14 सित॰ 2016

"आपके जीवन का लक्ष्य क्या हैं?"

By: Successlocator On: सितंबर 14, 2016
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  • यह सवाल आसान हैं लेकिन जबाब उतना ही
    मुश्किल हैं ना?
    कोई नहीं, मैं help करता हूँ
    Dream Big, Set Goals, Take Action                               
    What is your Goal? (in Hindi)

    आपके मन में जो भी ख्याल आता हो उन्हें
    लिख डालिए, धन, carrier, health, family, समाज,
    समुदाय, अध्यात्म और व्यक्तिगत लक्ष्यों के बारे में
    लिखिए। इनके द्वारा एक पुरे page को भर
    दीजिएं। अब जो तीन लक्ष्य
    आपके लिए सर्वाधिक अहमिहत रखते हो, उनके सामने A
    लिख दीजिएं। दुसरे
    उपलक्ष्यो, तर्कसंगत अगला कदम, तात्कालीन
    योजनाए लिख डालिए। फिर प्रत्येक A लक्ष्य से एक
    “अगला कदम” अगले सप्ताह के लिए निर्धारित
    कीजिए। अब आपके पास एक ठोस कार्य-योजना
    हैं, इस सूची की
    समीक्षा हर महीने
    कीजिए, इस तरह अपने “ Goal of your
    life ” की दिशा में होने वाली प्रगति
    का आप अंदाजा लगा पाएंगे।
    “ जीवन के लक्ष्यों की स्पष्ट
    सूची से महान शक्तिया प्राप्त होती
    हैं ” लाकिन का ऐसा मानना था लाकिन की इस बात
    से लोग समझ जाते थे कि उनके जीवन के एक-
    एक मिनट का सम्बन्ध उनके लक्ष्य से होता हैं।
    एक व्यस्त महिला वकील ने लाकिन को
    अपनी समस्या बताई कि उसके पास पर्याप्त
    समय नहीं रहता था। जब उस महिला
    वकील ने अपने जीवन के लक्ष्यों
    की सूची बनायीं तो
    उसमे लिखा था कि “एकाकी रहना
    चाहती हूँ” लाकिन ने उसे बताया कि “उसके
    व्यस्त जीवन और निर्धारित लक्ष्यों के
    बीच विरोधाभास नज़र आता हैं ऐसा लगता है कि
    वह महिला किसी को न नहीं कह
    पाती हैं और उसका काफी time यूँ
    ही नष्ट हो जाता हैं ” लाकिन ने उसे time
    saving के कई तरीके बताये इस तरह महिला
    का self-confidence बढ़ता चला गया और वह न कहना
    भी सीख गई।
    ¶¶
    ¶¶¶अगले पांच वर्ष आप किस तरह गुजारना चाहेंगे?
    आप अगले पांच वर्ष किस तरह गुजारेंगे या आपको किस
    तरह गुजारना चाहिए, या आप किस तरह गुजारना चाहेंगे?
    अगर आपने अपने जीवन का लक्ष्य
    “अमीर बनना” लिखा हैं और अब आप जबाब
    दे रहे हैं : “मैं मुंबई के सागर तट पर
    आलीशान मकान बनाऊगा” तो इसका अर्थ हैं
    की आप ईमानदारी के साथ पहले
    सवाल का जबाब नहीं दे रहे हैं।
    सीधा-सा मतलब यह है कि आपने जिन लक्ष्यों
    के बारे में सुन रखा हैं उनकी तरफ गौर किये बिना
    अपने लक्ष्यों की खोज करें। हम कई तरह
    के कार्य यह सोच कर करते रहते है कि हमें यह सब
    करना चाहिए लेकिन क्या सारे कार्य जरुरी होते
    हैं? भले की कार्य logical
    प्रतीत होते हो लेकिन जीवन के
    लक्ष्य के साथ उनका कोई रिश्ता बनता हैं?
    Reliance उधोग समूह के संस्थापक धीरू भाई
    अंबानी time management के सरताज माने
    जा सकते हैं। उन्होंने भारतीय उधोग जगत को
    समय से पहले, वक्त के आगे सोचना और उस पर सबसे
    पहले अमल करना सिखाया।
    धीरू भाई ( धीरज लाल
    हीराचंद अंबानी ) कहते थे
    की धन के निवेश से अधिक महत्वपूर्ण हैं
    समय का सही निवेश।
    समय प्रबंधन के एक और परामर्शक ‘ हरबर्ट ए.
    शेयार्ड ’ अपने पास सलाह लेने आये लोगो से कलपनाए करने
    के लिए कहते थे। जिसके लिए वे उनसे पूछते थे
    की जिन कार्यो को समय के अभाव के कारण
    उन्होंने हमेशा के लिए स्थगित कर रखा हैं उन कार्यो के बारे
    में कल्पना करे।
    Newyork School of visual art के विधार्थियों से
    मिल्टन ग्लेसर कहते थे कि “वे पांच साल के बाद एक दिन
    की रुपरेखा तैयार करें।”
    ऐसे कई तरीके हैं जैसे अपने बारे में स्मृतिशेष
    लिखना –जिसे अगर गम्भीरता से लिया जाये तो
    लोग कई निरर्थक फंदों से उभरकर जीवन के
    वास्तविक लक्ष्यों के प्रति अपने आप को केन्द्रित कर
    सकते हैं।
    “अगर आपको पता हो की आज से
    ठीक 6 महीने बाद
    आपकी death हो जाएगी तो आप
    किस तरह जीना पसंद करेंगे?” लाकिन यह
    सवाल पूछ कर लोगो को जीवन से जुड़े
    बुनयादी पहलुओ के बारे में सोचने के लिए
    मजबूर कर देते थे।
    इसी तरह शेपार्ड लोगो से पूछते थे –“ जब
    आप संतुष्ट होंगे तब क्या आप जीवित
    रहेंगे?” या आपको किस काम को पूरा नहीं करने
    का अफ़सोस हैं? ” अधिकतर लोगो ने ऐसे सवाल का जबाब
    सोचा तक नहीं था, जैसे ही उनको
    अपनी अनुभूतियो का पता चला उन्होंने ठोस
    संकल्प लेना शुरू कर दिया, ताकि जीवन में
    खुशिया बढे, और ग्लानी की भावना
    कम हो।
    “ महत्वपूर्ण कार्य करने के लिए व्यक्ति के पास हमेशा
    पर्याप्त समय होता हैं ” यह लाकिन का कहना था ज्यादातर
    लोग दिन के सर्वाधिक उत्पादक घंटे 8 बजे से 11 बजे तक
    अखबार पढने, चाय पीने, बातें करने में खर्च
    कर देते हैं जैसे ही हमें अहसास होता हैं कि
    महत्वपूर्ण कार्य करने के लिए समय कम हैं तो अगला
    सवाल पैदा होता हैं कि उसे कब किया जाये? उसका जबाब हैं-
    अभी, क्योकि “समय ही
    जीव

