Source bbc news
कई बार आपने कुछ लोगों को बड़बड़ाते देखा होगा. आमतौर पर जब हम किसी को ऐसा करते देखते हैं, तो हम उन्हें सनकी कहते हैं. हमें लगता है कि वो दिमागी ख़लल की वजह से ख़ुद से बातें करते रहते हैं.
दरअसल, ऐसे लोग अपने आपसे बातें करते हैं और जिसे आप दिमागी ख़लल कहकर ख़ारिज करते हैं, वो ख़ुद से बातें करने की आदत आपके लिए बड़े काम की साबित हो सकती है.
दुनिया में आज बहुत से एक्सपर्ट ये मशविरा देते हैं कि आप ख़ुद से बातें करें. उनके मुताबिक़ इससे याद्दाश्त तेज़ होती है. आत्मविश्वास भी बढ़ता है और आप ज़्यादा फ़ोकस हो जाते हैं.
अमरीका की विस्कॉन्सिन यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर गेरी लुपयन कहते हैं कि तेज़ आवाज़ में ख़ुद से बात करना आपको भले अजीब लगे, लेकिन है ये कामयाबी का नुस्खा.
वो अपनी रिसर्च की बुनियाद पर कहते हैं कि ऐसा करने से आपका बहुत फ़ायदा हो सकता है.
प्रोफ़ेसर गैरी लुपयन ने एक तजुर्बा किया था, जिसमें कुछ लोगों को कंप्यूटर की स्क्रीन पर कुछ चीज़ें सिर्फ़ देखने को कहा गया और कुछ को तेज़ आवाज़ में उनका नाम पुकारने को.
जिन लोगों ने तेज़ आवाज़ में उन चीज़ों का नाम लिया, वो स्क्रीन पर उन चीज़ों को ज़्यादा जल्दी पहचान पाए और जो लोग सिर्फ़ स्क्रीन को देख रहे थे, उन्हें वही चीज़ें पहचानने में थोड़ा समय लगा.
इसी तरह का प्रयोग उन्होंने किराने की दुकान पर भी किया. जिन लोगों ने सब्ज़ियों की तस्वीर देखकर उनका नाम तेज़ आवाज़ में पुकारा था, स्टोर में वही सब्ज़ी तलाशने में उन्हें आसानी हुई.
प्रोफेसर गैरी का कहना है कि जब हम किसी चीज़ का नाम अपनी ज़ुबान से तेज़ आवाज़ में लेते हैं तो उसकी तस्वीर हमारे ज़हन में बन जाती है. हमारा दिमाग़ ख़ुद-ब-ख़ुद ज़रूरत पड़ने पर उसे हमारे ज़हन में ज़िंदा कर देता है.
ब्रिटिश मनोवैज्ञानिक और लेखिका एनी विल्सन का कहना है कि वो अपने सभी क्लाइंट्स को ख़ुद से बातें करने की सलाह देती हैं.
अगर उनके किसी मरीज़ को बहुत गुस्सा आता है, तो वो उसे भी यही सलाह देती हैं, क्योंकि ऐसा करने से मसले का हल निकल आता है और गुस्सा ग़ायब हो जाता है.
एनी विल्सन कहती हैं- हम हमेशा चाहते हैं कि हमारे आसपास वो लोग रहें जो हमसे ज़्यादा ज्ञानी हों, जिनसे हमें कुछ सीखने को मिल सके.
सबसे अहम ये है कि जो हमें समझ सकें. जो ख़ासियतें हम दूसरों में तलाशते हैं, वो हम अपने अंदर हासिल कर सकते हैं.
आख़िर ख़ुद को इंसान सबसे अच्छे से जानता है. जब हम ख़ुद से बाते करने लगते हैं तो बहुत हद तक हम अपने अंदर ही उन्हें तलाश लेते हैं.
ऐसे में हम ख़ुद अपने आप को ही सबसे ज़्यादा दिलचस्प शख़्सियत पाते हैं और हमारी ख़ुद से दोस्ती हो जाती है.
2014 में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक़, जब हम किसी को तुम या वो कहकर बातें करते हैं, तो हम अपने जज़्बात पर जल्दी काबू कर लेते हैं. क्योंकि ऐसे में हम खुद एक दूसरी शख़्सियत बनकर अपने को ही समझाते हैं.
ख़ुद से बातें करने के फ़ायदे
ब्रिटेन के यूजीन गैम्बल इसकी बड़ी मिसाल हैं. वो बरसों तक दांतों के डॉक्टर थे. एक दिन उन्होंने डॉक्टरी छोड़कर कारोबार शुरू करने का इरादा कर लिया. जबकि उन्हें कारोबार का कोई तजुर्बा नहीं था. इस वजह से यूजीन को कई बार नाकामी मिली.
लिहाज़ा उन्होंने बिज़नेस कोच की मदद ली, जिसने उन्हें सबसे पहली सलाह ख़ुद से बात करने की ही दी और उन्हें इसका फ़ायदा भी हुआ.
आज जब भी उन्हें बिज़नेस की कोई प्रेज़ेन्टेशन देनी होती है तो वो सबसे पहले ख़ुद अपने आपसे बात करते हैं और अपनी प्रेज़ेन्टेशन को तेज़ आवाज़ में पढ़ते हैं.
ऐसा करने से वो अपने आइडिया पर ज़्यादा फोकस कर पाते हैं और अपनी प्रेज़ेन्टेशन को अच्छी तरह याद रख पाते हैं.
हम सभी के लिए हर समय ख़ुद से बात करना ना तो संभव है और ना ही हम कर पाते हैं.
इसकी बड़ी वजह ये है कि समाज में ख़ुद से बातें करने वाले को पागल करार दिया जाता है. इसीलिए कई लोग चाहकर भी ख़ुद से बातें नहीं कर पाते.
उन्हें सनकी कहकर ख़ारिज किए जाने का डर रहता है.
लेकिन छोटे बच्चे अक्सर ये काम करते हैं.
रिसर्च बताती हैं कि बच्चों के विकास में ये अमल बहुत कारगर साबित होता है.
2008 में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक़, पांच साल की उम्र वाले जिन बच्चों ने अपने आप से ज़्यादा बातें कीं, वो ज़्यादा समझदार थे बनिस्बत उन बच्चों के जो उस उम्र में ख़ामोश रहते थे.
अगर आप भी अपनी याददाश्त को तेज़ करना चाहते हैं, काम पर ज़्यादा ध्यान देना चाहते हैं, तो ख़ुद अपने आपके दोस्त बनिए और अपने आपसे बाते कीजिए.
शुरूआत में यह थोड़ा अजीब लगेगा. लेकिन, जब इसके फ़ायदे आपके सामने आएंगे, तो यक़ीन जानिए आप ख़ुद हैरान रह जाएंगे.
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10 अक्टू॰ 2017
27 सित॰ 2017
मेरे जैसा कोई नही,(No one like me)
By:
Successlocator
On: सितंबर 27, 2017
"आप धरती मे जन्मे अब तक के सबसे महान पुरुषो में से एक है"।(you are the greatest person ever born in the planet) हा दोस्तो ये बात सच है बस अपने आपको पहचानने की देर है,जब तक आप अपने आप को पहचानते नही तब तक आपकी जिंदगी एक जानवर से ज्यादा कुछ नही।जिस प्रकार जानवर सुबह से लेकर शाम तक सिर्फ और सिर्फ अपने पेट की भूख मिटाने के लिए भटकता है,उसे उससे ज्यादा और किसी वस्तु की चाह नही होती,उसके मरने तक का सफर ऐसा ही रहता है।ठीक उसी प्रकार हम भी सुबह उठे और शाम तक पेट की भूख मिटाने के लिए दौड़ते रहे और फिर सुबह हुई तो फिर वही काम और ऐसा करते करते हम अपनी आखिरी पड़ाव में भी पहुँच जायेगे,उस समय जब हम अपने सम्पूर्ण जीवन का विश्लेषण करेंगे तब हमारे पास असंतोष के सिवाय और कुछ नही रहेगा।
क्यों दोस्तो क्या पृथ्वी पर जन्मे सभी महान व्यक्तियों का जीवन ऐसा था जैसा हम जी रहे है बिलकुल भी नही, उनकी हर सुबह एक योजना(plan) के साथ होती है और रात उस योजना को खत्म होने या उस पर ही कार्य करते करते होती है,बस यही मामूली सा अंतर है,इसके अलावा कुछ भी विशेष नही है उनके पास उनके पास भी दो कान, एक नाक, दो हाथ, दो पैर,है उनके पास कोई जादू की छड़ी नही है उनका जुनून ही वो जादू की छड़ी है,जो हम भी पैदा कर सकते है।
वैसे भी दोस्तो हमे किसी के भी जैसा बनने की जरूरत नही है हम अपने आप मे महान है क्योंकि जब हम दुनिया के सबसे महान व्यक्तियों में से एक है तो हम किसी और जैसे तो बिल्कुल भी नही हो सकते जो दूसरों के जैसा बनने की कोशिश करते है वे उनके जैसे तो नही बन पाते बल्कि अपने अस्तित्व को भी भूल जाते है और इस भीड़ में कही गुम हो जाते है,जो भी व्यक्ति किसी भी क्षेत्र में अग्रणी है उन्होंने कभी के जैसा बनने का प्रयाश नही किया और न ही किसी के साथ प्रतिस्पर्धा में रहे वे सिर्फ अपने आप से ही प्रतिस्पर्धा करते रहे हर बार वे जैसे है उससे बेहतर बनाने का प्रयास करते रहेऔर एक दिन इतने बेहतर बन गए कि दुनिया उन्हें सलाम करने लगी।
ऐसी मानसिकता भी मन मे लाने के लिए आपको कुछ करना है वो मैं आपको बताता हूं रोज सुबह उठकर आईने में अपने आपको देखकर इतना कहना है" मैं धरती मे जन्मे अब तक के सबसे महान पुरुषो में से एक है"।(I am the greatest person ever born in the planet) .दिन भर ये बात आपको याद रखनी है जब भी निराश आये बस इतना मैन में दोहराते जाए जब तक मन शांत न हो जाये।
ये सभी बाते जिस दिन जान जायेगे उस दिन अकल्पनीय चमत्कार होगा उस दिन जो महानता आप तक ही सीमित थी दुनियाभर में फैल जाएगी।दोस्तो आपको मेरी पोस्ट कैसी लगी जरूर लिखे और आप कमेंट्स के माध्यम से हमसे बाते भी कर सकते हैं और अपने सवाल भी पूंछ सकते हैं।
वैसे भी दोस्तो हमे किसी के भी जैसा बनने की जरूरत नही है हम अपने आप मे महान है क्योंकि जब हम दुनिया के सबसे महान व्यक्तियों में से एक है तो हम किसी और जैसे तो बिल्कुल भी नही हो सकते जो दूसरों के जैसा बनने की कोशिश करते है वे उनके जैसे तो नही बन पाते बल्कि अपने अस्तित्व को भी भूल जाते है और इस भीड़ में कही गुम हो जाते है,जो भी व्यक्ति किसी भी क्षेत्र में अग्रणी है उन्होंने कभी के जैसा बनने का प्रयाश नही किया और न ही किसी के साथ प्रतिस्पर्धा में रहे वे सिर्फ अपने आप से ही प्रतिस्पर्धा करते रहे हर बार वे जैसे है उससे बेहतर बनाने का प्रयास करते रहेऔर एक दिन इतने बेहतर बन गए कि दुनिया उन्हें सलाम करने लगी।
ऐसी मानसिकता भी मन मे लाने के लिए आपको कुछ करना है वो मैं आपको बताता हूं रोज सुबह उठकर आईने में अपने आपको देखकर इतना कहना है" मैं धरती मे जन्मे अब तक के सबसे महान पुरुषो में से एक है"।(I am the greatest person ever born in the planet) .दिन भर ये बात आपको याद रखनी है जब भी निराश आये बस इतना मैन में दोहराते जाए जब तक मन शांत न हो जाये।
ये सभी बाते जिस दिन जान जायेगे उस दिन अकल्पनीय चमत्कार होगा उस दिन जो महानता आप तक ही सीमित थी दुनियाभर में फैल जाएगी।दोस्तो आपको मेरी पोस्ट कैसी लगी जरूर लिखे और आप कमेंट्स के माध्यम से हमसे बाते भी कर सकते हैं और अपने सवाल भी पूंछ सकते हैं।
25 सित॰ 2016
आत्म-मूल्यांकन से मिलती हैं सफलता
By:
Successlocator
On: सितंबर 25, 2016
आत्म-मूल्यांकन से मिलती हैं सफलता
Self-evaluation and assessment will help you to achieve your goals
Secrets of success is already there in you, get evaluated yourself (Hindi)
जीवन में आगे बढ़ने के लिए आत्म-मूल्यांकन बहुत जरुरी हैं।
सफलता चुटकियो में नहीं मिलती और न ही परंपरागत रूप से एक ही तरह का काम करने से।
योजना बनाकर उस पर अमल करना भी मायने रखता हैं।
कोई भी काम ख़राब या छोटा नहीं होता और सभी तरह के काम में समान तरह के अवसर मौजूद होते हैं।लेकिन कोई उस काम में काफी पैसा बना लेता हैं और कोई उससे पैसा कमाने के बजाय सब कुछ गवां देता हैं।क्या कभी आपने सोचा हैं ऐसा क्यों होता हैं? ये तो आप सब ने सुना होगा दोस्तों से “अरे यार इस काम में ज्यादा पैसा नहीं हैं और मेहनत भी ज्यादा हैं, जबकि उसी काम में कोई अच्छा पैसा बना रहा हैं इसका मतलब यह हैं कि काम तो वह ख़राब नहीं हैं।”
तो फिर क्यों इतना फर्क हैं, कुछ लोग बोलते हैं अरे यार “वो किस्मत वाला हैं या फिर उसकी किस्मत अच्छी हैं अपने तो भाग्य में तो रोना ही लिखा हैं।”
दोस्तों, ऐसा कुछ भी नहीं हैं आप अपना आत्म-मूल्यांकन कीजिये शायद जबाब आपको खुद-ब-खुद मिल जाए अब आपका सवाल कैसे करू मूल्यांकन? मैं help करता हूँ।
खुद से ये सवाल कीजिये और जबाब पूछिए।
1) मुझे किस चीज में दिलचस्पी हैं? ऐसे कौन से काम हैं जिन्हें करने में मुझे मज़ा आता हैं?
2) मेरी अब तक की Achievements (उपलब्धिया) क्या हैं?
3) मेरे personality (व्यक्तित्व) में ऐसे कौन से गुण हैं, जिन्होंने मेरे जीवन को सहज बनाने में मेरी मदद की हैं?
4) ऐसे कौन से काम हैं जो स्वाभाविक रूप से मेरे लिए बेहद आसान हैं?
5) मुझमें कौन-सी abilities हैं जो मेरे जीवन में सफलता को बढ़ा सकती हैं?
6) किसी काम को करने में मुझमें जो जोश और उर्जा एक दिन रहती हैं वह हफ्ते या महीने भर तक काम करने मेंकितनी रह जाती हैं?
7) मेरे सपने क्या हैं व कार्यक्षेत्र की वास्तिवक दुनिया से मैं उन्हें किस तरह जोड़ सकता हूँ?
8) ऐसे कौन से छोटे-छोटे काम हैं जिनमे मेरी दिलचस्पी बचपन से रही हैं इन कामो को एक साथ कैसे जोड़ा जा सकता हैं?
9) वर्तमान कार्यक्षेत्रों से जुडी जरूरतों के हिसाब से मेरे carrier के विकल्प कितने सही हैं?
10) मैं अपने carrier से सम्बंधित विकल्पों के बारें में कितनी जानकारी रखता हूँ?
11) मेरी कौनसी कमजोरिया हैं? उन कमजोरिया का मुझ पर और मेरे carrier पर क्या असर होगा?
12) मैं ऐसे कौनसे उपाय अपनाऊ, जिससे अपनी कमजोरियों से उभर सकू?
13) मैं जो carrier चुनने जा रहा हूँ, उसके लिए कैसे व्यक्तित्व की जरुरत होती हैं और मेरा व्यक्तित्व उसके लिए सही हैं या नहीं?
14) क्या में उस क्षेत्र में जाने से पहले खुद को परख सकता हूँ?
15) अपने चयनित कार्यक्षेत्र में लम्बे समय तक सफल बने रहने के लिए मुझे किस से सहयोग मिल सकता हैं?
इन सवालो के बारें में सोचने के बाद आप बेहद मूल्यवान जानकारी हासिल करेंगे आप स्वयं का परीक्षण करें और देखे यह जानकारी आपके लिए कितनी लाभदायक हैं।
Self-evaluation and assessment will help you to achieve your goals
Secrets of success is already there in you, get evaluated yourself (Hindi)
सफलता चुटकियो में नहीं मिलती और न ही परंपरागत रूप से एक ही तरह का काम करने से।
योजना बनाकर उस पर अमल करना भी मायने रखता हैं।
कोई भी काम ख़राब या छोटा नहीं होता और सभी तरह के काम में समान तरह के अवसर मौजूद होते हैं।लेकिन कोई उस काम में काफी पैसा बना लेता हैं और कोई उससे पैसा कमाने के बजाय सब कुछ गवां देता हैं।क्या कभी आपने सोचा हैं ऐसा क्यों होता हैं? ये तो आप सब ने सुना होगा दोस्तों से “अरे यार इस काम में ज्यादा पैसा नहीं हैं और मेहनत भी ज्यादा हैं, जबकि उसी काम में कोई अच्छा पैसा बना रहा हैं इसका मतलब यह हैं कि काम तो वह ख़राब नहीं हैं।”
तो फिर क्यों इतना फर्क हैं, कुछ लोग बोलते हैं अरे यार “वो किस्मत वाला हैं या फिर उसकी किस्मत अच्छी हैं अपने तो भाग्य में तो रोना ही लिखा हैं।”
दोस्तों, ऐसा कुछ भी नहीं हैं आप अपना आत्म-मूल्यांकन कीजिये शायद जबाब आपको खुद-ब-खुद मिल जाए अब आपका सवाल कैसे करू मूल्यांकन? मैं help करता हूँ।
खुद से ये सवाल कीजिये और जबाब पूछिए।
1) मुझे किस चीज में दिलचस्पी हैं? ऐसे कौन से काम हैं जिन्हें करने में मुझे मज़ा आता हैं?
