13 नव॰ 2017

सत्य की खोज।satya ki khoj hindi kahaniya.

By: Successlocator On: नवंबर 13, 2017
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  • दस भिक्षु सत्य की खोज में एक बार निकले थे। उन्होने बहुत पर्वतों-पहाडों, आश्रमों की यात्रा की। लेकिन उन्हें कोई सत्य का अनुभव न हो सका। क्योंकि सारी यात्रा बाहर हो रही थी। किन्हीं पहाडों पर, किन्ही आश्रमों में, किन्हीं गुरुओं के पास खोज चल हरी थी। जब तक खोज किसी और की तरफ चलती है, तब तक उसे पाया भी कैसे जा सकता है, जो स्वयं में है।आखिर में थक गए और अपने गांव वापस लौटने लगे। वर्षा के दिन थे, नदी बहुत पूर पर थी। उन्होने नदी पार की। पार करने के बाद सोचा कि गिन लें, कोई खो तो नहीं गया। गिनती की, एक आदमी प्रतीत हुआ खो गया है, एक भिक्षु डूब गया था। गिनती नौ होती थी। दस थे वे। दस ने नदी पार की थी। लौटकर बाहर आकर गिना, तो नौ मालूम होेते थै।

    प्रत्येक व्यक्ति अपने को गिनना छोड जाता था, शेष सबको गिन लेता था। वे रोने बेठ गए। सत्य की खोज का एक साथी खो गया था।एक यात्री उस रस्ते से निकल रहा था, दूसरे गांव तक जाने के लिए । उसने उनकी पीडा पूदभ्, उनके गिरते आंसू देखे। उसने पूछा, क्या कठिनाई है ?
    उन्होंने कहा- हम दस नदी में उतरे थे, एक साथी खो गया। उसके लिए हम रोते है। कैंसे खोंजे ? उसने देखा वे दस ही थे। वह हंसा और उसने कहा, तुम दस ही हो, व्यर्थ की खोज मत करो अपने रास्ते चला गया।
    उन्होने फिर से गिनती की कि हो सकता है, उनकी गिनती में भूल हो। लेकिन उस यात्री को पता भी न था। उनकी गिनती में भूूल न थी, वे गिनती तो ठीक ही जानते थे। भूल यहां थी कि कोई भी अपनी गिनती नहीं करता था।
    उन्होने बहुत बार गिना, फिर भी वे नौ ही थे। और तब उनमें से एक भिक्षु नदी के किनारे गया। उसने नदी में झांककर देखा। एक चट्टान के पास पानी स्थिर था। उसे अपनी ही परछाई नीचे पानी में दिखाई पडी। वह चिल्लाया, उसने अपने मित्रों को कहाः आओ,

    जिसे हम खोजते थे, वह मौजुद है। दसवां साथी मिल गया है। लेकिन पानी बहुत गहरा है। और उसे हम शायद निकाल न सकेंगे। लेकिन उसका अंतिम दर्शन तो कर लें। एक-एक व्यक्ति ने उस चट्टान के पास झांककर देखा, नीचे एक भिक्षु मौजुद था। सबकी परछाई नीचे बनती उन्हे दिखाई पडी। तब इतना तो तय हो गया, इतने डूबे पानी में वह मर गया हैं।
    वे उसका अंतिम संस्कार कर रहे थे। तब वह यात्री फिर वापस लौटा, उसने पूछा कि यह चिता किसके लिए जलाई हुई है ? यह क्या कर रहे हो ? उन नौ ही रोते हुए भिक्षुओं ने कहा, मित्र हमारा मर गया है। देख लिया हमने गहरे पानी में डूबी है उसकी लाश। निकालना तो संभव नहीं है। फिर वह मर भी गया होगा, हम उसका अंतिम दाह-संस्कार कर रहे है।

    उस यात्री ने फिर से गिनती की और उनसे कहा, पागलों! एक अर्थ में तुम सबने अपना ही दाह-संस्कार कर लिया है। तुमने जिसे दखा है पानी में, वह तुम्हीं हो। लेकिन पानी में देख सके तुम, लेकिन स्वयं में न देख सके! प्रतिबिंब को पकड सके जल में, लेकिन खुद पर तुम्हारी दृष्टि न जा सकी! तुमने अपना ही दाह-संस्कार कर लिया। और दसों ने मिलकर उस दसवें को दफना दिया है, जो खोया ही नहीं था।

