31 अग॰ 2018

कामयाबी किसे कहते है?What is success

By: Successlocator On: अगस्त 31, 2018
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  •                       

    आज की इस भागती हुयी जिंदगी में हम सब सफलता या कामयाबी के लिए प्रयास कर रहे हैं|अक्सर ये सवाल लोगो के दिमाग में आता है कि कामयाब कैसे बनें – सफलता कैसे पायें | हम सभी किसी न किसी लक्ष्य या मकसद को लेके जीते हैं | उस लक्ष्य कि प्राप्ति के बाद एक नया लक्ष्य निर्धारित करते हैं | अपने लक्ष्यों तक पहुचना हम सभी का ध्येय रहता है | सफलता के सही मायने न पता होने की वजह से हम जिंदगी भर मायूस  ही महसूस करते रहते हैं | इस पोस्ट का मुख्य उद्देश्य यही है कि आपको सफल होने के सही मायने बताये जाए|

    सफलता क्या है ? कामयाबी किसे कहते हैं ?

    अपने किसी लक्ष्य को प्राप्त कर लेना ही सफलता कि परिभाषा है| करियर या जिंदगी के शुरुवात में आपने जो गोल या मकसद अपने लिए बनाये थे , अगर आपने उन्हें पा लिया है  तो आप सफल कहे जायेंगे |

    सफलता के सूत्र क्या हैं ?

    कहा जाता है कि सफलता का कोई शार्ट कट नहीं होता | सफल होने के कई सूत्र है |

    एक बेहतर इंसान कैसे बने

    कामयाब कैसे बनें – सफलता कैसे पायें

    हम यहाँ उन ईंटो का ज़िक्र कर रहे हैं जिनसे आप अपनी सफलता कि सीढीयाँ बना कर अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं

    लगातार प्रयास : एक दोहे में कहा गया है कि “करत करत अभ्यास ते जड़मति होते सुजन , रसरी आवत जात ते सिल पर पडत निसान”. इस दोहे का सीधा मतलब है लगातार प्रयास करना | अगर आप जिंदगी में सफल होना चाहते हैं तो बार बार अपने लक्ष्य कि प्राप्ति के प्रयास कीजिये | हर बार प्रयास कीजिये | थक के चूर हो जाईये मगर प्रयास बंद मत कीजिये | चेष्टा करना मत छोड़े | लगातार प्रयास करने से आप का लक्ष्य आपकी सकारत्मक उर्जा से आप के पास पहुच जाएगा

    अथक परिश्रम :अगर आप कामयाब होना चाहते हैं तो  परिश्रम करते रहिये | अपने आराम और सहूलियत को त्याग कर कर ही आप सफलतम व्यक्तियों में शुमार हो सकते हैं

    किसी उपलब्धि को छोटा न समझे – अपनी किसी भी उपलब्धि को कभी कम आंकिये | अपनी हर छोटी बड़ी उपलब्धि का सम्मान कीजिये |

    अतिविश्वास और आत्ममुग्धता से   खुद को बचाए : कामयाब होने कि सबसे बड़ी शर्त है कि खुद को अतिविश्वास और आत्ममुग्धता से   खुद को बचाए| अगर आप अतिविश्वास से भर गए तो आप अपने परिश्रम को बीच में छोड़ देंगे | और अगर आप आत्ममुग्धता से भर गए तो खुद को तुलनात्मक नज़रिए से नहीं देख पाएंगे

    बुरी और नकारात्मक संगति से दूर रहे – दुनिया ऐसे लोगो से भरी पड़ी है जो आपके अन्दर नकारात्मकता और अविश्वास कि भावना डालते हैं | वो खुद तो कुछ नहीं करते साथ ही आप को तरह तरह से अपने लक्ष्य से भटकाने का पूरा प्रयास करते हैं |

    सफल लोगों से मेल जोल बढ़ाये , उन्हें पढ़े – कहा जाता है कि आपके आस पास कि सकारत्मक उर्जा और नकारात्मक दोनों तरह की उर्जा आप को प्रभावित करती हैं | आप उन लोगो से मिलिए जो उद्यमी है , कर्मनिष्ठ और जिज्ञासु हैं | प्रोत्साहित करने वाले हैं और कामयाब हैं | आपको कुछ दिनों में ही अपने अन्दर बड़ा परिवर्तन नज़र आयेगा

    खुद पर विश्वास – अपने आप में विश्वास रखे | अपने भाग्योदय के लिए किसी अन्धविश्वास को न पाले | कर्म से बड़ा कुछ नहीं है | तुलसी दास ने कहा है

    “सकल पदारथ एही जग माहीं
    कर्महीन नर पावत नाही”

    कहने का तात्पर्य ये है कि सब कुछ इसी संसार में उपलब्ध है मगर उसकी कामना मात्र से काम नहीं चलेगा | उसे प्राप्त करने के लिए जीतोड़ म्हणत और लगातार कर्म करते रहने कि ज़रूरत है

    10 अप्रैल 2018

    विद्यार्थियों के लिए श्लोक।shloka for students भाग-2

    By: Successlocator On: अप्रैल 10, 2018
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  • नास्ति विद्या समं चक्षु नास्ति सत्य समं तप:। 
    नास्ति राग समं दुखं नास्ति त्याग समं सुखं॥

     भावार्थ :

    विद्या के समान आँख नहीं है, सत्य के समान तपस्या नहीं है, आसक्ति के समान दुःख नहीं है और त्याग के समान सुख नहीं है ।

    गुरु शुश्रूषया विद्या पुष्कलेन् धनेन वा।
    अथ वा विद्यया विद्या चतुर्थो न उपलभ्यते॥

     भावार्थ :

    विद्या गुरु की सेवा से, पर्याप्त धन देने से अथवा विद्या के आदान-प्रदान से प्राप्त होती है। इसके अतिरिक्त विद्या प्राप्त करने का चौथा तरीका नहीं है ।

    अर्थातुराणां न सुखं न निद्रा कामातुराणां न भयं न लज्जा । विद्यातुराणां न सुखं न निद्रा क्षुधातुराणां न रुचि न बेला ॥

     भावार्थ :

    अर्थातुर को सुख और निद्रा नहीं होते, कामातुर को भय और लज्जा नहीं होते । विद्यातुर को सुख व निद्रा, और भूख से पीडित को रुचि या समय का भान नहीं रहता ।

    पठतो नास्ति मूर्खत्वं अपनो नास्ति पातकम् । 
    मौनिनः कलहो नास्ति न भयं चास्ति जाग्रतः ॥

     भावार्थ :

    पढनेवाले को मूर्खत्व नहीं आता; जपनेवाले को पातक नहीं लगता; मौन रहनेवाले का झघडा नहीं होता; और जागृत रहनेवाले को भय नहीं होता ।

    विद्याभ्यास स्तपो ज्ञानमिन्द्रियाणां च संयमः । 
    अहिंसा गुरुसेवा च निःश्रेयसकरं परम् ॥

     भावार्थ :

    विद्याभ्यास, तप, ज्ञान, इंद्रिय-संयम, अहिंसा और गुरुसेवा – ये परम् कल्याणकारक हैं ।

    विद्या वितर्को विज्ञानं स्मृतिः तत्परता क्रिया । 
    यस्यैते षड्गुणास्तस्य नासाध्यमतिवर्तते ॥

     भावार्थ :

    विद्या, तर्कशक्ति, विज्ञान, स्मृतिशक्ति, तत्परता, और कार्यशीलता, ये छे जिसके पास हैं, उसके लिए कुछ भी असाध्य नहीं ।

    गीती शीघ्री शिरः कम्पी तथा लिखित पाठकः । अनर्थज्ञोऽल्पकण्ठश्च षडेते पाठकाधमाः ॥

     भावार्थ :

    गाकर पढना, शीघ्रता से पढना, पढते हुए सिर हिलाना, लिखा हुआ पढ जाना, अर्थ न जानकर पढना, और धीमा आवाज होना ये छे पाठक के दोष हैं ।

    सद्विद्या यदि का चिन्ता वराकोदर पूरणे । 
    शुकोऽप्यशनमाप्नोति रामरामेति च ब्रुवन् ॥

     भावार्थ :

    सद्विद्या हो तो क्षुद्र पेट भरने की चिंता करने का कारण नहीं । तोता भी “राम राम” बोलने से खुराक पा हि लेता है ।

    मातेव रक्षति पितेव हिते नियुंक्ते कान्तेव चापि रमयत्यपनीय खेदम्।
     लक्ष्मीं तनोति वितनोति च दिक्षु कीर्तिम् किं किं न साधयति कल्पलतेव विद्या ॥

     भावार्थ :

    विद्या माता की तरह रक्षण करती है, पिता की तरह हित करती है, पत्नी की तरह थकान दूर करके मन को रीझाती है, शोभा प्राप्त कराती है, और चारों दिशाओं में कीर्ति फैलाती है । सचमुच, कल्पवृक्ष की तरह यह विद्या क्या क्या सिद्ध नहीं करती ?

    विद्याविनयोपेतो हरति न चेतांसि कस्य मनुजस्य । कांचनमणिसंयोगो नो जनयति कस्य लोचनानन्दम् ॥

     भावार्थ :

    विद्यावान और विनयी पुरुष किस मनुष्य का चित्त हरण नहीं करता ? सुवर्ण और मणि का संयोग किसकी आँखों को सुख नहीं देता ?

    हर्तृ र्न गोचरं याति दत्ता भवति विस्तृता । 
    कल्पान्तेऽपि न या नश्येत् किमन्यद्विद्यया विना ॥

     भावार्थ :

    जो चोरों के नजर पडती नहीं, देने से जिसका विस्तार होता है, प्रलय काल में भी जिसका विनाश नहीं होता, वह विद्या के अलावा अन्य कौन सा द्रव्य हो सकता है ?