2) मेरी अब तक की Achievements (उपलब्धिया) क्या हैं?
3) मेरे personality (व्यक्तित्व) में ऐसे कौन से गुण हैं, जिन्होंने मेरे जीवन को सहज बनाने में मेरी मदद की हैं?
4) ऐसे कौन से काम हैं जो स्वाभाविक रूप से मेरे लिए बेहद आसान हैं?
5) मुझमें कौन-सी abilities हैं जो मेरे जीवन में सफलता को बढ़ा सकती हैं?
7) मेरे सपने क्या हैं व कार्यक्षेत्र की वास्तिवक दुनिया से मैं उन्हें किस तरह जोड़ सकता हूँ?
8) ऐसे कौन से छोटे-छोटे काम हैं जिनमे मेरी दिलचस्पी बचपन से रही हैं इन कामो को एक साथ कैसे जोड़ा जा सकता हैं?
9) वर्तमान कार्यक्षेत्रों से जुडी जरूरतों के हिसाब से मेरे carrier के विकल्प कितने सही हैं?
10) मैं अपने carrier से सम्बंधित विकल्पों के बारें में कितनी जानकारी रखता हूँ?
11) मेरी कौनसी कमजोरिया हैं? उन कमजोरिया का मुझ पर और मेरे carrier पर क्या असर होगा?
12) मैं ऐसे कौनसे उपाय अपनाऊ, जिससे अपनी कमजोरियों से उभर सकू?
13) मैं जो carrier चुनने जा रहा हूँ, उसके लिए कैसे व्यक्तित्व की जरुरत होती हैं और मेरा व्यक्तित्व उसके लिए सही हैं या नहीं?
14) क्या में उस क्षेत्र में जाने से पहले खुद को परख सकता हूँ?
15) अपने चयनित कार्यक्षेत्र में लम्बे समय तक सफल बने रहने के लिए मुझे किस से सहयोग मिल सकता हैं?
इन सवालो के बारें में सोचने के बाद आप बेहद मूल्यवान जानकारी हासिल करेंगे आप स्वयं का परीक्षण करें और देखे यह जानकारी आपके लिए कितनी लाभदायक हैं।
22 सित॰ 2016
कैसे एक अरबपति बनें
By:
Successlocator
On: सितंबर 22, 2016
एक अरबपति होने का मतलब सिर्फ यह नहीं होता है कि एक रकम में कितने शून्य हैं । हो सकता है कि कुछ लोगों को पूंजी में निवेश करने के बारे में जानकारी न हो, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप एक अरबपति नहीं बन सकते हैं । गरीबी से निकलकर धन-दौलत प्राप्त करना एक प्रतिष्ठित सपना है । एक अरबपति बनने के लिए, अवसर बनाते रहें, बुद्धिमानी से निवेश करें और धन को बरकरार रखें । अरबपति बनने पर अधिक जानकारी के लिए नीचे दिए गए चरण देखें ।
अवसरों का निर्माण करना
1. मन लगाकर पढ़ाई करें: आम तौर पर, अरबपति, यूं ही अरबपति नहीं बनते हैं । ब्याज दर, टैक्स ब्रैकेट और लाभांश का अध्ययन करके एक अरबपति बनें । ऑनलाइन या एक विश्वविद्यालय में वित्त कक्षाएं लें । निवेश के बारे में किताबें पढ़ें ।
2 पैसा बचाएं: पैसे कमाने के लिए पैसों की जरूरत होती है । अपनी प्रत्येक तनख़्वाह से पैसे की एक विशेष राशि को अलग करें और फिर उसपर ब्याज कमाने के लिए और उसके प्रयोग से भविष्य में निवेश करने के लिए उसे एक बचत खाते में डालें ।
3 एक स्थायी सेवानिवृत्ति खाता बनाएं: भविष्य के लिए पैसे बचाने के लिए इस खाते को स्थापित किया जा सकता है । एक अरब रुपये बचाने के लिए, जितना जल्दी हो सके, पैसों की बचत शुरू करें । बचत पर ब्याज जमा होता है ।[१]
4 अपने क्रेडिट कार्ड के कर्ज़ को चुकाएं: सिर पर कर्ज होने से आगे बढ़ना मुश्किल होता है । जितना जल्दी हो सके, पढ़ाई लिखाई के कर्ज़ (Student loans) और क्रेडिट कार्ड के कर्ज़ को चुका दिया जाना चाहिए । औसत वार्षिक ब्याज़ दर 20% और 30% के बीच होता है, और इससे कर्ज़ बढ़ता रहता है ।[२]
5 एक पांच साल की योजना बनाएं: अनुमान लगाएं कि आप 5 साल में कितना पैसा बचा सकते हैं । अपने पैसे का अच्छे से उपयोग करें, चाहे उनका निवेश में प्रयोग करें, एक व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रयोग करें या फिर ब्याज एकत्र करने के लिए उन्हें एक खाते में जमा करें ।
निवेश करना
1 अचल संपत्ति खरीदें: अचल संपत्ति में निवेश करना पैसे बनाने का एक आम तरीका है । हर वर्ष संपत्ति का मूल्य बढ़ सकता है, और इससे निवेश पर अच्छा लाभ मिल सकता है । निवेश करके संपत्ति को किराये पर दिया जा सकता है और उसे विकसित किया जा सकता है ।
3 शेयरों को खरीदें और बेचें: अपनी संपत्ति बढ़ाने के लिए शेयर बाजार एक अच्छा क्षेत्र हो सकता है । खरीदने से पहले सावधानी से बाजारों को देखें और सफल शेयरों पर ध्यान दें । शेयरों को बुद्धिमानी से खरीदें । समय के साथ ज्यादातर शेयरों का मूल्य बढ़ता है । मूल्य में छोटी गिरावटें होने पर घबराएं नहीं और सामयिक जोखिम लेते रहें ।
4 मुद्रा बाजार (Money Market) में खाता खोलें: सामान्य बचत खातों की तुलना में इन खातों के लिए एक उच्च न्यूनतम राशि की आवश्यकता होती है, लेकिन इनमें एक बचत खाते से दोगुना ब्याज मिलता है । मुद्रा बाजार में कुछ हद तक जोखिम है - पैसे निकालने और निवेश करने में कुछ प्रतिबंध हैं - लेकिन कुछ किए बिना पैसे बढ़ाने का यह एक अच्छा तरीका है ।
1 सलाह के लिए अच्छे दलालों से विचार विमर्श करें: पैसा, प्राप्त की गई सलाह के जितना ही अच्छा है । धन की एक बड़ी राशि जमा करने के बाद, कोई भी व्यक्ति शेयरों में एक मामूली बदलाव देखने के लिए एक मॉनिटर के सामने बैठकर समय नहीं बिताना चाहता है । आप अपना जीवन जीना चाहेंगे । अच्छे और भरोसेमंद वित्तीय सलाहकार और दलाल आपके खातों में धन बढ़ाने के लिए काम करते रहेंगे ।
2 पोर्टफोलियो और निवेश में विविधता उत्पन्न करें: पैसे को एक ही स्थान पर न रखें । अपने पोर्टफोलियो में विविधता उत्पन्न करें और जोखिम घटाने के लिए शेयर, अचल संपत्ति, म्युचुअल फंड, बांड, और दलालों द्वारा अनुशंसित पूंजीनिवेश में निवेश करें । यदि किसी तौलिए की कंपनी में किया गया एक जोखिम भरा निवेश रंग न लाए, तो कम से कम आपके पास अभी भी अन्य कंपनियों में काफी पैसा होगा ।[३]
3 समझदारी से वित्तीय निर्णय लें: इंटरनेट, शेयर योजनाओं और जल्दी से अमीर बनने की योजनाएं प्रदान कराने वाले धोखेबाजों से भरा पड़ा है, जो अज्ञानी लोगों को अपना निशाना बनाते हैं और भोले भाले लोगों को खराब वित्तीय निर्णय लेने पर मजबूर करते हैं । अन्वेषण करें और जीवन भर के लिए निवेश करने और पैसा बनाने की ज़िम्मेदारी लें । रातों रात अरबपति नहीं बना जा सकता है ।
4 जानें कि बाहर कब निकलना है: यह जानना आवश्यक है कि एक निवेश के गिरने से पहले उससे बाहर कब निकला जाए । यदि आप कई समझदार दलालों से बात करते हैं, तो उनकी सलाह सुनें, लेकिन अपनी अंतरीय आवाज़ को भी सुनें ।
5 सही बर्ताव करें: एक अरबपति बनने के लिए, एक अरबपति के जैसा बर्ताव करें । धनी और सभ्य लोगों से मिलें, और अनुभवी लोगों से सलाह और ज्ञान प्राप्त करें ।
सलाह
चेतावनी
अवसरों का निर्माण करना
1. मन लगाकर पढ़ाई करें: आम तौर पर, अरबपति, यूं ही अरबपति नहीं बनते हैं । ब्याज दर, टैक्स ब्रैकेट और लाभांश का अध्ययन करके एक अरबपति बनें । ऑनलाइन या एक विश्वविद्यालय में वित्त कक्षाएं लें । निवेश के बारे में किताबें पढ़ें ।
- वित्त और उद्यमशीलता की पढ़ाई करें । उपभोक्ता की जरूरतों की पहचान करना सीखें, और फिर उन जरूरतों को पूरा करने के लिए व्यापार मॉडल का विकास करना सीखें । आजकल, कंप्यूटर विज्ञान और नई टेक्नोलोजी में एक अच्छा करियर बनाया जा सकता हैं ।
- सफल अरबपतियों के बारे में पढ़ें; वारेन बफेट (Warren Buffett), बिल गेट्स (Bill Gates) या जॉन हंट्समैन सीनियर (Jon Huntsman, Sr.) । अधिक पैसे कमाने के लिए, मौजूदा पैसे को सही तरीके से संभालें ।
2 पैसा बचाएं: पैसे कमाने के लिए पैसों की जरूरत होती है । अपनी प्रत्येक तनख़्वाह से पैसे की एक विशेष राशि को अलग करें और फिर उसपर ब्याज कमाने के लिए और उसके प्रयोग से भविष्य में निवेश करने के लिए उसे एक बचत खाते में डालें ।
- तय करें कि आप अपनी कमाई से कितना प्रतिशत बचाना चाहते हैं - प्रति माह केवल 1,500 रूपये से भी तीन या चार वर्षों के बाद काफी फर्क पड़ेगा । एक उच्च जोखिम का निवेश करते वक्त, उतने पैसों का निवेश करें जिसे खोने का खतरा आप उठा सकते हैं ।
3 एक स्थायी सेवानिवृत्ति खाता बनाएं: भविष्य के लिए पैसे बचाने के लिए इस खाते को स्थापित किया जा सकता है । एक अरब रुपये बचाने के लिए, जितना जल्दी हो सके, पैसों की बचत शुरू करें । बचत पर ब्याज जमा होता है ।[१]
- शुरू में पैसे की एक न्यूनतम राशि की जरूरत हो सकती है (यह वित्तीय संस्था पर निर्भर करता है) । अपने विकल्पों का अन्वेषण करें और एक वित्तीय सलाहकार से बात करें ।
4 अपने क्रेडिट कार्ड के कर्ज़ को चुकाएं: सिर पर कर्ज होने से आगे बढ़ना मुश्किल होता है । जितना जल्दी हो सके, पढ़ाई लिखाई के कर्ज़ (Student loans) और क्रेडिट कार्ड के कर्ज़ को चुका दिया जाना चाहिए । औसत वार्षिक ब्याज़ दर 20% और 30% के बीच होता है, और इससे कर्ज़ बढ़ता रहता है ।[२]
5 एक पांच साल की योजना बनाएं: अनुमान लगाएं कि आप 5 साल में कितना पैसा बचा सकते हैं । अपने पैसे का अच्छे से उपयोग करें, चाहे उनका निवेश में प्रयोग करें, एक व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रयोग करें या फिर ब्याज एकत्र करने के लिए उन्हें एक खाते में जमा करें ।
- वित्त को प्राथमिकता दें । अपने वित्तीय लक्ष्यों को लिख लें और नियमित रूप से उन्हें देखें । वित्तीय परियोजनाओं में अपनी रुचि बरकरार रखने के लिए, अनुस्मारक (reminders) लिखें और उन्हें एक ऐसी जगह पर रखें जहां आप उन्हें रोज़ देख सकें - उदाहरण के लिए बाथरूम के शीशे पर या अपनी कार के डैशबोर्ड पर ।
निवेश करना
1 अचल संपत्ति खरीदें: अचल संपत्ति में निवेश करना पैसे बनाने का एक आम तरीका है । हर वर्ष संपत्ति का मूल्य बढ़ सकता है, और इससे निवेश पर अच्छा लाभ मिल सकता है । निवेश करके संपत्ति को किराये पर दिया जा सकता है और उसे विकसित किया जा सकता है ।
2 व्यापार में निवेश करें: अपना खुद का व्यवसाय शुरू करने या एक व्यवसाय को खरीदना, पैसे बनाने का एक ठोस तरीका हो सकता है । एक ऐसी कंपनी बनाएं या चुनें जिसके उत्पादों या सेवाओं का आप खुद इस्तेमाल करना चाहते हैं, और उसे सुधारने की लिए समय और पैसे खर्च करें । अच्छे और बुरे व्यापार निवेश में अंतर बताने के लिए उद्योग के बारे में जानकारी प्राप्त करें ।
- बाजार में महंगाई के दौरान निवेश करते हुए सावधान रहें, और सुनिश्चित करें कि मासिक बंधक (mortgage) को आप आसानी से चुका सकते हैं । अमेरिका के 2008 के बंधक संकट के बारे में पढ़ने से आपको एक अच्छी सीख मिल सकती है ।
- हरित ऊर्जा और कंप्यूटर प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में निवेश करना, भविष्य के लिए एक अच्छी योजना हो सकती है । ये व्यवसाय अगले दशकों में विकसित हो सकते हैं, इसलिए अभी निवेश करना फायदेमंद हो सकता है ।
3 शेयरों को खरीदें और बेचें: अपनी संपत्ति बढ़ाने के लिए शेयर बाजार एक अच्छा क्षेत्र हो सकता है । खरीदने से पहले सावधानी से बाजारों को देखें और सफल शेयरों पर ध्यान दें । शेयरों को बुद्धिमानी से खरीदें । समय के साथ ज्यादातर शेयरों का मूल्य बढ़ता है । मूल्य में छोटी गिरावटें होने पर घबराएं नहीं और सामयिक जोखिम लेते रहें ।
- लाभांश पुनर्निवेश की योजनाओं (Dividend reinvestment plans) और प्रत्यक्ष शेयर खरीद की योजनाओं (direct stock purchase plans) में दलालों (और कमीशन) की जरूरत नहीं होती है और सीधे कंपनी एजेंटों से खरीदारी की जा सकती है । 1,000 से अधिक बड़ी कंपनियां, ये सेवाएं प्रदान करती हैं । प्रति माह केवल 1,500-2,000 रूपये निवेश करने से शेयरों के एक खंड को खरीदा जा सकता है ।
4 मुद्रा बाजार (Money Market) में खाता खोलें: सामान्य बचत खातों की तुलना में इन खातों के लिए एक उच्च न्यूनतम राशि की आवश्यकता होती है, लेकिन इनमें एक बचत खाते से दोगुना ब्याज मिलता है । मुद्रा बाजार में कुछ हद तक जोखिम है - पैसे निकालने और निवेश करने में कुछ प्रतिबंध हैं - लेकिन कुछ किए बिना पैसे बढ़ाने का यह एक अच्छा तरीका है ।
- 5 सरकारी बांड बाजार (government bonds) में निवेश करें: बांड सरकारी एजेंसियों द्वारा जारी किए गए ब्याज प्रमाण पत्र होते हैं, जैसे कि राजकोष, जिसमें कोई बकाया जोखिम नहीं होता है । प्रिंटिंग प्रेस को सरकार नियंत्रित करती है और पूंजीनिवेश को सुरक्षित रखने के लिए वह आवश्यक संपत्ति मुद्रित कर सकती है, इसलिए ये एक सुरक्षित निवेश है और अपने निवेश में विविधता उत्पन्न करने के लिए यह एक अच्छा तरीका है ।
- एक विश्वसनीय दलाल से बात करें और अपने पोर्टफोलियो में विविधता उत्पन्न करने के लिए एक बांड खरीदने की योजना पर विचार करें ।
1 सलाह के लिए अच्छे दलालों से विचार विमर्श करें: पैसा, प्राप्त की गई सलाह के जितना ही अच्छा है । धन की एक बड़ी राशि जमा करने के बाद, कोई भी व्यक्ति शेयरों में एक मामूली बदलाव देखने के लिए एक मॉनिटर के सामने बैठकर समय नहीं बिताना चाहता है । आप अपना जीवन जीना चाहेंगे । अच्छे और भरोसेमंद वित्तीय सलाहकार और दलाल आपके खातों में धन बढ़ाने के लिए काम करते रहेंगे ।
2 पोर्टफोलियो और निवेश में विविधता उत्पन्न करें: पैसे को एक ही स्थान पर न रखें । अपने पोर्टफोलियो में विविधता उत्पन्न करें और जोखिम घटाने के लिए शेयर, अचल संपत्ति, म्युचुअल फंड, बांड, और दलालों द्वारा अनुशंसित पूंजीनिवेश में निवेश करें । यदि किसी तौलिए की कंपनी में किया गया एक जोखिम भरा निवेश रंग न लाए, तो कम से कम आपके पास अभी भी अन्य कंपनियों में काफी पैसा होगा ।[३]
3 समझदारी से वित्तीय निर्णय लें: इंटरनेट, शेयर योजनाओं और जल्दी से अमीर बनने की योजनाएं प्रदान कराने वाले धोखेबाजों से भरा पड़ा है, जो अज्ञानी लोगों को अपना निशाना बनाते हैं और भोले भाले लोगों को खराब वित्तीय निर्णय लेने पर मजबूर करते हैं । अन्वेषण करें और जीवन भर के लिए निवेश करने और पैसा बनाने की ज़िम्मेदारी लें । रातों रात अरबपति नहीं बना जा सकता है ।