    उसकी इस बात के कहते ही उन्हें स्मरण आया कि दसंवा तो मैं ही हूं। हर आदमी को खयाल आया कि वह दसंवा आदमी तो मैं ही हूं। और जिस सत्य की खोज वे पहाडों पर नहीं कर सकते थे, अपने ही गांव लौटकर वह खोज पूरी हो गई। वे दसों ही जागृत होकर, जान कर गांव वापस लौट गये थे।
    उन दस भिक्षुओं की कथा ही हम सभी की कथा है। एक को भर हम छोड जाते है- स्वंय को। और सब तरफ हमारी दृष्टि जाती है- शास्त्रो में खोजते हैं, शब्दों में खोजते हैं, शास्त्रों के वचनों में खोजते हैं, पहाडों पर, पर्वतों पर खोजते हैं, सेवा में, समाज सेवा में, प्रार्थना में, पूजा में खोजते है। सिर्फ एक व्यक्ति भर इस खोज से वंचित रह जाता है, वह दसवां आदमी वंचित रह जाता है, जो कि हम स्वयं है।

    स्वतंत्रता का अर्थ है- इस स्वयं को जानने से जो जीवन उपलब्ध होता है, उसका नाम स्वतंत्रता है। स्वतंत्र होना इस जगत में सबसे दूर्लभ बात है। स्वतंत्र वही हो सकता है, जो स्वंय को जानता हो। जो स्वंय को नहीं जानता, वह परतंत्र हो सकता है या स्वच्छंद हो सकता है, लेकिन स्वतंत्र नहीं।

    10 अक्टू॰ 2017

    खुद से बात करना सफल लोगो की निशानी-

    By: Successlocator On: अक्टूबर 10, 2017
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  •                            Source bbc news