    द्यूतं पुस्तकवाद्ये च नाटकेषु च सक्तिता ।                     स्त्रियस्तन्द्रा च निन्द्रा च विद्याविघ्नकराणि षट् ॥

     भावार्थ :

    जुआ, वाद्य, नाट्य (कथा/फिल्म) में आसक्ति, स्त्री (या पुरुष), तंद्रा, और निंद्रा – ये छे विद्या में विघ्नरुप होते हैं ।

    विद्यार्थियों के लिए श्लोक(shlok for students) भाग-1

    By: Successlocator On: अप्रैल 10, 2018
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  • सुखार्थिनः कुतोविद्या नास्ति विद्यार्थिनः सुखम् ।                 सुखार्थी वा त्यजेद् विद्यां विद्यार्थी वा त्यजेत् सुखम् ॥

     भावार्थ :

    जिसे सुख की अभिलाषा हो (कष्ट उठाना न हो) उसे विद्या कहाँ से ? और विद्यार्थी को सुख कहाँ से ? सुख की ईच्छा रखनेवाले को विद्या की आशा छोडनी चाहिए, और विद्यार्थी को सुख की ।

    न चोरहार्यं न च राजहार्यंन भ्रातृभाज्यं न च भारकारी ।           व्यये कृते वर्धते एव नित्यं विद्याधनं सर्वधन प्रधानम् ॥

     भावार्थ :

    विद्यारुपी धन को कोई चुरा नहीं सकता, राजा ले नहीं सकता, भाईयों में उसका भाग नहीं होता, उसका भार नहीं लगता, (और) खर्च करने से बढता है । सचमुच, विद्यारुप धन सर्वश्रेष्ठ है ।

    नास्ति विद्यासमो बन्धुर्नास्ति विद्यासमः सुहृत् ।                   नास्ति विद्यासमं वित्तं नास्ति विद्यासमं सुखम् ॥

     भावार्थ :

    विद्या जैसा बंधु नहीं, विद्या जैसा मित्र नहीं, (और) विद्या जैसा अन्य कोई धन या सुख नहीं ।

    ज्ञातिभि र्वण्टयते नैव चोरेणापि न नीयते ।.                           दाने नैव क्षयं याति विद्यारत्नं महाधनम् ॥

     भावार्थ :

    यह विद्यारुपी रत्न महान धन है, जिसका वितरण ज्ञातिजनों द्वारा हो नहीं सकता, जिसे चोर ले जा नहीं सकते, और जिसका दान करने से क्षय नहीं होता ।

    सर्वद्रव्येषु विद्यैव द्रव्यमाहुरनुत्तमम् । अहार्यत्वादनर्ध्यत्वादक्षयत्वाच्च सर्वदा ॥

     भावार्थ :

    सब द्रव्यों में विद्यारुपी द्रव्य सर्वोत्तम है, क्यों कि वह किसी से हरा नहीं जा सकता; उसका मूल्य नहीं हो सकता, और उसका कभी नाश नहीं होता ।

    विद्या नाम नरस्य रूपमधिकं प्रच्छन्नगुप्तं धनम् विद्या भोगकरी यशः सुखकरी विद्या गुरूणां गुरुः ।  
    विद्या बन्धुजनो विदेशगमने विद्या परं दैवतम् विद्या राजसु पूज्यते न हि धनं विद्याविहीनः पशुः ॥

     भावार्थ :

    विद्या इन्सान का विशिष्ट रुप है, गुप्त धन है । वह भोग देनेवाली, यशदात्री, और सुखकारक है । विद्या गुरुओं का गुरु है, विदेश में वह इन्सान की बंधु है । विद्या बडी देवता है; राजाओं में विद्या की पूजा होती है, धन की नहीं । इसलिए विद्याविहीन पशु  ही है ।

    अलसस्य कुतो विद्या अविद्यस्य कुतो धनम् ।                   अधनस्य कुतो मित्रममित्रस्य कुतः सुखम् ॥

     भावार्थ :

    आलसी इन्सान को विद्या कहाँ ? विद्याविहीन को धन कहाँ ? धनविहीन को मित्र कहाँ ? और मित्रविहीन को सुख कहाँ ?

    रूपयौवनसंपन्ना विशाल कुलसम्भवाः ।                         विद्याहीना न शोभन्ते निर्गन्धा इव किंशुकाः ॥

     भावार्थ :

    रुपसंपन्न, यौवनसंपन्न, और चाहे विशाल कुल में पैदा क्यों न हुए हों, पर जो विद्याहीन हों, तो वे सुगंधरहित केसुडे के फूल की भाँति शोभा नहीं देते ।

    विद्याभ्यास स्तपो ज्ञानमिन्द्रियाणां च संयमः ।             अहिंसा गुरुसेवा च निःश्रेयसकरं परम् ॥

     भावार्थ :

    विद्याभ्यास, तप, ज्ञान, इंद्रिय-संयम, अहिंसा और गुरुसेवा – ये परम् कल्याणकारक हैं ।

    विद्या ददाति विनयं विनयाद् याति पात्रताम्।       पात्रत्वाद्धनमाप्नोति धनाद्धर्मं ततः सुखम्॥

     भावार्थ :

    विद्या से विनय (नम्रता) आती है, विनय से पात्रता (सजनता) आती है पात्रता से धन की प्राप्ति होती है, धन से धर्म और धर्म से सुख की प्राप्ति होती है ।

     दानानां च समस्तानां चत्वार्येतानि भूतले ।                        श्रेष्ठानि कन्यागोभूमिविद्या दानानि सर्वदा ॥

     भावार्थ :

    सब दानों में कन्यादान, गोदान,भूमिदान,और विद्यादान सर्वश्रेष्ठ है ।

    क्षणशः कणशश्चैव विद्यामर्थं च साधयेत् ।                             क्षणे नष्टे कुतो विद्या कणे नष्टे कुतो धनम् ॥

     भावार्थ :

    एक एक क्षण गवाये बिना विद्या पानी चाहिए; और एक एक कण बचा करके धन ईकट्ठा करना चाहिए । क्षण गवानेवाले को विद्या कहाँ, और कण को क्षुद्र समजनेवाले को धन कहाँ ?

    विद्या नाम नरस्य कीर्तिरतुला भाग्यक्षये चाश्रयो धेनुः कामदुधा रतिश्च विरहे नेत्रं तृतीयं च सा । 
    सत्कारायतनं कुलस्य महिमा रत्नैर्विना भूषणम् तस्मादन्यमुपेक्ष्य सर्वविषयं विद्याधिकारं कुरु ॥

     भावार्थ :

    विद्या अनुपम कीर्ति है; भाग्य का नाश होने पर वह आश्रय देती है, कामधेनु है, विरह में रति समान है, तीसरा नेत्र है, सत्कार का मंदिर है, कुल-महिमा है, बगैर रत्न का आभूषण है; इस लिए अन्य सब विषयों को छोडकर विद्या का अधिकारी बन ।

    अनंत की सैर। The journey of infinity (भाग-1)

    By: Successlocator On: अप्रैल 10, 2018
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  • "स्वयं और दूसरों की सत्ता से मुक्त होने का अर्थ है,अतीत की प्रत्येक वस्तु के प्रति मर जाना ताकि आपका चित्त सदा तरोताजा,युवा,निर्दोष और उत्साह व उत्कट आवेग से भरा हो।"
                                                                    "जे.कृष्णमूर्ती"

    इन शब्दों का यदि गहनता से अध्ययन किया जाए तो ये हमे उस मार्ग पर ले जा सकते है जिससे हम अनंत की सैर कर सके,कहने का तात्पर्य यह है कि हम यदि अपने भूत-भविष्य की चिंताओं से मुक्त हो जाये और वर्तमान में अपने समग्र अस्तित्व को समाहित कर ले तो हमारे लिए ब्रम्हांड के सारे रास्ते खुल जाएंगे और हम उन सारे सवालों के जवाब जान पाएंगे जो हमारे मन मस्तिष्क में खलबली मचाये हुए है।और वह हर चीज पाने में आप सक्षम हो पाएंगे जिसे इस भौतिक जगत में अर्थपूर्ण समझा जाता है।आप यदि अपने विचार रूपी समुद्री की गहराइयो में गोते लगाएंगे और एक दृष्टा के रूप में उन विचारों का अवलोकन करेंगे तो पता चलेगा कि वर्तमान में तो न हैम सुखी है ना दुखी जो सुख और दुख की अनुभूति है वो तो भूत और भविष्य के विचार हमारे मन मे उठते है उनके फलस्वरूप आती है यही वजह होती है कि वर्तमान में चल रहे किसी काम को हम सही न्याय नही दे पाते क्योंकि अतीत और भविष्य हैम पर इतना हावी रहता है कि वर्तमान हमारा उनकी छाया में जीने को मजबूर रहता है और कभी प्रकाशित नही हो पाता।इसको एक उदाहरण से समझते है एक बार एक टीवी चैनल के साक्षात्कार के दरम्यान सचिन तेंदुलकर से पुछा गया कि जब आप बैटिंग कर रहे होते है और बॉल आपकी तरफ आती है तो आपके मस्तिष्क में क्या विचार आते है उन्होंने बहुत ही सहजता पूर्वक कवाब दिया मैं उस पल सिर्फ उस बॉल को देखता हूं और सारे विचार अपने आप बंद हो जाते है। दोस्तो आपको ये जानकर बहुत आश्चर्य होगा कि वर्तमान में जीना यानी उस अंतहीन अनंत की सैर ।यदि आपको भी इस अनुभूति का आनंद लेना है और अपने मष्तिष्क में गहराइयों में प्रविष्ट होना है तो एक सवाल के साथ आपको छोड़े जा रहा हु आप उसे हल करने के समय किसी पेपर पेन या किसी बाहरी वस्तु का इस्तेमाल न करे अपने विचारों की गहनता में घुश्कर इसे हाल करने का प्रयाश करे

    एक ऐसी संख्या बताइए जिसमे 10 से भाग देने पर शेषफल 9 आये 9 से भाग देने पर शेषफल 8 आये 7 से भाग देने पर शेषफल 6 आये इस प्रकार 6,5,4,3,2,1 से भाग देने पर क्रमसः शेष फल 5,4,3,2,1,0 आये।
    यह सवाल सिर्फ एक एक्सरसाइज मात्र है जो आपको अपने अनंत विचारो के समुद्र में डुबकी लगवाकर आपको वर्तमान शक्ति का अनुभव कराएगा।इस सवाल का जवाब  और हल करते समय आपके अनुभव आप कमेंट में लिखे ।