- यदि आपको संदेह हो, तो अपने निवेश के साथ रूढ़िवादी रहें । पैसे का बुद्धिमानी से विविधीकरण करना, ब्याज अर्जित होने देना और अस्थिर बाजारों में सावधान रहना, अंत में एक चतुर निर्णय साबित होगा ।
4 जानें कि बाहर कब निकलना है: यह जानना आवश्यक है कि एक निवेश के गिरने से पहले उससे बाहर कब निकला जाए । यदि आप कई समझदार दलालों से बात करते हैं, तो उनकी सलाह सुनें, लेकिन अपनी अंतरीय आवाज़ को भी सुनें ।
- यदि आपके पास शेयर बेचकर काफी ज्यादा लाभ बनाने का एक अवसर आए, तो उसे बेच दें । लाभ, लाभ है । भले ही अगले साल उस शेयर का मूल्य बढ़े, तब भी कम से कम आपने काफी पैसे कमा चुके होंगे जिन्हें आप कहीं और निवेश कर सकते हैं ।
5 सही बर्ताव करें: एक अरबपति बनने के लिए, एक अरबपति के जैसा बर्ताव करें । धनी और सभ्य लोगों से मिलें, और अनुभवी लोगों से सलाह और ज्ञान प्राप्त करें ।
- ललित कला, अच्छे भोजन, और यात्रा में दिलचस्पी लें । एक नौका या धनी लोगों की मानक चीज़ें खरीदने पर विचार करें ।
- "पुराना पैसा" और "नया पैसा" के बीच एक अंतर है । नया पैसा उन लोगों को कहा जाता है जिन्होंने जल्दी से धन-दौलत हासिल की है, और जो ठाठ से रहते हैं और काफी पैसे खर्च करके एक ठाठदार जिंदगी जीते हैं । धन पर पकड़ बनाए रखने के लिए, पुराने पैसे से सीखें । ऐसा करके आप बहुत आगे जा सकते हैं ।
- समझदारी से जोखिम लेना सीखें । बैंक में पैसों पर ब्याज जुड़ता रहता है, लेकिन और अधिक पैसे कमाने के लिए अन्य क्षेत्रों में निवेश करने पर विचार करें ।
- रचनात्मक बनें । एक व्यवसाय शुरु करने के लिए या उसमें निवेश करने के लिए, किसी समस्या का एक ऐसा हल निकालें जिसके बारे में पहले किसी ने भी नहीं सोचा हो ।
- उचित समय प्रबंधन और दिनचर्या की एक संरचना का विकास करें । समय बचाएं और अतिरिक्त समय का रचनात्मक तरीके से उपयोग करें ।
चेतावनी
- जल्दी अमीर बनने के घोटालों से बचें । ऐसे लोगों से दूर रहें जो अवास्तविक शेयर बाजार के रिटर्न (10-15% या उससे अधिक रिटर्न) का वादा करें ।
कैसे आईआईटी की प्रवेश परीक्षा में सफलता प्राप्त करें IIT exam secrets
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On: सितंबर 22, 2016
भारत में इंजीरिंग विषयों की शिक्षा प्राप्त करने के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) सर्वश्रेष्ठ संस्थान माने जाते हैं। इनमें प्रवेश पाना जितना ही सम्मानजनक है उतना ही चुनौतीपूर्ण भी है। आईआईटी की प्रवेश परीक्षा में सफल होने के लिए अच्छी गणितीय क्षमता, भौतिकी और रसायन के महत्वपूर्ण टॉपिक्स की पहचान और समझ, कठिन मेहनत, लगातार अभ्यास, तेज गति से प्रश्न हल करने और उत्तर देने का अभ्यास, अपने सहपाठियों एवं अध्यापकों से खुली चर्चा आदि बहुत उपयोगी हैं।
सलाह
चेतावनी
- हर टॉपिक का विस्तारपूर्वक (डिटेल में) अध्ययन करें। । भौतिकी, रसायन और गणित के सभी टॉपिकों का अध्यन करना जरूरी है। कुछ चुन-चुनकर अध्ययन किए गये टॉपिकों से काम नहीं बनेगा।
- याद रखिए कि JEE में 11वीं कक्षा से लगभग 45% और 12वीं कक्षा से लगभग 55% प्रश्न पूछे जाते हैं।
- भौतिकी में इन टॉपिक्स को विस्तार से पढ़ें: तरल, तरंग एवं ध्वनि, विद्युतचुम्बकीय प्रेरण, संधारित्र एवं विद्युतस्थैतिकी, यांत्रिकी, प्रकाशिकी, तथा आधुनिक भौतिकी ।
- रसायन विज्ञान में इन टॉपिक्स को अच्छी तरह तैयार करें : सह-संयोजकता, भौतिक रसायन में रासायनिक साम्य, विद्युत-रसायन, ऊष्मागतिकी, मत्रात्मक विश्लेषण (Quantitative Analysis), अकार्बनिक रसायन तथा कार्बनिक रसायन में रासायनिक आबन्धन ।
- गणित में इन टॉपिक्स पर विशेष ध्यान दीजिए : समिश्र संख्याएँ, वृत्त, परवलय, अतिपरबलय, निर्देशांक ज्यामिति, प्रायिकता, सीमा, सदिश विश्लेषण, मैट्रिक्स, फलन, अवकलनीयता (differentiability), निश्चित समाकल, अवकलज के अनुप्रयोग आदि।
- मन में सकारात्मक सोच के साथ तैयारी कीजिए। अपने आप को आईआईटी के योग्य मानकर चलिए।
- समान दर से लगातार अध्ययन करिए और प्रश्न हल करते रहिए तथा अपनी परीक्षा स्वयं लेते रहिए। प्रत्येक विषय को समुचित समय दीजिए। एक विषय की तैयारी बहुत दिनों तक करने के बाद दूसरे विषय को तैयार करना ठीक तरीका नहीं है। एक विषय को अधिक से अधिक एक-दो दिन पढ़िए, फिर दूसरा विषय पढ़िए।
- समुचित मार्गदर्शन भी लेते रहिए। तेज विद्यार्थियों तथा अपने अध्यापकगण से चर्चा करते रहिए। तेज गति से गणना करने की अपनी स्वयं की विधियाँ विकसित कीजिए। जेईई पूर्णतः कांसेप्ट पर आधारित हो गया है। इसलिए सभी महत्वपूर्ण टॉपिक्स के आपके कांसेप्ट पूरी तरह साफ होने चाहिए।
सलाह
- यदि आप किसी कोचिंग संस्थान से कोचिंग नहीं ले रहें हो तो भी कोचिंग संस्थान के छात्रों के सम्पर्क में अवश्य रहें और उनसे चर्चा करके अपनी कमियों की पूर्ति करें।
- दो-तीन विद्यार्थियों का 'स्टडी-सर्कल' बनाएं जो आईआईटी प्रवेश-परीक्षा की तैयारी कर रहे हों। इनके साथ नियमित चर्चा करें। आपने जो टॉपिक तैयार किए हैं उन्हें समझाएँ तथा उन्होने जो तैयार किया है उसे उनसे सींखें।
चेतावनी
- प्रशन हल करते समय गति भी तेज बनाने की लगातार कोशिश करनी चाहिए। यह लम्बे और लगातार प्रयत्न से ही आती है। किन्तु गति बढाने के लिए शुद्धता (accuracy) से समझौता ना करें।
- परीक्षा के ठीक पहले रात-दिन पढ़ने की गलती न करें। इसके बजाय सात-आठ घण्टे की अच्छी नींद लें और प्रसन्न बने रहें। इससे परीक्षा-हाल में आपकी मानसिक क्षमता और दक्षता अपने पूर्ण रूप में बनी रहेगी। परीक्षा केन्द्र पर पन्द्रह मिनट पहले पहुँचना भी हर दृष्टि से लाभकारी रहेगा।
14 सित॰ 2016
"सफलता का रहस्य" (The secret of success)
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On: सितंबर 14, 2016
"सफलता का रहस्य" (The secret of success)
जीवन में सफल होना कौन नही चाहता, हम अपने अपने तरीके अपना कर जीवन में सफल होने का प्रयत्न करते रहते हैं।हर व्यक्ति की मूलभूत चाहत होती है कि उसके जीने के मायने हों। वह इतना सक्षम हो कि न केवल अपनी वरन अपने परिजनों-परिचितों की भी आवश्यकताओं एवं इच्छाओं की पूर्ति कर सके। समाज में उसका सम्माननीय स्थान हो। कोई व्यक्ति व्यवसाय करता है, कोई व्यक्ति नौकरी करता है तो कोई अन्य उद्योग करता है। जीवन में सफलता पाने के लिए एक लक्ष्य अपना कर उस का चिंतन -मनन करो ,उसे अपना जीवन बना लो अपनी सम्पूर्ण शक्ति को लगा दो अन्य विचार त्याग दो । दृढ़ता के साथ उसे पूरा करने की इक्षा करो । दृढ़ता में बड़ी ताकत होती है । प्रबल इक्षा शक्ति सफलता जरुर देगी ।जो लोग मंजिल पर नहीं पहुंच पाते, वे इसके लिए अपने भाग्य को कोसते हैं और इसे नियति मानकर बैठ जाते हैं लेकिन उन्हें यह नहीं मालूम है कि जीवन में सफलता पाने के लिए अपने भीतर कुछ विशिष्ट गुण पैदा करने पड़ते हैं जिन्हें हम सफलता के सूत्र भी कह सकते हैं। यहां कुछ ऐसे ही सूत्रों की चर्चा कर रहे हैं जिन्हें आत्मसात् करके आप अपने कार्य क्षेत्र में सफल हो सकते हैं।
आत्मविश्वास : प्रत्येक व्यक्ति निरन्तर विकास और सफलताओं के ख्वाब संजोता है लेकिन जब ख्वाब टूटने लगते हैं तो वह निराश व तनाव को अपने ऊपर हावी कर लेता है। उसे यह नहीं भूलना चाहिए कि आज के प्रतिस्पर्धा वाले युग में कोई भी कार्य कठिन ज़रूर हो सकता है परन्तु असंभव नहीं। ज़रूरत है तो बस आत्मविश्वास की। ऐसी धारणा है कि मनुष्य की आधी क्षमता शरीर और कौशल के साथ जुड़ी होती है, और शेष क्षमता आत्मविश्वास के सहारे टिकी रहती है, परन्तु सभी इसका उपयोग नहीं कर पाते, जो करते हैं सफलता एक न एक दिन उनके कदम चूमती है। आत्मविश्वास से ही मनुष्य के भीतर की क्षमता जाग्रत होती है। कई लोगों में योग्यता व क्षमता तो होती है लेकिन आत्मविश्वास नहीं होता, इसलिए सफलता भी इनसे दूर रहती है। सफलता तभी मिलेगी जब आप अपनी क्षमताओं पर विश्वास करते हुए अटूट लगन व मेहनत से काम करें।
किसी भी कार्य की सफलता में जितना बड़ा योगदान हमारे अभ्यास और परिश्रम का होता है, उतना ही आत्मविश्वास का भी होता है। मनोवैज्ञानिक आत्मविश्वास को प्रेरणा का ही एक आयाम मानते हैं, जितनी अधिक प्रेरणा होगी, उतना ही अधिक आत्मविश्वास और सफलता की संभावना होगी। आत्मविश्वास बढ़ाने के कई तरीके हो सकते हैं। अपने अतीत की सफल घटनाओं को याद करने से आत्मविश्वास बढ़ता है। अपना कोई आदर्श भी बनाया जा सकता है।
अपने कर्तव्य के प्रति ईमानदार रहते हुए लगातार परिश्रम से अपने आत्मविश्वास को जगाया जा सकता है। इसी के बल पर अपनी संकल्प शक्ति को भी मज़बूत किया जा सकता है। आत्मविश्वासी बनकर आप व्यक्तिगत सफलता तो पाएंगे ही, समाज में भी आप को सम्मान मिलेगा।
इच्छाशक्ति : लक्ष्य प्राप्ति के लिए यह ज़रूरी है अदम्य इच्छाशक्ति का होना। इच्छाशक्ति ही मनुष्य को उसके लक्ष्य तक लेकर जाती है। चाहे रास्ता कितना ही लंबा क्यों न हो, चाहे कितना ही त्याग क्यों न करना पड़े, इच्छाशक्ति ऐसी ऊर्जा या ताकत है जो मनुष्य को उसके उद्देश्य तक अवश्य पहुंचाती है। जीवन में गंभीर चुनौतियां क्यों न हों, यदि व्यक्ति में चुनौतियों का सामना करने की इच्छाशक्ति है तो कुछ भी असंभव नहीं है। प्रबल इच्छाशक्ति रखने वाला कोई भी व्यक्ति कार्य कुशल बन सकता है। इच्छाशक्ति सफलता की कुंजी है, इसलिए अपने भीतर इसे पैदा करें। इच्छाशक्ति के बल पर ही साहसी, परिश्रमी एवं धुन के पक्के लोग विश्व कीर्तिमान रचते हैं।
लक्ष्य तय करें : बिना दिशा निश्चित किए यदि समुद्र में एक जलयान को छोड़ दिया जाए तो इसका क्या परिणाम होगा, आप स्वयं अंदाज़ लगा सकते हैं। इधर-उधर डोलता हुआ जलयान या तो समुद्री चट्टानों से या फिर तट से टकराकर समुद्र में डूब जाएगा, लेकिन जब उसी जलयान की दिशा निश्चित होगी तो समुद्र को चीरते हुए वह अपनी मंजिल तक पहुंच जाएगा। यही उदाहरण हमारे जीवन पर भी लागू होता है। बिना अपना लक्ष्य तय किये हम अपनी मंजिल पर नहीं पहुंच सकते। भाग्य के भरोसे बैठे रहना ठीक नहीं।
योग्यता : जीवन का लक्ष्य हमारे सामर्थ्य, इच्छाशक्ति और योग्यता पर आधारित होना चाहिए। लक्ष्य प्राप्ति के लिए सबसे पहले यह ज़रूरी है कि आप यह तय करें कि आप किस रास्ते पर चलना चाहते हैं। उसके बाद यह सोचें कि किन साधनों से आप उस रास्ते पर चलते हुए अपनी मंजिल तक पहुंच सकते हैं। जैसे-जैसे आप रास्ते पर आगे बढ़ते जाएंगे, आपके साधन भी बढ़ते जाएंगे। यदि आप असफलता की असहनीय वेदना से बचना चाहते हैं तो सिर्फ लक्ष्य ही दिखाई देना चाहिए। वास्तव में लक्ष्य तय कर लेना ही आधी सफलता हासिल कर लेना है। अपने लक्ष्य को सकारात्मक तरीके से निर्मित करना चाहिए न कि नकारात्मक भाव से। लक्ष्य का उद्देश्य आपको गतिशील बनाए रखने के लिए प्रेरित करने के लिए होना चाहिए। जब आप अपना लक्ष्य निर्धारित करें तो यह भी सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि आप अपनी क्षमताओं व शक्तियों का पूरा उपयोग कर रहे हैं। लक्ष्य हासिल करने के लिए आपको अपनी क्षमताओं का भी पता होना चाहिए। ऐसे बहुत से लोग हैं जो अपने जीवन में बहुत आगे बढ़ सकते थे लेकिन उन्होंने अपनी क्षमताओं का इस्तेमाल ठीक ढंग से नहीं किया और अपने लक्ष्य को सीमित दायरे में ही रखा।
समय का सदुपयोग : जीवन के किसी भी क्षेत्र में सफलता के साथ चलने व उसका सदुपयोग करने वाला व्यक्ति ही जीवन में कामयाबी के शिखर पर पहुंच सकता है। योजनाबद्ध तरीके से शुरू किया गया कार्य समय सेपूरा होता है और अपेक्षित परिणाम देता है, इसलिए समय के महत्व को समझें।
इस प्रकार के कुछ टिप्स अपनाकर आप भी एक सफल व्यक्ति बन सकते हैं। तो फिर देर किसी बात की? हो जाइए आप तैयार और अपनी मंजिल की ओर कदम बढ़ा दीजिए।
जीवन में सफल होना कौन नही चाहता, हम अपने अपने तरीके अपना कर जीवन में सफल होने का प्रयत्न करते रहते हैं।हर व्यक्ति की मूलभूत चाहत होती है कि उसके जीने के मायने हों। वह इतना सक्षम हो कि न केवल अपनी वरन अपने परिजनों-परिचितों की भी आवश्यकताओं एवं इच्छाओं की पूर्ति कर सके। समाज में उसका सम्माननीय स्थान हो। कोई व्यक्ति व्यवसाय करता है, कोई व्यक्ति नौकरी करता है तो कोई अन्य उद्योग करता है। जीवन में सफलता पाने के लिए एक लक्ष्य अपना कर उस का चिंतन -मनन करो ,उसे अपना जीवन बना लो अपनी सम्पूर्ण शक्ति को लगा दो अन्य विचार त्याग दो । दृढ़ता के साथ उसे पूरा करने की इक्षा करो । दृढ़ता में बड़ी ताकत होती है । प्रबल इक्षा शक्ति सफलता जरुर देगी ।जो लोग मंजिल पर नहीं पहुंच पाते, वे इसके लिए अपने भाग्य को कोसते हैं और इसे नियति मानकर बैठ जाते हैं लेकिन उन्हें यह नहीं मालूम है कि जीवन में सफलता पाने के लिए अपने भीतर कुछ विशिष्ट गुण पैदा करने पड़ते हैं जिन्हें हम सफलता के सूत्र भी कह सकते हैं। यहां कुछ ऐसे ही सूत्रों की चर्चा कर रहे हैं जिन्हें आत्मसात् करके आप अपने कार्य क्षेत्र में सफल हो सकते हैं।
आत्मविश्वास : प्रत्येक व्यक्ति निरन्तर विकास और सफलताओं के ख्वाब संजोता है लेकिन जब ख्वाब टूटने लगते हैं तो वह निराश व तनाव को अपने ऊपर हावी कर लेता है। उसे यह नहीं भूलना चाहिए कि आज के प्रतिस्पर्धा वाले युग में कोई भी कार्य कठिन ज़रूर हो सकता है परन्तु असंभव नहीं। ज़रूरत है तो बस आत्मविश्वास की। ऐसी धारणा है कि मनुष्य की आधी क्षमता शरीर और कौशल के साथ जुड़ी होती है, और शेष क्षमता आत्मविश्वास के सहारे टिकी रहती है, परन्तु सभी इसका उपयोग नहीं कर पाते, जो करते हैं सफलता एक न एक दिन उनके कदम चूमती है। आत्मविश्वास से ही मनुष्य के भीतर की क्षमता जाग्रत होती है। कई लोगों में योग्यता व क्षमता तो होती है लेकिन आत्मविश्वास नहीं होता, इसलिए सफलता भी इनसे दूर रहती है। सफलता तभी मिलेगी जब आप अपनी क्षमताओं पर विश्वास करते हुए अटूट लगन व मेहनत से काम करें।