    कई बार आपने कुछ लोगों को बड़बड़ाते देखा होगा. आमतौर पर जब हम किसी को ऐसा करते देखते हैं, तो हम उन्हें सनकी कहते हैं. हमें लगता है कि वो दिमागी ख़लल की वजह से ख़ुद से बातें करते रहते हैं.
    दरअसल, ऐसे लोग अपने आपसे बातें करते हैं और जिसे आप दिमागी ख़लल कहकर ख़ारिज करते हैं, वो ख़ुद से बातें करने की आदत आपके लिए बड़े काम की साबित हो सकती है.
    दुनिया में आज बहुत से एक्सपर्ट ये मशविरा देते हैं कि आप ख़ुद से बातें करें. उनके मुताबिक़ इससे याद्दाश्त तेज़ होती है. आत्मविश्वास भी बढ़ता है और आप ज़्यादा फ़ोकस हो जाते हैं.
    अमरीका की विस्कॉन्सिन यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर गेरी लुपयन कहते हैं कि तेज़ आवाज़ में ख़ुद से बात करना आपको भले अजीब लगे, लेकिन है ये कामयाबी का नुस्खा.
    वो अपनी रिसर्च की बुनियाद पर कहते हैं कि ऐसा करने से आपका बहुत फ़ायदा हो सकता है.
    प्रोफ़ेसर गैरी लुपयन ने एक तजुर्बा किया था, जिसमें कुछ लोगों को कंप्यूटर की स्क्रीन पर कुछ चीज़ें सिर्फ़ देखने को कहा गया और कुछ को तेज़ आवाज़ में उनका नाम पुकारने को.
    जिन लोगों ने तेज़ आवाज़ में उन चीज़ों का नाम लिया, वो स्क्रीन पर उन चीज़ों को ज़्यादा जल्दी पहचान पाए और जो लोग सिर्फ़ स्क्रीन को देख रहे थे, उन्हें वही चीज़ें पहचानने में थोड़ा समय लगा.
    इसी तरह का प्रयोग उन्होंने किराने की दुकान पर भी किया. जिन लोगों ने सब्ज़ियों की तस्वीर देखकर उनका नाम तेज़ आवाज़ में पुकारा था, स्टोर में वही सब्ज़ी तलाशने में उन्हें आसानी हुई.
    प्रोफेसर गैरी का कहना है कि जब हम किसी चीज़ का नाम अपनी ज़ुबान से तेज़ आवाज़ में लेते हैं तो उसकी तस्वीर हमारे ज़हन में बन जाती है. हमारा दिमाग़ ख़ुद-ब-ख़ुद ज़रूरत पड़ने पर उसे हमारे ज़हन में ज़िंदा कर देता है.
    ब्रिटिश मनोवैज्ञानिक और लेखिका एनी विल्सन का कहना है कि वो अपने सभी क्लाइंट्स को ख़ुद से बातें करने की सलाह देती हैं.
    अगर उनके किसी मरीज़ को बहुत गुस्सा आता है, तो वो उसे भी यही सलाह देती हैं, क्योंकि ऐसा करने से मसले का हल निकल आता है और गुस्सा ग़ायब हो जाता है.
    एनी विल्सन कहती हैं- हम हमेशा चाहते हैं कि हमारे आसपास वो लोग रहें जो हमसे ज़्यादा ज्ञानी हों, जिनसे हमें कुछ सीखने को मिल सके.
    सबसे अहम ये है कि जो हमें समझ सकें. जो ख़ासियतें हम दूसरों में तलाशते हैं, वो हम अपने अंदर हासिल कर सकते हैं.
    आख़िर ख़ुद को इंसान सबसे अच्छे से जानता है. जब हम ख़ुद से बाते करने लगते हैं तो बहुत हद तक हम अपने अंदर ही उन्हें तलाश लेते हैं.
    ऐसे में हम ख़ुद अपने आप को ही सबसे ज़्यादा दिलचस्प शख़्सियत पाते हैं और हमारी ख़ुद से दोस्ती हो जाती है.
    2014 में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक़, जब हम किसी को तुम या वो कहकर बातें करते हैं, तो हम अपने जज़्बात पर जल्दी काबू कर लेते हैं. क्योंकि ऐसे में हम खुद एक दूसरी शख़्सियत बनकर अपने को ही समझाते हैं.
    ख़ुद से बातें करने के फ़ायदे
    ब्रिटेन के यूजीन गैम्बल इसकी बड़ी मिसाल हैं. वो बरसों तक दांतों के डॉक्टर थे. एक दिन उन्होंने डॉक्टरी छोड़कर कारोबार शुरू करने का इरादा कर लिया. जबकि उन्हें कारोबार का कोई तजुर्बा नहीं था. इस वजह से यूजीन को कई बार नाकामी मिली.
    लिहाज़ा उन्होंने बिज़नेस कोच की मदद ली, जिसने उन्हें सबसे पहली सलाह ख़ुद से बात करने की ही दी और उन्हें इसका फ़ायदा भी हुआ.
    आज जब भी उन्हें बिज़नेस की कोई प्रेज़ेन्टेशन देनी होती है तो वो सबसे पहले ख़ुद अपने आपसे बात करते हैं और अपनी प्रेज़ेन्टेशन को तेज़ आवाज़ में पढ़ते हैं.
    ऐसा करने से वो अपने आइडिया पर ज़्यादा फोकस कर पाते हैं और अपनी प्रेज़ेन्टेशन को अच्छी तरह याद रख पाते हैं.
    हम सभी के लिए हर समय ख़ुद से बात करना ना तो संभव है और ना ही हम कर पाते हैं.
    इसकी बड़ी वजह ये है कि समाज में ख़ुद से बातें करने वाले को पागल करार दिया जाता है. इसीलिए कई लोग चाहकर भी ख़ुद से बातें नहीं कर पाते.
    उन्हें सनकी कहकर ख़ारिज किए जाने का डर रहता है.
    लेकिन छोटे बच्चे अक्सर ये काम करते हैं.
    रिसर्च बताती हैं कि बच्चों के विकास में ये अमल बहुत कारगर साबित होता है.
    2008 में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक़, पांच साल की उम्र वाले जिन बच्चों ने अपने आप से ज़्यादा बातें कीं, वो ज़्यादा समझदार थे बनिस्बत उन बच्चों के जो उस उम्र में ख़ामोश रहते थे.
    अगर आप भी अपनी याददाश्त को तेज़ करना चाहते हैं, काम पर ज़्यादा ध्यान देना चाहते हैं, तो ख़ुद अपने आपके दोस्त बनिए और अपने आपसे बाते कीजिए.
    शुरूआत में यह थोड़ा अजीब लगेगा. लेकिन, जब इसके फ़ायदे आपके सामने आएंगे, तो यक़ीन जानिए आप ख़ुद हैरान रह जाएंगे.