    8 अप्रैल 2018

    आपने कभी अपने आप से ये सवाल पूछे है !!Think about these thinks

    By: Successlocator On: अप्रैल 08, 2018
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  • दोस्तो,मैं सुधीर तिवारी आज बहुत दिनों बाद मैं एक पोस्ट लेकर आपके सामने हाजिर हूँ, जो आपको अपने आप से बहुत से सवाल पूछने पर मजबूर कर देगी और मैं गारंटी देता हूं कि यदि आपने इन सवालों के विषय मे गंभीरता से विचार किया तो आपकी जिंदगी और जीने का तरीका सब कुछ बदल जायेगा।
    अब मैं आपका ज्यादा समय न लेते हुए अपने वास्तविक विषय पर आते है,दोस्तो क्या आपने कभी सोचा है कि आपके जीवन जीने का मकसद क्या है,ये सवाल जब कोई हमसे पूछता है तो हैम यही कहते है कि अमीर बनना या फिर व्यापार करना,परिवार की खुशी,वगैरह वगैरह, क्या दोस्तो सच मे हमारे जीवन जीने का मकसद यही है क्या इन मकसदों की पूर्ति के पश्चात हम मृत्यु पर्यंत सुखी हो जायेगे,यदि आपको इस सवाल का जवाब नही मिल रहा तो किसी बुजुर्ग से मिलिए उससे उसके पूरी जिंदगी में उसके अनुभव के बारे में पूछिये और उससे ये भी पूछिये क्या वह दिल से खुश है, यदि खुश है तो अब उन्हें मृत्यु का भय नही होना चाहिए आप उनके जवाबो से आकलन लगा सकते है 95% व्यक्ति दोस्तो आपको ऐसे मिलेंगे जिन्हें पता ही नही उनके जीवन का मकसद क्या था अथवा क्या है आप पाएंगे कि जैसे उनके पूर्वज आये और गए वो भी आएंगे और जायेगे ये सिलसिला यू ही चलता रहेगा।अब यदि आप गहराई से मंथन करेगे तो एक सवाल ओर आपके मन मे बेचैनी पैदा करेगा ये सिलसिला आखिर क्या है,हम क्यों जन्म लेते है और क्यों मरते है ऐसा क्या है जो जब तक हमारे साथ रहता है हहम जीवित रहते है हमारी सांसे चलती रहती है और जब वो हमारे साथ छोड़ती है  तो हमारा भी अस्तित्व समाप्त हो जाता है आखिर कोन सी वह शक्ति है जो इन सबके पीछे काम कर रही है आखिर क्यों जिनके पास समस्त ऐश्वर्य है वो भी दुखी है,फिर हमारे मन मे सवालो की बरसात होने चालू होगी आखिर मैं हूं कौन आप कहेंगे कि मैं फला नाम का व्यक्ति हूं फला नाम के व्यक्ति मेरे पिता या फिर कहेंगे कि फला कंपनी का मालिक,फिर सवाल उठता है इन सबसे से पहले आप कौन थे और इन सबके बाद आप क्या रहेंगे,आप पाएंगे कि जैसे जैसे हम गहरी सोच में उतरते है सवाल बढ़ते जाते है जो कि अंतहीन जान पड़ते है,क्या इन सवालों के जवाब नही है यह भी गणित के इनफिनिटी की तरह है या फिर अंतहीन ब्रम्हाड की तरह। अब दिसतो आपके पास दो विकल्प शेष रहते है या तो इसे अंतहीन माने या फिर अपने विचारों की गहनतम गहराइयों में घुश्कर इन्हें ढूंढे।
    यदि आपको इनमे से किसी एक सवाल का जवाब मील तो हमे कमेंट में जरूर बताएं। अगली पोस्ट में आपके और हमारे अनुभवों से प्राप्त  कुछ ऐसे ही सवालो जवाबो की चर्चा करेंगे आप हमारे साथ जुड़े रहिये अपने मन मे उठ रहे सवाल कमेंट में लिखे।

    13 नव॰ 2017

    सत्य की खोज।satya ki khoj hindi kahaniya.

    By: Successlocator On: नवंबर 13, 2017
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  • दस भिक्षु सत्य की खोज में एक बार निकले थे। उन्होने बहुत पर्वतों-पहाडों, आश्रमों की यात्रा की। लेकिन उन्हें कोई सत्य का अनुभव न हो सका। क्योंकि सारी यात्रा बाहर हो रही थी। किन्हीं पहाडों पर, किन्ही आश्रमों में, किन्हीं गुरुओं के पास खोज चल हरी थी। जब तक खोज किसी और की तरफ चलती है, तब तक उसे पाया भी कैसे जा सकता है, जो स्वयं में है।आखिर में थक गए और अपने गांव वापस लौटने लगे। वर्षा के दिन थे, नदी बहुत पूर पर थी। उन्होने नदी पार की। पार करने के बाद सोचा कि गिन लें, कोई खो तो नहीं गया। गिनती की, एक आदमी प्रतीत हुआ खो गया है, एक भिक्षु डूब गया था। गिनती नौ होती थी। दस थे वे। दस ने नदी पार की थी। लौटकर बाहर आकर गिना, तो नौ मालूम होेते थै।

    प्रत्येक व्यक्ति अपने को गिनना छोड जाता था, शेष सबको गिन लेता था। वे रोने बेठ गए। सत्य की खोज का एक साथी खो गया था।एक यात्री उस रस्ते से निकल रहा था, दूसरे गांव तक जाने के लिए । उसने उनकी पीडा पूदभ्, उनके गिरते आंसू देखे। उसने पूछा, क्या कठिनाई है ?
    उन्होंने कहा- हम दस नदी में उतरे थे, एक साथी खो गया। उसके लिए हम रोते है। कैंसे खोंजे ? उसने देखा वे दस ही थे। वह हंसा और उसने कहा, तुम दस ही हो, व्यर्थ की खोज मत करो अपने रास्ते चला गया।
    उन्होने फिर से गिनती की कि हो सकता है, उनकी गिनती में भूल हो। लेकिन उस यात्री को पता भी न था। उनकी गिनती में भूूल न थी, वे गिनती तो ठीक ही जानते थे। भूल यहां थी कि कोई भी अपनी गिनती नहीं करता था।
    उन्होने बहुत बार गिना, फिर भी वे नौ ही थे। और तब उनमें से एक भिक्षु नदी के किनारे गया। उसने नदी में झांककर देखा। एक चट्टान के पास पानी स्थिर था। उसे अपनी ही परछाई नीचे पानी में दिखाई पडी। वह चिल्लाया, उसने अपने मित्रों को कहाः आओ,

    जिसे हम खोजते थे, वह मौजुद है। दसवां साथी मिल गया है। लेकिन पानी बहुत गहरा है। और उसे हम शायद निकाल न सकेंगे। लेकिन उसका अंतिम दर्शन तो कर लें। एक-एक व्यक्ति ने उस चट्टान के पास झांककर देखा, नीचे एक भिक्षु मौजुद था। सबकी परछाई नीचे बनती उन्हे दिखाई पडी। तब इतना तो तय हो गया, इतने डूबे पानी में वह मर गया हैं।
    वे उसका अंतिम संस्कार कर रहे थे। तब वह यात्री फिर वापस लौटा, उसने पूछा कि यह चिता किसके लिए जलाई हुई है ? यह क्या कर रहे हो ? उन नौ ही रोते हुए भिक्षुओं ने कहा, मित्र हमारा मर गया है। देख लिया हमने गहरे पानी में डूबी है उसकी लाश। निकालना तो संभव नहीं है। फिर वह मर भी गया होगा, हम उसका अंतिम दाह-संस्कार कर रहे है।

    उस यात्री ने फिर से गिनती की और उनसे कहा, पागलों! एक अर्थ में तुम सबने अपना ही दाह-संस्कार कर लिया है। तुमने जिसे दखा है पानी में, वह तुम्हीं हो। लेकिन पानी में देख सके तुम, लेकिन स्वयं में न देख सके! प्रतिबिंब को पकड सके जल में, लेकिन खुद पर तुम्हारी दृष्टि न जा सकी! तुमने अपना ही दाह-संस्कार कर लिया। और दसों ने मिलकर उस दसवें को दफना दिया है, जो खोया ही नहीं था।

    उसकी इस बात के कहते ही उन्हें स्मरण आया कि दसंवा तो मैं ही हूं। हर आदमी को खयाल आया कि वह दसंवा आदमी तो मैं ही हूं। और जिस सत्य की खोज वे पहाडों पर नहीं कर सकते थे, अपने ही गांव लौटकर वह खोज पूरी हो गई। वे दसों ही जागृत होकर, जान कर गांव वापस लौट गये थे।
    उन दस भिक्षुओं की कथा ही हम सभी की कथा है। एक को भर हम छोड जाते है- स्वंय को। और सब तरफ हमारी दृष्टि जाती है- शास्त्रो में खोजते हैं, शब्दों में खोजते हैं, शास्त्रों के वचनों में खोजते हैं, पहाडों पर, पर्वतों पर खोजते हैं, सेवा में, समाज सेवा में, प्रार्थना में, पूजा में खोजते है। सिर्फ एक व्यक्ति भर इस खोज से वंचित रह जाता है, वह दसवां आदमी वंचित रह जाता है, जो कि हम स्वयं है।

    स्वतंत्रता का अर्थ है- इस स्वयं को जानने से जो जीवन उपलब्ध होता है, उसका नाम स्वतंत्रता है। स्वतंत्र होना इस जगत में सबसे दूर्लभ बात है। स्वतंत्र वही हो सकता है, जो स्वंय को जानता हो। जो स्वंय को नहीं जानता, वह परतंत्र हो सकता है या स्वच्छंद हो सकता है, लेकिन स्वतंत्र नहीं।

    10 अक्टू॰ 2017

    खुद से बात करना सफल लोगो की निशानी-

    By: Successlocator On: अक्टूबर 10, 2017
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  •                            Source bbc news