    उम्र से सफलता को नही आका जा सकता ।

    By: Successlocator On: सितंबर 14, 2016
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  •                 सफलता की कोई उम्र नहीं होती है

    हम इसलिए खेलना छोड़ देते है क्योंकि हम बूढ़े नही हो जाते है
    बल्कि हम इसलिए बूढ़े हो जाते है क्योंकि हम खेलना छोड़ देते है।

    इस संसार में बहुत से लोग ऐसे हैं, जिन्होंने अपने कार्योँ से अपनी उम्र को पीछे छोड़ दिया। यह बात सच है कि हमारे शरीर के कार्य करने की एक सीमा है। उम्र बढ़ने के साथ शरीर के कार्य करने की क्षमता घटती जाती है, लेकिन जिन लोगों के हौसले बुलंद होते हैं, जो जीवन में कुछ कर गुजरने की चाह रखते हैं, जिनमें उत्साह – उमँग होता है, जिनकी इच्छाशक्ति व संकल्पशक्ति मजबूत होती है, ऐसे व्यक्तियों के सामने कोई बाधा बड़ी नहीं होती। ऐसे व्यक्ति आत्मविश्वास से भरे हुयें होते है, जो असंभव को भी संभव बना देते है।
    युवा किसी आयु अवस्था का नाम नहीं, बल्क़ि शक्ति का नाम है। जिसने अपने मन और आत्मा की शक्ति को जगा लिया, वह ७० वर्ष की आयु में भी युवा है।
    बहुत से लोग उम्र बढ़ने के साथ – साथ सोचने लगते हैं कि अब तो हमारी उम्र हो गयी है, “अब हमसे ये सब नहीं हो सकता”। उनकी यही सोच उन्हें निर्बल बना देती है और कुछ कार्य नहीं करने देती। व्यक्ति जितना अपने शरीर से कार्य करता है, उससे कई गुना कार्य वह अपने मन से करता है। यदि मन की शक्तियाँ ही उसकी कमजोर पड़ गई हैं, तो फिर जरूरत है उन्हें जगाने की।
    शक्तियों के जागरण से संबंधित एक ऐतिहासिक कथा याद आती है।
    एक राजा के पास कई हाथी थे, लेकिन एक हाथी बहुत शक्तिशाली था, बहुत आज्ञाकारी, समझदार व युद्ध-कौशल में निपुण था। बहुत से युद्धों में वह भेजा गया था और वह राजा को विजय दिलाकर वापस लौटा था, इसलिए वह महाराज का सबसे प्रिय हाथी था। समय गुजरता गया और एक समय ऐसा भी आया, जब वह वृद्ध दिखने लगा। अब वह पहले की तरह कार्य नहीं कर पाता था। इसलिए अब राजा उसे युद्ध क्षेत्र में भी नहीं भेजते थे। एक दिन वह सरोवर में जल पीने के लिए गया, लेकिन वहीं कीचड़ में उसका पैर धँस गया और फिर धँसता ही चला गया। उस हाथी ने बहुत कोशिश की, लेकिन वह उस कीचड़ से स्वयं को नहीं निकाल पाया। उसकी चिंघाड़ने की आवाज से लोगों को यह पता चल गया कि वह हाथी संकट में है। हाथी के फँसने का समाचार राजा तक भी पहुँचा।