    27 सित॰ 2017

    मेरे जैसा कोई नही,(No one like me)

    By: Successlocator On: सितंबर 27, 2017
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  • "आप धरती मे जन्मे अब तक के सबसे महान पुरुषो में से एक है"।(you are the greatest person ever born in the planet) हा दोस्तो ये बात सच है बस अपने आपको पहचानने की देर है,जब तक आप अपने आप को पहचानते नही तब तक आपकी जिंदगी एक जानवर से ज्यादा कुछ नही।जिस प्रकार जानवर सुबह से लेकर शाम तक सिर्फ और सिर्फ अपने पेट की भूख मिटाने के लिए भटकता है,उसे उससे ज्यादा और किसी वस्तु की चाह नही होती,उसके मरने तक का सफर ऐसा ही रहता है।ठीक उसी प्रकार हम भी सुबह उठे और शाम तक पेट की भूख मिटाने के लिए दौड़ते रहे और फिर सुबह हुई तो फिर वही काम और ऐसा करते करते हम अपनी आखिरी पड़ाव में भी पहुँच जायेगे,उस समय जब हम अपने सम्पूर्ण जीवन का विश्लेषण करेंगे तब हमारे पास असंतोष के सिवाय और कुछ नही रहेगा।
    क्यों दोस्तो क्या पृथ्वी पर जन्मे सभी महान व्यक्तियों का जीवन ऐसा था जैसा हम जी रहे है बिलकुल भी नही, उनकी हर सुबह एक योजना(plan) के साथ होती है और रात उस योजना को खत्म होने या उस पर ही कार्य करते करते होती है,बस यही मामूली सा अंतर है,इसके अलावा कुछ भी विशेष नही है उनके पास उनके पास भी दो कान, एक नाक, दो हाथ, दो पैर,है उनके पास कोई जादू की छड़ी नही है उनका जुनून ही वो जादू की छड़ी है,जो हम भी पैदा कर सकते है।
    वैसे भी दोस्तो हमे किसी के भी जैसा बनने की जरूरत नही है हम अपने आप मे महान है क्योंकि जब हम दुनिया के सबसे महान व्यक्तियों में से एक है तो हम किसी और जैसे तो बिल्कुल भी नही हो सकते जो दूसरों के जैसा बनने की कोशिश करते है वे उनके जैसे तो नही बन पाते बल्कि अपने अस्तित्व को भी भूल जाते है और इस भीड़ में कही गुम हो जाते है,जो भी व्यक्ति किसी भी क्षेत्र में अग्रणी है उन्होंने कभी के जैसा बनने का प्रयाश नही किया और न ही किसी के साथ प्रतिस्पर्धा में रहे वे सिर्फ अपने आप से ही प्रतिस्पर्धा करते रहे हर बार वे जैसे है उससे बेहतर बनाने का प्रयास करते रहेऔर एक दिन इतने बेहतर बन गए कि दुनिया उन्हें सलाम करने लगी।
    ऐसी मानसिकता भी मन मे लाने के लिए आपको कुछ करना है वो मैं आपको बताता हूं रोज सुबह उठकर आईने में अपने आपको देखकर इतना कहना है" मैं धरती मे जन्मे अब तक के सबसे महान पुरुषो में से एक है"।(I am the greatest person ever born in the planet) .दिन भर ये बात आपको याद रखनी है जब भी निराश आये बस इतना मैन में दोहराते जाए जब तक मन शांत न हो जाये।
    ये सभी बाते जिस दिन जान जायेगे उस दिन अकल्पनीय चमत्कार होगा उस दिन जो महानता आप तक ही सीमित थी दुनियाभर में फैल जाएगी।दोस्तो आपको मेरी पोस्ट कैसी लगी जरूर लिखे और आप कमेंट्स के माध्यम से हमसे बाते भी कर सकते हैं और अपने सवाल भी पूंछ सकते हैं।