    कई बार आपने कुछ लोगों को बड़बड़ाते देखा होगा. आमतौर पर जब हम किसी को ऐसा करते देखते हैं, तो हम उन्हें सनकी कहते हैं. हमें लगता है कि वो दिमागी ख़लल की वजह से ख़ुद से बातें करते रहते हैं.
    दरअसल, ऐसे लोग अपने आपसे बातें करते हैं और जिसे आप दिमागी ख़लल कहकर ख़ारिज करते हैं, वो ख़ुद से बातें करने की आदत आपके लिए बड़े काम की साबित हो सकती है.
    दुनिया में आज बहुत से एक्सपर्ट ये मशविरा देते हैं कि आप ख़ुद से बातें करें. उनके मुताबिक़ इससे याद्दाश्त तेज़ होती है. आत्मविश्वास भी बढ़ता है और आप ज़्यादा फ़ोकस हो जाते हैं.
    अमरीका की विस्कॉन्सिन यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर गेरी लुपयन कहते हैं कि तेज़ आवाज़ में ख़ुद से बात करना आपको भले अजीब लगे, लेकिन है ये कामयाबी का नुस्खा.
    वो अपनी रिसर्च की बुनियाद पर कहते हैं कि ऐसा करने से आपका बहुत फ़ायदा हो सकता है.
    प्रोफ़ेसर गैरी लुपयन ने एक तजुर्बा किया था, जिसमें कुछ लोगों को कंप्यूटर की स्क्रीन पर कुछ चीज़ें सिर्फ़ देखने को कहा गया और कुछ को तेज़ आवाज़ में उनका नाम पुकारने को.
    जिन लोगों ने तेज़ आवाज़ में उन चीज़ों का नाम लिया, वो स्क्रीन पर उन चीज़ों को ज़्यादा जल्दी पहचान पाए और जो लोग सिर्फ़ स्क्रीन को देख रहे थे, उन्हें वही चीज़ें पहचानने में थोड़ा समय लगा.
    इसी तरह का प्रयोग उन्होंने किराने की दुकान पर भी किया. जिन लोगों ने सब्ज़ियों की तस्वीर देखकर उनका नाम तेज़ आवाज़ में पुकारा था, स्टोर में वही सब्ज़ी तलाशने में उन्हें आसानी हुई.
    प्रोफेसर गैरी का कहना है कि जब हम किसी चीज़ का नाम अपनी ज़ुबान से तेज़ आवाज़ में लेते हैं तो उसकी तस्वीर हमारे ज़हन में बन जाती है. हमारा दिमाग़ ख़ुद-ब-ख़ुद ज़रूरत पड़ने पर उसे हमारे ज़हन में ज़िंदा कर देता है.
    ब्रिटिश मनोवैज्ञानिक और लेखिका एनी विल्सन का कहना है कि वो अपने सभी क्लाइंट्स को ख़ुद से बातें करने की सलाह देती हैं.
    अगर उनके किसी मरीज़ को बहुत गुस्सा आता है, तो वो उसे भी यही सलाह देती हैं, क्योंकि ऐसा करने से मसले का हल निकल आता है और गुस्सा ग़ायब हो जाता है.
    एनी विल्सन कहती हैं- हम हमेशा चाहते हैं कि हमारे आसपास वो लोग रहें जो हमसे ज़्यादा ज्ञानी हों, जिनसे हमें कुछ सीखने को मिल सके.
    सबसे अहम ये है कि जो हमें समझ सकें. जो ख़ासियतें हम दूसरों में तलाशते हैं, वो हम अपने अंदर हासिल कर सकते हैं.
    आख़िर ख़ुद को इंसान सबसे अच्छे से जानता है. जब हम ख़ुद से बाते करने लगते हैं तो बहुत हद तक हम अपने अंदर ही उन्हें तलाश लेते हैं.
    ऐसे में हम ख़ुद अपने आप को ही सबसे ज़्यादा दिलचस्प शख़्सियत पाते हैं और हमारी ख़ुद से दोस्ती हो जाती है.
    2014 में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक़, जब हम किसी को तुम या वो कहकर बातें करते हैं, तो हम अपने जज़्बात पर जल्दी काबू कर लेते हैं. क्योंकि ऐसे में हम खुद एक दूसरी शख़्सियत बनकर अपने को ही समझाते हैं.
    ख़ुद से बातें करने के फ़ायदे
    ब्रिटेन के यूजीन गैम्बल इसकी बड़ी मिसाल हैं. वो बरसों तक दांतों के डॉक्टर थे. एक दिन उन्होंने डॉक्टरी छोड़कर कारोबार शुरू करने का इरादा कर लिया. जबकि उन्हें कारोबार का कोई तजुर्बा नहीं था. इस वजह से यूजीन को कई बार नाकामी मिली.
    लिहाज़ा उन्होंने बिज़नेस कोच की मदद ली, जिसने उन्हें सबसे पहली सलाह ख़ुद से बात करने की ही दी और उन्हें इसका फ़ायदा भी हुआ.
    आज जब भी उन्हें बिज़नेस की कोई प्रेज़ेन्टेशन देनी होती है तो वो सबसे पहले ख़ुद अपने आपसे बात करते हैं और अपनी प्रेज़ेन्टेशन को तेज़ आवाज़ में पढ़ते हैं.
    ऐसा करने से वो अपने आइडिया पर ज़्यादा फोकस कर पाते हैं और अपनी प्रेज़ेन्टेशन को अच्छी तरह याद रख पाते हैं.
    हम सभी के लिए हर समय ख़ुद से बात करना ना तो संभव है और ना ही हम कर पाते हैं.
    इसकी बड़ी वजह ये है कि समाज में ख़ुद से बातें करने वाले को पागल करार दिया जाता है. इसीलिए कई लोग चाहकर भी ख़ुद से बातें नहीं कर पाते.
    उन्हें सनकी कहकर ख़ारिज किए जाने का डर रहता है.
    लेकिन छोटे बच्चे अक्सर ये काम करते हैं.
    रिसर्च बताती हैं कि बच्चों के विकास में ये अमल बहुत कारगर साबित होता है.
    2008 में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक़, पांच साल की उम्र वाले जिन बच्चों ने अपने आप से ज़्यादा बातें कीं, वो ज़्यादा समझदार थे बनिस्बत उन बच्चों के जो उस उम्र में ख़ामोश रहते थे.
    अगर आप भी अपनी याददाश्त को तेज़ करना चाहते हैं, काम पर ज़्यादा ध्यान देना चाहते हैं, तो ख़ुद अपने आपके दोस्त बनिए और अपने आपसे बाते कीजिए.
    शुरूआत में यह थोड़ा अजीब लगेगा. लेकिन, जब इसके फ़ायदे आपके सामने आएंगे, तो यक़ीन जानिए आप ख़ुद हैरान रह जाएंगे.

    27 सित॰ 2017

    मेरे जैसा कोई नही,(No one like me)

    By: Successlocator On: सितंबर 27, 2017
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  • "आप धरती मे जन्मे अब तक के सबसे महान पुरुषो में से एक है"।(you are the greatest person ever born in the planet) हा दोस्तो ये बात सच है बस अपने आपको पहचानने की देर है,जब तक आप अपने आप को पहचानते नही तब तक आपकी जिंदगी एक जानवर से ज्यादा कुछ नही।जिस प्रकार जानवर सुबह से लेकर शाम तक सिर्फ और सिर्फ अपने पेट की भूख मिटाने के लिए भटकता है,उसे उससे ज्यादा और किसी वस्तु की चाह नही होती,उसके मरने तक का सफर ऐसा ही रहता है।ठीक उसी प्रकार हम भी सुबह उठे और शाम तक पेट की भूख मिटाने के लिए दौड़ते रहे और फिर सुबह हुई तो फिर वही काम और ऐसा करते करते हम अपनी आखिरी पड़ाव में भी पहुँच जायेगे,उस समय जब हम अपने सम्पूर्ण जीवन का विश्लेषण करेंगे तब हमारे पास असंतोष के सिवाय और कुछ नही रहेगा।
    क्यों दोस्तो क्या पृथ्वी पर जन्मे सभी महान व्यक्तियों का जीवन ऐसा था जैसा हम जी रहे है बिलकुल भी नही, उनकी हर सुबह एक योजना(plan) के साथ होती है और रात उस योजना को खत्म होने या उस पर ही कार्य करते करते होती है,बस यही मामूली सा अंतर है,इसके अलावा कुछ भी विशेष नही है उनके पास उनके पास भी दो कान, एक नाक, दो हाथ, दो पैर,है उनके पास कोई जादू की छड़ी नही है उनका जुनून ही वो जादू की छड़ी है,जो हम भी पैदा कर सकते है।
    वैसे भी दोस्तो हमे किसी के भी जैसा बनने की जरूरत नही है हम अपने आप मे महान है क्योंकि जब हम दुनिया के सबसे महान व्यक्तियों में से एक है तो हम किसी और जैसे तो बिल्कुल भी नही हो सकते जो दूसरों के जैसा बनने की कोशिश करते है वे उनके जैसे तो नही बन पाते बल्कि अपने अस्तित्व को भी भूल जाते है और इस भीड़ में कही गुम हो जाते है,जो भी व्यक्ति किसी भी क्षेत्र में अग्रणी है उन्होंने कभी के जैसा बनने का प्रयाश नही किया और न ही किसी के साथ प्रतिस्पर्धा में रहे वे सिर्फ अपने आप से ही प्रतिस्पर्धा करते रहे हर बार वे जैसे है उससे बेहतर बनाने का प्रयास करते रहेऔर एक दिन इतने बेहतर बन गए कि दुनिया उन्हें सलाम करने लगी।
    ऐसी मानसिकता भी मन मे लाने के लिए आपको कुछ करना है वो मैं आपको बताता हूं रोज सुबह उठकर आईने में अपने आपको देखकर इतना कहना है" मैं धरती मे जन्मे अब तक के सबसे महान पुरुषो में से एक है"।(I am the greatest person ever born in the planet) .दिन भर ये बात आपको याद रखनी है जब भी निराश आये बस इतना मैन में दोहराते जाए जब तक मन शांत न हो जाये।
    ये सभी बाते जिस दिन जान जायेगे उस दिन अकल्पनीय चमत्कार होगा उस दिन जो महानता आप तक ही सीमित थी दुनियाभर में फैल जाएगी।दोस्तो आपको मेरी पोस्ट कैसी लगी जरूर लिखे और आप कमेंट्स के माध्यम से हमसे बाते भी कर सकते हैं और अपने सवाल भी पूंछ सकते हैं।

    19 सित॰ 2017

    बड़े बदलाव की छोटी शुरुआत।(small start of big change)

    By: Successlocator On: सितंबर 19, 2017
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  • एक लड़का सुबह सुबह दौड़ने को जाया करता था | आते जाते वो एक बूढी महिला को देखता था |वो बूढी महिला तालाब के किनारे छोटे छोटे कछुवों की पीठ को साफ़ किया करती थी |
    एक दिन उसने इसके पीछे का कारण जानने की सोची |
    वो लड़का महिला के पास गया और उनका अभिवादन कर बोला ” नमस्ते आंटी !
    मैं आपको हमेशा इन कछुवों की पीठ को साफ़ करते हुए देखता हूँ
    आप ऐसा किस वजह से करते हो ?”  महिला ने उस मासूम से लड़के को देखा और  इस पर लड़के को जवाब दिया ” मैं हर रविवार यंहा आती हूँ और इन छोटे छोटे कछुवों की पीठ साफ़ करते हुए सुख शांति का अनुभव लेती हूँ |क्योंकि इनकी पीठ पर जो कवच होता है उस पर कचरा जमा हो जाने की वजह से इनकी गर्मी पैदा करने की क्षमता कम हो जाती है
    इसलिए ये कछुवे तैरने में मुश्किल का सामना करते है | कुछ समय बाद तक अगर ऐसा ही रहे तो ये कवच भी कमजोर हो जाते है

    इसलिए कवच को साफ़ करती हूँ |

    यह सुनकर लड़का बड़ा हैरान था | उसने फिर एक जाना पहचाना सा सवाल किया और बोला “बेशक आप बहुत अच्छा काम कर रहे है लेकिन फिर भी आंटी एक बात सोचिये कि इन जैसे कितने कछुवे है जो इनसे भी बुरी हालत में है जबकि आप सभी के लिए ये नहीं कर सकते
    तो उनका क्या क्योंकि आपके अकेले के बदलने से तो कोई बड़ा बदलाव नहीं आयेगा न |
    महिला ने बड़ा ही संक्षिप्त लेकिन असरदार जवाब दिया: भले ही मेरे इस कर्म से दुनिया में कोई बड़ा बदलाव नहीं आयेगा
    लेकिन सोचो इस एक कछुवे की जिन्दगी में तो बदलाव आएगा ही न | तो क्यों हम छोटे बदलाव से ही शुरुआत करें |