    राजा समेत सभी लोग हाथी के आसपास इक्कठा हो गए और विभिन्न प्रकार के शारीरिक प्रयत्न उसे निकालने के लिए करने लगे। जब बहुत देर तक प्रयास करने के उपरांत कोई मार्ग नहीं निकला तो राजा ने अपने सबसे अनुभवी मंत्री को बुलवाया। मंत्री ने आकर घटनास्थल का निरीक्षण किया और फिर राजा को सुझाव दिया कि सरोवर के चारों और युद्ध के नगाड़े बजाए जाएँ। सुनने वालोँ को विचित्र लगा कि भला नगाड़े बजाने से वह फँसा हुआ हाथी बाहर कैसे निकलेगा, जो अनेक व्यक्तियों के शारीरिक प्रयत्न से बाहर निकल नहीं पाया।
    आश्चर्यजनक रूप से जैसे ही युद्ध के नगाड़े बजने प्रारंभ हुए, वैसे ही उस मृतप्राय हाथी के हाव-भाव में परिवर्तन आने लगा। पहले तो वह धीरे-धीरे करके खड़ा हुआ और फिर सबको हतप्रभ करते हुए स्वयं ही कीचड़ से बाहर निकल आया। अब मंत्री ने सबको स्पष्ट किया कि हाथी की शारीरिक क्षमता में कमी नहीं थी, आवश्यकता मात्र उसके अंदर उत्साह के संचार करने की थी। हाथी की इस कहानी से यह स्पष्ट होता है कि यदि हमारे मन में एक बार उत्साह – उमंग जाग जाए तो फिर हमें कार्य करने की ऊर्जा स्वतः ही मिलने लगती है और कार्य के प्रति उत्साह का मनुष्य की उम्र से कोई संबंध नहीं रह जाता।
    जीवन में उत्साह बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि मनुष्य सकारात्मक चिंतन बनाए रखे और निराशा को हावी न होने दे। कभी – कभी निरंतर मिलने वाली असफलताओं से व्यक्ति यह मान लेता है कि अब वह पहले की तरह कार्य नहीं कर सकता, लेकिन यह पूर्ण सच नहीं है।
    • हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भी आजादी की लड़ाई 48 साल की उम्र में शुरू की थी और हमें आज़ादी दिलाई।
    • जापान के 105 वर्षीय धावक हिडकीची मियाज़ाकि ने 42.22 सेकण्ड्स में 100 मीटर डैश कम्पलीट कर नया विश्व रिकॉर्ड बनाया।
    • मशहूर अभिनेता बोमन ईरानी ने 44 साल की उम्र में एक्टिंग करना शुरू की।
    • ग्रामीण बैंक के फाउंडर और नोबल शांति पुरस्कार विजेता मुहम्मद युनुस ने 43 साल की उम्र में ग्रामीण बैंक की शुरुआत की।
    • अमिताभ बच्चन आज 70 साल से ऊपर होने के बावजूद सबसे सक्रीय बॉलीवुड स्टार्स में से एक हैं।
    ऐसे तमाम उदहारण हैं जहाँ लोगों ने साबित किया है कि अगर कुछ कर गुजरने का हौंसला हो तो क्या उम्र और क्या चुनौतियाँ कुछ मायने नहीं रखता ।
    मित्रों, प्रसिद्ध विचारक जॉन ओ डनह्यू का कहना है –
    “आप उतने युवा है, जितना आप महसूस करते हैं। अगर आप अंदर के उत्साह को महसूस करना शुरू करेंगे, तो एक ऐसी जवानी महसूस  करेंगे, जिसे कोई भी आपसे छीन नहीं सकता”।
    मन में उत्साह हो तो उम्र कभी भी कार्य के मार्ग पर बाधा नहीं बनती। बाधा बनती है तो केवल हमारी नकारात्मक सोच। यदि कार्य करना है तो किसी भी उम्र में कार्य किया जा सकता है, कार्य करने के तरीके बदले जा सकते हैं और पहले की तुलना में अधिक अच्छे ढंग से व कुशलतापूर्वक कार्य किया जा सकता है।
    उम्र के असर को बहुत हद्द तक अपने प्रयासों, सकारात्मक सोच और उत्साह से कम किया जा सकता है, अतः ये कहने से पहले कि हमारी उम्र हो गयी है , हम ये नहीं कर सकते , वो नहीं कर सकते उन तमाम लगों के बारे में सोचिये जिनके लिए age एक number से अधिक कुछ नहीं है। अगर वो कर सकते हैं तो कोई भी कर सकता है, तो चलिए फिर से सपने देखना शुरू करिए, फिर से उनका पीछा कीजिये और एक बार फिर अपने सपनो को साकार कर दीजिये।
    धन्यवाद!


    नोट: दोस्तों, इस लेख में सफलता के लिए अधिक उम्र बाधक नहीं होती; इस बारे में बताया गया है, पर यही बात कम उम्र में सफलता के लिए भी लागु होती है. कम उम्र में भी बहुत से लोगों ने बड़ी-बड़ी सफलताएं हासिल की हैं, फेसबुक फाउंडर मार्क जुकरबर्ग इसका एक बड़ा उदाहरण हैं. उन्होंने मात्र 20 साल की उम्र में Facebook found की थी.
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    "सफलता का रहस्य" (The secret of success)

    By: Successlocator On: सितंबर 14, 2016
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  • "सफलता का रहस्य" (The secret of success)