    19 सित॰ 2017

    बड़े बदलाव की छोटी शुरुआत।(small start of big change)

    By: Successlocator On: सितंबर 19, 2017
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  • एक लड़का सुबह सुबह दौड़ने को जाया करता था | आते जाते वो एक बूढी महिला को देखता था |वो बूढी महिला तालाब के किनारे छोटे छोटे कछुवों की पीठ को साफ़ किया करती थी |
    एक दिन उसने इसके पीछे का कारण जानने की सोची |
    वो लड़का महिला के पास गया और उनका अभिवादन कर बोला ” नमस्ते आंटी !
    मैं आपको हमेशा इन कछुवों की पीठ को साफ़ करते हुए देखता हूँ
    आप ऐसा किस वजह से करते हो ?”  महिला ने उस मासूम से लड़के को देखा और  इस पर लड़के को जवाब दिया ” मैं हर रविवार यंहा आती हूँ और इन छोटे छोटे कछुवों की पीठ साफ़ करते हुए सुख शांति का अनुभव लेती हूँ |क्योंकि इनकी पीठ पर जो कवच होता है उस पर कचरा जमा हो जाने की वजह से इनकी गर्मी पैदा करने की क्षमता कम हो जाती है
    इसलिए ये कछुवे तैरने में मुश्किल का सामना करते है | कुछ समय बाद तक अगर ऐसा ही रहे तो ये कवच भी कमजोर हो जाते है

    इसलिए कवच को साफ़ करती हूँ |

    यह सुनकर लड़का बड़ा हैरान था | उसने फिर एक जाना पहचाना सा सवाल किया और बोला “बेशक आप बहुत अच्छा काम कर रहे है लेकिन फिर भी आंटी एक बात सोचिये कि इन जैसे कितने कछुवे है जो इनसे भी बुरी हालत में है जबकि आप सभी के लिए ये नहीं कर सकते
    तो उनका क्या क्योंकि आपके अकेले के बदलने से तो कोई बड़ा बदलाव नहीं आयेगा न |
    महिला ने बड़ा ही संक्षिप्त लेकिन असरदार जवाब दिया: भले ही मेरे इस कर्म से दुनिया में कोई बड़ा बदलाव नहीं आयेगा
    लेकिन सोचो इस एक कछुवे की जिन्दगी में तो बदलाव आएगा ही न | तो क्यों हम छोटे बदलाव से ही शुरुआत करें |

    अगर आप कोई लक्ष्य की तरफ़ बढ़ रहे हो तो तब तक ना रुको जब तक आप इसे प्राप्त ना कर लो । क्योंकि जब आप उस लक्ष्य को प्राप्त कर लोगे तो उसे जो आपको नींद आयेगी वो ऐसी होगी जो आपको कभी नही मिली थी

    कभी कभी दोस्तो के साथ स्कूल को बीच में छोड़कर भागना भी अच्छा रहता है - उनका कहना था कि अगर आपके अच्छे मार्क्स है तो वो आपको बड़े होने पर इतनी खुशी नही देंगे जितनी आपके दोस्तो के साथ बिताये वो अनमोल दिन देंगे ।

    कई लोगो को अपना लक्ष्य पत्ता होता है फिर भी वो टीवी ,इंटरनेट, सोशियल मीडीया ,आदि कि तरफ ज्यादा ध्यान देते है और अपना टाइम खराब कर लेते है। इसलिये आप इससे बचो और अपने लक्ष्य को प्राप्त करो ।
    हम कोई भी कार्य करते है तो हमको पता है किसी भी कार्य के बीच कठिनाई भी आयेगी , लेकिन आप इस परेशानी का हल निकाले और इसे हल करे। परेशानिया अपने आप चली जायेगी।

    18 सित॰ 2017

    चंद्रमा और मूर्ख बंदर

    By: Successlocator On: सितंबर 18, 2017
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  • एक रात एक छोटा बंदर कुँए पर पानी पीने के लिए गया. जब उसने कुँए में झाँककर देखा तो उसे पानी में चंद्रमा झिलमिलाता हुआ दिखाई दिया. यह देखकर वह बहुत डर गया और दूसरे बंदरों को यह बात बताने के लिए दौड़ा.