    अगर आप कोई लक्ष्य की तरफ़ बढ़ रहे हो तो तब तक ना रुको जब तक आप इसे प्राप्त ना कर लो । क्योंकि जब आप उस लक्ष्य को प्राप्त कर लोगे तो उसे जो आपको नींद आयेगी वो ऐसी होगी जो आपको कभी नही मिली थी

    कभी कभी दोस्तो के साथ स्कूल को बीच में छोड़कर भागना भी अच्छा रहता है - उनका कहना था कि अगर आपके अच्छे मार्क्स है तो वो आपको बड़े होने पर इतनी खुशी नही देंगे जितनी आपके दोस्तो के साथ बिताये वो अनमोल दिन देंगे ।

    कई लोगो को अपना लक्ष्य पत्ता होता है फिर भी वो टीवी ,इंटरनेट, सोशियल मीडीया ,आदि कि तरफ ज्यादा ध्यान देते है और अपना टाइम खराब कर लेते है। इसलिये आप इससे बचो और अपने लक्ष्य को प्राप्त करो ।
    हम कोई भी कार्य करते है तो हमको पता है किसी भी कार्य के बीच कठिनाई भी आयेगी , लेकिन आप इस परेशानी का हल निकाले और इसे हल करे। परेशानिया अपने आप चली जायेगी।

    18 सित॰ 2017

    चंद्रमा और मूर्ख बंदर

    By: Successlocator On: सितंबर 18, 2017
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  • एक रात एक छोटा बंदर कुँए पर पानी पीने के लिए गया. जब उसने कुँए में झाँककर देखा तो उसे पानी में चंद्रमा झिलमिलाता हुआ दिखाई दिया. यह देखकर वह बहुत डर गया और दूसरे बंदरों को यह बात बताने के लिए दौड़ा.

    दोस्तों! वह चिल्लाया चंद्रमा पानी में गिर गया है।

    कहाँ! किस जगह! दूसरे बंदरों ने पूछा. मेरे साथ आओ! मैं तुम्हें दिखलाऊँगा! छोटे बंदर ने कहा.

    छोटा बंदर उन्हें कुँए तक ले गया. वे सभी झुंड बनाकर कुँए में झाँकने लगे.

    अरे हाँ! चंद्रमा तो पानी में गिर गया है, वे चिल्लाये हमारा सुंदर चंद्रमा कुँए में गिर गया! अब रात में अँधेरा हो जायेगा और हमें डर लगेगा! अब हम क्या करें!,

    मेरी बात सुनो एक बूढ़े बंदर ने कहा हम सिर्फ एक ही काम कर सकते हैं, हमें चंद्रमा को कुँए से निकालने की कोशिश करनी चाहिए,

    हाँ! हाँ! ज़रूर! सभी उत्साह से बोले हमें बताओ कि ऐसा कैसे करें,

    वो देखो कुँए के ऊपर पेड़ की एक डाली लटक रही है. हम सभी उससे लटक जायेंगे और चुटकियों में चंद्रमा को कुँए से निकाल लेंगे,

    बहुत अच्छा तरीका है, सब चिल्लाये चलो डाली से लटकें



    देखते ही देखते बहुत सारे बंदर उस पतली सी डाली से लटक गए और कुँए के भीतर झूलने लगे. उनमें से एक बंदर कुँए के भीतर पानी में हाथ डालकर चंद्रमा को निकालनेवाला ही था कि ऊपर पेड़ पर डाली चटक गई. सभी मूर्ख बन्दर कुँए में गिरकर पानी में डूब गए. चंद्रमा आकाश में स्थिर चमकता रहा.

    कुछ शायरियों से समझे जिंदगी को।

    1.हम फूल तो नहीं, पर महकना जानते है,

    बिना रोये, गम भुलाना जानते है

    लोग खुश होते है हमसे

    क्योकि, हम बिना मिले ही रिश्ते निभाना जानते है।


    2.क्या खूब लिखा है, किसी ने

    तू कर ले हिसाब, अपने हिसाब से,

    लेकिन ऊपर वाला लेगा हिसाब, अपने हिसाब से

    जिंदगी मे हम कितने सही और कितने गलत है,

    ये सिर्फ दो ही शक्स जानते है

    परमात्मा और अपनी अंतरआत्मा।



    3.किसीको गलत समझने से पहले

    एक बार उसके हालात समझने की कोशिश जरुर करे

    हम सही हो सकते है,

    लेकिन मात्र हमारे सही होने से सामने वाला गलत नही हो सकता।



    4.जिन्दगी एक हसीन ख़्वाब है

    जिसमें जीने की चाहत होनी चाहिये

    गम खुद ही खुशी में बदल जायेंगे

    सिर्फ मुस्कुराने की आदत होनी चाहिये।



    5.होगी किसी की ख्वाहिश चांद सितारे पाने की

    अपनी तो ख्वाहिश है खुद सितारा बनने की

    कोई चाहता होगा किसी को दिल में बसाना

    अपनी तो चाहत हर दिल में बस जाने की।



    6.समय की कीमत अखबार से पूछो

    जो सुबह चाय के साथ होता है वही रात को रद्दी हो जाता है

    जिंदगी में जो कुछ भी हासिल करना हो उसे वक्त पर हासिल करो

    क्योंकि जिंदगी मौके कम और अफसोस ज्यादा देती है।

    17 सित॰ 2017

    भविष्य के बारे में ज्यादा न सोचें जानिए क्यों?

    By: Successlocator On: सितंबर 17, 2017
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  • एक बार एक देश के राजा ने मुल्ला नसीरूदीन को बुलाया और उस से पूछा कि तुम्हारे बारे में मैंने बहुत सुना है कि तुम बहुत चालाक हो इसलिए क्या तुम एक काम कर सकते हो जो मैं तुमसे कहने वाला हूँ।

    इस पर मुल्ला ने कहा मैं कुछ भी कर सकता हूँ बस आप एक बार आज्ञा दें। इस पर राजा ने कहा क्या तुम अपने इस प्रिय गधे को पढ़ना सिखा सकते हो इस पर मुल्ला ने कहा, हाँ क्यों नहीं मैं इसे आराम से सिखा सकता हूँ | इस पर राजा ने कहा ‘बकवास मत करो ‘ क्या गारंटी है तुम ऐसा कर सकते हो |

    मुल्ला ने जवाब दिया कि एक काम कीजिये आप मुझे पचास हजार स्वर्ण मुद्राएँ दीजिये उसके बाद मैं गारंटी लेता हूँ कि आठ साल के अंदर मैं इस गधे को पढना सिखा सकता हूँ इस पर राजा ने कहा अगर तुम ऐसा कर पाने में सफल नहीं होते हो तो मैं तुम्हे जेल में डाल दूंगा। मुल्ला ने हामी भर ली और वंहा से चला गया।

    घर आने के बाद मुल्ला से उसके एक दोस्त ने कहा ‘ मुल्ला तुमने ये क्या किया ? सब जानते है तुम ऐसा नहीं कर सकते फिर भी तुमने राजा को यह वचन दे दिया है क्या तुम्हे जेल जाने से डर नहीं लगता मुल्ला ने उत्तर दिया तुम इतना ज्यादा मत सोचो।

    क्योंकि आठ साल में तो या तो हमारा राजा नहीं रहेगा और हो सकता है मेरा गधा भी तब तक नहीं रहे लेकिन फिर भी अगर ऐसा होता है कि सात साल तक दोनों में से कोई भी नहीं जाता तो मेरे पास पूरा एक साल है कि मैं सोच सकता हूँ राजा की सज़ा से कैसे बचा जा सकता है।
    सोच ये ना रखें की मुझे रास्ता अच्छा मिले, बल्कि ये होना चाहिए कि मैं जहां पाव रखूं वो रास्ता अच्छा हो जाए. फर्क सिर्फ सोच का होता हैं सकारात्मक या नकारात्मक वरना सीढियां वही होती है जो किसी के लिए ऊपर जाती हैं, और किसी के लिए नीचे आती हैं साधारण और श्रेष्ठ में सिर्फ इतना सा अंतर है की साधारण उसको चुनते है जो आसान है लेकिन श्रेष्ठ उसे चुनता है जो मुश्किल है कोई फर्क नहीं पड़ता की लोग आपके बारे में क्या सोचते है, फर्क तो इससे पड़ता है की आप अपने बारे में क्या सोचते है  सफलता हमेशा अच्छे विचारों से आती हैं और अच्छे विचार अच्छे लोगों के सम्पर्क से आते हैं.

    16 सित॰ 2017

    प्रतापी राजा मान सिंह और उनके चार अड़ियल घोड़ो की प्रेरणादायक कहानी।

    By: Successlocator On: सितंबर 16, 2017
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  • राजा मानसिंह बहुत ही चिंता में पड़ गए थे। उनके चार अड़ियल घोड़े किसी कीमत पर तालिम सीख ही नहीं रहे थे। देश परदेश से कई तालिमार्थी आए और गए। कुछ लोग तो इसी चक्कर में हड्डियाँ भी तुड़वा बैठे। पर जंगली घोडे टस से मस नहीं हो रहे थे। कुछ दिन बाद राजा मानसिंह नें ऐलान कर दिया की जो भी इन घोड़ों को तालिम दे पाएगा उसे में एक घड़ा भर के सोने के सिक्के दूंगा। इनाम की खबर सुन कर एक नौजवान आगे आया। उसने घोड़ों को तालिम देने की चुनौती स्वीकार कर ली। और यह शर्त रखी की यह कार्य होने तक उसे घोड़ों के साथ दूर अकेला छोड़ दिया जाये।  

    करीब तीन माह तक वह आदमी घोड़ों को ले कर किसी अंजान जगह चला गया। अब राजा मानसिंह को लगा की वह नौजवान वापिस नहीं आएगा। और अब तक घोड़े उसके कब्ज़े से भाग भी चुके होंगे। तभी उन्हे घोड़ों के तलवों (खुर) की आवाज़ सुनाये देने लगी। उनके चारों घोड़े एक कतार में आराम से चलते हुए उसी के महल की और आ रहे थे। और उन पर लगाम और गद्दी भी लगी हुई थी।

    इसका मतलब साफ था की वह चारो घोड़े अब तालिम ले चुके थे। राजा मानसिंह यह देख कर अति प्रसन्न हुए। उन्होने उसी वक्त घोड़ो को अपने कब्ज़े में लिया और उस नवयुवक को उसका इनाम दे दिया।