किसी भी कार्य की सफलता में जितना बड़ा योगदान हमारे अभ्यास और परिश्रम का होता है, उतना ही आत्मविश्वास का भी होता है। मनोवैज्ञानिक आत्मविश्वास को प्रेरणा का ही एक आयाम मानते हैं, जितनी अधिक प्रेरणा होगी, उतना ही अधिक आत्मविश्वास और सफलता की संभावना होगी। आत्मविश्वास बढ़ाने के कई तरीके हो सकते हैं। अपने अतीत की सफल घटनाओं को याद करने से आत्मविश्वास बढ़ता है। अपना कोई आदर्श भी बनाया जा सकता है।
अपने कर्तव्य के प्रति ईमानदार रहते हुए लगातार परिश्रम से अपने आत्मविश्वास को जगाया जा सकता है। इसी के बल पर अपनी संकल्प शक्ति को भी मज़बूत किया जा सकता है। आत्मविश्वासी बनकर आप व्यक्तिगत सफलता तो पाएंगे ही, समाज में भी आप को सम्मान मिलेगा।
इच्छाशक्ति : लक्ष्य प्राप्ति के लिए यह ज़रूरी है अदम्य इच्छाशक्ति का होना। इच्छाशक्ति ही मनुष्य को उसके लक्ष्य तक लेकर जाती है। चाहे रास्ता कितना ही लंबा क्यों न हो, चाहे कितना ही त्याग क्यों न करना पड़े, इच्छाशक्ति ऐसी ऊर्जा या ताकत है जो मनुष्य को उसके उद्देश्य तक अवश्य पहुंचाती है। जीवन में गंभीर चुनौतियां क्यों न हों, यदि व्यक्ति में चुनौतियों का सामना करने की इच्छाशक्ति है तो कुछ भी असंभव नहीं है। प्रबल इच्छाशक्ति रखने वाला कोई भी व्यक्ति कार्य कुशल बन सकता है। इच्छाशक्ति सफलता की कुंजी है, इसलिए अपने भीतर इसे पैदा करें। इच्छाशक्ति के बल पर ही साहसी, परिश्रमी एवं धुन के पक्के लोग विश्व कीर्तिमान रचते हैं।
लक्ष्य तय करें : बिना दिशा निश्चित किए यदि समुद्र में एक जलयान को छोड़ दिया जाए तो इसका क्या परिणाम होगा, आप स्वयं अंदाज़ लगा सकते हैं। इधर-उधर डोलता हुआ जलयान या तो समुद्री चट्टानों से या फिर तट से टकराकर समुद्र में डूब जाएगा, लेकिन जब उसी जलयान की दिशा निश्चित होगी तो समुद्र को चीरते हुए वह अपनी मंजिल तक पहुंच जाएगा। यही उदाहरण हमारे जीवन पर भी लागू होता है। बिना अपना लक्ष्य तय किये हम अपनी मंजिल पर नहीं पहुंच सकते। भाग्य के भरोसे बैठे रहना ठीक नहीं।
योग्यता : जीवन का लक्ष्य हमारे सामर्थ्य, इच्छाशक्ति और योग्यता पर आधारित होना चाहिए। लक्ष्य प्राप्ति के लिए सबसे पहले यह ज़रूरी है कि आप यह तय करें कि आप किस रास्ते पर चलना चाहते हैं। उसके बाद यह सोचें कि किन साधनों से आप उस रास्ते पर चलते हुए अपनी मंजिल तक पहुंच सकते हैं। जैसे-जैसे आप रास्ते पर आगे बढ़ते जाएंगे, आपके साधन भी बढ़ते जाएंगे। यदि आप असफलता की असहनीय वेदना से बचना चाहते हैं तो सिर्फ लक्ष्य ही दिखाई देना चाहिए। वास्तव में लक्ष्य तय कर लेना ही आधी सफलता हासिल कर लेना है। अपने लक्ष्य को सकारात्मक तरीके से निर्मित करना चाहिए न कि नकारात्मक भाव से। लक्ष्य का उद्देश्य आपको गतिशील बनाए रखने के लिए प्रेरित करने के लिए होना चाहिए। जब आप अपना लक्ष्य निर्धारित करें तो यह भी सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि आप अपनी क्षमताओं व शक्तियों का पूरा उपयोग कर रहे हैं। लक्ष्य हासिल करने के लिए आपको अपनी क्षमताओं का भी पता होना चाहिए। ऐसे बहुत से लोग हैं जो अपने जीवन में बहुत आगे बढ़ सकते थे लेकिन उन्होंने अपनी क्षमताओं का इस्तेमाल ठीक ढंग से नहीं किया और अपने लक्ष्य को सीमित दायरे में ही रखा।
समय का सदुपयोग : जीवन के किसी भी क्षेत्र में सफलता के साथ चलने व उसका सदुपयोग करने वाला व्यक्ति ही जीवन में कामयाबी के शिखर पर पहुंच सकता है। योजनाबद्ध तरीके से शुरू किया गया कार्य समय सेपूरा होता है और अपेक्षित परिणाम देता है, इसलिए समय के महत्व को समझें।
इस प्रकार के कुछ टिप्स अपनाकर आप भी एक सफल व्यक्ति बन सकते हैं। तो फिर देर किसी बात की? हो जाइए आप तैयार और अपनी मंजिल की ओर कदम बढ़ा दीजिए।
11 सित॰ 2016
नरेंद्र मोदी का प्रधान मंत्री बनने तक का सफर
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On: सितंबर 11, 2016
नरेन्द्र मोदी ने 2014 के चुनावों में भाजपा को प्रचंड जीत दिलाई। भाजपा ने मोदी को चेहरा बनाकर लोकसभा का चुनाव लड़ा था। प्रचार के दौरान मोदी ने धुंआधार सभाएं कीं। उनके प्रचार की आक्रामक शैली ने कांग्रेस को बैकफुट पर ला दिया। बच्चों से लेकर बुर्जुग तक की जुबां पर एक ही नाम था- 'मोदी'। सभाओं में उमड़े जनसैलाब ने बता दिया कि मोदी के व्यक्तित्व में कितना आकर्षण है। प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी का जादू आज भी बरकरार है। अब मोदी का यह जादू दुनियाभर में सर चढ़कर बोल रहा है। आइए जानते हैं नरेन्द्र मोदी के इन खास गुणों को-
1. असाधारण भाषण कला : मोदी की सबसे बड़ी और असाधारण बात उनकी भाषण कला है और वे अपनी इस कला से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करना जानते हैं। विकास और अन्य मुद्दों पर वे जितनी स्पष्टता और प्रभावी तरीके से अपनी बात रखते हैं कि बिना किसी तैयारी के उनका आशु भाषण भी लोगों को प्रभावित करने की क्षमता रखता है। देश के अन्य नेताओं की तरह से लिखा हुआ भाषण नहीं पढ़ते हैं। उनकी विशेषता है कि वे अपनी वाक शैली से किसी भी प्रकार के श्रोता वर्ग से अपना संबंध बना लेते हैं।
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2. करिश्मा : प्रधानमंत्री मोदी की एक और बड़ी खूबी है कि वे किसी विश्वस्तरीय नेता जैसा करिश्मा रखते हैं। उनका व्यक्तित्व मजबूत है और देश के ज्यादातर लोगों ने ऐसे ही प्रधानमंत्री देखे हैं जो कि लोगों के सामने से अदृष्य रहते रहे हैं। देश के 35 वर्ष से कम आयु के युवाओं की नजर में वे ऐसे मजबूत नेता हैं जिनके नेतृत्व में देश विकास के मार्ग पर आगे बढ़ सकता है।
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3. त्वरित निर्णय क्षमता : मोदी की एक खूबी यह भी है कि वे तुरंत ही निर्णय लेने के लिए जाने जाते हैं। यह क्षमता भारत के नेताओं में बहुत कम पायी जाती है और इस कारण से उन नेताओं से अलग हैं जोकि किन्हीं मजबूरियों के चलते फैसले नहीं लेते या लेने में बहुत अधिक समय लगा देते हैं। वे निर्णय लेने के बारे में नो नन सेंस अप्रोच रखते हैं और इस निर्णयों पर तुरंत क्रियान्वयन भी सुनिश्चित करना जानते हैं।
4. स्पष्ट दूरदृष्टि : मोदी का एक सकारात्मक गुण यह है कि उनकी दूरदृष्टि या विजन बिल्कुल स्पष्ट होता है। उनकी इसी दूरदर्शिता और स्वप्न का नतीजा है कि उन्होंने गुजरात को विकसित करने के लिए तब विदेश यात्राएं कीं जब वे एक मुख्यमंत्री ही थे। अपने चुनावी भाषणों में उन्होंने लोगों में विश्वास जगाया कि भारत का आर्थिक विकास, भ्रष्टाचार मुक्त सरकार और दुनिया में अपना प्रभाव कायम करने की क्षमता विकसित होगी।
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5. मजबूत समर्थन का आधार : प्रधानमंत्री के साथ एक और खूबी यह है कि गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर राजग के प्रधानमंत्री पद के दावेदार घोषित होने तक मोदी की अपनी ही पार्टी में स्पष्ट मास अपील थी। उनकी पार्टी के अन्य नेता और कार्यकर्ता उनके समर्थन में खड़े रहे और इसी तरह के समर्थन के बल पर उन्होंने पार्टी के दिग्गज नेताओं, लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, सुषमा स्वराज को पीछे छोडा और पार्टी की ओर से प्रधानमंत्री बनने की दावेदारी हासिल की थी।
6. अनुशासित जीवन : देश के पंद्रहवें प्रधानमंत्री ने हमेशा ही एक अनुशासित जीवन जिया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में एक बालस्वयंसेवक बनने से लेकर प्रधानमंत्री बनने तक उनका जीवन अनुशासित है। यह बात बताती है कि जो दृढ़ निश्चय वे एक आठ वर्षीय बालक के तौर पर रखते थे वही दृढ़ निश्चय और अनुशासन उनमें 64 वर्षीय प्रधानमंत्री के रूप में मौजूद है।
7. एक असाधारण योजनाकार : यह उनकी ऐसी खूबी है जोकि उन्हें उन लोगों में शामिल करती है जो कि बहुत अच्छी और कुशलता से बड़ी-बड़ी योजनाओं को बनाते हैं। इसका उदाहरण उनके चुनाव प्रचार से मिलता है। मोदी ने 3.5 लाख किमी से ज्यादा की यात्राएं कीं और इस दौरान 400 रैलियों को संबोधित किया। वे ऐसे क्षेत्रों में गए जहां पर आमतौर पर लोग जाना नहीं पसंद करते। लेकिन उनकी कुशल योजनाओं के बल पर ही वे बेहतर परिणाम हासिल कर सके।
8. तकनीक के प्रति रुझान : मोदी एक टेकसेवी व्यक्ति हैं और वे खुद को तकनीक के क्षेत्र में होने वाले परिवर्तनों से अपडेट रखते हैं। अपने जीवन में वे घटनाओं के बारे में तुरंत ही ट्वीट पोस्ट करते हैं। वे इस बात का भी ध्यान रखते हैं कि उनकी फेसबुक तस्वीर को बदला गया है या नहीं। उनसे हम सीख सकते हैं कि तकनीक के प्रति रुझान क्या होता है और इससे कैसे लाभ उठाया जा सकता है।
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9. फिटनेस के प्रति सतर्कता : मोदी योग के बहुत बड़े अनुगामी है और वे इसे करना कभी नहीं भूलते। भले ही वे कितने ही व्यस्त हों लेकिन उनके योगाभ्यास में कभी बाधा नहीं आती है। शायद इसी कारण से वे इस उम्र में भी इतने सक्रिय और फिट हैं। उनकी यह सतर्कता सभी को प्रेरित कर सकती है।
10. उत्साह से भरा जीवन : अपनी उम्र के 64 वर्ष होने के बावजूद नरेन्द्र मोदी अपने जीवन को प्रतिदिन उत्साह से जीते हैं। कुछ समय पहले ही उन्होंने अपनी जापान यात्रा के दौरान ड्रम बजाया था और शिक्षक दिवस पर बच्चों के सवालों का जवाब दिया था। उनके व्यक्तित्व में उत्साह की कमी कभी नजर नहीं आती है।
11. धैर्यशीलता : अपनी विश्वसनीय और पक्की योजना से उनमें आत्मविश्वास का भाव रहता है और वे ऐसे व्यक्ति नहीं हैं जोकि अधीरता दिखाए या बेचैन हो और परिणामों को लेकर अशांत हो जाए। धैर्य बनाए रखना और हर हालत में मानसिक संतुलन बनाए रखना उनकी खूबी है। बहुत कम अवसरों पर वे नाराज होते हैं या भावनाओं में बह जाते हों। मोदी अपना धीरज कभी नहीं खोते।
12. नेतृत्व कुशलता : एक बार सार्वजनिक भाषण में मोदीजी ने वायदा किया था कि वे अपने अधीनस्थों से एक घंटा अधिक काम करेंगे। इस तरह की बात कभी कोई अकुशल नेता नहीं कहता। वे एक सक्षम नेता हैं और दूसरों का अपने उदाहरण से नेतृ्त्व करते हैं। यह बात सभी के लिए लाभदायक है।
13. विनम्रता : मोदी दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश के प्रधानमंत्री हैं लेकिन इस बात ने उनके दिमाग पर कभी असर नहीं डाला। वे सामान्य लोगों से भी विनम्रता से पेश आते हैं और उनसे जो कुछ पूछा जाता है वे उसका जवाब देते हैं। वे इस बात का उदाहरण है कि विनम्रता से आप कितनी बड़ी सफलता पा सकते हैं।
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1. असाधारण भाषण कला : मोदी की सबसे बड़ी और असाधारण बात उनकी भाषण कला है और वे अपनी इस कला से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करना जानते हैं। विकास और अन्य मुद्दों पर वे जितनी स्पष्टता और प्रभावी तरीके से अपनी बात रखते हैं कि बिना किसी तैयारी के उनका आशु भाषण भी लोगों को प्रभावित करने की क्षमता रखता है। देश के अन्य नेताओं की तरह से लिखा हुआ भाषण नहीं पढ़ते हैं। उनकी विशेषता है कि वे अपनी वाक शैली से किसी भी प्रकार के श्रोता वर्ग से अपना संबंध बना लेते हैं।
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2. करिश्मा : प्रधानमंत्री मोदी की एक और बड़ी खूबी है कि वे किसी विश्वस्तरीय नेता जैसा करिश्मा रखते हैं। उनका व्यक्तित्व मजबूत है और देश के ज्यादातर लोगों ने ऐसे ही प्रधानमंत्री देखे हैं जो कि लोगों के सामने से अदृष्य रहते रहे हैं। देश के 35 वर्ष से कम आयु के युवाओं की नजर में वे ऐसे मजबूत नेता हैं जिनके नेतृत्व में देश विकास के मार्ग पर आगे बढ़ सकता है।
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3. त्वरित निर्णय क्षमता : मोदी की एक खूबी यह भी है कि वे तुरंत ही निर्णय लेने के लिए जाने जाते हैं। यह क्षमता भारत के नेताओं में बहुत कम पायी जाती है और इस कारण से उन नेताओं से अलग हैं जोकि किन्हीं मजबूरियों के चलते फैसले नहीं लेते या लेने में बहुत अधिक समय लगा देते हैं। वे निर्णय लेने के बारे में नो नन सेंस अप्रोच रखते हैं और इस निर्णयों पर तुरंत क्रियान्वयन भी सुनिश्चित करना जानते हैं।
4. स्पष्ट दूरदृष्टि : मोदी का एक सकारात्मक गुण यह है कि उनकी दूरदृष्टि या विजन बिल्कुल स्पष्ट होता है। उनकी इसी दूरदर्शिता और स्वप्न का नतीजा है कि उन्होंने गुजरात को विकसित करने के लिए तब विदेश यात्राएं कीं जब वे एक मुख्यमंत्री ही थे। अपने चुनावी भाषणों में उन्होंने लोगों में विश्वास जगाया कि भारत का आर्थिक विकास, भ्रष्टाचार मुक्त सरकार और दुनिया में अपना प्रभाव कायम करने की क्षमता विकसित होगी।
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5. मजबूत समर्थन का आधार : प्रधानमंत्री के साथ एक और खूबी यह है कि गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर राजग के प्रधानमंत्री पद के दावेदार घोषित होने तक मोदी की अपनी ही पार्टी में स्पष्ट मास अपील थी। उनकी पार्टी के अन्य नेता और कार्यकर्ता उनके समर्थन में खड़े रहे और इसी तरह के समर्थन के बल पर उन्होंने पार्टी के दिग्गज नेताओं, लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, सुषमा स्वराज को पीछे छोडा और पार्टी की ओर से प्रधानमंत्री बनने की दावेदारी हासिल की थी।
6. अनुशासित जीवन : देश के पंद्रहवें प्रधानमंत्री ने हमेशा ही एक अनुशासित जीवन जिया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में एक बालस्वयंसेवक बनने से लेकर प्रधानमंत्री बनने तक उनका जीवन अनुशासित है। यह बात बताती है कि जो दृढ़ निश्चय वे एक आठ वर्षीय बालक के तौर पर रखते थे वही दृढ़ निश्चय और अनुशासन उनमें 64 वर्षीय प्रधानमंत्री के रूप में मौजूद है।