    जीवन में सफल होना कौन नही चाहता, हम अपने अपने तरीके अपना कर जीवन में सफल होने का प्रयत्न करते रहते हैं।हर व्यक्ति की मूलभूत चाहत होती है कि उसके जीने के मायने हों। वह इतना सक्षम हो कि न केवल अपनी वरन अपने परिजनों-परिचितों की भी आवश्यकताओं एवं इच्छाओं की पूर्ति कर सके। समाज में उसका सम्माननीय स्थान हो।  कोई व्यक्ति व्यवसाय करता है, कोई व्यक्ति नौकरी करता है तो कोई अन्य उद्योग करता है। जीवन में सफलता पाने के लिए एक लक्ष्य अपना कर उस का चिंतन -मनन करो ,उसे अपना जीवन बना लो अपनी सम्पूर्ण शक्ति को लगा दो अन्य विचार त्याग दो । दृढ़ता के साथ उसे पूरा करने की इक्षा करो । दृढ़ता में बड़ी ताकत होती है । प्रबल इक्षा शक्ति सफलता जरुर देगी ।जो लोग मंजिल पर नहीं पहुंच पाते, वे इसके लिए अपने भाग्य को कोसते हैं और इसे नियति मानकर बैठ जाते हैं लेकिन उन्हें यह नहीं मालूम है कि जीवन में सफलता पाने के लिए अपने भीतर कुछ विशिष्ट गुण पैदा करने पड़ते हैं जिन्हें हम सफलता के सूत्र भी कह सकते हैं। यहां कुछ ऐसे ही सूत्रों की चर्चा कर रहे हैं जिन्हें आत्मसात् करके आप अपने कार्य क्षेत्र में सफल हो सकते हैं।
    आत्मविश्वास : प्रत्येक व्यक्ति निरन्तर विकास और सफलताओं के ख्वाब संजोता है लेकिन जब ख्वाब टूटने लगते हैं तो वह निराश व तनाव को अपने ऊपर हावी कर लेता है। उसे यह नहीं भूलना चाहिए कि आज के प्रतिस्पर्धा  वाले युग में कोई भी कार्य कठिन ज़रूर हो सकता है परन्तु असंभव नहीं। ज़रूरत है तो बस आत्मविश्वास की। ऐसी धारणा है कि मनुष्य की आधी क्षमता शरीर और कौशल के साथ जुड़ी होती है, और शेष क्षमता आत्मविश्वास के सहारे टिकी रहती है, परन्तु सभी इसका उपयोग नहीं कर पाते, जो करते हैं सफलता एक न एक दिन उनके कदम चूमती है। आत्मविश्वास से ही मनुष्य के भीतर की क्षमता जाग्रत होती है। कई लोगों में योग्यता व क्षमता तो होती है लेकिन आत्मविश्वास नहीं होता, इसलिए सफलता भी इनसे दूर रहती है। सफलता तभी मिलेगी जब आप अपनी क्षमताओं पर विश्वास करते हुए अटूट लगन व मेहनत से काम करें।
    किसी भी कार्य की सफलता में जितना बड़ा योगदान हमारे अभ्यास और परिश्रम का होता है, उतना ही आत्मविश्वास का भी होता है। मनोवैज्ञानिक आत्मविश्वास को प्रेरणा का ही एक आयाम मानते हैं, जितनी अधिक प्रेरणा होगी, उतना ही अधिक आत्मविश्वास और सफलता की संभावना होगी। आत्मविश्वास बढ़ाने के कई तरीके हो सकते हैं। अपने अतीत की सफल घटनाओं को याद करने से आत्मविश्वास बढ़ता है। अपना कोई आदर्श भी बनाया जा सकता है।
    अपने कर्तव्य के प्रति ईमानदार रहते हुए लगातार परिश्रम से अपने आत्मविश्वास को जगाया जा सकता है। इसी के बल पर अपनी संकल्प शक्ति को भी मज़बूत किया जा सकता है। आत्मविश्वासी बनकर आप व्यक्तिगत सफलता तो पाएंगे ही, समाज में भी आप को सम्मान मिलेगा।
    इच्छाशक्ति : लक्ष्य प्राप्ति के लिए यह ज़रूरी है अदम्य इच्छाशक्ति का होना। इच्छाशक्ति ही मनुष्य को उसके लक्ष्य तक लेकर जाती है। चाहे रास्ता कितना ही लंबा क्यों न हो, चाहे कितना ही त्याग क्यों न करना पड़े, इच्छाशक्ति ऐसी ऊर्जा या ताकत है जो मनुष्य को उसके उद्देश्य तक अवश्य पहुंचाती है। जीवन में गंभीर चुनौतियां क्यों न हों, यदि व्यक्ति में चुनौतियों का सामना करने की इच्छाशक्ति है तो कुछ भी असंभव नहीं है। प्रबल इच्छाशक्ति रखने वाला कोई भी व्यक्ति कार्य कुशल बन सकता है। इच्छाशक्ति सफलता की कुंजी है, इसलिए अपने भीतर इसे पैदा करें। इच्छाशक्ति के बल पर ही साहसी, परिश्रमी एवं धुन के पक्के लोग विश्व कीर्तिमान रचते हैं।
    लक्ष्य तय करें : बिना दिशा निश्चित किए यदि समुद्र में एक जलयान को छोड़ दिया जाए तो इसका क्या परिणाम होगा, आप स्वयं अंदाज़ लगा सकते हैं। इधर-उधर डोलता हुआ जलयान या तो समुद्री चट्टानों से या फिर तट से टकराकर समुद्र में डूब जाएगा, लेकिन जब उसी जलयान की दिशा निश्चित होगी तो समुद्र को चीरते हुए वह अपनी मंजिल तक पहुंच जाएगा। यही उदाहरण हमारे जीवन पर भी लागू होता है। बिना अपना लक्ष्य तय किये हम अपनी मंजिल पर नहीं पहुंच सकते। भाग्य के भरोसे बैठे रहना ठीक नहीं।
    योग्यता : जीवन का लक्ष्य हमारे सामर्थ्य, इच्छाशक्ति और योग्यता पर आधारित होना चाहिए। लक्ष्य प्राप्ति के लिए सबसे पहले यह ज़रूरी है कि आप यह तय करें कि आप किस रास्ते पर चलना चाहते हैं। उसके बाद यह सोचें कि किन साधनों से आप उस रास्ते पर चलते हुए अपनी मंजिल तक पहुंच सकते हैं। जैसे-जैसे आप रास्ते पर आगे बढ़ते जाएंगे, आपके साधन भी बढ़ते जाएंगे। यदि आप असफलता की असहनीय वेदना से बचना चाहते हैं तो सिर्फ लक्ष्य ही दिखाई देना चाहिए। वास्तव में लक्ष्य तय कर लेना ही आधी सफलता हासिल कर लेना है। अपने लक्ष्य को सकारात्मक तरीके से निर्मित करना चाहिए न कि नकारात्मक भाव से। लक्ष्य का उद्देश्य आपको गतिशील बनाए रखने के लिए प्रेरित करने के लिए होना चाहिए। जब आप अपना लक्ष्य निर्धारित करें तो यह भी सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि आप अपनी क्षमताओं व शक्तियों का पूरा उपयोग कर रहे हैं। लक्ष्य हासिल करने के लिए आपको अपनी क्षमताओं का भी पता होना चाहिए। ऐसे बहुत से लोग हैं जो अपने जीवन में बहुत आगे बढ़ सकते थे लेकिन उन्होंने अपनी क्षमताओं का इस्तेमाल ठीक ढंग से नहीं किया और अपने लक्ष्य को सीमित दायरे में ही रखा।
    समय का सदुपयोग : जीवन के किसी भी क्षेत्र में सफलता के साथ चलने व उसका सदुपयोग करने वाला व्यक्ति ही जीवन में कामयाबी के शिखर पर पहुंच सकता है। योजनाबद्ध तरीके से शुरू किया गया कार्य समय सेपूरा होता है और अपेक्षित परिणाम देता है, इसलिए समय के महत्व को समझें।
    इस प्रकार के कुछ टिप्स अपनाकर आप भी एक सफल व्यक्ति बन सकते हैं। तो फिर देर किसी बात की? हो जाइए आप तैयार और अपनी मंजिल की ओर कदम बढ़ा दीजिए।