    दोस्तों! वह चिल्लाया चंद्रमा पानी में गिर गया है।

    कहाँ! किस जगह! दूसरे बंदरों ने पूछा. मेरे साथ आओ! मैं तुम्हें दिखलाऊँगा! छोटे बंदर ने कहा.

    छोटा बंदर उन्हें कुँए तक ले गया. वे सभी झुंड बनाकर कुँए में झाँकने लगे.

    अरे हाँ! चंद्रमा तो पानी में गिर गया है, वे चिल्लाये हमारा सुंदर चंद्रमा कुँए में गिर गया! अब रात में अँधेरा हो जायेगा और हमें डर लगेगा! अब हम क्या करें!,

    मेरी बात सुनो एक बूढ़े बंदर ने कहा हम सिर्फ एक ही काम कर सकते हैं, हमें चंद्रमा को कुँए से निकालने की कोशिश करनी चाहिए,

    हाँ! हाँ! ज़रूर! सभी उत्साह से बोले हमें बताओ कि ऐसा कैसे करें,

    वो देखो कुँए के ऊपर पेड़ की एक डाली लटक रही है. हम सभी उससे लटक जायेंगे और चुटकियों में चंद्रमा को कुँए से निकाल लेंगे,

    बहुत अच्छा तरीका है, सब चिल्लाये चलो डाली से लटकें



    देखते ही देखते बहुत सारे बंदर उस पतली सी डाली से लटक गए और कुँए के भीतर झूलने लगे. उनमें से एक बंदर कुँए के भीतर पानी में हाथ डालकर चंद्रमा को निकालनेवाला ही था कि ऊपर पेड़ पर डाली चटक गई. सभी मूर्ख बन्दर कुँए में गिरकर पानी में डूब गए. चंद्रमा आकाश में स्थिर चमकता रहा.

    कुछ शायरियों से समझे जिंदगी को।

    1.हम फूल तो नहीं, पर महकना जानते है,

    बिना रोये, गम भुलाना जानते है

    लोग खुश होते है हमसे

    क्योकि, हम बिना मिले ही रिश्ते निभाना जानते है।


    2.क्या खूब लिखा है, किसी ने

    तू कर ले हिसाब, अपने हिसाब से,

    लेकिन ऊपर वाला लेगा हिसाब, अपने हिसाब से

    जिंदगी मे हम कितने सही और कितने गलत है,

    ये सिर्फ दो ही शक्स जानते है

    परमात्मा और अपनी अंतरआत्मा।



    3.किसीको गलत समझने से पहले

    एक बार उसके हालात समझने की कोशिश जरुर करे

    हम सही हो सकते है,

    लेकिन मात्र हमारे सही होने से सामने वाला गलत नही हो सकता।



    4.जिन्दगी एक हसीन ख़्वाब है

    जिसमें जीने की चाहत होनी चाहिये

    गम खुद ही खुशी में बदल जायेंगे

    सिर्फ मुस्कुराने की आदत होनी चाहिये।



    5.होगी किसी की ख्वाहिश चांद सितारे पाने की

    अपनी तो ख्वाहिश है खुद सितारा बनने की

    कोई चाहता होगा किसी को दिल में बसाना

    अपनी तो चाहत हर दिल में बस जाने की।



    6.समय की कीमत अखबार से पूछो

    जो सुबह चाय के साथ होता है वही रात को रद्दी हो जाता है

    जिंदगी में जो कुछ भी हासिल करना हो उसे वक्त पर हासिल करो

    क्योंकि जिंदगी मौके कम और अफसोस ज्यादा देती है।

    17 सित॰ 2017

    भविष्य के बारे में ज्यादा न सोचें जानिए क्यों?