7. एक असाधारण योजनाकार : यह उनकी ऐसी खूबी है जोकि उन्हें उन लोगों में शामिल करती है जो कि बहुत अच्छी और कुशलता से बड़ी-बड़ी योजनाओं को बनाते हैं। इसका उदाहरण उनके चुनाव प्रचार से मिलता है। मोदी ने 3.5 लाख किमी से ज्यादा की यात्राएं कीं और इस दौरान 400 रैलियों को संबोधित किया। वे ऐसे क्षेत्रों में गए जहां पर आमतौर पर लोग जाना नहीं पसंद करते। लेकिन उनकी कुशल योजनाओं के बल पर ही वे बेहतर परिणाम हासिल कर सके।
8. तकनीक के प्रति रुझान : मोदी एक टेकसेवी व्यक्ति हैं और वे खुद को तकनीक के क्षेत्र में होने वाले परिवर्तनों से अपडेट रखते हैं। अपने जीवन में वे घटनाओं के बारे में तुरंत ही ट्वीट पोस्ट करते हैं। वे इस बात का भी ध्यान रखते हैं कि उनकी फेसबुक तस्वीर को बदला गया है या नहीं। उनसे हम सीख सकते हैं कि तकनीक के प्रति रुझान क्या होता है और इससे कैसे लाभ उठाया जा सकता है।
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9. फिटनेस के प्रति सतर्कता : मोदी योग के बहुत बड़े अनुगामी है और वे इसे करना कभी नहीं भूलते। भले ही वे कितने ही व्यस्त हों लेकिन उनके योगाभ्यास में कभी बाधा नहीं आती है। शायद इसी कारण से वे इस उम्र में भी इतने सक्रिय और फिट हैं। उनकी यह सतर्कता सभी को प्रेरित कर सकती है।
10. उत्साह से भरा जीवन : अपनी उम्र के 64 वर्ष होने के बावजूद नरेन्द्र मोदी अपने जीवन को प्रतिदिन उत्साह से जीते हैं। कुछ समय पहले ही उन्होंने अपनी जापान यात्रा के दौरान ड्रम बजाया था और शिक्षक दिवस पर बच्चों के सवालों का जवाब दिया था। उनके व्यक्तित्व में उत्साह की कमी कभी नजर नहीं आती है।
11. धैर्यशीलता : अपनी विश्वसनीय और पक्की योजना से उनमें आत्मविश्वास का भाव रहता है और वे ऐसे व्यक्ति नहीं हैं जोकि अधीरता दिखाए या बेचैन हो और परिणामों को लेकर अशांत हो जाए। धैर्य बनाए रखना और हर हालत में मानसिक संतुलन बनाए रखना उनकी खूबी है। बहुत कम अवसरों पर वे नाराज होते हैं या भावनाओं में बह जाते हों। मोदी अपना धीरज कभी नहीं खोते।
12. नेतृत्व कुशलता : एक बार सार्वजनिक भाषण में मोदीजी ने वायदा किया था कि वे अपने अधीनस्थों से एक घंटा अधिक काम करेंगे। इस तरह की बात कभी कोई अकुशल नेता नहीं कहता। वे एक सक्षम नेता हैं और दूसरों का अपने उदाहरण से नेतृ्त्व करते हैं। यह बात सभी के लिए लाभदायक है।
13. विनम्रता : मोदी दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश के प्रधानमंत्री हैं लेकिन इस बात ने उनके दिमाग पर कभी असर नहीं डाला। वे सामान्य लोगों से भी विनम्रता से पेश आते हैं और उनसे जो कुछ पूछा जाता है वे उसका जवाब देते हैं। वे इस बात का उदाहरण है कि विनम्रता से आप कितनी बड़ी सफलता पा सकते हैं।
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11 अग॰ 2016
सफलता का रहस्य
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Successlocator
On: अगस्त 11, 2016
सफलता का रहस्य
एक बार की बात है किसी शहर में एक लड़का रहता था जो बहुत गरीब था। मेंहनत मजदूरी करके बड़ी मुश्किल से 2 वक्त का खाना जुटा पाता । एक दिन वह किसी बड़ी कंपनी में चपरासी के लिए इंटरव्यू देने गया । बॉस ने उसे देखकर उसे काम दिलाने का भरोसा जताया ।
जब बॉस ने पूछा -“तुम्हारी email id क्या है”? लड़के ने मासूमियत से कहा कि उसके पास email id नहीं है । ये सुनकर बॉस ने उसे बड़ी घृणा दृष्टि से देखा और कहा कि आज दुनिया इतनी आगे निकल गयी है , और एक तुम हो कि email id तक नहीं है , मैं तुम्हें नौकरी पर नहीं रख सकता ।
ये सुनकर लड़के के आत्मसम्मान को बहुत ठेस पहुंची , उसकी जेब में उस समय 50 रुपये थे । उसने उन 50 रुपयों से 1 किलो सेब खरीद कर वह अपने घर चलता बना। वह घर घर जाकर उन सेबों को बेचने लगा और ऐसा करके उसने 80 रुपये जमा कर लिए । अब तो लड़का रोज सेब खरीदता और घर घर जाकर बेचता । सालों तक यही सिलसिला चलता रहा लड़के की कठिन मेहनत रंग लायी और एक दिन उसने खुद की कंपनी खोली जहाँ से विदेशों में सेब सप्लाई किये जाते थे । उसके बाद लड़के ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और जल्दी ही बहुत बड़े पैमाने पर अपना बिज़नेस फैला दिया और एक
सड़क छाप लड़का बन गया अरबपति ।
एक कुछ मीडिया वाले लड़के का इंटरव्यू लेने आये और अचानक किसी ने पूछ लिया – “सर आपकी email id क्या है”?? लड़के ने कहा -“नहीं है “, ये सुनकर सारे लोग चौंकने लगे कि एक अरबपति आदमी के पास एक “email id” तक नहीं है । लड़के ने हंसकर जवाब दिया -“मेरे पास email id नहीं है इसीलिए मैं अरबपति हूँ , अगर email id होती तो मैं आज एक चपरासी होता”।
3 जुल॰ 2016
Motivate और Positive रहने का बेमिसाल तरीका
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Successlocator
On: जुलाई 03, 2016
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जीवन में सफल होने के लिए Positive or Motivate रहना बहुत जरुरी होता है। Positive रहने से सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि Negativity हमसे बहुत दूर रहती है। Positive रहने के लिए लोग बहुत से तरीके अपनाते हैं।
आज मैं आपके लिए Motivate होने और Positive रहने का एक ऐसा तरीका बताना चाहता हूँ जो बहुत ही आसान है और इसके लिए आपको न तो कोई Extra Time देना पड़ेगा और न ही कोई Extra Work करना पड़ेगा। एक बार जब आप इस तरीके को अपना लेते हैं तो दिन में कई बार यह तरीका आपको Motivate करता है और Positive रहने के लिए Recharge करता रहता है।
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Motivate और Positive रहने का बेमिसाल तरीका
इस तरीके का Use करने के लिए आपको कुछ ऐसे Motivational Words की जरुरत होगी जो आपको सबसे ज्यादा Motivate करते हों। यह Words या तो आप खुद बना सकते हैं या फिर इन्हे आप किसी Book या Internet से ले सकते हैं। इन Motivational Words का प्रयोग आप केवल Words के रूप में कर सकते हैं या इन Words से Quotes (Motivational Sentences) भी बना सकते हैं। अब आप इन Words या Quotes को अलग-अलग ऐसी चीजों या जगहों पर लिख दीजिये जिन चीजों या जगहों पर आपकी प्रतिदिन नजर पड़ती हो या जिन चीजों को आप प्रतिदिन Use करते हों।
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बस, आपको इतना ही करना है !
अब आप जब भी उनमे से किसी वस्तु का Use करेंगे या उसे देखेंगे तो आपकी नजर आपके लिखे हुए Quotes या Words पर पड़ेगी और आप Positive Feel करने लगेंगे। अब जब आप किसी दूसरी चीज का Use करेंगे या उसे देखेंगे तो आपकी नजर दूसरे Quotes पर पड़ेगी और आप फिर से Positive Feel करेंगे। अब यदि आपने 10 जगहों पर ऐसे अलग-अलग Quotes को लिखा है तो आप दिन में कम से कम 10 बार Motivate होंगे। यदि प्रत्येक दिन बार-बार आप इनको देखते और पढ़ते रहे तो आप Positive Minded और Successful Person बन जायेंगे।
yes ! यह बात सही है।
मैं इसका Use कर चुका हूँ और मुझे Result भी Positive मिले हैं। आप भी इस तरीके का Use करके Daily कई बार Motivate हो सकते है।
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मैं एक उदहारण द्वारा आपको बताना चाहता हूँ कि Motivate होने के इस तरीके का Use मैं खुद कैसे करता हूँ?
दोस्तों ! जब भी मुझे अपने ब्लॉग के लिए Post लिखनी होती है तो इसके लिए मैंने एक Diary बना ली है जिसमे मैं आगे लिखी जाने वाली पोस्ट को शार्ट में लिख लेता हूँ।
अब जब भी मुझे Blog Post को Computer में Type करना होता है तो लिखने से पहले उस Diary को Open करता हूँ।
जिसमे पहले पेज पर ही लिखा होता है- “आप एक बेहतरीन लेखक हैं !”
Next Page को खोलते ही लिखा मिलता है- “आप लिखना तो शुरू कीजिये, यकीन मानिये एक अच्छी पोस्ट लिखी जाएगी और वह सबको पसंद आएगी !”
बस इतना पढ़ते ही मैं Motivate हो जाता हूँ और लिखना Start कर देता हूँ। यदि मेरा मन नहीं भी होता है तो भी मैं इतना Motivate जो जाता हूँ कि मेरा मन लिखने को करने लगता है। इसी तरह मैं बहुत सी जगह ऐसे Motivational Words लिखकर Motivate होता रहता हूँ और Positive रहता हूँ। जब से मैंने यह तरीका Use किया है, मैं खुद को पहले से बहुत ज्यादा Motivate और Successful महसूस करता हूँ। मेरी आपसे सलाह है कि आप भी इस तरीके का प्रयोग करें और Motivate हों।
प्रेरणादायक शब्द (Motivational Words) आपको कहाँ लिखने चाहिए?
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अब मैं आपको कुछ ऐसी जगहों के बारे में बताता हूँ जहाँ पर यदि आप चाहें तो अपने Motivational Words को लिख सकते हैं.…
1- आप एक Paper पर Motivational Words लिख कर अपने Wallet or Purse में ऐसी जगह रख लें कि जब भी आप अपना Wallet खोलें तो सबसे पहले वही Words दिखें।
2- आप अपने Office की Table पर ऐसे Motivational Words को लिख कर रख सकते हैं जहाँ से वह आपको बार-बार दिखें।
3- यदि आप Student हैं तो अपनी Books के पहले Page पर या अपनी Copy के पहले Page पर इन Motivational Words को लिख सकते हैं।
4- यदि आप कोई Book या Magazine पढ़ते हैं तो उसके Cover Page या First Page पर इन Motivational Words को लिख सकते हैं।
5- आप अपने घर में लगे Mirror पर इन Motivational Words को लिख सकते हैं क्योकि इस Mirror का Use आप रोज करते ही होंगे।
6- आप अपने Mobile Phone या Laptop के Screen पर ऐसे Motivational Words का Use किये हुए Wallpaper का प्रयोग कर सकते हैं।
7- बहुत से लोग Daily Diary लिखते हैं तो जब भी आप अपनी Daily Diary लिखें तो उसमे कुछ Motivational Words जरूर लिखें और आप इसके Cover or First Page पर भी इनका Use कर सकते हैं।
इस तरह आप अपनी रोज प्रयोग की जाने वाली अधिकतर चीजों पर इन Motivational Words को अनेक तरीकों से लिख सकते हैं। एक बात और ध्यान रखिये कि समय-समय पर आप इन Motivational Words को बदल सकते हैं, उनका लिखने की जगह बदल सकते हैं। आपको अपनी आवश्यकता के अनुसार इनको बदलते रहना चाहिए।
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प्रेरणादायक शब्दों का वैज्ञानिकों द्वारा सफल प्रयोग
Motivate होने के इस तरीके का अमेरिका के वैज्ञानिकों द्वारा सफल प्रयोग भी हो चुका है। वैज्ञानिकों ने 1000 लोगों पर यह सफल प्रयोग किया। उन्होंने 500 व्यक्तियों को इन Motivational Words का Use करना सिखाया और बाकी 500 व्यक्तियों को बिना Motivational Words का Use करते हुए Normal Life जीने को कहा।
तीन महीनों बाद जब देखा गया तो Motivational Words को Use करने वाले व्यक्ति काफी खुश और Confident दिख रहे थे। उनके बहुत से Work अब Successful होने लगे थे। जबकि Motivational Words को use न करने वाले व्यक्तियों में कोई भी ऐसे Positive Change दिखायी नहीं दे रहे थे।
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प्रेरणादायक शब्दों का रहस्य (Secret of Motivational Words)
इन Motivational Words से Success होने का रहस्य यह है कि जब हम इनका Use करने लगते हैं और बार-बार उन्ही शब्दों को पढ़ते और सोचते हैं तो यहाँ पर आकर्षण का नियम (Law of Attraction) काम करने लगता है। इस नियम के अनुसार हम जो भी सोचते हैं, उसी के अनुसार हमारे कार्य हो जाते हैं और जैसे हमारे कार्य होते हैं वैसे ही हम बन जाते हैं। यानी यदि हम लगातार किसी चीज से Motivate होते रहते हैं तो Positive सोचते हैं और Positive Work करते हैं। Positive Work करते हुए हम Successful बन जाते हैं।
तो दोस्तों, देर किस बात की है। यदि आपको Motivate होने का यह तरीका पसंद आया हो तो आज से ही इसे Start कर दीजिये।
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क्या आप में सफल होने की हिम्मत है?kya apme safal hone ki himmat h
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Successlocator
On: जुलाई 03, 2016
आज की इस दुनिया में प्रत्येक व्यक्ति सफल होने के लिए दौड़ा चला जा रहा है। वह सोचता है कि कुछ भी हो और कैसे भी हो, बस सफलता हाथ लग जाए।
Success प्राप्त करने की इस दौड़ में कुछ लोग एक-दूसरे की टांग खींचकर आगे बढ़ रहे हैं।
कुछ लोग झूठ बोलकर आगे बढ़ रहे हैं तो कुछ लोग दूसरों को गलत रास्ता बताकर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं।
कुछ लोग अपने पैसों को पानी की तरह बहाकर आगे बढ़ रहे हैं तो कुछ लोग अपनी अच्छी जानपहचान के सहारे आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं।
यह रास्ता तो ऐसा है कि यहाँ तो कुछ लोग अपना ईमान और स्वाभिमान (Self respect) बेचकर भी आगे बढ़े जा रहे हैं।
लेकिन सोचने वाली बात यह है कि क्या ऐसे लोग सफलता प्राप्त कर पाते हैं?
क्या ऐसे लोग वास्तव में सफल होने का हक रखते हैं?
नहीं! बिलकुल नहीं! ऐसे लोगों को न तो कभी Success मिल पाती है और न ही वह सफल होने का हक़ रखते हैं।
ऐसे लोग सफलता प्राप्त नहीं कर पाते क्योकि सफलता प्राप्त करने की राह (way of success) में बहुत से मोड़ ऐसे आते हैं जहाँ झूठ, धोखा और पैसा काम नहीं करता।
अब आप सोच रहे होंगे कि हमने तो बहुत से ऐसे लोग देखे हैं जो झूठ, धोखा और पैसों का इस्तेमाल करके सफल हो जाते हैं।
तो दोस्तों, आप जो सोच रहे हैं वह ठीक है। कुछ लोग गलत तरीके से सफलता प्राप्त कर लेते हैं लेकिन यह बात भी आप जान लें कि ऐसे लोगों के पास सफलता ज्यादा दिनों तक नहीं रहती।
धीरे-धीरे उनकी कमजोरियाँ सामने आने लगती हैं और एक समय ऐसा आता है कि सफलता उनसे बहुत दूर चली जाती है और वह लोग बहुत बुरी तरह असफल हो जाते हैं।
आपको पता है ऐसे लोगों में किस चीज की सबसे बड़ी कमी होती है?