    शिल्पकार की सफलता का रहस्य

    By: Successlocator On: सितंबर 14, 2016
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  • शिल्पकार की 

    सफलता का रहस्य


    एक जिज्ञासु व्यक्ति एक प्रसिद्ध चित्रकार व शिल्पकार से मिलने गया। उसने शिल्पकार की कला की खूब सराहना की और उससे पूछा, च्मैं जानने आया हूं कि इस कला में आप इतने निष्णात कैसे हैं? मैं यह रहस्य जानना चाहता हूं। कोई तो ऐसा सिद्धांत या दर्शन होगा, जो आपको यह अनूठा काम करने के लिए प्रेरित करता होगा?
    शिल्पकार ने कहा, अगर तुम सचमुच जानना चाहते हो, तो तुम्हें कुछ समय यहीं रुकना पड़ेगा और
    जो मैं कहूं वह करना पड़ेगा। शिल्पकार ने उसे घर का काम करने में लगा दिया- सफाई करना, खाना बनाना, कपड़े धोना इत्यादि काम वह चुपचाप हफ्ते भर तक करता रहा। एक हफ्ते बाद चित्रकार उसके पास आया और
    बोला, च्मुझे लगता है, जो प्रश्न लेकर तुम आए थे, उसका उत्तर मिल गया होगा और शायद मेरा वह दर्शन भी तुम सीख गए होगे।
    वह व्यक्ति आश्चर्यचकित होकर बोला, च्महोदय, इतने दिनों तक मैं आपके कहने पर यहां रुका रहा और बिना कुछ कहे सारा काम करता रहा, लेकिन मेरी इन कामों में रुचि नहीं है, मुझे तो आपकी कला के बारे में जानना था, जो आपने अभी तक नहीं बताया। शिल्पकार ने कहा, च्तुमने हर काम एक शब्द बोले बिना दत्तचित्त होकर किया न? यही तो मेरी कला और सफलता का रहस्य है। मैं तुम्हें यही बताना चाहता था।
    कथा मर्म : जो व्यक्ति काम को दत्तचित्त होकर चुपचाप करता है, उसे सफलता पाने से कोई नहीं
    रोक सकता।

    13 सित॰ 2016

    बिड़ला ग्रुप की सफलता की कहानी आम आदमी की जुबानी

    By: Successlocator On: सितंबर 13, 2016
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  • लोगों की सोच को भांपकर मार्केट में अपने पांव पसारने की कला जिस खिलाड़ी को आती है उसे मार्केट का किंग कहा जाता है। वो कहते हैं न कि बाजार की अपनी एक अलग खासियत होती है, यह उन्हीं खिलाड़ियों को पसंद करती है जो टी-20 के मौसम में सहवाग, 50-50 की पिच पर सचिन और लंबे फार्मेट में द्रविड जैसा टैलेंट रखता हो। अगर आप यह तय कर लें कि मार्केट में खरीददारों को जो कुछ भी भाता या पसंद आता हो आप उस चीज को हर किसी के लिए उपलब्ध कराने का प्रबंध कर देंगे तो मार्केट में आपका डंडा चलना तय है। आपको जानकर हैरानी होगी कि आदित्य बिड़ला ग्रुप के बैनर तले तमाम ब्रांड के कपड़े बाजार में मौजूद रहते हैं और सभी के सभी उतनी ही शिद्दत के साथ खरीदे जाते हैं। आखिर ऐसा क्यों होता है इसे समझने के लिए आपको थोड़ा धीरज धरना होगा। हम आपको एक ऐसी छोटी कहानी सुनाएंगे जो यूं तो टैक्सटाइल सेक्टर में बिड़ला ग्रुप की सफलता का आईनाभर है, लेकिन यह आपको बाजार के बाजारवाद को समझाने के लिए काफी है। इस कहानी के जरिए समझिए क्यों बिड़ला ग्रुप आज भी लोगों का पसंदीदा ब्रांड बना हुआ है।