    फिर राजा मानसिंह नें उसे पूछा की तुम इस कार्य में सफल कैसे हुए। यह घोड़े तो अच्छों अच्छों की हड्डियाँ तुड़वा चुके हैं। तब उस नौजवान नें कहा की, मैंने इन घोड़ो को मुक्त विचरने दिया। जिस से इनका तनाव दूर हो गया।

    फिर धीरे धीरे इन के करीब से गुजरने लगा ताकि यह मेरी मौजूदगी स्वीकार करना सीख लें। उसके बाद मै इनहि के चरने के समय पास बैठ कर भोजन करता, जब यह आँख बंद कर के खड़े खड़े सुस्ताते तो मै भी इनके पास खड़ा खड़ा आंखे बंद कर के सोने का नाटक करता।

    जब यह घोड़े मस्ती में खेलते दौड़ते तो मै भी इनके साथ उछलता कूदता। इस तरह मैंने धीरे धीरे इन सब का विश्वास जीता। फिर इन पर गद्दी बिछाना शुरू किया। पहले यह जटक देते थे। पर आहिस्ता आहिस्ता इन्हे मेरी आदत हो गयी।

    फिर में लगाम बांधने लगा। तो यह थोड़े विचलित हुए। लेकिन इन्हे इतना भरोसा हो चुका था की में इन्हे नुकसान नहीं पहुंचाऊंगा तो मै इस कार्य में भी सफल हुआ। धीरे धीरे मैंने इन पर सवारी करना शुरू किया।

    कई बार गुस्से में इनहोने मुझे गिरा भी दिया। पर मैंने सैयम खो कर इन से दूरव्यवहार नहीं किया। बस विनम्रता से प्रयास करता रहा। और अंत में मै इन्हे अन्य लोगों के पास ले जा कर उनको भी सवारी करवाना शुरू किया। जिस से इन घोड़ों को लोगों का डर भी निकल गया। अब यह घोड़े पूरी तरह से तालिमबद्ध और शांत हो चुके हैं। मेरा कार्य खत्म हुआ।

    राजा मानसिंह इस नौयुवक की चतुराई भरी बातें सुन कर बहुत खुश हुए। उन्होनेनें उस युवक को एक और सोने के सिक्कों से भरा हुआ घड़ा दिया। और उसे अपने घोड़ों के अस्तबल में प्रमुख कर्मचारी बनाने की पेशकश भी करी। वार्ता समाप्त।

    कहानी का सार – मानवी के मन के अंदर भी चार घोड़े होते हैं। मानस, चिंता, अहम और बुद्धि। इन चार तत्व को काबू करना है तो बहुत सैयम से काम लेना चाहिए। जैसे इस कहानी के नौजवान नें लिया था।

    दोस्तों अगर आप भी इस कहानी के हीरो जैसे सफल होना चाहते हैं तो अपने मन से दोस्ती कर लो। पहले खुद पर विश्वास करो। अपने मन से positive बात करो। खुद को खुश करो। यानि फिल्म देखो, घूमने जाओ, जो इन्सान अच्छा लगे उसके पास जाओ। खुद को खुश करो।

    ऐसा करने से आप का चित्त प्रसन्न होगा। और आप के मुश्किल से मुश्किल काम ऐसे चुटकियों में सफल होने लगेंगे। पोस्ट अच्छी लगे तो पोस्ट Like करो, पोस्ट Share करो। और हमें Subscribe करना भूलना नहीं। धन्यवाद।

    15 सित॰ 2017

    नरेंद्र मोदी का संघर्षों भर जीवन।

    By: Successlocator On: सितंबर 15, 2017
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  • दोस्तों अगर मैं आपसे एक सवाल पूछूं क्या नरेन्द्र मोदी जी को अगले प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं तो आपका जवाब क्या होगा ?



    यकीन मानिए 80% लोग यह चाहते हैं कि आगे होने वाले लोकसभा चुनाव में नरेन्द्र मोदी ही प्रधानमंत्री बने। और आप अगर उनके बारे में थोड़ा बहुत भी जानते हैं, उन्होंने अपने पूरे जीवन में क्या-क्या किया और कैसे वो आगे बढ़े तो आपको उनकी बातें सुनकर गर्व होगा।

    आखिर कैसे वे एक चाय बेचने वाले लड़के से गुजरात के मुख्यमंत्री बने और कैसे वहां की जनता ने उन्हें चार बार लगातार वहां का मुख्यमंत्री चुना। देश में या यूँ कहें पूरे विश्व में ऐसी बहुत ही कम जगह है जहाँ पर एक ही व्यक्ति को लगातार चुनाव में जीतता है।

    नरेन्द्र मोदी जी के पिता दामोदरदास मूलचंद मोदी एक बहुत गरीब परिवार से थे। दामोदर दास जी की चाय की दुकान थी जिसमें नरेन्द्र मोदी बचपन में उनकी मदद किया करते थे। और बाद में वो दुकान नरेंद्र मोदी जी अपने बड़े भाई के साथ चलाने लगे। मोदी जी बचपन में नाटक और राजनीती में बहुत दिलचस्प थे।
    द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जब सेना के जवान स्टेशन पर आते थे तो नरेन्द्र मोदी जी उनकी सेवा करते थे। उनको सहारा देते थे उनका उपचार करते थे और बहुत सी चीजें उनको सही करने के लिए करते थे। मोदी जी ने अपनी पढ़ाई गुजरात यूनिवर्सिटी से पूरी की और उसके आगे की पढ़ाई डेल्ही वर्सिटी से पूरी की। नरेन्द्र मोदी जी गुजरात से लगातार चार बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं। और दो हजार चौदह के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने कुल सीटों में से दो सौ बहत्तर सीटें जीतकर इतिहास रच दिया।और उसके बाद वे भारत के पंद्रहवें प्रधानमंत्री बने। मोदी जी दुनिया के सबसे प्रभावशाली नेताओं की लिस्ट में नौवें स्थान पर हैं और यह स्थान उनको विश्व प्रसिद्ध फोर्ब्स पत्रिका में दिया गया है।

    14 सित॰ 2017

    बुरा समय आने पर आपकी सहायक बनती हैं ये बातें, जानिए जीवन के इन नियमों को

    By: Successlocator On: सितंबर 14, 2017
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  • कई बार हमें अपने जीवन में असफलता मिलती है और हम निराश हो जाते हैं। आज हम आपको कुछ ऐसी जानकारी यहां दे रहें हैं जो असफल होने पर भी आपको जीवन से असंतुलित होने नहीं देंगी। जीवन में सफलता तथा असफलता साथ-साथ ही चलती है। कभी सफलता मिलती है तो खुशी होती है, पर जब असफलता मिलती है तब बहुत से लोग बहुत ज्यादा दुखी हो जाते हैं। वास्तव में असफलता भी सफलता की ही शुरुआत होती है। आज हम आपको जीवन के कुछ नियम यहां बताने जा रहें हैं जिनको जानने के बाद आप असफलता मिलने पर या बुरा समय आने पर अपने आप को संतुलित रख सकते हैं।वॉरेन बफे दुनिया के सबसे बड़े स्‍टॉक इन्‍वेस्‍टर हैं। उन्होंने कहा था कि बुरा समय सबके जीवन में आता ही है, पर उसको झेलने के कुछ रूल्स हैं। यदि आप इन रूल्स को फॉलो करते हैं तब आप बुरे समय के


    दुष्परिणाम से बच जाएंगे। बुरे समय के बाद में अच्छा समय भी आता है और वह आपको जीवन की नई-नई ऊचाइंयों पर ले जाता है। आज हम आपको इन रूल्स से ही मुखातिब करा रहें हैं, जो आपको जीवन में संभाले रखेंगे

    1 – कई लोग जीवन में असफल होने पर काफी परेशान हो जाते हैं। ऐसे में आप ध्यान रखें कि मुश्किल तथा नाकामी दोनों ही जीवन के हिस्से हैं। यदि आप इस बात को ध्यान रखेंगे तो यह बात आपको जीवन की मुश्किल परिस्थितियों में टूटने नहीं देंगे।

    2 – कई लोगों के जीवन में हालात समान नहीं रहते। ऐसे लोगों को यह ध्यान रखना चाहिए हर समय की तरह यह बुरा समय भी गुजर जाएगा। यह शब्द आपको बुरे हालत में भी हौसला बनाए रखने का संदेश देते हैं।

    3 – चिंता करने तथा ज्यादा सोचने से कुछ नहीं बदलता है। यह सोच आप में नया जोश पैदा करेगी तथा आपको नए सिरे से काम करने लिए प्रेरित करेगी।

    4 – कई लोग बुरे समय को देखते हुए अपने जीवन को रोक देते हैं। ऐसे लोगों को चिंता बहुत हो जाती है। इस प्रकार के लोगों को सोचना चाहिए जो होना होगा वह होकर रहेगा, आगे बढ़ते रहों। यह सोच इस प्रकार के लोगों को आगे बढ़ाती है तथा उनको कामयाबी दिलाती है।

    13 सित॰ 2017

    अब्राहिम लिंकन एक विचारधारा।

    By: Successlocator On: सितंबर 13, 2017
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  • अमरीका के 16वें राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन दास प्रथा खत्म करने जैसे बड़े-बड़े कामों के लिए जाने जाते हैं। एक बार वह कांग्रेस में हिस्सा लेने के लिए जा रहे थे, तभी रास्ते में उन्होंने एक असहाय सूअर को गहरे कीचड़ में धंसा देखा। उसकी पीड़ा ने उन्हें अधीर कर दिया। उन्होंने चालक से तुरंत गाड़ी रोकने के लिए कहा और जानवर को बाहर निकालने के लिए गाड़ी से उतरने लगे।
    यह देखकर चालक ने राष्ट्रपति से कहा, ‘‘आप जरूरी काम से कांग्रेस जा रहे हैं। ऐसा मत कीजिए, आपके कपड़े गंदे हो जाएंगे।’’
    इस पर लिंकन ने जवाब दिया, ‘‘सूअर का जीवन मेरे लिए ज्यादा महत्वपूर्ण है।’’
    लेकिन उनकी इस बात से चालक सहमत नहीं हुआ और बोला, ‘‘आप रहने दीजिए। मैं उस जानवर को निकालता हूं।’’
    ऐसा कह कर वह कीचड़ से सूअर को बाहर निकालने की कोशिश करने लगा। कीचड़ बहुत ज्यादा था और सूअर उसमें से निकल नहीं पा रहा था। अब लिंकन से रहा नहीं गया और वह भी कीचड़ में उतर पड़े। राष्ट्रपति और चालक की बहुत कोशिशों के बाद ही सूअर बाहर निकल सका। इस मशक्कत में लिंकन के सारे कपड़े कीचड़ से सन गए। चालक ने उनसे वापस घर चलकर कपड़े बदलने का निवेदन किया लेकिन लिंकन बोले, ‘‘कांग्रेस में समय से पहुंचना ज्यादा जरूरी है।’’
    वह कांग्रेस पहुंचे तो सभी उनकी हालत देखकर हैरान थे। जब यह पता लगा कि लिंकन ने किस तरह असहाय जानवर की रक्षा की तो क्या विरोधी और क्या समर्थक सभी उनके मुरीद हो गए। एक छोटे-से किसान के बेटे और अमरीका के सबसे लोकप्रिय राष्ट्रपति लिंकन की ख्याति का मूल था- उदारता और दूसरों की सहायता करने की प्रवृत्ति। लिंकन के इस सूत्र को याद रखा जाए तो हर कोई लोकप्रियता प्राप्त कर सकता है।

