते हैं लेकिन खुद के बारे में सोचने का उनके पास समय नहीं होता है। आपने कुछ लोगों से यह कहते सुना होगा--

    a- "दूसरों के बारे में सोचना ही असली जिंदगी है तो अपने बारे में क्या सोचें?"
    b- "हम दूसरों के बारे में सोचेंगे तभी वह हमारे बारे में सोचेंगे",
    c- "मेरी जिंदगी तो अपने परिवार के बारे में ही सोचते हुए निकल गई",
    d- "अपने बारे में सोचने का कभी Time ही नहीं मिला", आदि। 

    दूसरों के बारे में सोचना बहुत अच्छी बात है लेकिन हम दूसरों के बारे में तभी अच्छा सोच सकते हैं जब खुद के बारे में अच्छा सोचें। खुद के बारे में जब आप अच्छा सोचेंगे तभी आप अच्छे बनेंगे और अच्छा बनने के बाद ही आप दूसरों के बारे में अच्छा सोच सकते हैं। अतः खुद के बारे में सोचने का समय निकालिये। खुद को इतना मजबूत और सफल बनाइये कि आप ऐसा ही बनने के लिए दूसरों की मदद कर सकें।


    यह कुछ ऐसे हथियार हैं जिनका उपयोग हम करने लगते हैं और जीवन में असफल हो जाते हैं। इन हथियारों को हमेशा के लिए नष्ट कर दीजिये वरना एक दिन यही आपको नष्ट कर देंगे। जीवन में कुछ करके मरने से अच्छा है कुछ अच्छा करने की कोशिश करके मर जाना। जीवन एक बार मिलता  है, अच्छा और सुखद यही होगा कि इस जीवन को सफल बनाया जाये। कुछ अच्छा सोचा जाये। कुछ अच्छा किया जाये।