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    कुछ सालों पहले किसी कस्बे में सुरेश की मिठाई की एक दुकान हुआ करती थी। दुकान में पेठा बेचा जाता था। बिजनेस अच्छा खासा चल रहा था और कस्बे के लोग तेजी से इस दुकान की और बढ़ रहे थे। दुकान पर बढ़ती भीड़ को थामने के लिए सुरेश ने इसी कस्बे में एक और मिठाई की दुकान खोल दी। इस दुकान ने उम्मीद से बेहतर काम किया और सुरेश ने दो साल बाद एक और दुकान खोलने की योजना बना ली। लेकिन इसी बीच सुरेश के दिमाग में गजब का आइडिया आया। उसने सोचा कि अगर कुछ लोग पेठे के 10 पैसे दे सकते हैं तो कुछ लोग ऐसे भी होंगे जो और अच्छे पेठे के लिए 15-20 पैसे देने को भी तैयार होंगे। ऐसे में अगर वो दुकान नहीं खोलेगा तो कोई और इस दुकान को खोल लेगा। सुरेश ने पूरी तैयारी कर ली थी और वो दुकान खोलने वाला ही था, लेकिन सुरेश के पिता ने बताया कि लोग पेठे के कारण तुम्हारी दुकान की तरफ आकर्षित हुए हैं और ये वाजिब दामों में उपलब्ध है। इसलिए नई दुकान में इस थोड़े महंगे पेठे के लिए अन्य ग्राहकों का आना थोड़ा मुश्किल लगता है। सुरेश के पिता ने सुझाव दिया कि बेटा तुम्हे विकास मिठाई नाम से एक दुकान खोलनी चाहिए। सुरेश ने बताया कि यह आइडिया काम कर गया और इसके बाद उसने इन दोनों ब्रांड्स की कई और दुकाने खोल दीं।

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    सुरेश ने बताया कि उसके पिता एक चतुर व्यापारी हैं और ठीक एक साल पहले उन्होंने यह भांपा कि जो लोग 10 पैसे का पेठा खरीदते हैं वो अपने बेहतर पेठे के लिए 15 पैसे देने को तो तैयार हैं लेकिन वो 20 पैसे हरगिज नहीं देंगे। दुकान पर 10 पैसे का पेठा लेने वालों की तादात हरदम बनी रहती है। इसी वक्त सुरेश के पिता को एक आइडिया सूझा और उन्होंने उन लोगों के लिए एक अलग से दुकान खोल दी जो पेठे के लिए 15 पैसे देने को तैयार हैं। इस नई चेन का नाम रखा गया आनंद मिठाई। इस तरह से सुरेश के परिवार ने मिठाई की तीन चेन खोल दीं। सुरेश ने बताया कि सालभर बीतने के बाद उसने युवाओं को आकर्षित करने के लिए चाकलेट और अन्य स्पेशल मिठाइयों को लेकर एक नई चेन खोलने की योजना बनाई। इस नई चेन का नाम रखा गया लक्जरियस स्वीट।
    इस कहानी को सुनकर आप इसका मर्म तो समझ ही गए होंगे। अगर नहीं समझे तो चलिए आपको समझा देते हैं.....


    दरअसल यह पूरी लड़ाई टार्गेट ऑडियंस को लेकर है
    पेठा कुछ भी नहीं है, लेकिन यह बाजार में मुख्यधारा के लोगों की पसंद बना हुआ है जिसका नाम Peter England
    विकास मिठाई  Van Heusen ब्रांड के जैसी है, जो आमतौर पर लक्जरी कपड़ों की डीलिंग करती है।
    वहीं आनंद मिठाई Allen Solly के जैसी है, जो इन दोनों वर्ग के लोगों के इतर की पसंद है।
    वहीं Louis Philippe बाजार की लक्जरियस स्वीट की दुकान है और लोगों को लक्जरी फॉर्मल और कैजुअल कपड़े उपलब्ध करा रही है।

    लब्बोलुआब- सुरेश और उसके पिता की इस छोटी सी कहानी ने बाजार के पूरे गणित को समझा दिया।

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    11 सित॰ 2016

    नरेंद्र मोदी का प्रधान मंत्री बनने तक का सफर

    By: Successlocator On: सितंबर 11, 2016
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  • नरेन्द्र मोदी ने 2014 के चुनावों में भाजपा को प्रचंड जीत दिलाई। भाजपा ने मोदी को चेहरा बनाकर लोकसभा का चुनाव लड़ा था। प्रचार के दौरान मोदी ने धुंआधार सभाएं कीं। उनके प्रचार की आक्रामक शैली ने कांग्रेस को बैकफुट पर ला दिया। बच्चों से लेकर बुर्जुग तक की जुबां पर एक ही नाम था- 'मोदी'। सभाओं में उमड़े जनसैलाब ने बता दिया कि मोदी के व्यक्तित्व में कितना आकर्षण है। प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी का जादू आज भी बरकरार है। अब मोदी का यह जादू दुनियाभर में सर चढ़कर बोल रहा है। आइए जानते हैं नरेन्द्र मोदी के इन खास गुणों को-
    1. असाधारण भाषण कला  : मोदी की सबसे बड़ी और असाधारण बात उनकी भाषण कला है और वे अपनी इस कला से  श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करना जानते हैं। विकास और अन्य मुद्दों पर वे जितनी स्पष्टता और प्रभावी तरीके से अपनी बात  रखते हैं कि बिना किसी तैयारी के उनका आशु भाषण भी लोगों को प्रभावित करने की क्षमता रखता है। देश के अन्य  नेताओं की तरह से लिखा हुआ भाषण नहीं पढ़ते हैं। उनकी विशेषता है कि वे अपनी वाक शैली से किसी भी प्रकार के  श्रोता वर्ग से अपना संबंध बना लेते हैं।