ऐसे लोगों में हिम्मत (courage) बिलकुल भी नहीं होती। अगर हिम्मत होती तो वह सफलता प्राप्त करने के लिए ऐसे तरीके नहीं अपनाते।
अगर उनमे हिम्मत होती तो उन्हें खुद पर विश्वास (Self confidence) होता, न कि अपने धोखे और झूठ पर विश्वास होता।
ऐसे लोग डरपोक (Coward) होते हैं, उन्हें मालूम होता है कि उनमे साहस (courage) नहीं है।
साहस या हिम्मत सफलता प्राप्त करने के लिए सबसे जरुरी है क्योकि बिना साहस के आप सफलता की ओर पहला कदम भी नहीं बढ़ा सकते।
प्रत्येक सफल व्यक्ति के अंदर साहस मौजूद होता है और प्रत्येक साहसी व्यक्ति (courageous people ) एक दिन सच्ची सफलता (True success) जरूर प्राप्त करता है।
अब आप मुझे यह बताइये कि क्या आपमें सफल होने की हिम्मत है?
क्या आपमें सच्ची सफलता को जीवन भर अपने पास रख पाने की हिम्मत है?
क्या आप सफलता प्राप्त करने के लिए हिमालय जैसे पर्वत से भी टकराने का साहस रखते है?
यदि आपका उत्तर “हाँ” में है तो आइये मेरे साथ और इस स्पीच को पढ़ना जारी रखिये क्योकि आगे मैं आपको वह बातें बताने जा रहा हूँ जिनको केवल वही व्यक्ति follow कर पाएगा जिसके अंदर सफलता प्राप्त करने की हिम्मत होगी।
अब आप इस लाइन को पढ़ रहें हैं, इसका सीधा सा अर्थ है कि आप एक साहसी व्यक्ति (courageous person) हैं और अपने साहस के द्वारा सफलता प्राप्त करना चाहते हैं। अच्छी बात है, आगे बढ़िए।
अब मैं आपको यह बताऊंगा कि आपको अपने इस साहस का प्रयोग कहाँ-कहाँ करना है जिससे आप सफलता प्राप्त कर सकें।
जब भी कोई अच्छा अवसर आपके सामने आए तो साहस के साथ आगे बढ़िए और उस अवसर का फायदा लीजिए।
अवसर (Opportunity) सभी की जिंदगी में आते हैं लेकिन उनका फायदा वही व्यक्ति ले पाता है जिसके अंदर हिम्मत होती है, वरना आज दुनिया का हर एक इंसान सफल होता।
अवसर आपके दरवाजे पर आकर उसे खटखटाता जरूर है लेकिन एक साहसी व्यक्ति ही उस दरवाजे को खोलकर उस अवसर का स्वागत कर पाता है।
जब भी आपके सामने कोई जिम्मेदारी आये तो साहस के साथ आगे बढ़िए और उसे निभाइए।
आपने देखा होगा कि कुछ लोगों के पास एक के बाद दूसरी जिम्मेदारी (Responsibility) आती रहती है। जिम्मेदारी उसी के पास आती हैं जो उसे निभाने की हिम्मत रखते हैं। जिम्मेदारियों को स्वीकारो क्योकि वह आपको सफलता की ओर ले जाने आती हैं।
जिम्मेदारी कभी बोझ नहीं होती। जिम्मेदार बनो क्योकि आपके सफल होने की जिम्मेदारी आपकी ही है, उसे कोई और नहीं निभाएगा, सफल आपको होना है तो यह जिम्मेदारी भी आप ही को निभानी चाहिए।
जब भी कोई चेलेंज आपके सामने आये तो हिम्मत दिखाइए और उसे accept करके आगे बढ़ जाइये।
यह जिंदगी एक चेलेंज (Challenge) ही तो है। सफलता की ओर जाने वाला प्रत्येक रास्ता आपके लिए चेलेंज है। आपने जिस मंजिल (Goal) को प्राप्त करने के बारे में सोचा है, वह आपके लिए एक चेलेंज ही तो है।
अपना साहस दिखाइए, आगे बढ़िए और मिले हुए चेलेंज को पूरा कीजिये।
जीवन में जब भी परेशानियों का पहाड़ आपके सामने खड़ा हो तो हिम्मत दिखाइए।
यह बात समझ लीजिए कि परेशानी (Problems) आपको परेशान करने को नहीं आती हैं बल्कि परेशानी आपकी योग्यता को check करने आती हैं। अगर आप योग्यता रखते हैं तो परेशानी का सामना कर पाएंगे।
अगर आप हिम्मत रखते हैं तो हर परेशानी आपको और ज्यादा चमकने का मौका देती है।
हिम्मत दिखाइए और सीना तानकर परेशानी का सामना कीजिये। अगर आपने ऐसा किया तो परेशानियों का पहाड़ आपके सीने से टकराकर चकनाचूर हो जायेगा।
Courage व्यक्ति की उस power का नाम है जिसके सहारे कोई भी व्यक्ति चाहे तो किसी भी सफलता को हमेशा के लिए प्राप्त कर सकता है।
साहस जितना अधिक होगा, उसके परिणाम भी उतने ही अच्छे होंगे।
दोस्तों! अंत में आपको एक काम की बात बताना चाहता हूँ। यदि आपके अंदर बहुत अधिक साहस है तो यह अच्छी बात तो है लेकिन सफल होने के लिए साहस के साथ और भी कई चीजों का होना बहुत जरुरी है। लेकिन बहुत सी अच्छी चीजें होने के बाद अगर साहस नहीं है तो उससे भी कोई फायदा नहीं है। अर्थात साहस सबसे पहले और सबसे जरूरी है।
उदाहरण के लिए, यदि कोई सैनिक बिना हथियार के केवल साहस के साथ लड़ाई के मैदान में कूद जाता है तो यह समझदारी नहीं कही जाएगी। लेकिन यदि वही सैनिक एक तलवार लेकर साहस के साथ मैदान में कूदे तो अपने दुश्मनों के छक्के छुड़ा सकता है।
तो हिम्मत रखो, हिम्मत से सब कुछ हासिल किया जा सकता है।
30 जून 2016
सफलता की और अग्रसर (safalta)
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Successlocator
On: जून 30, 2016
1. अच्छे विचार मनुष्य को और उसके व्यापार को सफलता की और अग्रसर करता हें !
2. जीवन में आगे बड़ने की कोशिश करे !
3. अनुभव की पाठशाला में जो पाठ सीखते हें वह और कही नहीं सीखे जाते हें !
4. ईमानदारी के साथ व्यापार चालू करे क्योकि वह उसकी पहचान होती हे !
5. इन्सान की पहचान ही काफी होती हें !
6. हमेशा अच्छे रिश्ते बनाने की कोशिश करे !
7. सपने वह ही साकार करते जिनके सपनो में जान होती हें और सपने पुरे करने की चाहत होती हें !
8. मेहनत वह चाबी हें जो किस्मत का दरवाजा खोलती हें !
9. अच्छी नियत से ही बरकत होती हें !
10. पद से ज्यादा उसका प्रभाव और चरित्र होता हें !
11. जब भी नया काम शरू करे उसे पूरा ख़त्म करके ही चेन की नींद ले !
12. परिश्रम हमेशा पैसे से ज्यादा कीमती होता हें !
13. हर काम को दिलोदिमाग से करना चाहिए !.
14. नया काम शुरु करके कभी मैदान छोड़कर नहीं भागना चाहिए बल्कि संघर्ष करना चाहिए !
15. वही सबसे तेज चलता है, जो अकेला चलता है
16. प्रत्येक अच्छा कार्य पहले असम्भव नजर आता है।
17. ऊद्यम ही सफलता की कुंजी है।
18. एकाग्रता से ही विजय मिलती है।
19. कीर्ति वीरोचित कार्यो की सुगन्ध है।
20. भाग्य साहसी का साथ देता है।
21. सफलता अत्यधिक परिश्रम चाहती है।
22. विवेक बहादुरी का उत्तम अंश है।
23. एकाग्र रहने वाला सदा सफलता का वरण करता है।
24. कार्य उद्यम से सिद्ध होते है, मनोरथो से नही।हम जो भी हैं, जो कुछ भी करते हैं, वह तभी होता है जब हम उसे वास्तव में करना चाहते हैं।
25. संकल्प ही मनुष्य का बल है।
26. प्रचंड वायु मे भी पहाड विचलित नही होते।
27. कर्म करने मे ही अधिकार है, फल मे नही।
28. मेहनत, हिम्मत और लगन से कल्पना साकार होती है।
29. अपने शक्तियो पर भरोसा करने वाला कभी असफल नही होता।
30. मुस्कान प्रेम की भाषा है।
31. सच्चा प्रेम दुर्लभ है, सच्ची मित्रता और भी दुर्लभ है।
32. अहंकार छोडे बिना सच्चा प्रेम नही किया जा सकता।
33. प्रसन्नता स्वास्थ्य देती है, विषाद रोग देते है।
34. प्रसन्न करने का उपाय है, स्वयं प्रसन्न रहना।
35. अधिकार जताने से अधिकार सिद्ध नही होता।
36. एक गुण समस्त दोषो को ढक लेता है।
37. दूसरो से प्रेम करना अपने आप से प्रेम करना है।
38. समय महान चिकित्सक है।
39. समय किसी की प्रतीक्षा नही करता।
40. हर दिन वर्ष का सर्वोत्तम दिन है।
41. एक झूठ छिपाने के लिये दस झूठ बोलने पडते है।
42. प्रकृति के सब काम धीरे-धीरे होते है।
43. बिना गुरु के ज्ञान नही होता।
44. आपकी बुद्धि ही आपका गुरु है।
45. जिग्यासा के बिना ज्ञान नही होता।
46. बिना अनुभव के कोरा शाब्दिक ज्ञान अंधा है।
47. अल्प ज्ञान खतरनाक होता है।
48. कर्म सरल है, विचार कठिन।
49. उपदेश देना सरल है, उपाय बताना कठिन।
50. धन अपना पराया नही देखता।
51. जैसा अन्न, वैसा मन।
52. अहिंसा सर्वोत्तम धर्म है।
53. बहुमत की आवाज न्याय का द्योतक नही है।
54. अन्याय मे सहयोग देना, अन्याय के ही समान है।
55. विश्वास से आश्चर्य-जनक प्रोत्साहन मिलता है।
56. हर बात का सही वक़्त होता हें कोई भी काम शुरू करने से पहेले उस जगह का माहोल तथा उससे जुड़े हर तथ्यों को जानने की कोशिश करे !
57. सकारात्मक शब्दों में हमेशा ताकत नजर आती हें !
58. जीवन का वही सार होता हें की आप हर मुश्किल काम में भी मुस्कराते हुए नजर आये !
59. हमेशा सामने वालो को भी सोचने का समय दे !
60. बदलाव के साथ हमेशा विकास जरुर होता हें !
61. उदेश्य के साथ जीने की कोशिश करे !
62. हमेशा सकारात्मक शब्द बोलने की कोशिश करे तथा उसका उपयोग भी करे !
63. मंदी में भी धंधा हो सकता हें अगर आप कोशिश करे !
64. एक छोटा सा प्रयास आप की तक़दीर बदल सकता हें इसलिए किसी काम को छोटा न समझे !
65. आगे बड़ने के लिए हमेसा तत्पर रहें !
66. आगे बड़ने वालों को हमेशा श्रेय दे !
67. हमेशा आत्म निर्भर बनने की कोशिश करे !
68. आपको सामने वाले की गलती न देखकर उसमे विश्वास करना सीखे तथा उसकी गलती को सुधारने की कोशिश करे 69. शब्दों में जादू होता हें इसलिए सही शब्दों का इस्तमाल करे !
70. सफल होने के लिए सही निर्णय ही काम आता हें !
71. सच्ची लगन से जो काम करता हें वह हमेशा सफल होता हें !
72. अच्छे लोग संसार को रोशनी प्रदान करते हें !
73. समाज सेवा से भी आप का कारोबार चलया जा सकता हें इसलिए समाज के लिए कुछ करना चहिये !
74. अच्छे वर्कर और मेनेजमेंट हमेशा ऑफिस की और आकर्षित करता हें !
75. नाम ही उसकी सही पहचान होती हें !
76. परिवार वालो से हमेशा रिश्ते बनाये रखे !
77. वक़्त के साथ चले चाहें वक़्त हमारा साथ दे या न दे !
78. हमेशा परिवर्तनशील रहे !
79. कारोबार में पैसे को सुलझाये न की उलझाये !
80. घर में भी रिश्ते को निभाए तथा उनका काम भी करे न की अपना कारोबार पर ही धयान दे !
81. अपनी मह्त्व्कांश को बरक़रार रखे !
82. जीवन को जीवन की तरह जीने की कोशिश करे !
83. अच्छे व्यवहार से ही जीवन की उनती होती हें
84. विश्वाश के साथ नया काम शुरू करे !
85. कभी आगे बड़ने की दोड़ में परिवार को नदर अंदाज न करे क्योकि आगे चलकर कही आप अकेले न रह जाये !
86. कुछ लोग अपने काम को दिल से नहीं करते हें तो अक्सर वह पीछे रह जाते हें !
87. जिसमे ईमानदारी नहीं होती वह कभी भी प्लानिंग नहीं कर सकता !
88. जीवन में कभी किसी की मदत जरुर करनी चाइए !
89. अगर आप के प्रयास से किसी की जिंदगी बदल सकती हें तो वह प्रयास जरुर करना चाइए !
90. किसी भी स्थति में चिंता नहीं करनी चाइये अक्सर वह चिता बन जाती हें !
91. जिंदगी में ईमानदारी का स्थान बहुत महत्पूर्ण होता हें !
92. कई बार इन्सान इसलिए असफल हो जाते की उनको मालूम नहीं होता की वह क्या कर रहे !
93. बाहने बजी और टालम टोल असफल की निशानी हें !
94. अँधेरे को कोसने के बजाये स्वयं एक दीपक जलाये !
95. उपदेश देने के बजाये उनका अनुसरण खुद करे !
96. विफलता सफलता की कुंजी हें इसलिए विफलता का स्वागत करे !
97. विफलता हमें कुछ न कुछ शिखाती हें !
98. असफल सफलता की नीव हें !
99. जो प्रसन रहते वह हमेशा कुछ नया सोचते हें !
100. हमेशा धेर्य रखे तथा लक्ष्य की और अग्रसर रहें !
101. जिसे अपनों पर और अपने आप पर विश्वाश नहीं होता वह कभी सफल नहीं हो सकता !
102. जिसने जीवन में सिर्फ गलतिया की कभी -कभी वह सफल हो जाता हे !
103. अपनी सोच को बदलो फिर देखो जिंदगी के मायने केसे बदल जायेगे !
104. सच्चे दिल से प्रथना हमेशा चमत्कारी होती हें बशर्ते प्रथना होनी चहिये न की याचना !
105. जीवन में आने वाली समस्त समस्या का समाधान प्रेम हें !
106. हमेशा लोक प्रिय बनने की कोशिस करे !
107. आत्म विश्वाश कभी पराजित नहीं होता हें !
108. धन के पीछे मत भागो वह सयंम आ जाये गा !
109. अच्छी सूरत की नहीं एक अच्छी अदा की जरुरत होती हें !
110. रुकते वह इन्सान जिने हारने की आदत होती हें और चलते वही जीने जितने की चाहत होती हें !
111. हमेशा सुनने की बजाये कभी बोलने की भी आदत रखे !
112. जब भी कोई विकट समस्या आये तब दिल की आवाज सुन लेना !
113. क्रोध को हमेशा शांति से हल करे !
114. आशा के साथ ईश्वर होता हें !
115. अगर गलती आप की हें तो उसे जरुर माने !
116. समय हर घाव को भर देता हें यह सत्य बात हें !
117. ज्ञान ही सब कुछ नहीं होता व्यवहार होना भी जरुरी हें !
118. हर समस्या का समाधान हमेशा अच्छे प्रबंधक से करवाना चहिये !
119. अपने आस-पास भी अच्छे लोग रहते हें सिर्फ नजर उठा के देखने की जरुरत हें !
120. अच्छे लोग की आज भी कमी नहीं बस उन्हें समझाना चहिये !
121. सुख के जेसे ही दुख भी जीवन में आते हें इसलिए उनका भी स्वागत करे !
122. सबके सामने बोलने से इज्जत व आत्म बल बड़ता हें !
123. नोकरी जाना ही जीवन का अंत नहीं कभी - कभी अपने आप के लिए भी लड़ना पड़ेगा !
124. हमेशा गुरु का सम्मान करना सीखे !
125. अक्सर लोग सफलता हासिल करने के बाद पुराने दिनों को भूल जाते हें पर अपनी परम्परा को नहीं भूलते हें !
126. आपका कोई भी काम महत्वहीन नहीं हो सकता पर महत्वपूर्ण जरुर हो सकता !
127. जब किसी लक्ष्य को पाना चाहते हो तो उसक प्रयास ही न करे बल्कि लक्ष्य पर आने वाली समस्या का समाधान भी करे !
128. उम्मीद से बड़कर और कोई चीज नहीं होती !
129. जो सुख संतोष में हें वह किसी और में नहीं होता ,क्योकि तृष्णा कभी खत्म नहीं होती !
130. जो व्यक्ति अपनी योग्यता और कमजोरी को जानता हें वह जीवन में सफल जरुर होता हें !
131. उचाईयो के शिखर पर पहुचने के बाद इन्सान को अपनी मूल जड़ो को भूल नहीं जाना चाइये !
132. एक समझाइश से नजारा बदल सकता हें !
133. शक्ती ही इन्सान को आगे बड़ाती हें !
134. अच्छे लोगो की की बाते हमेशा ध्यान से सुने यह भी एक कला हें !
135. किसी के साथ या अपने साथ अत्याचार हो रहा तब हमें क्रोध और विरोध दोनों करना चहिए !
136. लम्बी आयु के लिए विनर्म होना जरुरी हें !
137. लोगो का मानना हें की मोबाइल ने उनेह गुलाम बना दिया पर कभी कभी यह बहुत काम आती हें !
138. अपने शोब्दो पर विश्वाश रखे !