    12 सित॰ 2017

    वारेन बफ़ेट एक सफल निवेशक के टिप्स।

    By: Successlocator On: सितंबर 12, 2017
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  • वारेन बुफेट दुनिया के सफल निवेशको में गिने जाते है। वो दुनिया के सबसे धनी व्यक्तियों में से एक है, जिनकी सम्पदा माइक्रोसॉफ्ट के बिल गेट्स के समकक्ष है।

    आइए पढ़ते है, उनके कुछ बेहतरीन शब्दों को।


    यदि आप उन चीजों को खरीदते हैं, जिनकी आपको जरूरत नहीं है तो शीघ्र ही आपको उन चीजों को बेचना पड़ेगा जिनकी आपको जरूरत है।

    एकल आय पर निर्भर कभी नहीं रहना चाहिये। दूसरा स्रोत बनाने के लिए निवेश करें।

    मुझे हमेशा से पता था कि मैं अमीर बनने जा रहा हूँ। मुझे नही लगता कि मैंने एक मिनट के लिए भी इस बात पर शक किया।

    नियम नम्बर एक, कभी पैसा मत गंवाइये। नियम नम्बर दो, कभी नियम नम्बर 1 मत भूलिए।

    हमेशा लम्बी अवधि के लिए निवेश करें।

    एक टोकरी में अपने सभी अंडे मत डालो।

    ईमानदारी बहुत महंगा उपहार है। इसकी घटिया लोगों से उम्मीद मत करो।

    कोई आज पेड़ की छाया में बैठा है तो इस वजह से कि किसी ने बहुत समय पहले ये पेड़ लगाया होगा।

    एक शानदार कम्पनी को उचित कीमत पर खरीदना एक उचित कम्पनी को शानदार कीमत पर खरीदने से ज्यादा अच्छा है।

    कोई आज पेड़ की छाया में बैठा है तो इस वजह से कि किसी ने बहुत समय पहले ये पेड़ लगाया होगा।

    मैं एक बेहतर निवेशक हूँ क्योंकि मैं एक व्यापारी हूँ और एक बेहतर व्यापारी हूँ क्योंकि मैं एक निवेशक हूँ।

    वाल स्ट्रीट ही एक ऐसी जगह है, जहाँ रोल्स रोयस से चलने वाले लोग सबवे से जाने वाले लोगों से सलाह लेने आते हैं।

    11 सित॰ 2017

    भाग्यशाली कौन है?

    By: Successlocator On: सितंबर 11, 2017
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  • दोस्तों आज मैं आपको भाग्यशाली और सफल लोगों के कुछ लक्षण बताने जा रहा हूं जिनका जिक्र महाभारत में विदुर जी ने किया हुआ है। अगर आपके पास भी है ये लक्षण तो आप भी हो सकते हैं जीवन में सफल। अगर आप जीवन में सफल होना चाहते हैं तो महात्मा विदुर जी ने जो बातें उनकी नीतियां में बताई है उन का अवश्य पालन करें। तो आइए जानते हैं उन नीतियों के बारे में।

    विदुर जी कहते हैं कि हमेशा स्वस्थ रहना मनुष्य जीवन का सबसे बड़ा वरदान होता है। जो मनुष्य ज्यादा से ज्यादा बीमारियों की गिरफ्त में रहता है उसे कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बीमार पुरुष कोई भी काम ठीक से नहीं कर पाता है ऐसे मनुष्य को अपने शरीर के नुकसान के साथ-साथ धन का भी नुकसान उठाना पड़ता है इसलिए कहा जाता है की बीमारियों से बचे रहना सबसे बड़ा सुख होता है।

    दूसरी बात है किसी से उधार ना लेना। मनुष्य को अपनी आय के अनुसार ही अपनी इच्छा रखनी चाहिए। कई लोगों का मन उनके वश में नहीं होता है और वह अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए दूसरों से उधार लेते हैं। दूसरों से उधार ले कर पाई हुई सुविधाएं कभी सुख नहीं देती हैं और कभी-कभार लोग लिए हुए कर्ज को चुका नहीं पाते हैं और उसके साथ-साथ अपने परिवार को भी परेशानी में डाल देते हैं। जो मनुष्य हमेशा क़र्ज़ से बचा रहता है वह सबसे ज्यादा भाग्यशाली होता है।

    तीसरी बात है अपने देश में रहना। कई कारणों से कई लोग अपना देश छोड़कर किसी ओर देश में रहने लगते हैं। ऐसा करने का कारण चाहे जो भी हो लेकिन जो अपने देश में रहने का सुख है वह और किसी देश में नहीं मिल सकता है। जो मनुष्य अपना पूरा जीवन अपने लोगों और अपने देश में बिताता है वह सबसे ज्यादा सुखी और भाग्यशाली होता है।

    चौथी बात है अच्छे लोगों की संगति होना। जो मनुष्य अच्छे और विद्वान लोगों से दोस्ती रखता है और उनके साथ अपना समय बिताता है वह बहुत ही सुखी माना जाता है। बुरे लोगों की संगति का परिणाम भी बुरा होता है। जो मनुष्य दुष्ट और हिंसक लोगों के साथ मेल मिलाप रखता है उसे आगे चलकर कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है इसलिए जिसकी दोस्ती अच्छे लोगों के साथ होती है वह सबसे अधिक भाग्यशाली होता है।

    पांचवी बात है जीवन यापन के लिए किसी पर निर्भर रहना। जो मनुष्य अपना और अपने परिवार का जीवन यापन करने के लिए खुद धन कमाने के काबिल होता है वह बहुत ही सुखी माना जाता है। कई लोग अपना जीवन चलाने के लिए दूसरों पर निर्भर रहते हैं ऐसे लोगों का ना तो कोई स्वाभिमान होता है और ना ही दूसरों की नजर में सम्मान इसलिए जो खुद मेहनत करके अपना जीवन चलाता है उसे सबसे अधिक सुखी माना जाता है।

    छठा है निडर होकर जीना। जिसकी अपने से ज्यादा ताकतवर इंसान से दुश्मनी होती है तो वह उसी दुश्मनी के बारे में सोचता है। ताकतवर इंसान उसे और उसके परिवार को किसी तरह का भी नुकसान पहुंचा सकता है। किसी बात या किसी मनुष्य से डरने वाला मनुष्य कभी भी अपने जीवन का आनंद नहीं ले पाता है इसलिए जो व्यक्ति बिना भय के अपना जीवन जीता है वह सबसे अधिक सुखी माना जाता है।

    तो दोस्तों यह थी वह बातें जिन के बारे में विदुर जी ने बताया है। इसको पढ़ने के लिए मैं आप सभी का धन्यवाद करता हूं। यदि आपको हमारी यह पोस्ट अच्छी लगी हो तो कृपया इसे लाइक कीजिए और ऐसी ही पोस्ट पाने के लिए हमें फॉलो जरुर कीजिए धन्यवाद।

    10 सित॰ 2017

    अब्दुल कलाम के कुछ प्रेरक वक्तव्य

    By: Successlocator On: सितंबर 10, 2017
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  • दुनिया की इस भीड़ में हमें अलग दिखने के लिए कुछ ना कुछ अलग करना पड़ेगा और साथ ही साथ कुछ चीज़ो का ध्यान रखना पड़ेगा उन में से सबसे पहला ह समय

    हम चाहें तो अपने आत्मविश्वास और मेहनत के बल पर अपना भाग्य खुद लिख सकते है और अगर हमको अपना भाग्य लिखना नहीं आता तो परिस्थितियां हमारा भाग्य लिख देंगी|

    विश्वास

    विश्वास में वो शक्ति है जिससे उजड़ी हुई दुनिया में प्रकाश लाया जा सकता है| विश्वास पत्थर को भगवान बना सकता है और अविश्वास भगवान के बनाए इंसान को भी पत्थर दिल बना सकता है|

    सोच

    बारिश की दौरान सारे पक्षी आश्रय की तलाश करते है लेकिन बाज़ बादलों के ऊपर उडकर बारिश को ही avoid कर देते है। समस्याए common है, लेकिन आपका नजरिया इनमे difference पैदा करता है।

    हार ना मानना

    बीच रास्ते से लौटने का कोई फायदा नहीं क्योंकि लौटने पर आपको उतनी ही दूरी तय करनी पड़ेगी जितनी दूरी तय करने पर आप लक्ष्य तक पहुँच सकते है|

    सफलता

    दूर से हमें आगे के सभी रास्ते बंद नजर आते हैं क्योंकि सफलता के रास्ते हमारे लिए तभी खुलते जब हम उसके बिल्कुल करीब पहुँच जाते है|

    समय

    आप यह नहीं कह सकते कि आपके पास समय नहीं है क्योंकि आपको भी दिन में उतना ही समय (24 घंटे) मिलता है जितना समय महान एंव सफल लोगों को मिलता है|

    जीवन

    जब तुम पैदा हुए थे तो तुम रोए थे जबकि पूरी दुनिया ने जश्न मनाया था। अपना जीवन ऐसे जियो कि तुम्हारी मौत पर पूरी दुनिया रोए और तुम जश्न मनाओ।

    लाइन अच्छी लगी हो तो शेयर जरूर करे

    9 सित॰ 2017

    जिंदगी में इन्हें महसूस कर देखिए(feel these things in life)

    By: Successlocator On: सितंबर 09, 2017
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  • 1.जब नौ महीने अपने कोख में आपका बोझ उठाने वाली माँ आपको बोझ लगने लगे तो आपको समझ लेना चाहिए, कि आप वैचारिक फिसलन भरे दौर से गुजर रहे हैं।आप स्वार्थी और एहसान फरामोश हो गए हैं।

    2.पहला प्यार हमेशा मीठी याद बनकर हमारे दिल में रहता है, चाहे हमने उसे पाया हो या नहीं।