    By: Successlocator On: सितंबर 17, 2017
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  • एक बार एक देश के राजा ने मुल्ला नसीरूदीन को बुलाया और उस से पूछा कि तुम्हारे बारे में मैंने बहुत सुना है कि तुम बहुत चालाक हो इसलिए क्या तुम एक काम कर सकते हो जो मैं तुमसे कहने वाला हूँ।

    इस पर मुल्ला ने कहा मैं कुछ भी कर सकता हूँ बस आप एक बार आज्ञा दें। इस पर राजा ने कहा क्या तुम अपने इस प्रिय गधे को पढ़ना सिखा सकते हो इस पर मुल्ला ने कहा, हाँ क्यों नहीं मैं इसे आराम से सिखा सकता हूँ | इस पर राजा ने कहा ‘बकवास मत करो ‘ क्या गारंटी है तुम ऐसा कर सकते हो |

    मुल्ला ने जवाब दिया कि एक काम कीजिये आप मुझे पचास हजार स्वर्ण मुद्राएँ दीजिये उसके बाद मैं गारंटी लेता हूँ कि आठ साल के अंदर मैं इस गधे को पढना सिखा सकता हूँ इस पर राजा ने कहा अगर तुम ऐसा कर पाने में सफल नहीं होते हो तो मैं तुम्हे जेल में डाल दूंगा। मुल्ला ने हामी भर ली और वंहा से चला गया।

    घर आने के बाद मुल्ला से उसके एक दोस्त ने कहा ‘ मुल्ला तुमने ये क्या किया ? सब जानते है तुम ऐसा नहीं कर सकते फिर भी तुमने राजा को यह वचन दे दिया है क्या तुम्हे जेल जाने से डर नहीं लगता मुल्ला ने उत्तर दिया तुम इतना ज्यादा मत सोचो।

    क्योंकि आठ साल में तो या तो हमारा राजा नहीं रहेगा और हो सकता है मेरा गधा भी तब तक नहीं रहे लेकिन फिर भी अगर ऐसा होता है कि सात साल तक दोनों में से कोई भी नहीं जाता तो मेरे पास पूरा एक साल है कि मैं सोच सकता हूँ राजा की सज़ा से कैसे बचा जा सकता है।
    सोच ये ना रखें की मुझे रास्ता अच्छा मिले, बल्कि ये होना चाहिए कि मैं जहां पाव रखूं वो रास्ता अच्छा हो जाए. फर्क सिर्फ सोच का होता हैं सकारात्मक या नकारात्मक वरना सीढियां वही होती है जो किसी के लिए ऊपर जाती हैं, और किसी के लिए नीचे आती हैं साधारण और श्रेष्ठ में सिर्फ इतना सा अंतर है की साधारण उसको चुनते है जो आसान है लेकिन श्रेष्ठ उसे चुनता है जो मुश्किल है कोई फर्क नहीं पड़ता की लोग आपके बारे में क्या सोचते है, फर्क तो इससे पड़ता है की आप अपने बारे में क्या सोचते है  सफलता हमेशा अच्छे विचारों से आती हैं और अच्छे विचार अच्छे लोगों के सम्पर्क से आते हैं.

    16 सित॰ 2017

    प्रतापी राजा मान सिंह और उनके चार अड़ियल घोड़ो की प्रेरणादायक कहानी।

    By: Successlocator On: सितंबर 16, 2017
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  • राजा मानसिंह बहुत ही चिंता में पड़ गए थे। उनके चार अड़ियल घोड़े किसी कीमत पर तालिम सीख ही नहीं रहे थे। देश परदेश से कई तालिमार्थी आए और गए। कुछ लोग तो इसी चक्कर में हड्डियाँ भी तुड़वा बैठे। पर जंगली घोडे टस से मस नहीं हो रहे थे। कुछ दिन बाद राजा मानसिंह नें ऐलान कर दिया की जो भी इन घोड़ों को तालिम दे पाएगा उसे में एक घड़ा भर के सोने के सिक्के दूंगा। इनाम की खबर सुन कर एक नौजवान आगे आया। उसने घोड़ों को तालिम देने की चुनौती स्वीकार कर ली। और यह शर्त रखी की यह कार्य होने तक उसे घोड़ों के साथ दूर अकेला छोड़ दिया जाये।  