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    2. करिश्मा : प्रधानमंत्री मोदी की एक और बड़ी खूब‍ी है कि वे किसी विश्वस्तरीय नेता जैसा करिश्मा रखते हैं। उनका व्यक्तित्व मजबूत है और देश के ज्यादातर लोगों ने ऐसे ही प्रधानमंत्री देखे हैं जो कि लोगों के सामने से अदृष्य रहते रहे  हैं। देश के 35 वर्ष से कम आयु के युवाओं की नजर में वे ऐसे मजबूत नेता हैं जिनके नेतृत्व में देश विकास के मार्ग  पर आगे बढ़ सकता है।

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    3. त्वरित निर्णय क्षमता :  मोदी की एक खूबी यह भी है कि वे तुरंत ही निर्णय लेने के लिए जाने जाते हैं। यह क्षमता  भारत के नेताओं में बहुत कम पायी जाती है और इस कारण से उन नेताओं से अलग हैं जोकि किन्हीं मजबूरियों के  चलते फैसले नहीं लेते या लेने में बहुत अधिक समय लगा देते हैं। वे न‍िर्णय लेने के बारे में नो नन सेंस अप्रोच रखते हैं  और इस निर्णयों पर तुरंत क्रियान्वयन भी सुनिश्चित करना जानते हैं।

    4. स्पष्ट दूरदृष्टि :  मोदी का एक सकारात्मक गुण यह है कि उनकी दूरदृष्टि या विजन बिल्कुल स्पष्ट होता है। उनकी इसी  दूरदर्शिता और स्वप्न का नतीजा है कि उन्होंने गुजरात को विकसित करने के लिए तब विदेश यात्राएं कीं जब वे एक  मुख्यमंत्री ही थे। अपने चुनावी भाषणों में उन्होंने लोगों में विश्वास जगाया कि भारत का आर्थिक विकास, भ्रष्टाचार मुक्‍त  सरकार और दुनिया में अपना प्रभाव कायम करने की क्षमता विकसित होगी।

     
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    5. मजबूत समर्थन का आधार :  प्रधानमंत्री के साथ एक और खूबी यह है कि गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर राजग के  प्रधानमंत्री पद के दावेदार घोषित होने तक मोदी की अपनी ही पार्टी में स्पष्ट मास अपील थी। उनकी पार्टी के अन्य नेता  और कार्यकर्ता उनके समर्थन में खड़े रहे और इसी तरह के समर्थन के बल पर उन्होंने पार्टी के दिग्गज नेताओं, लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, सुषमा स्वराज को पीछे छोडा और पार्टी की ओर से प्रधानमंत्री बनने की दावेदारी हासिल की थी।

    6. अनुशासित जीवन  :  देश के पंद्रहवें प्रधानमंत्री ने हमेशा ही एक अनुशासित जीवन जिया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ  में एक बालस्वयंसेवक बनने से लेकर प्रधानमंत्री बनने तक उनका जीवन अनुशासित है। यह बात बताती है कि जो दृढ़  निश्चय वे एक आठ वर्षीय बालक के तौर पर रखते थे वही दृढ़ निश्चय और अनुशासन उनमें 64 वर्षीय प्रधानमंत्री के रूप  में मौजूद है।
    7. एक असाधारण योजनाकार :  यह उनकी ऐसी खूबी है जोकि उन्हें उन लोगों में शामिल करती है जो कि बहुत अच्छी  और कुशलता से बड़ी-बड़ी योजनाओं को बनाते हैं। इसका उदाहरण उनके चुनाव प्रचार से मिलता है। मोदी ने 3.5 लाख  किमी से ज्यादा की यात्राएं कीं और इस दौरान 400 रैलियों को संबोधित किया। वे ऐसे क्षेत्रों में गए जहां पर आमतौर  पर लोग जाना नहीं पसंद करते। लेकिन उनकी कुशल योजनाओं के बल पर ही वे बेहतर परिणाम हासिल कर सके।

    8. तकनीक के प्रति रुझान  :  मोदी एक टेकसेवी व्यक्ति हैं और वे खुद को तकनीक के क्षेत्र में होने वाले परिवर्तनों से  अपडेट रखते हैं। अपने जीवन में वे घटनाओं के बारे में तुरंत ही ट्वीट पोस्ट करते हैं। वे इस बात का भी ध्यान रखते हैं  कि उनकी फेसबुक तस्वीर को बदला गया है या नहीं। उनसे हम सीख सकते हैं कि तकनीक के प्रति रुझान क्या होता है  और इससे कैसे लाभ उठाया जा सकता है।

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    9. फिटनेस के प्रति सतर्कता  :  मोदी योग के बहुत बड़े अनुगामी है और वे इसे करना कभी नहीं भूलते। भले ही वे  कितने ही व्यस्त हों लेकिन उनके योगाभ्यास में कभी बाधा नहीं आती है। शायद इसी कारण से वे इस उम्र में भी इतने  सक्रिय और फिट हैं। उनकी यह सतर्कता सभी को प्रेरित कर सकती है।
    10. उत्साह से भरा जीवन : अपनी उम्र के 64 वर्ष होने के बावजूद नरेन्द्र मोदी अपने जीवन को प्रतिदिन उत्साह से  जीते हैं। कुछ समय पहले ही उन्होंने अपनी जापान यात्रा के दौरान ड्रम बजाया था और शिक्षक दिवस पर बच्चों के  सवालों का जवाब दिया था। उनके व्यक्तित्व में उत्साह की कमी कभी नजर नहीं आती है।