139. जरुरत ज्यादा कभी संग्रह न करे !
140. स्वभाव से व्यवहार बनाये न की व्यवहार से स्वभाव बनाये !
141. झुठ बोलकर भी अच्छा कहने की भावना पैदा करे !
142. झुठ बोलकर खुद को अच्छा साबित करना भी एक कला हें !
143. सही निर्णय हमेशा सफलता दिलाता हें !
144. लोगो की बातों को घोर से सुने और उन्हें जीवन में उतारने की कोशिश करे !
145. सत्य महान हें और सत्य ही बड़ा धर्म हें !
146. जीवन में जितनी बड़ी समस्या हो उस से ज्याद प्रभु के सामने प्राथना हो !
147. कर्म ही जीवन हें कर्म करते रहो !
148. सोचने का तरीका दिलाता हें सफलता !
149. नजर हमेशा तिखी होनी चहिये !
150. लोग जितनी आप में रूचि रखते हें उतनी आपकी समस्या पर भी रखते हें !
151. सत्य में ही ईश्वर हें और वहि आपका आधार हें !
152. अक्सर सुख के दरवाजे खुल जाते हें पर इन्सान उस को समझ नहीं पाता हें !
153. जीवन में आल्श्य को छोड़कर पुरुषार्थ को रखो !
154. आप कितने बुद्धिमान हें इसका पाता सिर्फ आप की बुद्धि ही बता सकती हें !
155. कर्म करने से किस्मत को बदला जा सकता हें !
156. जल्दबाजी ना करे क्योकि किसी को पहचान ने में टाइम लग सकता हें !
157. कभी अपनी दिल की बात भी सूने !
158. समस्या का समाधान करो न की भागने का !
159. मोंन रहने से कलह नहीं होती और जागने से कभी भय नहीं रहता !
160. हर वस्तु सुन्दर दिखने वाली कभी सही नहीं होती !
161. लीडर वहि होता जो अपनी साख को ना गवाए !
162. देने से दिल खुलता हें और बोलने से इन्सान खुलता हें !
163. दान देने से सुख मिलता हें !
164. लक्ष्य को पाना जितना कठिन होता हें उससे ज्यादा उसे समझना !
165. अधिकार तरह अपने कर्तव्य का पालन भी करे !
166. बड़ी सोच जादू की तरह होती हें
167. जिन्दगी के दो ही पहलु हें कभी हार तो कभी जित हें
168. जिन्दगी में हालात केसे भी हो उसका डटकर मुकाबला करे !
169. श्रेष्ठ होने के लिए उर्जा होनी जरुरी हें !
170. इच्छा शक्ति जरुर रखे !
171. बहेतर होगा कि बच्चों को रोकने ,टोकने के बजाए उसके स्थान पर उन्हें काम करने के लिए पेरित कर्रे !
172. व्यवहार में इतनी सरलता हो कि लोग सच्चे दिल से सम्मान कर्रे !
173. अच्छी किताब और सच्चे दोस्त देर से समझ में आते हें !
174. जन्म भूमि हि आप कि कर्म भूमि होती हें
175. आलोचक से इन्सान के आत्मसम्मान को ठोस पहुचती हें और उसके प्रति गलत भावना रखने लगता हें !
176. सफलता का द्वार कभी खुलता नहीं उसे खोला जीता हें !
177. जीवन में किसी के प्रति रूचि रखे !
178. असम्भव को सम्भव बना देता हें आत्मबल !
179. अपने हाथ में हि रखे अपनी जीवन कि डोर !
180. जिंदगी का भरपूर आनन्द लेते रहे !
181. महज तकनीकि ज्ञान हि काफी नहीं होता व्यवहार का होना भी जरुरी हें !
182. जिंदगी का भरपूर आनन्द वहि उठा सकता जो अपनी इच्छा को आसमान तक ले गया हो !
183. कोई साथ दे या न दे पर अपना जमीर साथ देना चहिये !
184. दिल कि बात मानने वाला हि सफल होता हें !
185. में हि हु ---ना इसके सिवा कोई और हें ,ना मेरे जेसा कोई हें और नहीं कोई कभी होगा !
186. सच्चे दिल से मुकाम हासिल करना चाहते हो तो दूसरों कि मंजिल कभी ना तोड़े !
187. सत्य,प्रेम,न्याय,धर्म,कर्म,त्याग,उपासना,व्यवहार यह सभी मानवीय साधभाव हें जो इन्सान को महान बना देती हे
188. नोकरी कर्रे प्यार से व्यापार कर्रे दिमाग से !
189. माँ और जन्म भूमि दोनों स्वर्ग के सम्मान ,इनका आदर करना सीखे !
190. आपकी आत्मा हि सबसे बड़ा मार्गदर्शक हें !
191. सत्य हि मानव का आभूषण हें !
192. विश्वाश में बड़ी शक्ति होती हें !
193. गुरु कि डाट पिता के प्यार से अच्छी होती हें !
194. सबसे अच्छा दान शमादान होता हें !
195. उतम तीर्थ अपना मन होता हें
196. ईमानदारी इन्सान कि सर्वोतम पूंजी हें !
197. सपने अगर सच करना चाहते हो तो आलस्य को त्याग दो !
198. याचन तो केवल भिखारी करता हें भक्त तो केवल प्राथना करता हें !
199. आलोचना से मत डरो क्योकि आलोचना उन्ही की होती जो कुछ करते हें !
200. कुछ व्यक्तियों के लिए सफलता उनकी राहों में और आसमान उनकी बाहों में होती हें !
201. जिसे अपनों पर विश्वास नहीं वह असफल हें !
202. आज का जो पुरषार्थ हें कल का वह भाग्य हें !
203. धेर्य जीवन के लक्ष्य के द्वार खोलती हें !
204. निराशा होने से जीवन के बहुत सरे अच्छे अवसर भी ख़त हो जाते हें !
205. आत्मविश्वासी कभी पराजित नहीं होता !
206. असफल होना कोई गुनाह नहीं हें पर कोशिश न करना गुनाह हें !
207. दिन का शुभारम ईश्वर के स्मरण और अंत उसे धन्यवाद से होना चहिये !
208. प्रसन रहने से आलश्य नहीं आता हें !
209. सब कुछ कामयाबी नहीं होती और भी कुछ होता हें !
210. आदमी न छोटा होता और नहीं वह कभी बड़ा होता हें !
211. असफलता एक चुनोती हें उसे सिव्कारे !
212. सत्य यही हें इन्सान गलती करता
मनोबल ही जीवन शक्ति है(manobal hi jeevan sakti hai)
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Successlocator
On: जून 30, 2016
इटली के एक प्रमुख शहर गिएरुपे में बारुद के एक कारखाने में फिनोज पी॰ वेग नामक फोरमैन काम करता था। इस कारखाने के बारुद के मिश्रण से धातुओं की छोटी परतों में छेद करने का काम होता था। फिनोज पी॰ वेग के साथ एक विचित्र दुर्घटना घटी। हुआ यह कि वह सुराख करने के एक बरमे के पास काम कर रहा था। बरमा करीब पौने चार फीट लम्बा और तेरह पौंड वजन का था। काम चल ही रहा था। कि अचानक न जाने क्या गड़बड़ी आई जो मशीन से एक भारी ध्माके के साथ बरमा निकल कर उचटा और वेग के मस्तिष्क को बेधता हुआ बाहर निकल गया। बरमा चेहरे के बाँई ओर वाले भाग से घुसा था और भीतरी हड्डियों को तोड़ता हुआ आँख के निचले भाग को छेदता हुआ बाहर निकल गया। आस-पास काम कर रहे कर्मचारियों को लगा कि वेग के परखचे उड़ गये हैं।
वह झटके के साथ नीचे गिरा और ऐंठ गया। फिर भी आर्श्चय था कि उसमें जान बाकी थी। उसे कारखाने से करीब एक मील दूर स्थित अस्पताल में पहुँचाया गया। अस्पताल के प्रमुख चिकित्सकों ने उसका परीक्षण किया आर मुख्य चिकित्साधिकारी इस निर्ष्कष पर पहुँचे कि घायल के साथ कितना ही परिश्रम क्यों न किया जाये असे बचाया नहीं जा सकता। फिर भी चिकित्सकों ने अपना कर्त्तव्य निभाया और साधारण मरहम पट्टी कर दी। आर्श्चय तो उस समय हुआ जब उसी दिन वेग की बेहोशी टूटी। डाँक्टर बेहोशी टूटने की आशा करना तो अलग रहा, इस बात की प्रतीक्षा कर रहे थे कि वेग की साँसें कितनी देर तक साथ देती हैं ?
उसका खून बहना बन्द नहीं हुआ था, फिर भी दर्द को सहा और रात दस बजे वहाँ उपस्थित लोगों से बातें करने लगा। इसके बाद तो डाँक्टरों में भी वेग के जीवित बच जाने की आशा जगी। वह तेजी से अच्छा होने लगा और तीन माह तक अस्पताल में रहने के बाद पूरी तरह स्वस्थ होकर अस्पताल से घर आ गया। अस्पताल के अधिकारियों ने जो अन्तिम रिपोर्ट तैयार की, वह विश्व के मूर्धन्य चिकित्सकों के लिए आज भी अध्ययन और आर्श्चय की वस्तु बनी हुई है। वेग की नेत्र ज्योति तो चली गई थी, पर उसका बाकी मस्तिष्क पूरी तरह ठीक हो गया और वह अपना सामान्य जीवन क्रम ठीक तरह से चलाने लगा। इतने भयानक मस्तिष्कीय आघात के बाद भी कोई व्यक्ति जीवित बच सकता है, वरन् स्वस्थ सामान्य जीवन व्यतीत कर सकता है, इस पर शरीर विज्ञानियों को सहसा विश्वास नहीं हो सकता। परन्तु वेग की टूटी हुई खोपडी के अस्थि खण्ड तथा उससे सम्बन्धित पदार्थ व कागजात हार्वर्ड मेडिकल कालेज बुकलिन के संग्रहालय में सुरक्षित रखे हैं, साथ ही वह बरमा भी रखा हुआ है जो वेग की खोपड़ी को चीरता हुआ बाहर निकला था।
यह घटना इस बात की साक्षी है कि जीवन मृत्यु से अधिक बलवान है। यहाँ जीवन का अर्थ जन्म और मृत्यु के बीच की अवधि नहीं है, अपितु उस जीवटता से है जो प्रतिकूल परिस्थितियों में भी मनुष्य को सक्षम बनाये रखती है। शरीर वैसे हाड़-माँस से बना दिखाई देता है। इसे मिट्टी का पुतला और क्षणभंगुर कहा जाता है, परन्तु इसके भीतर विद्यमान जीवटता को देखते हैं तो कहना पडेगा कि उसकी संरचना अष्ट धातुओं से भी मजबूत तत्वों द्वारा मिलकर बनी हुई है। छोटी-मोटी, टूट-फूट, हारी-बीमारी तो रक्त के श्वेतकण तथा दूसरे संरक्षणकर्ता, शामक तत्व अनायास ही दूर करते रहते हैं, परन्तु भारी संकट आ उपस्थित होने पर भी यदि साहस न खोया जाय तो उत्कट इच्छा शक्ति के सहारे उनका सामना सफलतापूर्वक किया जा सकता है।
निश्चित ही मृत्यु की विभीषिका और अनिवार्यता से इन्कार नहीं किया जा सकता, न ही विपत्ति का संकट हल्का करके आँका जा सकता है, परन्तु इतना होते हुए भी जिजीविषा की-जीवन आकाँक्षा की-सामर्थ्य सबसे बडी है और उसके सहारे संकटों को पार किया जा सता है।
जीवन के लिए संकट प्रस्तुत करने वाले क्षण बहुत लोगों के सामने आते हैं। उनमें से आधे लोग तो भयभीत होकर हिम्मत हार बैठते हैं। और उस कातर मनःस्थिति में ही बेमौत मारे जाते हैं। पेड़ के नीचे चीते को खड़ा देखकर बन्दर हक्का-बक्का हो जाता है और हड़बडी घबड़ाहट में नीचे आ गिरता है। चीता उसे चुपचाप मुँह में दबाकर चल देता है। विपत्ति की घड़ी सामने आने पर अक्सर लोग ऐसी ही भयभीत स्थिति में फंस जाते हैं और बेमौत मरते हैं। इसके विपरित यदि उस कठिन समय में उसने अपने मनोबल को स्थिर रखा तो बहुत सम्भव है कि वह विपत्ति बच जाती। इच्छा शक्ति की प्रचण्डता अंग प्रत्यंग में ऐसी अद्भुत सुरक्षा उत्पन्न कर देती है जिसके सहारे माटी का पुतला कही जाने वाली अपनी यही देह मृत्युँजय बन जाती है। मनस्वी और मनोबल सम्पन्न लोगों के ऐसे अगणित उदाहरण अपने चतुर्दिक बिखरे देखे जा सकते हैं।
सन् 1891 की घटना है। एक अंग्रेज मछुआरा अपना जहाज लेकर दलबल के साथ व्हेल मछली का शिकार करने के लिए निकला। आकलैंड द्वीप समूह के पास उसे एक विशालकाय व्हेल दिखाई पड़ी। दो नावों पर सवार ने उस पर ‘भाला’ द्वारा आक्रमण किया। व्हेल ने पलटा खाया तो एक नाव उसकी पूँछ की चपेट में आ गई। एक नाविक तत्काल डूब गया। दूसरा जेम्स वर्टली गायब हो गया। उसे व्हेल ने निगल लिया था उसके भी जीवित न बचने की आशा थी। टनों भारी व्हेल मछली के उदर में समा जाने के बाद साढ़े पाँच छह फुट आदमी का बच सकना सम्भव भी कैसे हो सकता है ? पर यह सम्भव हुआ!