    3.अगर आपको भगवान पर विश्वास नहीं है, तो लोगों पर विश्वास करके देखिए।फिर आप भगवान पर विश्वास करने लगेंगे।

    4.अगर आप खुद को दुर्भाग्यशाली समझते हैं, तो कोई एक काम चुनिए… जो आप करना चाहते हैंऔर जिसे आप कर सकते हैं। फिर पूरी ईमानदारी से तन-मन-धन लगाकर उस काम को करना शुरू कर दीजिए, कुछ महीनों या कुछ सालों बाद आप सफल होकर सौभग्यशाली बन जायेंगे।क्योंकि हमारे कर्म हीं हमें सौभाग्यशाली या दुर्भाग्यशाली बनाते हैं।

    5.बड़ी दूरी तय करने का लक्ष्य रखने से यह फायदा होता है, कि अगर हम छोटी दूरी भी तय कर लें।तो भी दूसरों से बहुत आगे निकल जाते हैं।

    6.अगर आप किसी क्षेत्र में बहुत बड़ी सफलता पाना चाहते हैं। तो आपको अपने काम को वैसे हीं करना होगा जैसे : एडिसन ने 1600 अविष्कार करते वक्त काम किए होंगे। जैसे बिल गेट्स ने अपने पूरे जीवन काम किया है।जैसे सचिन, गांगुली ने अपने कैरियर में क्रिकेट खेला। जैसे टाटा, अम्बानी Business करते हैं।जैसे सरदार पटेल ने राजनीति की।

    7.अगर आपने अपने माता-पिता को वृद्धाश्रम में छोड़ने का निर्णय ले लिया हो, तो उन्होंने आप पर जितने रुपए खर्च किए हैं।उन रुपयों की Value आज जितने रुपए होंगे। कृपया उनके वो सारे रुपए और उन रुपयों पर आजतक उन्हें जितना ब्याज मिलता वो सब उन्हें लौटा दीजिए।

    8.भगवान हमारी हर Wish पूरी नहीं करते हैं, ठीक वैसे हीं जैसे माँ-बाप बच्चे की गैरजरूरी जिदों को पूरा नहीं करते और यही हमारे लिए अच्छा होता है।

    9.एकाग्रता किसी भी लक्ष्य को आसान बना देता है और एकाग्रता के बिना आसान लक्ष्य भी मुश्किल बन जाता है।

    10.सफलता या पैसा किसी व्यक्ति की काबिलियत नहीं बताता है एक काबिल व्यक्ति भी गरीब या असफल हो सकता है और एक नाकाबिल व्यक्ति भी किसी तरह से सफलता और पैसे पा सकता है।

    11.किसी रिश्ते को परखना है, तो उस रिश्ते से कोई उम्मीद करके देखिए आपको जल्द हीं रिश्ते की मजबूती और गहराई का पता चल जाएगा।

    12.अच्छी आदतों को हीं संस्कार कहते हैं और आदतें एक दिन में बनती या बिगड़ती नहीं हैं ।इसलिए कोई भी व्यक्ति एक दिन में संस्कारवान या कुसंस्कारी नहीं हो जाता है। बल्कि लम्बे समय मेंजैसी उसकी आदतें बन जाती है वही उसे संस्कारवान या कुसंस्कारी बनाती हैं।

    13.दोहरे चरित्र वाले लोग कैसे होते हैं, इसके 2 सबसे अच्छे उदाहरण :कई ऐसे लोग होते हैं, जो जाति प्रथा को एक कुप्रथा बताकर Inter caste marriage की तरफदारी करते हैं, लेकिन वे हीं लोग वोट नेता की जाति देखकर देते हैं,2. कुछ लोग तथाकथित बुद्धिजीवी कहलाना पसंद करते हैं और उन मुद्दों पर चुप रहते हैं, जहाँ उन्हें बोलना चाहिए और उन मुद्दों पर बोलते हैं जहाँ उन्हें चुप रहना चाहिए.

    14.जीत हासिल करना आसान होता है, लेकिन उसे बरकरार रखना बहुत मुश्किल होता है।

    15.आज की कड़वी सच्चाई यही है कि लोग पैसे वाले लोगों को महत्व देते हैं, चाहे सामने वाले व्यक्ति का चरित्र,इरादा और आदतें कैसी भी क्यों न हो किसी भी काम को छोटा मत समझिए।किसी भी काम को मेहनत से करते हुए पैसा कमाना गलत नहीं है।

    16.किसी भी व्यक्ति को अच्छे से जाने बिना, दूसरों की बातें सुनकर उसके प्रति कोई धारणा बना लेना मूर्खता है।

    17.जैसे हम समय-समय पर अपने कमरे की सफाई करते हैं, वैसे हीं हमें समय-समय पर अपनी आदतों की भी सफाई करनी चाहिए क्योंकि जाने-अनजाने हम में बहुत सारी बुरी आदतें खुद-ब-खुद आ जाती है।

    18.जिन लोगों को हड़बड़ी में फैसले लेने की आदत होती है, वे लोग अपने काम खुद हीं बिगाड़ लेते हैं।

    19.लगातार अध्ययन और मेहनत साधारण व्यक्ति को भी प्रतिभावान बना देते हैं।

    20.जीवन में कितना भी बुरा समय क्यों न आए, कभी किसी बुरे व्यक्ति का एहसान मत लीजिए,वरना आपको इसकी महंगी कीमत चुकानी पड़ेगी। इसलिए आदर्श स्थिति यह है कि बीमा याअन्य बचत आपके पास होना हीं चाहिए। ताकि अनहोनी होने की स्थिति में आपको किसी काकर्जदार न बनना पड़े ।

    21.जीवन को बदलने में समय लगता है, इसका कोई शार्टकट नहीं होता है।और सबसे बड़ी बात Shortcut से पाई गई चीजें लम्बे समय तक नहीं टिकती हैं।

    ड़े.

    22.सम्पन्नता, सफलता और सुन्दरता लोगों को अक्सर मगरूर बना देते हैं।

    23.ज्यादातर लोग अपने से कमजोर व्यक्ति को परेशान करके खुद को ताकतवर समझते हैं।अगर आप खुद को ताकतवर समझते हैं, तो अपने से ताकतवर व्यक्ति को परेशान करके देखिए।

    24.किसी की मजबूरी का उपहास नहीं करना चाहिए।

    25.वक्त बदलता रहता है और वक्त के साथ लोगों की किस्मत बदलती रहती है.क्योंकि वक्त के साथ हमारे कर्म बदलते रहते हैं और हमारे कर्म हीं हमारे किस्मत को बनाते या बिगाड़ते हैं।

    26.वास्तव में इस दुनिया में हमारा कोई दुश्मन या दोस्त नहीं होता है।वक्त और हालात हमारे दोस्त और दुश्मन बदलते रहते हैं।

    27.कर्तव्यों को निभाने वाले लोग कर्तव्यपालन करने से बचने वाले लोगों से आगे निकल जाते हैं।

    28.दूरदर्शी बनिए, इससे आपका जीवन बेहतर हो जाएगा।

    8 सित॰ 2017

    गुरु दक्षिणा।

    By: Successlocator On: सितंबर 08, 2017
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  • एक पहुंचे हुए गुरु अपने चार शिष्यों के साथ रहते थे। शिष्यों को तरह तरह के ज्ञान बताते। एक दिन जब गुरु ने शिष्यों को कहा कि उनकी शिक्षा पूरी हो चुकी है तो वे गुरूजी से गुरुदक्षिणा मांगने का अनुरोध करने लगे।

    पहले तो गुरु ने उनको मना किया कि उन्हें गुरुदक्षिणा देने की कोई जरूरत नहीं है। लेकिन शिष्यों के बार बार अनुरोध करने पर गुरु ने कहा..

    "ठीक है अगर तुम मुझे देना ही चाहते हो तो मुझे ज्यादा कुछ नहीं चाहिए बाद एक टोकरा सुखी पत्तियां मेरे लिए ला दो।"

    शिष्यों ने सोचा कि गुरूजी को इतनी छोटी सी चीज चाहिए जिसको तो वे चुटकियों में ला सकते हैं। उन्होंने ख़ुशी ख़ुशी गुरू से आज्ञा ली और चल पड़े घने जंगल में सुखी पत्तियां ढूंढने।।

    जंगल में जाकर उन्होंने देखा कि वहां तो पेड़ों पर ही पत्तियां थी। कुछेक पत्तियां जमीन पर बिखरी पड़ी थी लेकिन वो तो बहुत थोड़ी सी थी। उनसे एक टोकरी तो क्या एक मुट्ठी भी न भरे। चारों शिष्य बहुत ही दुखी हो गए। सोचने लगे कि जंगल में तो इतनी सारी पत्तियां होनी चाहिए कि घर भर जाए लेकिन यहां तो एक टोकरी भरने को भी पत्तियां नहीं। वहां पास में एक लकड़हारा लकड़ियाँ काट रहा था। शिष्यों के पूछने पर उसने बताया कि सुखी पत्तियां सुबह ही समेट कर अपने घर ले जाकर आग जलाने में उपयोग में ले ली। उसने उन्हें बताया कि आगे एक गाँव है जहां एक व्यापारी सुखी पत्तियां कोई दे सकता है।

    चारों गाँव में गये। व्यापारी ने उन्हें बताया कि उसने तो पत्तियों के पत्तल बना बना कर बेच दिए। अब उसके पास एक भी सुखी पत्ती नहीं थी। चारों अत्यन्त मायूस हो गए। व्यापारी ने उन्हें एक औरत का पता बताया जिसके पास सुखी पत्तियां होने की संभावना थी। पर औरत के पास जाने पर पता चला कि औरत तरह तरह की पत्तियों से दवाइयां बनाती थी और उसके पास आज कोई सुखी पत्ती नहीं थी।

    दुखी होकर चारों गुरु के पास लौटे और सारा हाल कह दिया। उन्होंने बताया कि उन्हें अंदाजा नहीं था कि सुखी पत्तियों का भी इतना प्रयोग किया जाता।



    गुरु ने हंसते हुए कहा,"सुनो तुम सब, यह जो ज्ञान तुम्हें आज मिला है यही मेरी गुरुदक्षिणा है। कभी किसी चीज को छोटा मत समझो। हर छोटी से छोटी चीज बड़े से बड़ा काम कर सकती है। जो काम एक सुई कर सकती है वह काम क्या एक तलवार क्र सकती है भला। तुम्हें यही समझाने के लिए मैने तुम्हें पत्तियां लाने को कहा था। और चूँकि तुम समझ गए हो तुम्हें ज्ञान मिल गया है तो मुझे भी अपनी गुरुदक्षिणा मिल गयी है।"