    करीब तीन माह तक वह आदमी घोड़ों को ले कर किसी अंजान जगह चला गया। अब राजा मानसिंह को लगा की वह नौजवान वापिस नहीं आएगा। और अब तक घोड़े उसके कब्ज़े से भाग भी चुके होंगे। तभी उन्हे घोड़ों के तलवों (खुर) की आवाज़ सुनाये देने लगी। उनके चारों घोड़े एक कतार में आराम से चलते हुए उसी के महल की और आ रहे थे। और उन पर लगाम और गद्दी भी लगी हुई थी।

    इसका मतलब साफ था की वह चारो घोड़े अब तालिम ले चुके थे। राजा मानसिंह यह देख कर अति प्रसन्न हुए। उन्होने उसी वक्त घोड़ो को अपने कब्ज़े में लिया और उस नवयुवक को उसका इनाम दे दिया।

    फिर राजा मानसिंह नें उसे पूछा की तुम इस कार्य में सफल कैसे हुए। यह घोड़े तो अच्छों अच्छों की हड्डियाँ तुड़वा चुके हैं। तब उस नौजवान नें कहा की, मैंने इन घोड़ो को मुक्त विचरने दिया। जिस से इनका तनाव दूर हो गया।

    फिर धीरे धीरे इन के करीब से गुजरने लगा ताकि यह मेरी मौजूदगी स्वीकार करना सीख लें। उसके बाद मै इनहि के चरने के समय पास बैठ कर भोजन करता, जब यह आँख बंद कर के खड़े खड़े सुस्ताते तो मै भी इनके पास खड़ा खड़ा आंखे बंद कर के सोने का नाटक करता।

    जब यह घोड़े मस्ती में खेलते दौड़ते तो मै भी इनके साथ उछलता कूदता। इस तरह मैंने धीरे धीरे इन सब का विश्वास जीता। फिर इन पर गद्दी बिछाना शुरू किया। पहले यह जटक देते थे। पर आहिस्ता आहिस्ता इन्हे मेरी आदत हो गयी।

    फिर में लगाम बांधने लगा। तो यह थोड़े विचलित हुए। लेकिन इन्हे इतना भरोसा हो चुका था की में इन्हे नुकसान नहीं पहुंचाऊंगा तो मै इस कार्य में भी सफल हुआ। धीरे धीरे मैंने इन पर सवारी करना शुरू किया।

    कई बार गुस्से में इनहोने मुझे गिरा भी दिया। पर मैंने सैयम खो कर इन से दूरव्यवहार नहीं किया। बस विनम्रता से प्रयास करता रहा। और अंत में मै इन्हे अन्य लोगों के पास ले जा कर उनको भी सवारी करवाना शुरू किया। जिस से इन घोड़ों को लोगों का डर भी निकल गया। अब यह घोड़े पूरी तरह से तालिमबद्ध और शांत हो चुके हैं। मेरा कार्य खत्म हुआ।

    राजा मानसिंह इस नौयुवक की चतुराई भरी बातें सुन कर बहुत खुश हुए। उन्होनेनें उस युवक को एक और सोने के सिक्कों से भरा हुआ घड़ा दिया। और उसे अपने घोड़ों के अस्तबल में प्रमुख कर्मचारी बनाने की पेशकश भी करी। वार्ता समाप्त।

    कहानी का सार – मानवी के मन के अंदर भी चार घोड़े होते हैं। मानस, चिंता, अहम और बुद्धि। इन चार तत्व को काबू करना है तो बहुत सैयम से काम लेना चाहिए। जैसे इस कहानी के नौजवान नें लिया था।

    दोस्तों अगर आप भी इस कहानी के हीरो जैसे सफल होना चाहते हैं तो अपने मन से दोस्ती कर लो। पहले खुद पर विश्वास करो। अपने मन से positive बात करो। खुद को खुश करो। यानि फिल्म देखो, घूमने जाओ, जो इन्सान अच्छा लगे उसके पास जाओ। खुद को खुश करो।

    ऐसा करने से आप का चित्त प्रसन्न होगा। और आप के मुश्किल से मुश्किल काम ऐसे चुटकियों में सफल होने लगेंगे। पोस्ट अच्छी लगे तो पोस्ट Like करो, पोस्ट Share करो। और हमें Subscribe करना भूलना नहीं। धन्यवाद।