वर्टली जब व्हेल मछली के पेट में पहुँच गया तो भी उसने अपना होशो-हवास कायम रखा और उसने अपनी पेंट की जेब में रखे हुए शिकारी चाकू से व्हेल का पेट चीरना आरम्भ कर दिया। हालाँकि ऐसा करने में बडी परेशानी हो रही थी। भीतर की जकड़न कुछ करने नहीं दे रही थी, फिर भी उसने अपना प्रयास जारी रखा और व्हेल का पेट चीरकर बाहर आने में सफल हो गया। दो दिन बाद वह अचेत अवस्था में समुद्र की सतह पर तैरता हुआ पाया गया। नाविकों ने उसे देखा तो बाहर निकाला और इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया। व्हेल मछली के पेट में रहने के कारण उसका शरीर क्षत-विक्षत हो गया था। उसका सारा शरीर पीला पड़ चुका था और चमड़ी का रंग तो अन्त तक वैसा ही बना रहा। तीन हप्ते तक उपचार के बाद उसके मस्तिष्क ने काम करना शुरु किया और उसकी बेहोशी टूटी। धीरे-धीरे वह ठीक होता गया और करीब दो महीने में पूरी तरह स्वस्थ होकर घर वापस आ गया।
व्हेल मछली के पेट में पहुँच जाने के बाद बर्टली को अपने जीवन की रक्षा के लिए जो संघर्ष करना पड़ा था उसका विवरण “डेट डिवैट्स” पत्र के जनवरी 1892 अंक में प्रकाशित हुआ था। वर्टली ने अपने अनुभव बताते हुए लिखा है कि “व्हेल के मुँह में मैंने एक अंधेरी गुफा में घसीटे गए व्यक्ति की तरह प्रवेश किया। उस तालाब जैसे पेट में साँस लेने की गुँजाइश तो थी पर गर्मी इतनी तेज पड़ रही थी मानों खोलते पानी में उबाला जा रहा हो, फिर भी मैंने साहस से काम लिया। बड़ी कठिनाई से मैंने अपना चाकू निकाला और खोला। मैं मछली की आँतों में बेहतर कसा हुआ था। हिलने-डुलने की गुँजाइश नहीं थी फिर भी किसी तरह चाकू निकाला और मछली का पेट चीरने का सिलसिला चलाया। पेट की परत इतनी मोटी थी कि उसकी परतों को फाड़ने में घण्टों लग गये तब कहीं बाहर निकलने का रास्ता बन सका।”
शरीर की शक्ति, सामर्थ्य सीमित है यह ठीक है, पर शरीर से भी अधिक शक्तिशाली और सामार्थ्यवान है- मनोबल। यह मनोबल दुर्बल से दुर्बल काया को भी मृत्युँजयी बना देता है, बड़े से बड़े संकटों को भी पार करा देता है और इसका अभाव साधारण संकटों में भी परास्त कर देता है। स्वामी विवेकानन्द ने मनोबल की महत्ता बताते हुए कहा है, “मनोबल ही सुख सर्वस्व है। यही जीवन है और यही अमरता है तथा मनोदौर्बल्य ही रोग है, दुःख और मृत्यु है।” मनोबल के द्वारा शरीर को अजेय वज्र के समान बनाया जा सकता है। यदि इस शक्ति का भली-भाँति विकास किया जाय तो साधारण से दीखने वाले मानवीय व्यक्तित्व में ही ऐसी विशेषताएँ उत्पन्न की जा सकती है जो साधारणतया असम्भव महसूस पड़ती हैं। परन्तु जो लोग शरीर पर मन के नियंत्रण का तथ्य जानते हैं उन्हें यह समझना कठिन नहीं होना चाहिए कि इस शक्ति के बल पर देह के अवयव अपनी प्रकृति बदल सकते हैं और मन की इच्छानुसार ऐसी हलचलें भी कर सकते हैं। जो सामान्य प्रयत्नों के द्वारा सम्भव ही प्रतीत हो। साम्राज्ञी मेरीलुइस के संबंध में प्रसिद्ध है कि वह अपनी इच्छानुसार अपने कानों को बिना हाथ से छुए किसी भी दिशा में मोड़ सकती थीं और आगे पीछे हिला सकती थी।
एक फ्राँसीसी अभिनेता अपनी इच्छानुसार अपने बालों को घुमा सकता था। बालों को गिराने, उठाने और घुँघराले बनाने की क्रिया इच्छानुसार कर सकने में अपनी अद्भुत क्षमता के बल पर उसने ढ़ेरों रुपये कमाये। वह एक बाल को घुंघराला बना लेता और ठीक उसी के बगल वाला बाल चपटा कर लेने का अपना आर्श्चयजनक करतब भी कर दिखाता था। डाक्टरों ने उसका परीक्षण किया और ‘प्रो॰ आगस्ट कैवेनीज’ ने बताया कि उसने अपने सिर की माँस-पेशियों और त्वचा के तन्तुओं को अपनी इच्छाशक्ति के द्वारा असाधारण रुप से विकसित और संवेदनशील बना लिया है।
एक व्यक्ति ने अपने पेट को प्रशिक्षित किया और उसने असाधारण खुराक खाने में ही नहीं उसे पचाने में भी सफलता प्राप्त की। ग्रीस का क्रोटोनाकामिलो नामक पेटू अधिक खाने और पचाने के लिए प्रसिद्ध था। वह एक दिन में 150 पौंड माँस तक खा जाता था। डेट्रायर (मिशीगन) के एडिको, जो एक रेल्वे मजदूर था, ने तो कमाल ही कर दिया। उसने 60 सुअरों के माँस से बनी हुई टिकिया एक दिन में खाकर पचाई। एडिको की सामान्य खुराक सत्तर आदमियों के बराबर थी। उसने केवल इसीलिए शादी नहीं की कि वह जो कमाता था उससे उसका अपना पेट ही नहीं भरता था। फिर बीबी को क्या खिलाता? उसे जितना कुछ वेतन मिलता था, वह उसके लिए प्रायः कम पड़ता था और ऐसी दश में उसके मित्र लोग उसकी सहायता करते थे ताकि वह भूखा न मरे।
कहा जाता है कि नींद न आने पर आदमी पागल हो जाता है और अकाल मृत्यु हो जाती है किन्तु ऐसे भी उदाहरण हैं जिनमें बिल्कुल न सोने वाले लोग सामान्य जीवन जीते रहे और अपना काम ठीक प्रकार चलाते रहे। पेरिस का प्रख्यात वकील जैक्विसल हरवेट 72 वर्ष तक जीवित रहा। इस अवधि में वह 68 वर्ष तक एक क्षण के लिए भी नहीं सोया। चार वर्ष की आयु में ही उसकी नींद खो गई थी। हुआ यह था कि फ्राँस के सम्राट सोलहवें लुई को जब सन् 1793 में फाँसी दी गई तो जैक्विसल भी अपनी माँ के साथ वह दृश्य देखने गया। शूली पर चढ़ाये जाने का दृश्य देखकर जैक्विसल के मन में ऐसी दहशत बैठी कि वह बुरी तरह डर गया और मूर्छित अवस्था में उसे अस्पताल पहुचाया गया। वहाँ वह ठीक तो हो गया, पर उसकी नींद बिल्कुल गायब हो गई। वह इसके बाद एक क्षण के लिए भी नहीं सोया। परन्तु इसका उसके स्वास्थ्य पर कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ा।
कहा गया है कि मन की शक्ति का कोई पारावार नहीं हैं। कई बार तो सये शक्तियाँ अनायास ही जागृत हो जाती हैं, परन्तु ऐसा होता अपवाद रुप में ही है। उन्हें जागृत करने के अलग अभ्यास है जिन्हें योग-साधना भी कहा जा सकता है।
यदि मनोबल का महत्व समझ लिया जाये और उसे अर्जित किया जा सके, संचित किया जा सके तो न केवल बडे-बडे विचलित कर देने वाले संकटों को आसानी से पार किया जा सकता है, वरन् चमत्कार कही जाने वाली सफलताँ भी अर्जित की जा सकती हैं।
वह झटके के साथ नीचे गिरा और ऐंठ गया। फिर भी आर्श्चय था कि उसमें जान बाकी थी। उसे कारखाने से करीब एक मील दूर स्थित अस्पताल में पहुँचाया गया। अस्पताल के प्रमुख चिकित्सकों ने उसका परीक्षण किया आर मुख्य चिकित्साधिकारी इस निर्ष्कष पर पहुँचे कि घायल के साथ कितना ही परिश्रम क्यों न किया जाये असे बचाया नहीं जा सकता। फिर भी चिकित्सकों ने अपना कर्त्तव्य निभाया और साधारण मरहम पट्टी कर दी। आर्श्चय तो उस समय हुआ जब उसी दिन वेग की बेहोशी टूटी। डाँक्टर बेहोशी टूटने की आशा करना तो अलग रहा, इस बात की प्रतीक्षा कर रहे थे कि वेग की साँसें कितनी देर तक साथ देती हैं ?
उसका खून बहना बन्द नहीं हुआ था, फिर भी दर्द को सहा और रात दस बजे वहाँ उपस्थित लोगों से बातें करने लगा। इसके बाद तो डाँक्टरों में भी वेग के जीवित बच जाने की आशा जगी। वह तेजी से अच्छा होने लगा और तीन माह तक अस्पताल में रहने के बाद पूरी तरह स्वस्थ होकर अस्पताल से घर आ गया। अस्पताल के अधिकारियों ने जो अन्तिम रिपोर्ट तैयार की, वह विश्व के मूर्धन्य चिकित्सकों के लिए आज भी अध्ययन और आर्श्चय की वस्तु बनी हुई है। वेग की नेत्र ज्योति तो चली गई थी, पर उसका बाकी मस्तिष्क पूरी तरह ठीक हो गया और वह अपना सामान्य जीवन क्रम ठीक तरह से चलाने लगा। इतने भयानक मस्तिष्कीय आघात के बाद भी कोई व्यक्ति जीवित बच सकता है, वरन् स्वस्थ सामान्य जीवन व्यतीत कर सकता है, इस पर शरीर विज्ञानियों को सहसा विश्वास नहीं हो सकता। परन्तु वेग की टूटी हुई खोपडी के अस्थि खण्ड तथा उससे सम्बन्धित पदार्थ व कागजात हार्वर्ड मेडिकल कालेज बुकलिन के संग्रहालय में सुरक्षित रखे हैं, साथ ही वह बरमा भी रखा हुआ है जो वेग की खोपड़ी को चीरता हुआ बाहर निकला था।
यह घटना इस बात की साक्षी है कि जीवन मृत्यु से अधिक बलवान है। यहाँ जीवन का अर्थ जन्म और मृत्यु के बीच की अवधि नहीं है, अपितु उस जीवटता से है जो प्रतिकूल परिस्थितियों में भी मनुष्य को सक्षम बनाये रखती है। शरीर वैसे हाड़-माँस से बना दिखाई देता है। इसे मिट्टी का पुतला और क्षणभंगुर कहा जाता है, परन्तु इसके भीतर विद्यमान जीवटता को देखते हैं तो कहना पडेगा कि उसकी संरचना अष्ट धातुओं से भी मजबूत तत्वों द्वारा मिलकर बनी हुई है। छोटी-मोटी, टूट-फूट, हारी-बीमारी तो रक्त के श्वेतकण तथा दूसरे संरक्षणकर्ता, शामक तत्व अनायास ही दूर करते रहते हैं, परन्तु भारी संकट आ उपस्थित होने पर भी यदि साहस न खोया जाय तो उत्कट इच्छा शक्ति के सहारे उनका सामना सफलतापूर्वक किया जा सकता है।
निश्चित ही मृत्यु की विभीषिका और अनिवार्यता से इन्कार नहीं किया जा सकता, न ही विपत्ति का संकट हल्का करके आँका जा सकता है, परन्तु इतना होते हुए भी जिजीविषा की-जीवन आकाँक्षा की-सामर्थ्य सबसे बडी है और उसके सहारे संकटों को पार किया जा सता है।
जीवन के लिए संकट प्रस्तुत करने वाले क्षण बहुत लोगों के सामने आते हैं। उनमें से आधे लोग तो भयभीत होकर हिम्मत हार बैठते हैं। और उस कातर मनःस्थिति में ही बेमौत मारे जाते हैं। पेड़ के नीचे चीते को खड़ा देखकर बन्दर हक्का-बक्का हो जाता है और हड़बडी घबड़ाहट में नीचे आ गिरता है। चीता उसे चुपचाप मुँह में दबाकर चल देता है। विपत्ति की घड़ी सामने आने पर अक्सर लोग ऐसी ही भयभीत स्थिति में फंस जाते हैं और बेमौत मरते हैं। इसके विपरित यदि उस कठिन समय में उसने अपने मनोबल को स्थिर रखा तो बहुत सम्भव है कि वह विपत्ति बच जाती। इच्छा शक्ति की प्रचण्डता अंग प्रत्यंग में ऐसी अद्भुत सुरक्षा उत्पन्न कर देती है जिसके सहारे माटी का पुतला कही जाने वाली अपनी यही देह मृत्युँजय बन जाती है। मनस्वी और मनोबल सम्पन्न लोगों के ऐसे अगणित उदाहरण अपने चतुर्दिक बिखरे देखे जा सकते हैं।
सन् 1891 की घटना है। एक अंग्रेज मछुआरा अपना जहाज लेकर दलबल के साथ व्हेल मछली का शिकार करने के लिए निकला। आकलैंड द्वीप समूह के पास उसे एक विशालकाय व्हेल दिखाई पड़ी। दो नावों पर सवार ने उस पर ‘भाला’ द्वारा आक्रमण किया। व्हेल ने पलटा खाया तो एक नाव उसकी पूँछ की चपेट में आ गई। एक नाविक तत्काल डूब गया। दूसरा जेम्स वर्टली गायब हो गया। उसे व्हेल ने निगल लिया था उसके भी जीवित न बचने की आशा थी। टनों भारी व्हेल मछली के उदर में समा जाने के बाद साढ़े पाँच छह फुट आदमी का बच सकना सम्भव भी कैसे हो सकता है ? पर यह सम्भव हुआ!
वर्टली जब व्हेल मछली के पेट में पहुँच गया तो भी उसने अपना होशो-हवास कायम रखा और उसने अपनी पेंट की जेब में रखे हुए शिकारी चाकू से व्हेल का पेट चीरना आरम्भ कर दिया। हालाँकि ऐसा करने में बडी परेशानी हो रही थी। भीतर की जकड़न कुछ करने नहीं दे रही थी, फिर भी उसने अपना प्रयास जारी रखा और व्हेल का पेट चीरकर बाहर आने में सफल हो गया। दो दिन बाद वह अचेत अवस्था में समुद्र की सतह पर तैरता हुआ पाया गया। नाविकों ने उसे देखा तो बाहर निकाला और इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया। व्हेल मछली के पेट में रहने के कारण उसका शरीर क्षत-विक्षत हो गया था। उसका सारा शरीर पीला पड़ चुका था और चमड़ी का रंग तो अन्त तक वैसा ही बना रहा। तीन हप्ते तक उपचार के बाद उसके मस्तिष्क ने काम करना शुरु किया और उसकी बेहोशी टूटी। धीरे-धीरे वह ठीक होता गया और करीब दो महीने में पूरी तरह स्वस्थ होकर घर वापस आ गया।
व्हेल मछली के पेट में पहुँच जाने के बाद बर्टली को अपने जीवन की रक्षा के लिए जो संघर्ष करना पड़ा था उसका विवरण “डेट डिवैट्स” पत्र के जनवरी 1892 अंक में प्रकाशित हुआ था। वर्टली ने अपने अनुभव बताते हुए लिखा है कि “व्हेल के मुँह में मैंने एक अंधेरी गुफा में घसीटे गए व्यक्ति की तरह प्रवेश किया। उस तालाब जैसे पेट में साँस लेने की गुँजाइश तो थी पर गर्मी इतनी तेज पड़ रही थी मानों खोलते पानी में उबाला जा रहा हो, फिर भी मैंने साहस से काम लिया। बड़ी कठिनाई से मैंने अपना चाकू निकाला और खोला। मैं मछली की आँतों में बेहतर कसा हुआ था। हिलने-डुलने की गुँजाइश नहीं थी फिर भी किसी तरह चाकू निकाला और मछली का पेट चीरने का सिलसिला चलाया। पेट की परत इतनी मोटी थी कि उसकी परतों को फाड़ने में घण्टों लग गये तब कहीं बाहर निकलने का रास्ता बन सका।”
शरीर की शक्ति, सामर्थ्य सीमित है यह ठीक है, पर शरीर से भी अधिक शक्तिशाली और सामार्थ्यवान है- मनोबल। यह मनोबल दुर्बल से दुर्बल काया को भी मृत्युँजयी बना देता है, बड़े से बड़े संकटों को भी पार करा देता है और इसका अभाव साधारण संकटों में भी परास्त कर देता है। स्वामी विवेकानन्द ने मनोबल की महत्ता बताते हुए कहा है, “मनोबल ही सुख सर्वस्व है। यही जीवन है और यही अमरता है तथा मनोदौर्बल्य ही रोग है, दुःख और मृत्यु है।” मनोबल के द्वारा शरीर को अजेय वज्र के समान बनाया जा सकता है। यदि इस शक्ति का भली-भाँति विकास किया जाय तो साधारण से दीखने वाले मानवीय व्यक्तित्व में ही ऐसी विशेषताएँ उत्पन्न की जा सकती है जो साधारणतया असम्भव महसूस पड़ती हैं। परन्तु जो लोग शरीर पर मन के नियंत्रण का तथ्य जानते हैं उन्हें यह समझना कठिन नहीं होना चाहिए कि इस शक्ति के बल पर देह के अवयव अपनी प्रकृति बदल सकते हैं और मन की इच्छानुसार ऐसी हलचलें भी कर सकते हैं। जो सामान्य प्रयत्नों के द्वारा सम्भव ही प्रतीत हो। साम्राज्ञी मेरीलुइस के संबंध में प्रसिद्ध है कि वह अपनी इच्छानुसार अपने कानों को बिना हाथ से छुए किसी भी दिशा में मोड़ सकती थीं और आगे पीछे हिला सकती थी।
एक फ्राँसीसी अभिनेता अपनी इच्छानुसार अपने बालों को घुमा सकता था। बालों को गिराने, उठाने और घुँघराले बनाने की क्रिया इच्छानुसार कर सकने में अपनी अद्भुत क्षमता के बल पर उसने ढ़ेरों रुपये कमाये। वह एक बाल को घुंघराला बना लेता और ठीक उसी के बगल वाला बाल चपटा कर लेने का अपना आर्श्चयजनक करतब भी कर दिखाता था। डाक्टरों ने उसका परीक्षण किया और ‘प्रो॰ आगस्ट कैवेनीज’ ने बताया कि उसने अपने सिर की माँस-पेशियों और त्वचा के तन्तुओं को अपनी इच्छाशक्ति के द्वारा असाधारण रुप से विकसित और संवेदनशील बना लिया है।
एक व्यक्ति ने अपने पेट को प्रशिक्षित किया और उसने असाधारण खुराक खाने में ही नहीं उसे पचाने में भी सफलता प्राप्त की। ग्रीस का क्रोटोनाकामिलो नामक पेटू अधिक खाने और पचाने के लिए प्रसिद्ध था। वह एक दिन में 150 पौंड माँस तक खा जाता था। डेट्रायर (मिशीगन) के एडिको, जो एक रेल्वे मजदूर था, ने तो कमाल ही कर दिया। उसने 60 सुअरों के माँस से बनी हुई टिकिया एक दिन में खाकर पचाई। एडिको की सामान्य खुराक सत्तर आदमियों के बराबर थी। उसने केवल इसीलिए शादी नहीं की कि वह जो कमाता था उससे उसका अपना पेट ही नहीं भरता था। फिर बीबी को क्या खिलाता? उसे जितना कुछ वेतन मिलता था, वह उसके लिए प्रायः कम पड़ता था और ऐसी दश में उसके मित्र लोग उसकी सहायता करते थे ताकि वह भूखा न मरे।
कहा जाता है कि नींद न आने पर आदमी पागल हो जाता है और अकाल मृत्यु हो जाती है किन्तु ऐसे भी उदाहरण हैं जिनमें बिल्कुल न सोने वाले लोग सामान्य जीवन जीते रहे और अपना काम ठीक प्रकार चलाते रहे। पेरिस का प्रख्यात वकील जैक्विसल हरवेट 72 वर्ष तक जीवित रहा। इस अवधि में वह 68 वर्ष तक एक क्षण के लिए भी नहीं सोया। चार वर्ष की आयु में ही उसकी नींद खो गई थी। हुआ यह था कि फ्राँस के सम्राट सोलहवें लुई को जब सन् 1793 में फाँसी दी गई तो जैक्विसल भी अपनी माँ के साथ वह दृश्य देखने गया। शूली पर चढ़ाये जाने का दृश्य देखकर जैक्विसल के मन में ऐसी दहशत बैठी कि वह बुरी तरह डर गया और मूर्छित अवस्था में उसे अस्पताल पहुचाया गया। वहाँ वह ठीक तो हो गया, पर उसकी नींद बिल्कुल गायब हो गई। वह इसके बाद एक क्षण के लिए भी नहीं सोया। परन्तु इसका उसके स्वास्थ्य पर कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ा।
कहा गया है कि मन की शक्ति का कोई पारावार नहीं हैं। कई बार तो सये शक्तियाँ अनायास ही जागृत हो जाती हैं, परन्तु ऐसा होता अपवाद रुप में ही है। उन्हें जागृत करने के अलग अभ्यास है जिन्हें योग-साधना भी कहा जा सकता है।
यदि मनोबल का महत्व समझ लिया जाये और उसे अर्जित किया जा सके, संचित किया जा सके तो न केवल बडे-बडे विचलित कर देने वाले संकटों को आसानी से पार किया जा सकता है, वरन् चमत्कार कही जाने वाली सफलताँ भी अर्जित की जा सकती हैं।
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