    11. धैर्यशीलता  :  अपनी विश्वसनीय और पक्की योजना से उनमें आत्मविश्वास का भाव रहता है और वे ऐसे व्यक्ति  नहीं हैं जोकि अधीरता दिखाए या बेचैन हो और परिणामों को लेकर अशांत हो जाए। धैर्य बनाए रखना और हर हालत में  मानसिक संतुलन बनाए रखना उनकी खूबी है। बहुत कम अवसरों पर वे नाराज होते हैं या भावनाओं में बह जाते हों।  मोदी अपना धीरज कभी नहीं खोते।

    12. नेतृत्व कुशलता :  एक बार सार्वजनिक भाषण में मोदीजी ने वायदा किया था कि वे अपने अधीनस्थों से एक घंटा  अधिक काम करेंगे। इस तरह की बात कभी कोई अकुशल नेता नहीं कहता। वे एक सक्षम नेता हैं और दूसरों का अपने  उदाहरण से नेतृ्त्व करते हैं। यह बात सभी के लिए लाभदायक है।

    13. विनम्रता :  मोदी दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश के प्रधानमंत्री हैं लेकिन इस बात ने उनके दिमाग पर कभी  असर नहीं डाला। वे सामान्य लोगों से भी विनम्रता से पेश आते हैं और उनसे जो कुछ पूछा जाता है वे उसका जवाब देते  हैं। वे इस बात का उदाहरण है कि विनम्रता से आप कितनी बड़ी सफलता पा सकते हैं।
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    महाभारत मेंं बताए गए है सफलता और तरक्की पाने के 7 अचूक तरीके

    By: Successlocator On: सितंबर 11, 2016
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  • सफलता हर इंसान की चाहत होती है, लेकिन अक्सर देखा जाता है कि सफलता सभी को नहीं मिलती है। आखिर ऐसा क्यों होता है? इस संबंध में कई कारण ढूंढे जा सकते हैं, लेकिन मोटे तौर कामयाबी नसीब न होने के पीछे लक्ष्य को लेकर उदासीनता, विचार और कर्म में सही तालमेल का अभाव बड़ा कारण नजर आता है। यही नहीं, सफलता में निरंतरता भी अहम होती है, क्योंकि उसके बिना तरक्की संभव नहीं। किंतु अगर मकसद साफ हो, सही विचार हो और कर्मशक्ति भी मौजूद हो तब भी सफलता और तरक्की दूर रह जाए तो फिर इसके क्या कारण हो सकते हैं?

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    इस सवाल का जवाब हिन्दू धर्म ग्रंथ महाभारत में बताए सफलता व तरक्की के सटीक सूत्रों में मिलता है। सफलता व तरक्की के ये 7 सूत्र जीवन में उतार साधारण इंसान भी असाधारण बन मनचाही ऊंचाइयों को पा सकता है-


    हिन्दू धर्मग्रंथ महाभारत में लिखा गया है कि-

    उत्थानं संयमो दाक्ष्यमप्रमादो धृति: स्मृति:।
    समीक्ष्य च समारम्भो विद्धि मूलं भवस्य तु।।


    इस श्लोक में जीवन में कर्म, विचार और व्यवहार से जुड़ी 7 बातें उन्नति का मूल मंत्र मानी गई है। ये बातें है ये
    1. उद्यम
    2. संयम
    3. दक्षता
    4. धैर्य
    5. सावधानी
    6. स्मृति
    7. सोच विचार

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    उद्यम या परिश्रम - अक्सर सफलता पाने की जल्दबाजी या बेचैनी में कई लोग आसान और छोटे रास्ते या तरीकों को चुन तो लेते हैं। लेकिन मनचाही सफलता से दूर रहने पर निराशा के दौर से गुजरते हैं। असल में सफलता के लिए संकल्प, कर्म के साथ उद्यम यानी परिश्रम की भावना के तय पैमानों को अपनाए बिना कामयाबी की मंजिल को छूना व उस पर कायम रहना मुश्किल है।
    संयम- छोटी या थोड़ी-सी सफलता मिलने पर मन व विचार पर काबू या उतावलेपन से बचना, क्योंकि बिना धैर्य और संयम के सफलता साथ छोड़ देती है, बल्कि तरक्की के रास्ते भी बंद हो जाते हैं।

    दक्षता- सफलता को अवसरों को भुनाने व जल्द लक्ष्यों को हासिल करने के लिए किसी भी कार्य या कला में कुशलता या महारत बड़ी मददगार होती है। इसलिए बिना अहंकार के सीखने की जिज्ञासा बनाए रखें।

    धैर्य- तमाम कोशिशों के बाद भी अगर मनचाहे परिणाम न मिलने या अपेक्षा पूरा न होने पर लक्ष्य से न भटकें या न उसे छोडऩे का विचार करें। बल्कि मजबूत संकल्प और दोगुनी मेहनत के साथ उसे पाने में जुट जाएं।
    सावधानी - किसी भी तरह की सफलता के रास्ते में कई बाधाएं भी मुमकिन है। इसलिए सारी संभावनाओं और स्थितियों के आंकलन और विश्लेषण के साथ विषय, कार्य और स्थिति के प्रति जागरूकता व सावधानी रखें।

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    स्मृति - इसकी अलग-अलग अर्थों व परिस्थितियों में अलग-अलग अहमियत है। जैसे ज्ञान व स्मरण शक्ति के अलावा दूसरों के उपकारों, सहयोग या प्रेम को न भूलना आदि।


    सोच-विचार - विवेक का साथ न छोडऩा। सफलता व तरक्की के लिए कोई भी कदम बढ़ाने से पहले सही और गलत की विचार शक्ति अहम होती है, जिसके लिए अधिक से अधिक ज्ञान व अनुभव बंटोरें।
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